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पत्रकार पीयूष पांडे के व्यंग्यसंग्रह के विमोचन पर 'गंभीर' बातें कर गए पुण्य प्रसून बाजपेयी
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। विश्व पुस्तक मेले में पत्रकार और व्यंग्यकार पीयूष पांडे के नए व्यंग्य संग्रह ‘धंधे मातरम्’ का शुक्रवार को विमोचन किया गया। किताब का लोकार्पण जाने-माने कवि अशोक चक्रधर, मशहूर व्यंग्यकार आलोक पुराणिक, ‘आजतक’ के जाने-माने एंकर पुण्य प्रसून बाज
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विश्व पुस्तक मेले में पत्रकार और व्यंग्यकार पीयूष पांडे के नए व्यंग्य संग्रह ‘धंधे मातरम्’ का शुक्रवार को विमोचन किया गया। किताब का लोकार्पण जाने-माने कवि अशोक चक्रधर, मशहूर व्यंग्यकार आलोक पुराणिक, ‘आजतक’ के जाने-माने एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी और सईद अंसारी ने किया। .
इस मौके पर कवि अशोक चक्रधर ने कहा कि आधुनिक समाज की विसंगतियों को पीयूष ने बखूबी उकेरा है, संग्रह का हर एक व्यंग्य पठनीय है। उन्होंने कहा कि पीयूष के व्यंग्य की नई भाषा और नई शैली है और वो किसी को कॉपी करते नहीं दिखते। उन्होंने कहा कि आड़ी-तिरछी डगरों पर चलते पीयूष कभी बिहार पहुंच जाते हैं तो कभी उनके व्यंग्य सीधे केजरीवाल पर होते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में 50 दिनों हमने धन की महिमा देखी है। जहां कई नई धंधे दिखे तो कई को कंधे मिल गए। उन्होने कहा कि पीयूष का अलहदा अंदाज उन्हें काफी आगे ले जाएगा।
विमोचन के दौरान किताब के शीर्षक पर डिबेट भी हुई, जिसका संचालन और सभी सवालों का जवाब ‘आजतक’ के मशहूर एंकर सईद अंसारी ने अपने अलग अंदाज में दिया। हालांकि सईद ने किताब के शीषर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम् को लेकर जो सम्मान है, ऐसे में किताब के शीर्षक को लेकर उनकी आपत्ति है। कार्यक्रम का संचालन ‘आजतक’ चैनल के जाने-माने एंकर सईद अंसारी ने ही किया।
वहीं जाने माने पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कहा-देश के हालात ऐसे हो गए हैं कि राजनेता भी कॉमेडियन में तब्दील हो गए हैं। यह व्यंग्य के लिए मुफीद वक्त है। पीयूष ने अपने व्यंग्य संग्रह में जिन विषयों को उठाया है, उन्हें हम समाचारों की दुनिया में भी देखते हैं लेकिन कहने का अंदाज बदल गया है। देश के वर्तमान हालातों को गंभीर बताते हुए प्रसून बोले कि आज का दौर स्टैंडअप कॉमेडियन का है। प्रधानमंत्री हो या विपक्ष का नेता जब भी ये भाषण देने के लिए खड़े होते हैं, इस देश का जनमानस पेट पकड़कर हंसता है। अगर आज देश से गंभीरता खत्म हो रही है, राजनीति हल्की हो रही है, तो हम क्या करें, ऐसे में व्यंग्य ही अपनी ताकत दिखाता है। अब तो हम गंभीरता शब्द से भी न्याय नहीं कर पा रहे हैं। पीयूष का मिजाज भी गंभीर है और उनके व्यंग्य में गंभीर बातें छिपी रहती है। प्रसून आगे बोले कि आज के दौर में किताब का नाम कुछ भी हो, पर गंभीर बात ये है कि आजकल किताबें बिकती ही नहीं है क्योंकि व्यंग्य से ज्यादा गंभीरता किसी में नहीं होती है। आज सबकुछ गूगल है, पढ़ाई-लिखाई से हम दूर हो रहे हैं। वो बताते हैं कि अभी कुछ दिन पहले सर्च पेपर्स यानी शोधपत्रों की कोई सूची आई थी, तो उसमें दुनिया भर में भारत की जो स्थिति थी, वो शर्मनाक थी। भारत में उसका दशमलव में भी प्रतिनिधित्व नहीं था। अपने इसी अंदाज के साथ प्रसून ने व्यंग्य के जरिए जो गंभीरता के अभाव पर व्यंग्य किया है, वो देश के यर्थाथ को बयां कर रहा है।
