जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) ने अपने संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से खुद को अलग कर लिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) ने अपने संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से खुद को अलग कर लिया है। कंपनी का कहना है कि यह मामला डॉ. सुभाष चंद्रा और प्रमोटर समूह की कंपनियों से जुड़ा है। इसका कंपनी के कामकाज या संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कंपनी की ओर से यह सफाई ऐसे समय में आई है, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पहले से ही 1,322 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच कर रहा है। यह मामला LIC Housing Finance Limited की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है। इसमें डॉ. सुभाष चंद्रा और तीन अन्य लोगों के नाम हैं।
जी एंटरटेनमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी के संज्ञान में आया है कि डॉ. सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत हैसियत से संबोधित करते हुए ECIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई LIC Housing Finance की ओर से पहले दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ी CBI जांच के आधार पर हुई है। प्रवक्ता ने साफ किया कि यह मामला डॉ. सुभाष चंद्रा और प्रमोटर कंपनियों से संबंधित है और इसका जी एंटरटेनमेंट या उसके कामकाज से कोई संबंध नहीं है।
980 करोड़ रुपये के दो कर्ज हैं जांच के केंद्र में
CBI ने सितंबर में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया था कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने LIC Housing Finance से कर्ज लेने के लिए अपनी व्यक्तिगत संपत्ति की कीमत बढ़ाकर दिखाई थी। आरोप है कि इस आधार पर दो कर्ज मंजूर कराए गए, जिनकी कुल रकम 980 करोड़ रुपये थी। बाद में ये कर्ज नॉन-परफॉर्मिंग एक्सपोजर यानी ऐसे कर्ज बन गए, जिनकी वसूली में दिक्कत आ रही है।
एफआईआर के मुताबिक, पहला कर्ज 500 करोड़ रुपये का था, जिसे Vasant Sagar Properties Pvt Ltd को दिया गया था। इसमें Pan India Infra Projects Pvt Ltd सह-कर्जदार थी। यह कर्ज पुराने कर्ज को चुकाने, अतिरिक्त रकम देने और कारोबार बढ़ाने के लिए मंजूर किया गया था।
दूसरा कर्ज 480 करोड़ रुपये का था, जो Digital Subscriber Management and Consultancy Services Pvt Ltd को दिया गया था। इसमें Spirit Infra Power and Multi Ventures Pvt Ltd सह-कर्जदार थी। यह कर्ज किराये से होने वाली कमाई के आधार पर सिक्योरिटाइजेशन व्यवस्था के तहत दिया गया था।
दोनों कर्जों के लिए डॉ. सुभाष चंद्रा ने गारंटी दी थी। जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या कर्ज मंजूर कराने के लिए उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ाकर दिखाई गई थी।
संपत्ति के मूल्यांकन में अंतर की जांच
LIC Housing Finance ने जांचकर्ताओं को बताया कि DIM & Co की ओर से 28 मार्च 2018 को जारी एक प्रमाणपत्र में डॉ. सुभाष चंद्रा की संपत्ति करीब 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, 6 जुलाई 2018 को MPJ & Co की ओर से जारी दूसरे प्रमाणपत्र में उनकी संपत्ति का मूल्य 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।
CBI की एफआईआर में इन आंकड़ों की तुलना दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 के तहत बाद में हुई कार्यवाही में डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से दिए गए बयानों से की गई है। इन कार्यवाही के दौरान उन्होंने 2024 में अपनी संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये बताई थी। साथ ही कहा था कि 2017-18 में भी उनकी संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी।
CBI का आरोप है कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने चार कर्जदार कंपनियों और उनके अधिकारियों के साथ मिलकर LIC Housing Finance से कर्ज मंजूर कराने की कोशिश की। आरोपों के मुताबिक, संपत्ति का मूल्य बढ़ाकर दिखाने के लिए गलत दस्तावेज तैयार किए गए और कर्ज की रकम मिलने के बाद उसका गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और जांच के नतीजे सामने आने बाकी हैं।
व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया भी चर्चा में
यह जांच डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़ी व्यक्तिगत दिवालिया समाधान प्रक्रिया के बीच हो रही है। इस प्रक्रिया में उनके गारंटर होने और कर्जदाताओं की बकाया रकम की वसूली को लेकर विवाद चल रहा है।
CBI की शिकायत से तीन दिन पहले डॉ. सुभाष चंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ गठित करने का विरोध किया था, जिसे उनके व्यक्तिगत दिवालिया मामले की सुनवाई करनी थी।
इससे पहले NCLT की विशेष पांच सदस्यीय पीठ ने उनकी भुगतान योजना की मंजूरी पर रोक लगा दी थी। पीठ का कहना था कि पहले दिया गया फैसला स्पष्ट बहुमत से नहीं आया था। साथ ही डॉ. सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या उससे जुड़े अधिकार किसी और को देने से भी रोक दिया गया था।
