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स्टार प्लस का ‘नई सोच’ कैंपन: पढ़ें, यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर और उनकी बेटी रोशनी के बोल...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। टीवी चैनल स्टार प्लस की पहल ’नई सोच’ के अंतर्गत ऐसी पिता-पुत्री की कहानियों को सामने लाने की कोशिश की गई है जिसमें पुरानी लिंग संबंधी रूढ़ीवादी सोच को दरकिनार करते हुए नए बंधन की इबारत लिखी। ऐसी ही सोच रख
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टीवी चैनल स्टार प्लस की पहल ’नई सोच’ के अंतर्गत ऐसी पिता-पुत्री की कहानियों को सामने लाने की कोशिश की गई है जिसमें पुरानी लिंग संबंधी रूढ़ीवादी सोच को दरकिनार करते हुए नए बंधन की इबारत लिखी।
ऐसी ही सोच रखने वाले हैं यस बैंक के फाउंडर और सीईओ राणा कपूर। राणा ने अपने प्रोफेशनल फ्रंट पर कई उंचाइयां छुईं, पर उनकी असली खुशी उनकी तीन बेटियों में बसती है। वे अपनी बेटियों के साथ बहुत ही खास बॉन्ड शेयर करते हैं। उन्होंने एक खास मुलाकात में अपनी सबसे छोटी बेटी रोशनी कपूर के साथ खुलकर बात की। रोशनी ‘द थ्री सिस्टर्स इंस्टीट्यूशनल ऑफिस’ (The Three Sisters Institutional Office) की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं। दोनों ही उद्यमी हैं और उनकी सोच भी काफी मिलती है।
पापा हैं रोल मॉडल
रोशनी बताती हैं कि वह हमेशा निर्णय लेने से पहले अपने पापा से सलाह लेती हैं। वे कहती है, मेरे पापा हमेशा से ही मेरे लिए रोल मॉडल रहे हैं। उनकी लगन और मेहनत ने ही मुझे भी इस फील्ड में जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुझे और मेरी बहनों को हमेशा से ही बड़ा सोचने और सामान्य पर समझौता नहीं करने का सिखाया।
राणा कपूर कहते हैं कि उन्हें आज भी याद हैं कि बचपन से ही रोशनी कैसे अपने किए गए कामों में बेहतरीन प्रदर्शन करती थीं, फिर चाहे वह पढ़ाई हो या खेल। ये मेरे और मेरी पत्नी बिंदू के लिए बहुत ही गर्व के पल हुआ करते थे। सबसे छोटी होने की वजह से रोशनी को पढ़ाई और दुनिया को देखने के बेहतर अवसर प्राप्त हुए।
बहुत कुछ सिखाता है घूमना
कपूर कहते हैं कि बिंदू और मैंने हमेशा से ही रोशनी को ट्रैवलिंग के लिए प्रेरित किया। ट्रैवलिंग के दौरान कई तरह की सीख मिलती है और जब हम अपने काम में जुटे होते हैं तो यही हमारे लिए बहुत ही कारगर साबित होती हैं।
रोशनी बताती हैं कि जब उन्होंने अपनी दोनों बहनों के साथ मिलकर स्टार्ट-अप शुरू किया तो ट्रैवलिंग के दौरान सीखी गई बातें उनके बहुत काम आईं।‘सिलिकोन वैली’ के दौरे के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला। वहां का स्टार्ट-अप कल्चर और जोश देखकर बहुत अच्छा लगा।’
नई सोच
हर पिता की तरह कपूर को भी अपनी बेटी की चिंता रहती है। वह कहते हैं कि माता-पिता का बढ़ती बेटियों के लिए चिंतित रहना स्वभाविक है। लेकिन मेरी बेटियों ने हमेशा से ही इसे मुझ पर हावी नहीं होने दिया। विदेश में चार साल की पढ़ाई के दौरान रोशनी ने जता दिया कि वह एक कांफिडेंट वूमेन है और अपना ख्याल बखूबी रख सकती है।
रोशनी लिंग संबंधी रूढ़ियों को दरकिनार करते हुए कहती हैं कि यूथ को खुद पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ाना आना चाहिए, फिर चाहे वह लड़का हो या लड़की। आज के दौर में यूथ को पढ़ाई की ताकत को समझकर आगे कदम बढ़ाने चाहिए। इस देश का भविष्य हम युवाओं के हाथ में है और हम ही इसे सुधार सकते हैं।
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