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इंटरनेट पर ‘Fake News’ को लेकर कराए गए BBC सर्वे में सामने आई ये सच्चाई
‘बीबीसी’ (BBC) ने हाल ही में 18 देशों में एक सर्वे कराया है। कंसल्टेंसी फर्म ‘ग्लोबस्कैन’ (Globescan) के साथ मिलकर...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘बीबीसी’ (BBC) ने हाल ही में 18 देशों में एक सर्वे कराया है। कंसल्टेंसी फर्म ‘ग्लोबस्कैन’ (Globescan) के साथ मिलकर गए इस सर्वे में यह जानने की कोशिश की गई है कि ‘फेक न्यूज’ को दुनिया आखिर किस रूप में देखती है। ‘बीबीसी’ द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक, ऑनलाइन फेक न्यूज को लेकर विश्व भर के इंटरनेट यूजर्स में चिंता बढ़ती जा रही है।
इस सर्वे में 79 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट पर क्या फर्जी है और क्या असली, इसे लेकर वे चिंतित रहते हैं। सिर्फ दो देश- (चीन और ब्रिटेन) के अधिकांश लोग चाहते थे कि सरकार को इंटरनेट को रेगुलेट करना चाहिए। जनवरी से अप्रैल के बीच में कराए गए सर्वे में 16000 से ज्यादा युवाओं को शामिल किया गया था।
गौरतलब है कि ‘बीबीसी’ ने वर्ष 2010 में भी इसी तरह का सर्वे कराया था। इस सर्वे में जब इंटरनेट को रेगुलेट करने के बारे में सवाल पूछा गया तो 58 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसे रेगुलेट नहीं किया जाना चाहिए जबकि सात साल पूर्व यही सवाल पूछे जाने पर 51 प्रतिशत लोगों ने यह जवाब दिया था। वहीं, इंटरनेट को रेगुलेट किए जाने के बारे में चीन के लोगों ने इससे सहमति जताई है जबकि ब्रिटेन में यह स्थिति लगभग बराबर दिखी। हालांकि 53 प्रतिशत लोग इसके पक्ष में दिखे।
इंटरनेट को रेगुलेट किए जाने का सबसे ज्यादा विरोध ग्रीस और नाइजीरिया में देखा गया। ग्रीस के करीब 84 प्रतिशत लोग नहीं चाहते कि इंटरनेट को रेगुलेट किया जाए, वहीं नाइजीरिया के 82 प्रतिशत लोग इसके विरोध में दिखे।
दरअसल, इंटरनेट पर क्या फर्जी यानी फेक है और क्या सही है, का मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब फेक न्यूज का चलन बढ़ता जा रहा है और फेसबुक आदि पर फर्जी स्टोरी के साथ विज्ञापन आदि के माध्यम से जबरदस्त कमाई की जा रही है।
इंटरनेट पर फर्जी और असली के बीच सबसे ज्यादा चिंतित ब्राजील के लोग दिखे। यहां के करीब 92 प्रतिशत लोगों ने यह चिंता जताई जबकि यदि अन्य विकासशील देशों की बात करें तो यहां के लोग भी कम चिंतित नहीं दिखे। इनमें इंडोनेशिया के 90 प्रतिशत, नाइजीरिया के 88 प्रतिशत और केन्या के 85 प्रतिशत लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की।
सर्वे में सिर्फ जर्मनी ही ऐसा देश रहा, जहां सबसे कम (51) प्रतिशत लोग ही इस मुद्दे को लेकर गंभीर दिखे। उनका कहना था कि वे इस मामले को लेकर जरा भी चिंतित नहीं हैं। हालांकि देश में चुनावों के चलते फेक न्यूज की तलाश के लिए वहां कई प्रयास किए गए हैं। वहां पर ऑनलाइन राय व्यक्त करने के बारे में चिंता बढ़ती जा रही है।
इस सर्वे में जिन देशों पर लगातार नजर रखी गई है, उनमें से 43 प्रतिशत लोग इसे लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं जबकि वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 49 प्रतिशत था। लेकिन यदि हम विकसित और विकासशील देशों की बात करें तो उनके नजरिये में काफी बदलाव देखा गया है।
नाइजीरिया, पेरू और चीन में अधिकांश लोग अपने विचारों को व्यक्त करने को लेकर काफी आश्वस्त दिखे लेकिन यूरोप और उत्तरी अमेरिका में इसे लेकर ज्यादा चिंता जताई गईं, वहीं फ्रांस और यूनान में कम लोग इस मुद्दे पर खुलकर बोले।
यदि हम ग्लोबल रूप में इंटरनेट के विस्तार की बात करें तो इसकी पहुंच सभी तक होनी चाहिए। इस बारे में पूछे जाने पर 53 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट को मौलिक अधिकार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। इस बात पर ब्राजील, ग्रीस और भारत के अधिकांश लोगों ने अपनी सहमति जताई है।
सर्वे के अनुसार, इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पुरुषों और महिलाओं के नजरिये में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पुरुष इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। 78 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि वे पिछले छह महीनों से ऑनलाइन थे जबकि इस मामले में महिलाओं की संख्या 71 प्रतिशत रही।
अपने विचारों को ऑनलाइन व्यक्त करने के मामले में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कम सुरक्षित महसूस करती हैं। विकसित देशों में यह स्थिति ज्यादा है, जहां फ्रांस में सिर्फ 14 प्रतिशत महिलाएं इस मामले को लेकर खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत और अमेरिका में 35 प्रतिशत है। इंटरनेट पर फेक कंटेंट के मामले में पुरुषों के मुकाबले ब्रिेटन की महिलाएं ज्यादा चिंतित थीं और वे चाहती थीं कि इंटरनेट पर कुछ रेगुलेशन लगाए जाने चाहिए।
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