लोकप्रिय व्यंग्यकार आलोक पुराणिक ने कहा, मीडिया में होने की वजह पीयूष सत्ता और समाज की विसंगतियों को बखूबी समझते हैं और यह संग्रह उसे उजागर करता है। दरअसल, आज हर विषय में व्यंग्य छिपा है क्योंकि विसंगतियां ही इतनी हैं। लेकिन-ज्यादातर व्यंग्यकारों की परेशानी यह है कि वो नए विषयों को नहीं देख पा रहे हैं। पीयूष ने यह काम किया है। आलोक ने कहा कि आजकल व्यंग्यकार बहुत हो रहे हैं और उनमें से सत्तर फीसदी पत्रकार या अर्थशास्त्री ही है। उन्होंने कहा कि आज इस मुल्क में आप इतने कंफ्युजिया गए हैं कि कौन क्या कर रहा है, पता ही नहीं करता। नेता कारोबारी है, कारोबारी स्मगलर है, स्मगलर चार मंदिरों का ट्रस्टी है और ट्र्स्टी किसी मल्टीनेशनल का सीईओ है। तो ये दौर व्यंग्य के जरिए प्रहार करने का भी है।
इस मौके पर पीयूष पांडे ने अपनी व्यंग्य यात्रा के बारे में कहा, व्यंग्य लिखने का शौक कई साल से है, और कई अखबारों में लिखता रहा। लेकिन जब पांच साल पहले ‘छिछोरेबाजी का रिजोल्यूशन’ नाम से पहला व्यंग्य संग्रह राजकमल प्रकाशन से आया तो इस दिशा में गंभीरता से सोचना शुरू किया और अब लगता है कि इस क्षेत्र में काम की काफी गुंजाइश है क्योंकि आज का युवा पाठक व्यंग्य काफी पसंद कर रहा है। पीयूष ने अपनी किताब के शीर्षक धंधे मातरम् के अनेक अर्थो के बारे में भी बताया कि धंधे मातरम् यानी ऐसी माता किस काम की, जो हमें धन न दे, धन दे मातरम्। ऐसी माता किस काम की, जो हमारे धंधे को, हमारे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद ना करे। धंधे मातरम् का एक आशय यह भी हुआ कि धंधा हमारे लिए माता सामान है, जो उसे पूरी इज्ज़त पूरा समय देते हैं।
पीयूष ने कहा कि उन्होंने अपने व्यंग-संग्रह में उन बिंबों को पकड़ने की कोशिश की है जिन्हें अमूमन अभी तक नहीं छुआ गया है। धंधे-मातरम में कुल 51 व्यंग्य हैं और इस पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। इस मौके पर उनके पुराने साथी और इंडिया न्यूज में कार्यरत विष्णु शर्मा, समाचार4मीडिया डॉट कॉम के संपादकीय प्रभारी अभिषेक मेहरोत्रा, एनबीटी के भरत मल्होत्रा और पीआर फजले गुफरान।
देश के नंबर वन न्यूज चैनल 'आजतक' की तेजतर्रार पत्रकार और एंकर मीनाक्षी कांडपाल भी इस बुक लॉन्चिंग पर मौजूद थी। उन्होने पत्रकार पीयूष पांडे को उनके नवीन व्यंग्यसंग्रह के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार ने कहा- धंधे मातरम् शीर्षक ही इतना आकर्षक है कि पाठक हाथ में किताब लिए बिना नहीं रहता। लेकिन-बड़ी बात यह कि व्यंग्य भी उतने ही धारदार हैं।
‘धंधे मातरम्’ एक पाठनीय व्यंग्य-संग्रह है, जो सजी-धजी भाषा में नहीं है, बल्कि भाषा को नई सज-धज प्रदान करता है। किताब में अ से असहिष्णुता, आ से आतंकवाद, अच्छे दिन के इंतजार में, कॉल ड्राप के फायदे, लोकतंत्र की हत्या जैसे कई तमाम व्यंग्य लेखक ने पेश किए हैं।
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