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टीवी पर मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता बंद होनी चाहिए
<div><strong><span style=font-size: small>रण विजय प्रताप सिंह</span></strong></div> <div><strong><sp
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
रण विजय प्रताप सिंह
समाचार4मीडिया.कॉम
देश के एक जाने-माने पत्रकार ने टीआरपी के लिए कुछ भी दिखाने को तैयार न्यूज़ चैनलों की हालत को देखते हुए कहा था कि उन्हें इस बात का डर लगा रहता है कि कहीं ये चैनल किसी दिन स्टूडियो में लाइव मर्डर न दिखा दें। लेकिन चौतरफा आलोचना और सेल्फ रेगुलेशन की बदौलत न्यूज़ चैनल तो इस तोहमत से बच गए और धीरे-धीरे सही रास्ते पर आते दिखाई दे रहे हैं। मगर एंटरटेनमेंट चैनल, लाइव मर्डर दिखाने से महज एक कदम दूर हैं। गौरतलब है कि ‘राखी का इंसाफ’, नामक शो में एक व्यक्ति ने अपने बारे में अपमानजनक टिप्पणी से आहत होकर आत्महत्या कर ली। वहीं ‘बिग बॉस’ नामक शो ने छिछोरेपन की सभी हदें पार कर दी हैं। टीआरपी के लिए कुछ भी करने को तैयार, इस तरह के कार्यक्रमों को लेकर विरोध इतना तेज हो गया है कि मामला कोर्ट तक जा पहुंचा। कोर्ट ने ‘राखी का इंसाफ’ को रात के 11 बजे दिखाने का आदेश दिया, तो वहीं ‘बिग बॉस’ को रात 9 बजे के निर्धारित समय दिखाए जाने की तत्कालिक राहत दी और इस पर अगली सुनवाई आज सोमवार को होगी। लेकिन बहस और विरोध अभी भी जारी है।
कुछ लोग कहते हैं कि देखने की जिम्मेदारी दर्शकों पर छोड़ देनी चाहिए, लेकिन ऐसा कह कर वे कहीं न कहीं क्या दिखाया जाये, इसकी जिम्मेदारी चैनलों को देना चाहते हैं। पश्चिम की नकल पर दिखाए जा रहे इस तरह के कार्यक्रम भारतीय समाज के लिए कहां तक जायज है? समाचार4मीडिया ने इस मुद्दे पर मीडिया दिग्गजों से राय जानने की कोशिश की।
हिन्दुस्तान के पूर्व वरिष्ठ स्थानीय संपादक, प्रमोद जोशी ने बताया, “टीवी चैनल दर्शकों की किसी एक मनोवृति को लेकर जिस तरह चल रहे हैं और उससे खिलवाड़ कर रहे हैं, उसे किसी भी तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता है।” मनोरंजन व्यक्ति के जीवन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसके नाम पर चैनलों द्वारा अश्लीलता परोसना कहां तक सही है? यह सब सस्ती लोकप्रियता के लिए हो रहा है। क्या हमारा समाज इस तरह के शो के लिए तैयार है? इस पर वे कहते हैं, “हमारे यहां संतुलन की कमी है। पश्चिम के पास ‘डिस्कवरी’, ‘हिस्ट्री’ चैनल सहित कई चैनल हैं जो एक संतुलन स्थापित करते हैं, हमारे यहां वैसा कुछ भी नहीं है। आजकल पश्चिम की नकल पर, शो बनाने का जो चलन हमारे यहां है, उसमें कुछ अच्छे शो भी हैं। जैसे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ज्ञान के दम पर, करोड़पति बनने का मौका देता है। ‘जस्सी जैसी कोई नही’, नामक शो भी पश्चिम की ही नकल पर था, लेकन इसमें हमारे भारतीय समाज के लिए भी एक सबक था कि सुंदरता से कहीं ज्यादा अहम समझदारी है।” उन्होंने कहा कि टीवी एक बड़ा माध्यम है लिहाजा इसे समाज में एक सकारात्मक तस्वीर पेश करनी चाहिए।
मीडिया विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार,वर्तिका नंदा ने कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अभिव्यक्ति की तमाम सीमाओं को तोड़कर टीवी चैनलों पर जो कुछ हो रहा है, उसे कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। आजकल इस तरह के शो में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, उसका जनसरोकार से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “जिस तरह मसालेदार खाना स्वाद में अच्छा लग सकता है, लेकिन महज मसाले से पेट नहीं भरता। देश में तमाम तरह की दूसरी समस्याएं है, उस पर क्यों नहीं दिखाते। मनोरंजन के नाम पर टीवी पर जो अश्लीलता परोसी जा रही है, वह सब टीआरपी के लिए है और उसी से पैसा आता है।” ‘राखी का इंसाफ’ का समय बदल दिये जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “समय बदल देने से सब कुछ नहीं बदला जाएगा। इस तरह के शो को बंद किया जाना चाहिए।”
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