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हैप्पी बर्थडे विनोद शर्मा: ये बातें आपको दूसरों से अलहदा पत्रकार बनाती है...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। पत्रकारिता की दुनिया में एचटी यानी हिन्दुस्तान टाइम्स के पॉलिटिकल एडिटर विनोद शर्मा एक जाना-पहचाना नाम हैं। 21 जनवरी को जन्मे विनोद शर्मा का चेहरा अक्सर टीवी शोज में नजर आता रहता है। किसी न किसी मुद्दे पर उनका एक्सपर्ट कमेंट लिया जाता है। विनोद शर्मा का पत्रकारिता का सफर तीस साल पुराना है। उन्होंने अपन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकारिता की दुनिया में एचटी यानी हिन्दुस्तान टाइम्स के पॉलिटिकल एडिटर विनोद शर्मा एक जाना-पहचाना नाम हैं। 21 जनवरी को जन्मे विनोद शर्मा का चेहरा अक्सर टीवी शोज में नजर आता रहता है। किसी न किसी मुद्दे पर उनका एक्सपर्ट कमेंट लिया जाता है।
विनोद शर्मा का पत्रकारिता का सफर तीस साल पुराना है। उन्होंने अपना सफर 1978 में युनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया से शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मलयालम मनोरमा समूह की पत्रिका वीक (Week) में भी कुछ समय काम किया। 1986 में वह हिन्दुस्तान टाइम्स से जुड़े। इसके बाद उन्होंने यहां अनेक पदों पर कार्य किया। वह चीफ ऑफ पॉलिटिकल ब्यूरो रहे। फिर 1991-94 के दौरान वह एचटी की ओर से इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में डिप्लोमैटिक कॉरस्पोंडेंट और रेसिडेंट रिप्रेजेंटेटिव भी रहे। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी रहे हैं।
हालांकि विनोद शर्मा प्रिंट पत्रकार हैं, लेकिन वह सीएनएन आईबीएन, एनडीटीवी, टाइम्स नाउ और लोकसभा टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों के लिए एक्सपर्ट कमेंटेटरों के पैनल के सदस्य हैं, विशेष रूप से दक्षिण एशिया के मामलों में।
विनोद शर्मा साउथ एशियन फ्री मीडिया एसोसिएशन (साफमा) के संस्थापक सदस्य हैं जोकि आठ सार्क देशों के पत्रकारों की एसोसिएट बॉडी है। विनोद साफमा के इंडियन चैप्टर के प्रमुख और उसके अध्यक्ष हैं।
विनोद शर्मा की पाकिस्तान यात्राएं बहुत लोकप्रिय रही हैं। वह दो दशकों से पत्रकार और शांति दूत के रूप में पाकिस्तान के कई दौरे कर चुके हैं। 1999 में पहले वह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ वह लाहौर गए। फिर 2003 में लालू प्रसाद यादव के साथ शांति मिशन पर गए। एक साल बाद वह भारतीय पत्रकारों के समूह के साथ पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) गए। इस दल के वह मुखिया थे। उन्होंने पाकिस्तान के हर राजनीतिक घटनाक्रम को कवर किया है, चाहे वह बेनजीर भुट्टो की हत्या हो, परवेज मुशर्रफ का पतन हो या जरदारी की बुलंदी।
विनोद शर्मा विभिन्न थिंक टैक्स और प्रोफेशनल बॉडीज से भी जुड़े हुए हैं। वह लोक सभा प्रेस एडवाइजरी कमिटी के वाइस चेयरपर्सन रहे और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन की कार्यकारी परिषद में भी हैं। वह इंडियन नेशनल कमीशन फॉर कोऑपरेशन विद यूनेस्को के सदस्य भी हैं। वह वर्ल्ड एडिटर्स फोरम से जुड़े हुए हैं जोकि प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित मुद्दों पर कार्य करता है।
अक्सर विनोद शर्मा पर इस बात का आरोप लगाया जाता है कि पॉलिटिकल एडिटर के रूप में वह कांग्रेस पार्टी का पक्ष लेते हैं, लेकिन विनोद हमेशा कहते हैं कि जब राजनेता उनके सवालों के जवाब नहीं दे पाते तो ऐसे आरोप लगाते हैं। बेशक, वह अटल बिहारी वाजपेयी के पाकिस्तान दौरे को एक साहसिक कदम बताते हैं और कहते हैं कि वह एक मध्यमार्गी व्यक्ति हैं। बाकी, उनकी नजर में सबसे बड़ी मध्यमार्गी पार्टी कांग्रेस ही है और वह स्वयं को भी मध्यमार्गी ही बताते हैं।
विनोद शर्मा की पत्नी ऋतंभरा भी पेशे से पत्रकार हैं और उनकी एक बेटी है। कुछ साल पहले उनके जवान बेटे की एक सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद विनोद को गहरा झटका लगा था और इस घटना के बाद जीवन के प्रति उनके नजरिए में काफी बदलाव आया है। उनकी सास शशिप्रभा शास्त्री साहित्य दुनिया का चिरपरिचित नाम है।
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