इससे पहले NCLT के दो सदस्यों के बीच फैसले को लेकर मतभेद हुआ था। इसके बाद तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा ने IBC की धारा 114 के तहत सुभाष चंद्रा की ओर से पेश भुगतान योजना को मंजूरी दी थी और असहमत कर्जदाताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया था।
इस योजना के तहत गारंटर के रूप में डॉ. सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे। इसके अलावा मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से अलग से 1,494 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव था। रिपोर्ट के मुताबिक, 80.8% वोटिंग हिस्सेदारी वाले कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।
हालांकि, LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank ने इस योजना का विरोध किया था। LIC Housing Finance का कहना था कि उसके करीब 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से व्यक्तिगत तौर पर सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव था। कंपनी ने इस योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताया था।
इस मामले में कर्जदाताओं के करीब 22,000 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये के समझौते को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आने के बाद भी यह प्रक्रिया चर्चा में रही है।
देश में मीडिया के बदलते स्वरूप और उससे जुड़े नियमन को लेकर संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना एजेंडा तय कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में मीडिया के बदलते स्वरूप और उससे जुड़े नियमन को लेकर संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Communications and Information Technology) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना एजेंडा तय कर दिया है। समिति इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कामकाज से जुड़े 12 अहम विषयों की जांच और समीक्षा करेगी। इस सूची में प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के कानूनों से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, टीवी रेटिंग (TRP), पे-टीवी के घटते ग्राहक और प्रसार भारती तक शामिल हैं।
खास बात यह है कि समिति ने पहली बार मीडिया से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ समीक्षा के दायरे में रखा है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में मीडिया के नियमन, सरकारी प्रसारण व्यवस्था, डिजिटल कंटेंट और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कई मुद्दों पर संसदीय स्तर पर चर्चा हो सकती है।
समिति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े निम्नलिखित 12 विषयों को जांच और समीक्षा के लिए चुना है।
ये हैं समिति के एजेंडे में शामिल 12 विषय
समिति सभी तरह के मीडिया पर लागू कानूनों और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। इसमें प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया से जुड़े नियम शामिल हैं। इसका मकसद यह देखना है कि अलग-अलग मीडिया माध्यमों के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था किस तरह काम कर रही है और बदलते मीडिया परिदृश्य में इसमें किस तरह के बदलाव की जरूरत हो सकती है।
प्रसार भारती के कामकाज को भी समिति ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। इसके तहत आकाशवाणी और दूरदर्शन के कामकाज, उनकी भूमिका और संगठन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकारी प्रसारण सेवाओं की पहुंच और बदलते मीडिया बाजार में उनकी प्रासंगिकता भी इस विषय के तहत महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) का भी व्यापक आकलन किया जाएगा। इसमें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति, उससे जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है। यह क्षेत्र डिजिटल वितरण, ओटीटी और बदलते दर्शक व्यवहार के कारण तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव और उनसे जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी समिति करेगी। इसमें ओटीटी सेवाओं का विस्तार, डिजिटल कंटेंट और उनके नियमन से जुड़े सवाल अहम रहेंगे। मौजूदा समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म मनोरंजन के बड़े माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में इनके लिए लागू नियमों और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है।
केंद्रीय संचार ब्यूरो (Central Bureau of Communication-CBC) के कामकाज की भी समीक्षा होगी। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है और सरकारी विज्ञापनों के प्रचार-प्रसार तथा संचार गतिविधियों से जुड़ा है। समिति इसके कामकाज और जिम्मेदारियों की समीक्षा करेगी। मीडिया संस्थानों के लिए सरकारी विज्ञापन से जुड़ी व्यवस्था के लिहाज से भी यह विषय अहम है।
समिति सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के भाग-3 (Part III) को लागू करने की स्थिति की समीक्षा करेगी।
