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पत्रकारों पर हमला करने वालों की अब खैर नहीं, इस कानून के तहत मिलेगी ये कड़ी सजा...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। देश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही जा रही हैं, ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों पर हमले की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। इसलिए महाराष्ट्र में अब पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमले करने वालों क
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही जा रही हैं, ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों पर हमले की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। इसलिए महाराष्ट्र में अब पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमले करने वालों की खैर नहीं है, क्योंकि महाराष्ट्र कैबिनेट ने पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ पर मसौदा विधेयक को गुरुवार को मंजूरी दी और बजट सत्र के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को राज्य विधायिका के दोनों सदनों में इस विधेयक को सर्वसम्मति से पास करा लिया।
इस विधेयक में जहां पत्रकार व मीडिया संस्थान और उसके साथ काम कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने पत्रकारों पर हमला करने वालों का अपराध गैरजमानती होगा। पत्रकारों के साथ ड्यूटी के दौरान किसी तरह की हिंसा करने, पत्रकार और मीडिया संस्थान की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर इस कानून के तहत मामला दर्ज किया जा सकेगा।
हमला करने वाले को पीड़ित के इलाज का खर्च और मुआवजा भी देना होगा। मेडिकल खर्च व मुआवजा न अदा करने पर भूमि राजस्व बकाया मान कर रकम वसूल की जाएगी। पुलिस उपाधीक्षक व उससे उच्च स्तर का अधिकारी इस तरह के मामलों की जांच करेगा। साथ ही, यदि आरोप झूठा पाया गया तो दोषी व्यक्ति यदि मान्यता प्राप्त पत्रकार है, तो उसकी अधिस्वीकृति भी समाप्त की जा सकेगी । इसके साथ ही उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक को पत्रकार संगठनों के पास सुझाव और आपत्तियों के लिए पिछले साल भेजा गया था। सरकार ने सुझावों और आपत्तियों के बाद ही यह विधेयक तैयार किया है।
गौरतलब है कि पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग 2005 से ही हो रही है। तत्कालीन गृहमंत्री दिवंगत एनसीपी नेता आर.आर. पाटिल ने पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने का वादा किया था। इसको लेकर नारायण राणे की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी लेकिन कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार इस कानून को पारित करने में टालमटोल करती रही।
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