होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / प्रभात खबर की नयी पहल, पाठकों को जोड़ने वाले कंटेंट पर जोर
प्रभात खबर की नयी पहल, पाठकों को जोड़ने वाले कंटेंट पर जोर
समाचार4मीडिया ने पहले ही अपने पाठकों को यह जानकारी दी थी कि 12 जून से प्रभात खबर नए रंग-रूप में लॉन्च हो रहा है। आज अखबार में कॉरपोरेट एडिटर राजेंद्र तिवारी ने पाठकों को दिए संदेश में कहा है कि नये कलेवर के साथ आज मंगलवार का प्रप्रभात खबर आपके सामने है और इसमें है छह पेजों का एक नया सेक्शन, जिसमें खुद और अपने शहर की जिंदगी से जुड़ी सामग्री मिलेगी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 13 years ago
समाचार4मीडिया ने पहले ही अपने पाठकों को यह जानकारी दी थी कि 12 जून से प्रभात खबर नए रंग-रूप में लॉन्च हो रहा है। आज अखबार में कॉरपोरेट एडिटर राजेंद्र तिवारी ने पाठकों को दिए संदेश में कहा है कि नये कलेवर के साथ आज मंगलवार का प्रप्रभात खबर आपके सामने है और इसमें है छह पेजों का एक नया सेक्शन, जिसमें खुद और अपने शहर की जिंदगी से जुड़ी सामग्री मिलेगी। उन्होंने अपने संदेश में लिखा है कि पिछले 20-25 साल में हमारी जिंदगी बहुत तेजी से बदली है, हमारी जिंदगी में कई नये आयाम जु.डे हैं, जिनसे हमारी दिनचर्या व्यापक रूप से प्रभावित हुई है। श्रम और पूंजी की परिभाषाएं बदल रही हैं। गवर्नेंस के तरीके बदल रहे हैं, अंतरसामाजिक, अंतर्देशीय, अंतरराष्ट्रीय व्यवहार प्रभावित हो रहा है। संप्रेषण (कम्युनिकेशन) के तरीके और वाहक बदल गये। कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल की नयी बोली हमारे संवाद का अहम हिस्सा बन रही है। इन सबसे हमारा तन-मन-धन अछूता नहीं है। नाते-रिश्ते, परिवार-समाज, उद्यम-रोजगार सभी क्षेत्रों में नयी-नयी प्रवृत्तियां और चुनौतियां दिखायी दे रही हैं। जो पहले था, वह अब नहीं है. एक व्यक्ति के तौर पर हमारी चिंताएं और हमारे सरोकार भी बदल रहे हैं। लेकिन अखबार? प्रभात खबर के नये कलेवर के पीछे यही समझदारी है। धरना-प्रदर्शन, क्राइम, तमाम तरह की दिक्कतों व घपलों-घोटालों से अलग भी एक पटना है, जिसमें हम-आप जैसे लोग जीते हैं। छह पेजों का लाइफ पटना सेक्शन इसी पटना को सामने लाने का काम करेगा। इसमें पटना शहर की जिंदगी, लोग, लोगों के इश्यूज, सफलता-विफलता, दुख-सुख, आकांक्षाएं-सपने, आयोजन-उत्सव, सब कुछ झलकेगा। कॉरपोरेट एडिटर ने लिखा है कि पटना आज पूर्वी हिस्से के छात्रों का सबसे बड़ा हब बन कर उभर रहा है। पटना यूनिवर्सिटी व मगध यूनिवर्सिटी के कॉलेजों के साथ-साथ ला यूनिवर्सिटी, आइआइटी, एनआइटी, बीआइटी जैसे लब्ध-प्रतिष्ठित संस्थान खुल चुके हैं। मेडिकल एजुकेशन का केंद्र तो पटना है ही. इन नये कैंपस में देश भर से आये युवा पढ. व रह रहे हैं। कैंपस पेज पटना में रह रहे छात्रों की जरूरतों और जिंदगी पर केंद्रित होगा। हमारी कोशिश है कि यह पेज एडमिशन-एक्जाम सूचना से आगे बढ. कर आज के छात्र-छात्राओं की जरूरतों, सोच और सपनों का प्लेटफॉर्म बने। यह पेज आपको मंगलवार से रविवार तक लगातार मिलेगा। कंपीटिशन भरी आज की जिंदगी में हमारे सबसे बड़े कंसर्न एजुकेशन और