होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / रेगुलेशन को लेकर ZEE ग्रुप के पुनीत गोयनका ने कुछ यूं बयां की ‘मन की बात’
रेगुलेशन को लेकर ZEE ग्रुप के पुनीत गोयनका ने कुछ यूं बयां की ‘मन की बात’
तीन महीने तक चली लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 'टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया'...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
तीन महीने तक चली लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 'टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (TRAI) के टैरिफ ऑर्डर को बरकरार रखा है। 'ZEE' ही सबसे पहला ऐसा ब्रॉडकास्टर था, जिसने सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पहले ही टैरिफ ऑर्डर के अनुसार अपना रेट कार्ड जारी कर दिया था। इस ऑर्डर का विरोध करने वालों द्वारा दिए गए तर्कों में एक यह भी था कि यह क्रिएटिविटी और कंटेंट पर सरकारी नियंत्रण रखता है।
'जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका भी इस बात से सहमत हैं कि यह तर्क गलत नहीं है। उनका कहना है कि जब आप चीजों पर कीमत लगाना शुरू कर देते हैं, तो इनका असर बिजनेस की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वर्तमान बिजनेस मॉडल पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन वहां पर कोई रेगुलेशन भी नहीं है। रेगुलेशन के साथ ही कई बदलाव भी आते हैं।
गोयनका का कहना है कि मूलतः वह रेगुलेशन के पक्ष में नहीं हैं। आजकल के डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस को व्यवस्थित करने के लिए इसके सबस्क्रिप्शन भाग को रेगुलेट किए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल भी उठाया है कि क्या देश में कोई भी ऐसा प्रॉडक्ट है, जिसका मूल्य 25 साल तक एक जैसा रहा हो या कंज्यूमर्स द्वारा उपभोग किए जाने वाले कंटेंट में वृद्धि देखने को न मिली हो?
गोयनका का कहना है, ‘इंडस्ट्री का यही खराब हिस्सा है, कोई भी दूसरी इंडस्ट्री इस तरह काम नही करती है। इसलिए इस नजरिये से देखें तो वर्तमान में चल रहीं इस तरह की चीजों को हल करने के लिए रेगुलेशन की जरूरत है। मुझे विश्वास है कि जब चीजें एक बार सही हो जाएंगी तो सरकार इस मामले में पुनर्विचार करेगी और हम ओपन मार्केट बन जाएंगे।’ गोयनका को इस बात का भी पूरा भरोसा है कि भविष्य में सबस्क्रिप्शन फीस भी ऐडवर्टाइजिंग की तरह ओपन हो जाएगी। गोयनका ने इस बात से भी सहमति जताई है कि यदि कोई कंज्यूमर चैनलों के सभी पैक को जारी रखना चाहता है तो रेगुलेशन के बाद उसे ज्यादा भुगतान करना होगा।
उनका कहना कि हालांकि इस सिस्टम में कंज्यूमर के पास अपने हिसाब से खर्च करने का विकल्प है। रेगुलेशन के अनुसार, इस समय जो 180 रुपए दे रहा है, उसके लिए कम से कम 150 रुपए और ज्यादा से ज्यादा 500 रुपए देने होंगे। वहीं, बेसिक सर्विस के लिए 130 रुपए रखे गए हैं। ऐसे में यदि कोई कंज्यूमर बेसिक सर्विस से ही खुश है तो वह बेसिक मूल्य 130 रुपए का भुगतान कर सकता है।
गोयनका के अनुसार यह बिल्कुल टेलिकॉम बिजनेस की तरह है, जहां पर वह 99 रुपए में कोई सर्विस ले सकते हैं, जबकि कुछ लोग किसी सर्विस के लिए 500 रुपए भी देते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की और कितनी सर्विस का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
गोयनका का कहना कि कि बिल्कुल यही बात टीवी पर भी लागू होनी चाहिए। हमारे में और दूसरों में आखिर क्यों अंतर होना चाहिए? यदि आप ज्यादा प्रीमियम कंटेंट का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए ज्यादा भुगतान करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
गोयनका का अनुसार, दूसरे अन्य कई रेगुलेशंस की तरह यह ऑर्डर एकाएक लागू नहीं हो सकते हैं। इसके लिए पहले तैयार होना पड़ेगा। गोयनका का यह भी कहना है, ‘डिजिटाइजेशन के साथ भी यही स्थिति हुई थी। जब डिजिटाइजेशन अस्तित्व में आया था तो क्या वे एक दिन में इसे लागू करने में सक्षम थे?, इसलिए इसमें भी छह से नौ महीने लगेंगे। कहने का मतलब ये है कि कोई भी चीज एकाएक नहीं हो सकती है, उसी तरह मुझे नहीं लगता है कि ये रेगुलेशंस भी रातोंरात लागू हो पाएंगे।’
टैग्स ट्राई पुनीत गोयनका टैरिफ ऑर्डर. trai