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GST लागू होने से ब्रॉडकास्टर्स को सता रही ये चिंता...

मधुवंती साह ।। सरकार अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की नई व्यवस्था वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने की तैयारी में जुटी हुई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में एक समान बाजार बनाने और सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) को बढा़ने में काफी मदद मिले

समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago

मधुवंती साह ।।

सरकार अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की नई व्यवस्था वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने की तैयारी में जुटी हुई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में एक समान बाजार बनाने और सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) को बढा़ने में काफी मदद मिलेगी।

जीएसटी को लेकर अन्‍य लोग तमाम तरह की प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर रहे हैं, वहीं ब्रॉडकास्‍टर्स इसके सकारात्‍मक प्रभाव को देख रहे हैं। ब्रॉडकास्‍टर्स को पूरी उम्‍मीद है कि जीएसटी से उनका बिजनेस काफी आसान हो जाएगा और पारदर्शिता आने के साथ दक्षता में भी वृद्धि होगी।

इस बारे में ‘टाइम्‍स नेटवर्क’ के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है, ‘हालांकि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्‍ट्री पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जबकि सिर्फ जीएसटी लगाने से कुछ सेवाओं को दो तरह के टैक्‍स वैल्‍ट (वैल्‍यू ऐडेड टैक्‍स)’ और सर्विस टैक्‍स सर्विस टैक्‍स (Service Tax) से छुटकारा मिल जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में टैक्‍स को चली आ रहीं अड़चनों को जीएसटी की सहायता से दूर कर लिया जाएगा।

‘सोनी पिक्‍चर्स नेटवर्क्‍स इंडिया’ के चीफ एग्जिक्‍यूटिव ऑफिसर एनपी सिंह का कहना है, ‘एक ही कर लगाने से सिस्‍टम में काफी सुधार होगा और इसमें पारदर्शिता बढ़ेगी। मेरा मानना है कि इससे हमारे देश की अर्थव्‍यवस्‍था और हमारे सेक्‍टर में काफी सकारात्‍मक सुधार होगा। ’

 कुछ समय तक शांति की उम्‍मीद (Expect a lull period)

हालांकि ब्रॉडकास्‍टर्स को देश भर में एक टैक्‍स सिस्‍टम से दूसरे टैक्‍स सिस्‍टम में परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान कुछ मंदी (slowdown) आने की आशंका है। इस बारे में एनके सिंह का कहना है, ‘जब जीएसटी लागू हो जाएगा तो हमें भी थोड़़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि तीन-चार महीनों में सभी चीजें ठीक हो जाएंगी और स्थिति पहले की तरह सामान्‍य हो जाएगी।’

 ‘9X Media’ के चीफ रेवेन्‍यू ऑफिसर पवन जेलखानी भी इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है, ‘टैक्‍स परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान कुछ परेशानी हो सकती है क्‍योंकि पूरे देश में एक प्रक्रिया से दूसरी प्रक्रिया में बदलाव होना है। इसलिए शुरुआत के दो-तीन महीने काफी परेशानी भरे हो सकते हैं। टेलिविजन सेक्‍टर बड़े पैमाने पर FMCG, टेलिकॉम और ऑटोमोबाइल पर ज्‍यादा निर्भर है। एक बार जब जीएसटी आएगा तो मार्केट में स्‍लोडाउन हो जाएगा। पूरी इंडस्‍ट्री की प्राइसिंग भी बदल जाएगी और इसका ऐडवर्टाइजिंग पर काफी प्रभाव पड़ेगा। जब शुरुआत का समय गुजर जाएगा तो ऐडवर्टाइजिंग काफी आगे बढ़ेगा और इसका सकारात्‍मक प्रभाव होगा। मेरा मानना है कि यह टैक्स स्‍ट्रक्‍चर काफी बेहतरीन है। आने वाले समय में इसका बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ेगा। यह ऐडवर्टाइजिंग इंडस्‍ट्री के लिए काफी बेहतर है और ऐडवर्टाइजिंग पर निर्भर ब्रॉडकास्टिंग समेत सभी मीडियम पर इसका अच्‍छा प्रभाव पड़ेगा।’

ये मुद्दे भी उठाए जाने चाहिए (Issues to be addressed)

