होम / इंटरनेशनल / PoK में सेना का अत्याचार, इस्लामाबाद में पत्रकारों पर कहर, प्रेस क्लब में तोड़फोड़
PoK में सेना का अत्याचार, इस्लामाबाद में पत्रकारों पर कहर, प्रेस क्लब में तोड़फोड़
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सेना के दमन के खिलाफ लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब पाकिस्तान सरकार ने पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सेना के दमन के खिलाफ लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल की फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। इस घटना के बाद पाकिस्तान सरकार ने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
इस्लामाबाद प्रेस क्लब में हालात भयावह रहे। पुलिस ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोकने के साथ ही क्लब के अंदर घुसकर लाठीचार्ज किया। इस दौरान PoK से आए कई नागरिक कार्यकर्ता भी घायल हुए। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में पुलिस की तोड़फोड़ और पत्रकारों पर हमला देखा जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रकार PoK में हो रहे सेना के अत्याचारों की रिपोर्टिंग कर रहे थे। तभी अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल ने प्रेस क्लब में घुसकर मौजूद रिपोर्टरों और प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया। इसका उद्देश्य पत्रकारों को डराना और PoK की आवाज दबाना बताया जा रहा है।
पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में घिरी रही हैं। PoK में सेना की फायरिंग में अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि सेना केवल प्रदर्शनकारियों को ही नहीं, बल्कि उनकी आवाज उठाने वाले पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को भी डराने की कोशिश कर रही है।
मानवाधिकार आयोग ने जताई कड़ी चिंता
इस घटना के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने कड़ा बयान जारी किया। आयोग ने कहा, “इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर पुलिस के हमले और पत्रकारों की पिटाई की हम कड़ी निंदा करते हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। हम मांग करते हैं कि तुरंत जांच हो और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले।”
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह पाकिस्तान की गहरी राज्य व्यवस्था (Deep State) की कोशिश है ताकि PoK में हो रहे अत्याचारों को छुपाया जा सके।
HRCP strongly condemns the raid on the National Press Club and assault on journalists by the Islamabad police. We demand an immediate inquiry and those responsible brought to book.
— Human Rights Commission of Pakistan (@HRCP87) October 2, 2025
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेस क्लब पर हमला पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख के लिए नुकसानदेह है। यह दिखाता है कि देश में प्रेस स्वतंत्र नहीं है और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है। PoK से जुड़े मुद्दों को पहले ही वैश्विक मंचों पर मानवाधिकार उल्लंघन के उदाहरण के रूप में उठाया जा रहा है। अब प्रेस क्लब पर हमले से पाकिस्तान की छवि और खराब हो सकती है।
हालात और बिगड़ने का खतरा
PoK में चल रहे प्रदर्शनों और इस्लामाबाद में पुलिस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान दमनकारी नीतियां जारी रखता है, तो PoK की आवाज और तेज होगी और देश में अस्थिरता बढ़ सकती है।
टैग्स