होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / बदले-बदले नज़र आ रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार...
बदले-बदले नज़र आ रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार...
नीरज नैय्यर युवा पत्रकार ।। सत्ता बदलते ही मिज़ाज बदल जाते हैं, फिर चाहे वो नेता हो या अधिकारी। लेकिन आजकल पत्रकारों के मिज़ाज भी सरकार के साथ बदलने लगे हैं। कुछ वक़्त पहले तक जो पत्रकार भाजपा के नाम से भी खार खात
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
नीरज नैय्यर
युवा पत्रकार ।।
सत्ता बदलते ही मिज़ाज बदल जाते हैं, फिर चाहे वो नेता हो या अधिकारी। लेकिन आजकल पत्रकारों के मिज़ाज भी सरकार के साथ बदलने लगे हैं। कुछ वक़्त पहले तक जो पत्रकार भाजपा के नाम से भी खार खाते थे, वो अब नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी की तारीफ करते नहीं थक रहे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा की प्रचंड जीत ने कुछ पत्रकारों की सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
वैसे ये कहना ज्यादा उचित होगा कि समय के अनुरूप पत्रकारों ने अपनी सोच बदल ली है, क्योंकि समयानुसार ढलना उनसे बेहतर भला और कौन समझ सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि गोवा और मणिपुर में ताज़ा घटनाक्रम पर भी उन पत्रकारों की जुबां ज्यादा तीखी नहीं है, जो कल तक ‘कमल’ के खिलने पर ही उंगलियां उठा दिया करते थे। इन पत्रकारों की जमात में एनडीटीवी के रवीश कुमार का नाम सबसे पहले आता है। थोड़ा पहले जाकर यदि देखें तो रवीश के लिए भाजपा और उससे जुड़े लोग किसी अछूत की तरह थे, लाइव शो में ही उनका रुखा व्यवहार नज़र आ जाया करता था। नेताओं की बात ख़त्म होने से पहले ही वो ज्ञान की गंगा बहाना शुरू कर देते थे, मगर अब वो बाकायदा भाजपा नेताओं की बात सुन भी रहे हैं और उन पर तालियां भी बजा रहे हैं।
विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने पर एनडीटीवी के एक शो में मौजूद भाजपा नेता अमिताभ सिन्हा और बाकियों को रवीश ने बड़ी तल्लीनता के साथ सुना, जो उनकी पहचान के बिल्कुल इतर था। इसके अलावा वो कांग्रेस, सपा और बसपा के प्रवक्ताओं पर शब्दबाण भी छोड़ते नज़र आए।
एक न्यूज़ एंकर के लिहाज़ से देखें तो यह बदलाव अच्छा है और इसे परिकपक्वता की निशानी के तौर पर देखा जाना चाहिए, केवल भाजपा के संदर्भ में नहीं, एक पत्रकार को सभी की बात सुनना चाहिए वो भी बिना किसी पक्षपात के। व्यक्तिगत तौर पर पत्रकार भी आम इंसान की तरह किसी एक विचारधारा का समर्थक हो सकता है, लेकिन जब समर्थक वाला व्यक्तित्व उसके काम पर भी हावी होने लगे, तो वो तटस्थ नहीं रह जाता और यही रवीश कुमार के साथ होता आ रहा था, रवीश के शब्दों में, उनके हावभाव में भाजपा के खिलाफ गुस्सा साफ़ दिखलाई देता था। हालांकि अब सरकार बदल गई और रवीश के मिज़ाज भी, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि जबरन कराया गया या मजबूरीवश किया गया व्यवहार या सोच का यह धर्मांतरण कितने दिनों तक टिक पता है।
समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
टैग्स