होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / शेखर गुप्ता की कलम से: यूपी में मुस्लिम महिलाओं से नहीं, इस गणित से भाजपा जीती

शेखर गुप्ता की कलम से: यूपी में मुस्लिम महिलाओं से नहीं, इस गणित से भाजपा जीती

‘यह कहना कि कई मुस्लिमों खासतौर पर महिलाओं ने उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा को वोट दिया साफतौर पर मिथक है। तथ्य तो यह है कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने भाजपा के 39.7 फीसदी के खिलाफ अपने 50 फीसदी वोटों का बंटवारा कर लिया।’ हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’

समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago

‘यह कहना कि कई मुस्लिमों खासतौर पर महिलाओं ने उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा को वोट दिया साफतौर पर मिथक है। तथ्य तो यह है कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने भाजपा के 39.7 फीसदी के खिलाफ अपने 50 फीसदी वोटों का बंटवारा कर लिया।’ हिंदी अखबार दैनिक भास्करमें छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:

राष्ट्रवाद वाले हिंदुत्व की राजनीति का दौर

यदि राजनीतिक इतिहास को युगों में बांट दिया जाए तो इंदिरा गांधी का युग 1969 में शुरू होता है, जब उन्होंने कांग्रेस का विभाजन कर दिया था और वह 1989 में समाप्त हुआ जब राजीव गांधी सत्ता खो बैठे। दो उभरती राजनीतिक ताकतों ने यह संभव किया : मंदिर और मंडल। उसके बाद कांग्रेस 15 साल सत्ता में रही (पीवी नरसिंह राव के मातहत एक और सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह के मातहत दो कार्यकाल) फिर भी वह कभी अपनी ऊर्जा वापस प्राप्त न कर सकी। असली ताकत तो विभिन्न चरणों में मंदिर व मंडल की संतानों में बंट गई।

1989 बाद की राजनीति उत्तर प्रदेश में 325 सीटों वाली भाजपा की जीत और आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ खत्म हो गई। यह आधारभूत परिवर्तन है। इसने राजनीति में नए नियम स्थापित किए हैं। पुराने नियमों ने भाजपा को कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह देने पर बाध्य किया था। अत्यधिक कट्‌टर वाम-उदारवादी भी लखनऊ में योगी की जगह इन नेताओं जैसे किसी को देखकर राहत की सांस लेते। नए नियम आपको और भी योगी देंगे। एक या दो प्रभावी पिछड़ी और अजा जातियों को मुस्लिमों के साथ जोड़ने का पुराना फॉर्मूला नरेंद्र मोदी/अमित शाह की चुनावी मशीन ने ध्वस्त कर दिया है। वह हिंदुत्व जो इस उदय को उभारता है वह न तो राम मंदिर तक सीमित है और न उसका प्रतीक है। यदि कोई बात है तो वह यह कि मंदिर तो अब हो चुका सौदा है अथवा कोई प्रभावी राजनीतिक विरोध न होने और देश के मुख्य न्यायाधीश की ओर से मध्यस्थता की पेशकश के बाद जल्द ही हकीकत बन जाएगा।

यह कहना कि कई मुस्लिमों खासतौर पर महिलाओं ने उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा को वोट दिया साफतौर पर मिथक है। तथ्य तो यह है कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने भाजपा के 39.7 फीसदी के खिलाफ अपने 50 फीसदी वोटों का बंटवारा कर लिया। इस तरीके से तो जरूरी आंकड़ा नहीं जुटाया जा सकता था बशर्ते मुस्लिम भाजपा के खिलाफ वोट देने टूट न पड़े। सात दशकों से कांग्रेस या कांग्रेस जैसी वाम-मध्यमार्गी राजनीति हमारी राजनीति का प्रभावी ध्रूव थी। अब भाजपा ने इसका स्थान ले लिया है। अब भूमिकाएं निर्णायक रूप से कुछ इस तरह उलट गई है कि जैसी वह न 2014 में मोदी की जीत के बाद बनी थी और न उसके पहले वाजपेयी-आडवाणी शासन के वक्त थी।

