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SC से हरी झंडी मिलने के बाद TRAI ने उठाया यह कदम
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। सुप्रीम कोर्ट से तीन मार्च को हरी झंडी मिलने के कुछ समय बाद ही ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने टेलिकम्युनिकेशन ड्रॉफ्ट टैरिफ ऑर्डर 2017 (Broadcasting and Cable Services) (Eighth) (Addressable
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट से तीन मार्च को हरी झंडी मिलने के कुछ समय बाद ही ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने टेलिकम्युनिकेशन ड्रॉफ्ट टैरिफ ऑर्डर 2017 (Broadcasting and Cable Services) (Eighth) (Addressable Systems) को अधिसूचित (notified) कर दिया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) को मद्रास हाई कोर्ट से स्थगन आदेश (stay order) हासिल करने की अनुमति दे दी है। वहीं मद्रास हाई कोर्ट को भी दो महीने के अंदर इस मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘स्टार इंडिया’ और ‘विजय टीवी’ की याचिका पर मद्रास हाई कोर्ट इस मामले की जांच कर रहा है कि क्या इस टैरिफ ऑर्डर के द्वारा ट्राई अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है। इस मामले में ट्राई के सलाहकार (B&CS) प्रोफेसर एमके कासिम ने इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उनका कहना था, ‘यह मामला कोर्ट के अधीन है और मुझे नहीं लगता कि इस पर बयान देने का यह उचित समय है।’
नए टैरिफ के तहत, ब्रॉडकास्टर्स अपने सबस्क्राइबर्स को ‘a-la-carte’ आधार पर सभी चैनल ऑफर करेंगे। TRAI के अनुसार, जो उपभोक्ता पैकेज के नाम पर न चाहते हुए भी कुछ चैनलों को लेते हैं, उन्हें कई चॉइस मिल सकेंगी।
ट्राई ने पहले ब्रॉडकास्टर्स को यह मंजूरी दे दी थी कि वे उपभोक्ताओं को चैनलों का पैकेज इस शर्त पर ऑफर कर सकते हैं इन पे चैनल्स का अधिकतम मूल्य (maximum retail price) a-la-carte पे चैनल्स के कुल मूल्य के 85 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए- 10 विभिन्न चैनल्स अलग-अलग यदि 100 रुपये में लिए जाएंगे तो उन्हें पैकेज में बेचने पर यह राशि 85 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए अर्थात सिर्फ 15 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है।
वहीं इस बारे में ‘जेके मीडिया नेटवर्क’ (JK Media Network) के स्ट्रेटजिक पार्टनर आरके अरोड़ा का कहना है, ‘कंज्यूमर्स को एक निश्चित संख्या में चैनल लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।’ इस समय ऐसे कई कंज्यूमर हैं जो उन चैनलों को खरीदने के लिए भी बाध्य होते हैं, जिन्हें वे लेना नहीं चाहते हैं। ट्राई के इस नए टैरिफ ऑर्डर इस तरह की चीजें दूर होंगी।
इसके अलावा ट्राई ने विभिन्न कैटेगरी के चैनलों के लिए जॉनरवाइज (genre-wise) प्राइस कैप भी निर्धारित किए थे। इसके तहत स्पोर्ट्स चैनल के लिए 19 रुपये, जनरल एंटरटेनमेंट चैनल के लिए 12 रुपये और मूवी चैनल के लिए दस रुपये तय किए गए थे। वहीं ‘इनफोटेन्मेंट’ (infotainment) चैनल के लिए नौ रुपये और बच्चों के चैनल के लिए यह राशि सात रुपये रखी गई थी। इन सॉत जॉनर के अलावा, भक्ति चैनलों और न्यूज चैनलों के लिए यह राशि क्रमश: तीन रुपये और पांच रुपये तय की गई थी।
हालांकि ब्रॉडकास्टर्स के विरोध के बाद ट्राई ने अपने आदेशों में मामूली संशोधन कर जॉनरवाइज पैसों की सीमा हटा दी थी। लेकिन अभी भी पैकेज में शामिल किसी भी चैनल के लिए 19 रुपये से ज्यादा अधिकतम खुदरा मूल्य (maximum retail price) नहीं रखा गया है।
इस बारे में ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अरोड़ा का कहना है, ‘मुझे यह सही नहीं लगता है, कीमतें तय करने का अधिकार तो ब्रॉडकास्टर्स के पास छोड़़ देना चाहिए था।’
इसके अलावा यदि डिस्ट्रीब्यूशन की बात करें तो ट्राई ने सबस्क्राइबर के लिए प्रति सेट टॉप बाक्स 130 रुपये प्रतिमाह का किराया फिक्स किया है। इसमें सबस्क्राइबर को 100 एसडी चैनल दिखाए जाएंगे जहां पर एक एचडी चैनल दो एसडी चैनल के बराबर माना जाएगा। इसमें सबस्क्राइर 25 एसडी चैनल और ले सकता है, लेकिन इसके लिए टैक्स समेत उससे 20 रुपये से ज्यादा नहीं लिए जा सकते हैं।
हालांकि नाम न छापने की शर्त पर एक टेलिविजन नेटवर्क के प्रमोटर ने बताया कि इससे ब्रॉडकास्टिंग में खासकर न्यूज में काफी नुकसान हो रहा था। उनका कहना था, ‘हम सभी न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) और इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (Indian Broadcasting Foundation) के कदम का इंतजार कर रहे हैं।’
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