हालांकि ब्रॉडकास्‍टर्स टैक्‍स को पॉजिटिव रूप में ले रहे हैं लेकिन विभिन्‍न बातों को लेकर वे चिंतित भी हैं। जैसे टैक्‍सेसन स्‍लैब में क्लियरिटी का अभाव है। टैक्‍स रेट को लेकर भी चीजें स्‍पष्‍ट नहीं हैं। ऐसे में ब्रॉडकास्‍टर्स का मानना है कि जीएसटी को लागू करने से पूर्व इन बातों पर भी ध्‍यान देना चाहिए।

‍इस बारे में आनंद का कहना है, ‘जीएसटी को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसमें सप्‍लाई के प्‍लेस को लेकर कोई क्लियरिटी नहीं है। इसके अलावा भी कई अन्‍य बातें हैं, जिन पर जरूर ध्‍यान दिया जाना चाहिए।’

वहीं विभिन्‍न माध्यमों में असमानता को लेकर जेलखानी ने भी अपनी चिंता जताई है। उनका कहना है, ‘टैक्‍स के स्‍लैब को लेकर कोई भी क्लियरिटी नहीं है। FMCG इंंडस्ट्री के तहत आने वाल गुड्स टैक्‍स को सबसे निचले टैक्‍स स्‍लैब में रखा गया है, जो पांच प्रतिशत है। अब इसमें दो बातें हैं कि कैसे यह ऐडवर्टाइजिंग को प्रभावित करेंगे। इसके अलावा उद्योग कैसे कामयाब होंगे। जहां तक ब्रॉडकास्टिंग इंडस्‍ट्री की बात है तो उसे काफी फायदा होगा। अभी टेलिविजन 15 प्रतिशत सर्विस टैक्‍स का भुगतान कर रहा है, वह अब 18 प्रतिशत चुकाएगा। यह ऐडवर्टाइजिंग पर होगा और ब्रॉडकास्‍टर स्‍तर पर दो से ढाई प्रतिशत की बचत होगी। यहां तक तो ठीक है लेकिन समस्‍या यह है कि टीवी पर यह टैक्‍स 15 प्रतिशत है जबकि प्रिंट पर पांच प्रतिशत से ज्‍यादा नहीं है। ऐसे में विभिन्‍न माध्यमों की बात करें तो इसमें क्लि‍यरिटी नहीं है। इस असमानता को लेकर ही ब्रॉडकास्‍टर्स सवाल उठा रहे हैं।’

उनका कहना है, राज्‍यों के स्‍तर पर भी टैक्‍स में समानता नहीं है। स्‍टेट जीएसटी (SGST) और इंटरस्‍टेट जीएसटी (IGST) को भी स्‍पष्‍ट किए जाने की जरूरत है। एक महीने के अंदर यह चीजें स्‍पष्‍ट हो जाएंगी। यदि यह दरें एक जुलाई से प्रभावी हो जाती हैं तो कैश को लेकर इश्‍यू उठेगा क्‍योंकि हम तुरंत प्रभाव से 18 प्रतिशत का भुगतान कर रहे हैं लेकिन इसके लाभ बाद में होंगे।

जीएसटी को लेकर बार्क इंडिया (BARC India) के सीईओ पार्थो दासगुप्‍ता भी आशान्वित हैं लेकिन उन्‍होंने टैक्स के स्‍ट्रक्‍चर को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है, ‘हम सरकार के इस कदम का स्‍वागत करते हैं और आने वाले समय में इसके काफी फायदे होंगे। लेकिन बार्क इंडिया के लिए चिंता की बात यह है कि इसमें टैक्‍स की दरें असमान हैं और घरों में व्‍युअरशिप मापने के लिए लगे बार्क इंडिया के मीटरों को लेकर टैक्‍स के बारे में स्थिति स्‍पष्‍ट होनी चाहिए।

इसके अलावा उन्‍होंने स्‍टेटवाइज रजिस्‍ट्रेशन का मुद्दा भी उठाया। पार्थो दासगुप्‍ता का कहना है कि अभी जीएसटी स्‍टेटवाइज रजिस्‍ट्रेशन के आधार पर तैयार किया गया है लेकिन जब बार्क इंडिया पूरे देश में मीटर लगा देगी , तब एक ही रजिस्‍ट्रेशन किए जाने की जरूरत महसूस होगी ताकि टैक्‍स को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो।

उन्‍होंने कहा कि अभी शुरुआत है और इससे काफी चीजें सीखने को मिलेंगे। उन्‍होंने उम्‍मीद भी जताई कि इन मुद्दों को अधिकारियों से बातचीत कर सुलझा लिया जाएगा।

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