वर्ष 1995 में लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्टैटेजिक स्टडीज (एडेल्फी पेपर सीरीज) के लिए विशेष लेख में भाजपा के सत्तारूढ़ होने की संभावना देखते हुए मैंने दलील दी थी कि भारत एक अनोखे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां बहुत अधिक संख्या वाले बहुसंख्यकों में अल्पसंख्यक भाव आ गया है। आडवाणी और आरएसएस ने इसी पर अभियान खड़ा किया। अयोध्या इसी का प्रतीक है। हिंदुओं को यह यकीन दिलाया गया कि कांग्रेस शैली की धर्मनिरपेक्षता में अल्पसंख्यकों खासतौर पर मुस्लिम व ईसाइयों के साथ विशेष व्यवहार किया जा रहा है।

हज सब्सिडी, मंत्रियों की इफ्तार पार्टियां, मुस्लिम संस्थानों को कानून के खिलाफ संरक्षण (जिसमें राइट टू एजुकेशन शामिल है), बढ़ता पाकिस्तानी आतंक और दुनियाभर में बढ़ते इस्लामवाद ने इसमें योगदान दिया। कई बार तो यह सब भाजपा के लिए एक साथ आ गए और पार्टी ने 1998-2004 तक सत्ता का आनंद लिया। यह जरूर है कि ज्यादातर ‘धर्मनिरपेक्ष’ ताकतें तब भी उसके खिलाफ एकजुट थीं। किंतु इस रणनीति की भी सीमाएं थीं।

शायद नई दिल्ली से बहुत दूर बैठकर मोदी यह समझने में सफल रहे कि बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक का भाजपा का पुराना फॉर्मूला घिस चुका है। वैसे भी शिकार होने की भावना उनकी भुजाएं फड़काने वाली राजनीतिक शैली में बैठती नहीं। उत्तरोत्तर उन्हें अल्पसंख्यकवाद की शिकायत करने की बजाय अपने ही तरीके से ‘आतंक’ से निपटते देखा गया- यदि ‘पोटा’ उपलब्ध नहीं है तो एनकाउंटर ही सही। यदि आप 2007 के आगे विश्लेषण करें (जब उनका दूसरा पूर्ण कार्यकाल शुरू हुआ) उनके द्वारा की गई हर पहल तथा जो भी उन्होंने कहा वह हिंदू शिकायत को हिंदू पुनरुत्थानवाद में बदलने के विचार पर केंद्रित था। उसके बाद से वे अल्पसंख्यकों के प्रति रूखे नहीं रहे और न उनमें कोई खेद दिखता है।

उनके नए तेवरों की यही वजह थी- मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार, प्रधानमंत्री निवास पर सालाना इफ्तार पार्टी की परम्परा खत्म करना, कैबिनेट में मुस्लिम या ईसाई को हाशिये से ज्यादा महत्व नहीं देना और अब उत्तर प्रदेश के 403 में किसी भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट न देना, सब सोच-समझकर किया गया। यह कोई पूर्वग्रह ग्रस्त मानसिकता नहीं थी बल्कि सोच-समझकर राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता और हिंदूवादी राष्ट्रवाद को नई परिभाषा देने का प्रयत्न था। योगी की नियुक्ति इसमें ठीक बैठती है। धर्मनिरपेक्षता की मोदी-शाह की परिभाषा यह है कि भारत आत्मविश्वास से भरा हिंदू देश है और इसीलिए धर्मनिरपेक्ष है। अल्पसंख्यक यदि इसमें अपना स्थान जान लेते हैं तो वे सुरक्षित रहेंगे। अब उन्हें इस बात पर वीटो का हक नहीं होगा कि भारत पर कौन शासन करता है या नहीं करता है। खेद जताने के दिन बीत गए हैं। योगी आदित्यनाथ भी जान-बूझकर किया गया चयन है जैसे मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार करने का फैसला था।

