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यूरोपीय यूनियन का बड़ा एक्शन, Apple व Meta पर 700 मिलियन यूरो का जुर्माना
यूरोपीय यूनियन (EU) ने डिजिटल बाजार में बड़ी तकनीकी कंपनियों की ताकत पर लगाम कसते हुए Apple और Meta पर कुल 700 मिलियन यूरो (करीब 800 मिलियन डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
यूरोपीय यूनियन (EU) ने डिजिटल बाजार में बड़ी तकनीकी कंपनियों की ताकत पर लगाम कसते हुए Apple और Meta पर कुल 700 मिलियन यूरो (करीब 800 मिलियन डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई EU के नए डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) के तहत पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यूनियन अब डिजिटल एकाधिकार को लेकर सख्त रुख अपनाने को तैयार है।
इसमें सबसे बड़ा जुर्माना Apple को 500 मिलियन यूरो का लगाया गया है। आयोग के अनुसार, Apple ने ऐप डेवलपर्स को यह बताने से रोका कि उनके ऐप्स App Store के बाहर भी सस्ते विकल्पों के साथ उपलब्ध हैं। इससे उपभोक्ताओं के विकल्प सीमित हुए और डेवलपर्स के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों की पेशकश करना मुश्किल हो गया। आयोग ने इसे न तो आवश्यक माना और न ही उचित।
वहीं, Meta (Facebook और Instagram की मूल कंपनी) को 200 मिलियन यूरो का जुर्माना उस ‘पे या सहमति’ मॉडल के लिए मिला, जिसे कंपनी ने 2023 के अंत में यूरोप में लागू किया था। इस मॉडल में यूजर्स को या तो अपने डेटा के विज्ञापन उपयोग की अनुमति देनी होती थी या विज्ञापन-मुक्त अनुभव के लिए भुगतान करना होता था। आयोग ने इस व्यवस्था को यूजर्स की सहमति के अधिकारों का उल्लंघन माना और कहा कि Meta ने कोई ऐसा विकल्प नहीं दिया जो कम डेटा-आधारित और अधिक सम्मानजनक हो।
DMA, जो पिछले साल प्रभाव में आया था, उन कंपनियों को लक्षित करता है जो डिजिटल बाजार में गेटकीपर की भूमिका निभाती हैं, यानी जो अपनी ताकत का दुरुपयोग करके प्रतिस्पर्धा को बाधित कर सकती हैं। इस कानून का मकसद उपभोक्ताओं और व्यापारियों को ज्यादा विकल्प और नियंत्रण देना है।
दोनों कंपनियों को EU की गाइडलाइंस के अनुसार 60 दिन के भीतर बदलाव लागू करने होंगे, नहीं तो उन्हें दैनिक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
इस कार्रवाई के बीच अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव भी नजर आया है। ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय यूनियन पर अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि, यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी कंपनियों को नहीं, बल्कि डिजिटल बाजार में निष्पक्षता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए की गई है।
Apple और Meta दोनों ने EU के फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि कानूनों में स्पष्टता नहीं है और ये दंड उनके बिजनेस मॉडल को अनुचित रूप से प्रभावित करते हैं। लेकिन EU ने साफ कर दिया है कि अगर निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो और भी कड़ी सजा दी जा सकती है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में अन्य बड़ी टेक कंपनियों पर भी इसी तरह की सख्ती हो सकती है।
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