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IB मंत्रालय के साथ मिलकर IIMC इस तरह दे रहा कम्युनिटी रेडियो को बढ़ावा
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। एक महत्वपूर्ण विवाद में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में पहली बार कहा था, ‘ध्वनि-तंरगें (एयरवेव्स) सार्वजनिक संपत्ति हैं. इनका उपयोग भी जनहित में होना चाहिए.’ लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक महत्वपूर्ण विवाद में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में पहली बार कहा था, ‘ध्वनि-तंरगें (एयरवेव्स) सार्वजनिक संपत्ति हैं. इनका उपयोग भी जनहित में होना चाहिए.’ लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि तब से लेकर देश में रेडियो स्टोशनों की बाढ़ सी आ गई है।
रेडियो को भी तीन सेक्शंस में बांट दिया गया है। इनमें सबसे पहले तो ऑल इंडिया रेडियो (AIR) का नंबर आता है, फिर एफएम रेडियो स्टेशन और उसके बाद कम्युनिटी रेडियो स्टेशन का नंबर है। हालांकि पहली दो कैटेगरी तो काफी अच्छा काम कर रही हैं लेकिन कम्युनिटी रेडियो स्टेशन (CRS) को मार्केट में बने रहने के लिए कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कम्युनिटी रेडियो का मुख्य उद्देश्य किसी खास कम्युनिटी की जरूरतों को पूरा करना है लेकिन दुर्भाग्य से उसकी आम जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
बेजुबानों की आवाज (Voice of the Voiceless) माना जाने वाला कम्युनिटी रेडियो स्टेशन तब से खुद अपनी पहचान बनाने के लिए अवसर की तलाश में था। वास्तव में इसे सशक्त बनाने और रिसर्च सेंटर की जरूरतों पर चर्चा वर्ष 2004 से शुरू हुई। हालांकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में इस पर नजर-ए-इनायत की हैं और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) में कम्युनिटी रेडियो एंपॉवरमेंट और रिसोर्स सेंटर की शुरुआत की है। यहां कम्युनिटी रेडियो स्टेशन के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है।
इस सेंटर में 29 मार्च 2017 को कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। 10 दन के इस पॉयलट प्रोग्राम को उन लोगों के लिए डिजायन किया गया था जो कम्युनिटी रेडियो स्टेशन के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना चाहते हैं। अभी यह शुरुआत है और पहला कार्यक्रम है। एक टीम इस प्रोग्राम पर नजर रख रही है और इसके फीडबैक के आधार पर ही अगले प्रोग्राम के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।
कार्यक्रम के प्रमुख राजेंद्र चुघ का कहना है, ‘कम्युनिटी रेडियो एंपॉवरमेंट एंड रिसोर्स सेंटर’ अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। देश में अभी तक इस तरह का कोई भी प्रोग्राम शुरू नहीं किया गया है। इस सेंटर के द्वारा हम रेडियो स्टेशन के कार्यों में मदद करेंगे और कम्युनिटी रेडियो स्टेशन एवं सरकार के बीच पुल की तरह काम करेंगे।’
चूंकि कम्युनिटी रेडियो स्टेशन लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं इसलिए यह प्रोग्राम किसी तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराता है, क्योंकि सरकार उन्हें कम्युनिटी रेडियो सपोर्ट फंड के द्वारा समर्थन देता है। इस बारे में आईआईएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश का कहना है, ‘कम्युनिटी रेडियो तरक्की कर रहा है लेकिन इसकी रफ्तार काफी कम है। इसलिए कम्युनिटी रेडियो को मजबूत करने और देश भर में इसे फैलाने के लिए यह कदम उठाया गया है।’
इस प्रोग्राम के तहत प्लानिंग और प्रॉडक्शन से लेकर उसे पूरा करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। सबसे पहले यह बताया जाता है कि कम्युनिटी रेडियो स्टेशन में किन उपकरणों की जरूरत होती है। इसके बाद यह जानकारी दी जाती है कि इन उपकरणों को सही कीमत पर कहां से खरीदा जा सकता है। प्रोग्राम के तहत यह भी बताया जाता है कि इसकी लाइसेंसिंग प्रक्रिया क्या है और विभिन्न बजट की जानकारी भी दी जाती है। आखिर में प्रसारित होने वाले कंटेंट को तैयार करने के बारे में बताया जाता है।
केजी सुरेश का कहना है, ‘देश में इस समय कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या 206 है। देखा जा रह है कि उनके कंटेंट में विशेषज्ञता (expertise), टेक्नोलॉजी और रेवेन्यू जेनरेशन की कमी है और इसलिए वे काफी पीछे चल रहे हैं। किसी भी रेडियो के लिए सबसे महत्वपूर्ण कंटेंट होता है। हम बेहतर कंटेंट तैयार करने में रेडियो स्टेशनों की मदद करेंगे। इसके अलावा हमने अपना रिसर्च सेंटर बनाने की योजना भी तैयार की है जहां पर लोग अपने सभी सवालों का जवाब पा सकते हैं।’
आईआईएमसी ने इस प्रोग्राम को फिलहाल सिर्फ दिल्ली कैंपस में शुरू किया है। इसके बाद प्रोग्राम केा जम्मू, कोट्टायम, अमरावती, आइजॉल और देवकुंड में भी शुरू करने की योजना है और धीरे-धीरे इस प्रोग्राम को पूरे देश में फैला दिया जाएगा।
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