कोई विपक्ष पुराने नारों अथवा फॉर्मूले से इसका प्रतिरोध नहीं कर सकता, कांग्रेस तो बिल्कुल नहीं। उत्तर प्रदेश में उन्होंने मुस्लिमों को धर्मनिरपेक्षता के झंडाबरदार होने के बहाने जोड़ने का प्रयास किया और हार मिली। विपक्ष ने ऐसा इसलिए नहीं किया कि वे हिंदू कट्‌टरता के खिलाफ थे बल्कि इसलिए कि मोदी ने बहुसंख्यकों को एकजुट करने के लिए शिकायतों व असुरक्षा का सहारा लेने की बजाय अधिक शक्तिशाली शस्त्र काम में लिया- मर्दाना राष्ट्रवाद। अब तक कांग्रेस-वाम धर्मनिरपेक्षता राजनीतिक बहस तय करती थी। मोदी इसे राष्ट्रवाद की बहस की ओर ले गए। इसमें उन्हें जेएनयू शैली की विकृत उदारवाद की मदद मिली। जब तक विपक्ष ऐसा नेता नहीं लाता, जो यह मानने को तैयार हो कि आप राष्ट्रवाद का सामना धर्मनिरेपेक्षता से नहीं कर सकते और राष्ट्रवाद की प्रतिस्पर्द्धी परिभाषा नहीं खोजता, तब तक मोदी अपराजेय रहेंगे।

(साभार: दैनिक भास्कर) समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

BSE व NSE ने इस मामले में 'बालाजी टेलीफिल्म्स' पर लगाया जुर्माना

टीवी और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) पर स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना लगाया है।

1 day ago

मैडिसन मीडिया सिग्मा की CEO वनिता केसवानी ने छोड़ा पद

मीडिया इंडस्ट्री से एक बड़ी खबर सामने आई है। वनिता केसवानी ने मैडिसन मीडिया सिग्मा (Madison Media Sigma) के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है।

1 day ago

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में शाजिया फ़ज़ल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) में शाजिया फ़ज़ल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है

1 day ago

अब RPSG मीडिया के CEO होंगे साहिल शेट्टी, 9 मार्च को संभालेंगे जिम्मेदारी

नेटवर्क18 स्टूडियो से अलग होने के बाद साहिल शेट्टी अब आरपीएसजी मीडिया (RPSG Media) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर जुड़ने जा रहे हैं

2 days ago

'जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट' की बोर्ड मीटिंग आज, 14.80 करोड़ रुपये जुटाने पर होगा फैसला

जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक सोमवार, 2 मार्च 2026 को होने जा रही है।

2 days ago


बड़ी खबरें

दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार व पूर्व राज्यसभा सांसद एच.के. दुआ

वरिष्ठ पत्रकार, राजनयिक और पूर्व राज्यसभा सांसद एच.के. दुआ का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।

10 hours ago

BSE व NSE ने इस मामले में 'बालाजी टेलीफिल्म्स' पर लगाया जुर्माना

टीवी और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) पर स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना लगाया है।

1 day ago

मैडिसन मीडिया सिग्मा की CEO वनिता केसवानी ने छोड़ा पद

मीडिया इंडस्ट्री से एक बड़ी खबर सामने आई है। वनिता केसवानी ने मैडिसन मीडिया सिग्मा (Madison Media Sigma) के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है।

1 day ago

क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान को हरा पाएगा: रजत शर्मा

तालिबान ने कहा कि उसके हमले में 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, इनमें से 23 सैनिकों की लाशें भी अफगान लड़ाके अपने साथ अफगानिस्तान ले गए।

1 day ago

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में शाजिया फ़ज़ल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) में शाजिया फ़ज़ल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है

1 day ago