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टीवी जर्नलिस्ट राहुल शुक्ल ने दुनिया को कहा अलविदा, लगाई फांसी
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। जी मीडिया समूह के बिजनेस जर्नलिस्ट राहुल शुक्ल ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। रविवार को उन्होंने मुंबई के चांदीवली में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। हालांकि उनके आत्महत्या की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी मीडिया समूह के बिजनेस जर्नलिस्ट राहुल शुक्ल ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। रविवार को उन्होंने मुंबई के चांदीवली में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। हालांकि उनके आत्महत्या की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है।
राहुल ‘टाइम्स नाउ’, ‘ब्लूमबर्ग टीवी इंडिया’ (BTVi), टीवी9 महाराष्ट्र (Tv9 Maharashtra) जैसे प्रतिष्ठित न्यूज चैनलों के साथ काम कर चुके हैं।
मुबंई यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में बेचलर डिग्री लेने वाले राहुल ने जून, 2008 में ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज वर्ल्ड इंडिया) से इंटर्नशिप की और इसके बाद अगस्त, 2008 में उन्होंने टीवी9 महाराष्ट्र (Tv9 Maharashtra) से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। यहां उन्होंने असोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर काम किया और एंकरिंग की बारीकियों को भी सीखा। धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए वे अप्रैल, 2013 में ‘ब्लूमबर्ग टीवी इंडिया’ (BTVi) से जुड़ गए और यहां उन्होंने बिजनेस असाइनमेंट प्रड्यूसर के तौर पर काम किया। यहां से निकलकर मार्च, 2014 में वे ‘टाइम्स नाउ’ के कॉरेस्पोंडेंट बने और लगभग तीन साल की पारी खेली, इसके बाद वे पिछले साल अक्टूबर में ‘जी मीडिया’ से बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर जुड़ गए थे और तब से वे यहां अपनी सेंवाएं दे रहे थे।
राहुल की अचानक मौत से उनके सहयोगियों और करीबियों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके मित्रों ने कुछ इस तरह सोशल मीडिया पर उन्हें याद किया-
बावरा मन देखने चला एक सपना...
अश्विनी शर्मा, असोसिएट एग्जिक्यूटिव एडिटर, सहारा मीडिया
आखिर ऐसा कौन सा सपना था जिसे देखने की ख्वाहिश लिए जी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शुक्ल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उसने मुंबई के चांदीवली में फांसी लगाकर जान दे दी। राहुल की खुदकुशी की जानकारी मेरी पूर्व सहयोगी हर्षा ने मुझे कल रात को दी और तब से ही मेरा मन बेचैन हो उठा।
साल 2009 में पहली बार राहुल मुझसे टीवी9 महाराष्ट्र में काम करने के दौरान मिला था। राहुल की पहली नौकरी थी। कभी भी मैंने राहुल के मुरझाए चेहरे को नहीं देखा था। हमेशा मुस्कराता हुआ किसी भी टास्क को करने के लिए तैयार रहता। यही वजह है कि वो अपने सहकर्मियों का चहेता था और बड़ी लगन से काम करते हुए वो जी न्यूज में वरिष्ठ संवाददाता के पद पर पहुंचा था।
लेकिन आज राहुल नहीं है और मैं ही नहीं उसके वो तमाम साथी सदमे में हैं जो कभी ना कभी राहुल के साथ काम कर चुके हैं। सब यही कह रहे हैं कि आखिर सबके दुखों का साथी राहुल इतना अकेला क्यों था। उसने खुदकुशी से पहले फेसबुक पर कई ऐसी कविताएं पोस्ट की जो उसके गहरे विशाद में होने का भाव पेश करती हैं। राहुल ने चंद दिन पहले एक कविता लिखी जिसमे किसी परछाई का जिक्र है। वो परछाई आखिर क्या थी। आखिर वो क्यों राहुल का पीछा कर रही थी। राहुल ने लिखा था...
एक परछाई पीछे भागती है..
ना जाने कहां से आती है..
मैं रूकता हूं वो छिप जाती है..
मैं दौड़ता हूं वो दबे पांव फिर आती है..
हर दिन छलती है, हर दिन हंसती है..
शाम होते ही छिप जाती है..
मलाल इस बात का भी है कि आभासी दुनिया और रीयल दुनिया में अनगिनत दोस्त होने के बाद भी किसी को राहुल का दर्द क्यों नहीं दिखा। राहुल ने किसी से अपना दर्द खुलकर क्यों नहीं शेयर किया और अगर ऐसा हो जाता तो आज राहुल हमारे बीच होता। ईश्वर से यही प्रार्थना है राहुल की आत्मा को शांति दें...
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