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सेक्स के प्रति आपका नजरिया बदल देगी HT Brunch की ये कवर स्टोरी
एक पाठक सेक्स, भारतीय समाज में बहुत ही संवेदनशील जज्बात है। इस शब्द को उच्चारण करने से हमें शर्मिंदंगी होती है। लेकिन इसे अंजाम देने में कोई लाज नहीं आती। तो क्या सेक्स केवल जिस्मानी रिश्ता है, क्या इस शब्द पर दुनिया शुरू और खत्म होती है। क्या किसी रिश्ते की बुनिय
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
एक पाठक
सेक्स, भारतीय समाज में बहुत ही संवेदनशील जज्बात है। इस शब्द को उच्चारण करने से हमें शर्मिंदंगी होती है। लेकिन इसे अंजाम देने में कोई लाज नहीं आती। तो क्या सेक्स केवल जिस्मानी रिश्ता है, क्या इस शब्द पर दुनिया शुरू और खत्म होती है। क्या किसी रिश्ते की बुनियाद यही है। क्यों हर माता पिता को छोड़कर हर रिश्ते की भूख बस यही है। ऐसा नहीं है। सेक्स का रिश्ता उसी के साथ बनाया जाता है जिसके साथ पहले आपका मन का या आत्मा का रिश्ता बनता है। हिन्दुस्तान टाइम्स की साप्ताहिक मैगजीन एचटी ब्रंच HT Brunch की बीते रविवार यानी 19 मार्च 2017 की कवर स्टोरी में सेक्स को कितने रूप में डिफाइन किया गया है आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। लेखक, युवा, स्टूडेंट्स, जर्नलिस्ट ने सेक्स को एक नई परिभाषा दी है। दरअसल, परिभाषा तो पुरानी है, लेकिन उसे नए सांचे में ढाला है। सेक्स पर मिथ बदलने की कोशिश की गई है। सेक्स मतलब केवल जिस्मानी मिलन नहीं है। बल्कि ये एक इमोशनल बॉन्डिंग है। यही नहीं, तीन तरह के सेक्स पर बहुत जोर दिया गया है।
एक पाठक के तौर पर मैं कह सकती हूं कि पिछले लंबे समय में मैंने कुछ भी ऐसा नहीं पढ़ा था। ये एक बेहतरीन सफल स्टोरी है, जिसमें एक युवा को अपने सारे सवालों के जवाब मिलते हैं। सेक्स केवल शरीर के मिलन के साथ सीमित नहीं रहता है। बेहतरीन लेख है ये। इस लेख में सेक्स को कई तरह से दिखाया गया है। अब तक समाज में सेक्स को लेकर केवल एक ही धारणा है कि अगर दो विपरीत लिंग हैं तो बस सेक्स का ही रिश्ता उनमें पहले पनप सकता है, लेकिन इस लेख में बताया गया है कि जब तक आप किसी से इमोशनली नहीं जुड़ते हैं या, एक सेक्स ऐसा भी होता है, जिसे हम "सेपियोसेक्स" कहते हैं,जो इंटलेक्ट से जुडा होता है। मतलब आपकी वेभलेंग्थ और आपकी सोच मिलनी चाहिए, तभी कोई और रिश्ता बनाया जा सकता है।
"एसेक्सुअल" लोगों की एक कम्युनिटी है, समाज में इस तरह के लोगों को बीमार कहा जाता है। लेकिन आपको बता दें कि कॉलेज, इंस्टीट्यूट, समाज और ऑफिसों में शहरों में ऐसे लोगों की तादाद हजारों में है। जो लोग पहले अपने पार्टनर के साथ इमोशनली जुड़ते हैं, अगर एक कनेक्ट तैयार होता है उसके बाद ही वे सेक्सुअली आगे बढ़ते हैं। वे बीमार नहीं हैं। ऐसे ही सेपियोसेक्सुअल्टी और डेमिसेक्सुअलटी होती है। शिखा कुमार के इस लेख में संभवी सक्सेना एक लेखिका हैं, जो महज 23 साल की हैं, लेकिन इतनी खूबसूरती से सेक्स पर बात की है, जो आपको इस मुद्दे पर कई अलग तरह से सोचने पर मजबूर करे देता है।
क्या आज के युवा भी ऐसा ही सोचते हैं। मूल स्टोरी अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए पिक्चर पर राइट क्लिक कीजिए...
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