कैरियर हैं। इस पर हर मंगलवार को मिलेगी पूरे दो पेजों की सामग्री, जो युवा के तौर पर, माता-पिता के तौर पर या अभिभावक के तौर पर आपको एजुकेशन और कैरियर से संबंधित उपयोगी जानकारियों, अपडेट, विशेषज्ञों की राय और अन्य जरूरी आयामों से अवगत करायेगी। हम नॉलेज एरा में हैं और दुनिया एक ग्लोबल विलेज बनी हुई है, जहां पटना हो या पेरिस, सब कहीं-न-कहीं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के जरिये एक-दूसरे से जु.डे हुए हैं। ऐसे में आप कॉलेज में हों या कैरियर की तैयारी में, उद्यमी हों या नौकरी-पेशा, सामाजिक-राजनीतिक कर्म से जु.डे हों या घर पर ही रहते हों, दुनिया में क्या हो रहा है, इसकी गहराई से जानकारी आपको अपने स्तर पर ताकतवर (इंपावर्ड) बनाती है। इस सेक्शन का नॉलेज पेज इसी उद्देश्य से आपके सामने आ रहा है। कामकाजी लोग अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा ऑफिस या कार्यस्थल पर बिताते हैं। ऑफिस की हमारी जिंदगी से हमारा परिवार तो प्रभावित होता ही है, हमारे भविष्य का खाका भी बनता चलता है। फिर हमारी जिंदगी का यह हिस्सा हमारे र्जनलिज्म का विषय बनना ही चाहिए। कल आपने प्रप्रभात खबर में ऑफिस-ऑफिस नाम से पूरे एक पेज की सामग्री पढी होगी. अब हर सोमवार आपको ऑफिस यानी कार्यस्थल से जुड़ी सामग्री मिलेगी। हम एक बात और आपसे करना चाहते हैं. यह बात है भाषा को लेकर. हमारा मानना है कि भाषा नदी की तरह होती है, जहां से जो जल मिला, उसे अपने में मिला लेती है. जो नहीं मिला पातीं, वे सूख जाती हैं. हमारी मातृभाषा हिंदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. आपको जान कर ताज्जुब होगा कि हमारी हिंदी भाषा की आधी से ज्यादा शब्द संपदा अरबी, फारसी, तुर्की व अन्य विदेशी भाषाओं से आयी है. इसलिए हमारा विनम्र प्रयास है कि जो शब्द हमारी बोली में आ गये, जिन्हें हम आपस की बातचीत में अनायास इस्तेमाल करते हैं, उनसे परहेज न करें. इससे अपनी हिंदी भाषा तो समृद्ध होगी ही, संप्रेषण (कम्युनिकेशन) भी सरल हो जायेगा. यही वजह है कि आपको प्रप्रभात खबर में आम बोल-चाल के कई ऐसे शब्द मिलेंगे, जिनको शास्त्रीय रूप से हिंदी का नहीं माना जायेगा. लेकिन फिर, हम आप न भी चाहें, तब भी आज से कुछ सौ साल बाद ये शब्द वैसे ही शास्त्रीय कहे जायेंगे, जैसे हम आज हिंदी (यह फारसी का शब्द है) शब्द को मानते हैं। कुल मिला कर, प्रप्रभात खबर की कोशिश है कि वह उपयोगी दैनिक पत्रिका के रूप में आपसे रू-ब-रू हो. कंटेंट के नाम पर अखबारों में तमाम ऐसी सामग्री होती है, जिसका कोई औचित्य नहीं होता। यह सामग्री न तो हमारी जानकारी को समृद्ध करती है और न ही इसका सिलसिला हमसे-आपसे जुड़ा होता है। यह सामग्री निर्थक रूप से पेज संख्या बढ़ाने और अखबार को पोथा बनाने का काम करती है. प्रप्रभात खबर का लक्ष्य है, अपने समाज-शहर-राज्य-देश व दुनिया की घटनाओं व मुद्दों पर प्रखर सामग्री व सूचनाओं के साथ-साथ जीवन को करीब से छूने और उपयोगी जानकारियां देनेवाली पत्रकारिता. प्रप्रभात खबर के इस प्रयास में आप सबकी भागीदारी अपेक्षित है। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
टैग्स