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आउटलुक समूह से अलग हुए जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने आउटलुक समूह को अलविदा कह दिया है। वे आउटलुक (हिंदी) के प्रधान संपादक की भूमिका निभा रहे थे। उनके कंधों पर न केवल हिंदी मैगजीन की जिम्मेदारी थी, बल्कि डिजिटल विंग भी उन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने आउटलुक समूह को अलविदा कह दिया है। वे आउटलुक (हिंदी) के प्रधान संपादक की भूमिका निभा रहे थे। उनके कंधों पर न केवल हिंदी मैगजीन की जिम्मेदारी थी, बल्कि डिजिटल विंग भी उन्हीं की देखरेख में सफलता के नए आयाम लिख रहा था। इस बार वे यहां मात्र डेढ़ साल तक रहे। वे जनवरी, 2016 में इस समूह से जुड़े थे।
आउटलुक समूह में मेहता की ये दूसरी पारी थी। साल 2002 में शुरू हुई आउटलुक की हिंदी पत्रिका में मेहता ने करीब छह साल तक अपना योगदान दिया।
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पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा की बारिकियों को समझने वाले आलोक मेहता ने हिंदी पत्रकारिता को एक नई पहचान दी है। उन्हें साल 2010 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।
7 सितंबर 1952 को मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जन्में आलोक मेहता पिछले चालीस वर्षों से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मेहता ने प्रिंट पत्रकारिता के साथ-साथ टेलिविजन और रेडियो के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनाई है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य टीवी चैनलों पर समसामयिक विषयों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें अकसर देखा और सुना जाता है। आलोक मेहता को कई बार देश के अलग-अलग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ कई अन्य प्रतिनिधिमंडलों में शामिल होकर विदेश जाने का अवसर भी मिला है। वे 35 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं।
जर्मन रेडियो 'डाइचे वेले' की हिंदी सेवा में काम कर चुके मेहता हिंदी दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’ के पटना संस्करण के संपादक भी रहे हैं। मेहता इस समूह के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े और यहां भी संपादक के रूप में काम किया। हिन्दुस्तान समूह छोड़ने के बाद वे ‘दैनिक भास्कर’ के दिल्ली संस्करण में भी संपादक की भूमिका निभा चुके हैं। जब वे दैनिक भास्कर के दिल्ली संस्करण के संपादक थे, तब उन्हें आउटलुक समूह के प्रधान संपादक रहे स्व. विनोद मेहता ने उनसे हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू करने के लिए कहा, जिसके बाद 2002 में वे आउटलुक समूह के साथ जुड़ गए और इसकी हिंदी पत्रिका का शुभारंभ किया और यहां वे 6 साल तक रहे।
आउटलुक हिंदी के संस्थापक संपादक के पद से इस्तीफा देने के बाद मेहता इंदौर से प्रकाशित होने वाले ‘नईदुनिया’ से जुड़ गए और जहां उन्हें इस अखबार के दिल्ली एडिशन को शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई। ‘नईदुनिया’ समूह को जागरण द्वारा खरीद लिए जाने के बाद मेहता और उनकी टीम ने इस समूह को अलविदा कह दिया दिया और इसके बाद ‘नेशनल दुनिया’ के साथ अपने सफर को आगे बढ़ाया। इस अखबार को शुरू कराने का श्रेय भी आलोक मेहता को जाता है। नेशनल दुनिया के बाद आलोक मेहता ‘गवर्नेंस नाउ’ नाम से हिंदी में पाक्षिक पत्रिका से जुड़े। ‘गवर्नेंस नाउ’ नाम से अंग्रेजी में पत्रिका का प्रकाशन पहले से ही चला आ रहा था, लेकिन इस समूह के साथ भी मेहता का ज्यादा दिन तक जुड़ाव नहीं रह पाया।
आलोक मेहता का नाम उन पत्रकारों में शामिल हैं, जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यिक विषयों पर भी अपनी रुचि दिखाई है। पत्रकारिता, पर्यटन, कविता, कहानियों और समसामयिक विषयों पर आलोक की करीब एक दर्जन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘नामी चेहरे-यादगार मुलाकातें’, ‘पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा’, ‘भारतीय पत्रकारिता’, ‘इंडियन जर्नलिज्म-कीपिंग इट क्लीन’, ‘सफर सुहाना दुनिया का’, ‘तब और अब’, ‘चिड़िया फिर नहीं चहकी’ (कहानी संग्रह), ‘भारत में पत्रकारिता', ‘राइन के किनारे’, ‘स्मृतियां ही स्मृतियां’, ‘राव के बाद कौन’, ‘आस्था का आंगन’, ‘सिंहासन का न्याय’, ‘अफगानिस्तान-बदलते चेहरे’ आदि प्रमुख हैं।
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