यह हिस्सा डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़े नियमों और आचार संहिता से संबंधित है। इसके तहत डिजिटल मीडिया के लिए शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी आती है। इस समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि इन नियमों को किस तरह लागू किया जा रहा है और मौजूदा व्यवस्था में किन मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।
यह समिति के एजेंडे का एक अहम तकनीकी विषय है। इसमें भारत में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) से जुड़े पूरे इकोसिस्टम की समीक्षा की जाएगी।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए जाने वाले ऑडियो और वीडियो कंटेंट को भी इसमें शामिल किया गया है। यानी एआई से बनने वाले वीडियो, आवाज और दूसरे ऑडियो-विजुअल कंटेंट का क्षेत्र भी संसदीय समीक्षा के दायरे में रहेगा।
यह विषय ऐसे समय में अहम है, जब मीडिया और मनोरंजन इंडस्ट्री में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कंटेंट बनाने के तरीके बदल रहे हैं।
देश में कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों (Community Radio Stations) की स्थिति की भी समीक्षा होगी। समिति इनके विस्तार, उपलब्ध अवसरों और सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार करेगी।
कम्युनिटी रेडियो स्थानीय समुदायों की आवाज को मंच देने का काम करते हैं। ऐसे में इनके विकास, पहुंच और कामकाज से जुड़े मुद्दे इस समीक्षा का हिस्सा होंगे।
डिजिटल और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों पर भी समिति विचार करेगी। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव, सोशल मीडिया की भूमिका और उनसे जुड़ी चुनौतियों को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही आगे की राह (Way Forward) पर भी चर्चा होगी। यानी डिजिटल और सोशल मीडिया के क्षेत्र में आने वाले समय में किस तरह की व्यवस्था और नीतिगत दिशा की जरूरत है, इस पर समिति विचार कर सकती है।
टेलीविजन चैनलों की टीआरपी रेटिंग (TRP Ratings) का तंत्र भी समिति के एजेंडे में है। इसके तहत मीडिया चैनलों की रेटिंग तय करने के मौजूदा तरीके और उससे जुड़ी व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा।
टीआरपी टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विज्ञापन बाजार में चैनलों की स्थिति और विज्ञापनदाताओं के फैसलों में इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में रेटिंग की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दे इस समीक्षा में अहम हो सकते हैं।
पे-टीवी (Pay-TV) के ग्राहकों से जुड़े नियामकीय मुद्दों को भी समिति ने अपने एजेंडे में जगह दी है। इसमें भुगतान करके टीवी चैनल देखने वाले ग्राहकों के आधार से जुड़े नियमों और चुनौतियों की समीक्षा की जाएगी।
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पारंपरिक पे-टीवी सेवाओं के सामने ओटीटी और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। दर्शकों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने से पे-टीवी कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
सूची का आखिरी विषय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के कामकाज की समीक्षा से जुड़ा है। इसके तहत मंत्रालय के इन उपक्रमों की कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका का अध्ययन किया जाएगा।
इस विषय के जरिए समिति मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और संगठनों के कामकाज से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगी।
पहले भी उठ चुका है एक साझा मीडिया कानून का मुद्दा
मीडिया के सभी माध्यमों को एक व्यापक कानूनी व्यवस्था के तहत लाने का मुद्दा पहले भी संसदीय समिति के सामने आ चुका है। समिति ने मार्च 2025 में अपनी 11वीं रिपोर्ट में सरकार को एक व्यापक मीडिया विधेयक (Media Bill) लाने की संभावना तलाशने की सिफारिश की थी।
इसके साथ ही प्रिंट, प्रसारण और डिजिटल मीडिया को एक ही दायरे में लाने के लिए मीडिया काउंसिल बनाने का सुझाव भी दिया गया था। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी एक साझा कानून की जरूरत का समर्थन किया है।
वहीं, अगस्त 2026 में पेश समिति की 28वीं रिपोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बीच डिजिटल मीडिया के नियमन से जुड़ी जिम्मेदारियों के बंटवारे का मुद्दा उठाया गया था।
अब इन 12 विषयों पर रहेगी नजर
2026-27 के लिए तय किए गए इन 12 विषयों से साफ है कि संसदीय समिति केवल मीडिया कानूनों तक सीमित नहीं रहेगी। उसका एजेंडा सरकारी प्रसारण, फिल्म इंडस्ट्री, ओटीटी, सोशल मीडिया, एआई से तैयार कंटेंट, टीवी रेटिंग, पे-टीवी और सरकारी विज्ञापन व्यवस्था तक फैला हुआ है।
हालांकि, इन विषयों को समीक्षा के लिए चुने जाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार ने इनके लिए नए कानून या नियम लागू करने का फैसला कर लिया है। फिलहाल समिति इन विषयों की जांच और समीक्षा करेगी। इसके बाद उसकी सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय हो सकता है।
देश में डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाएं देने वाली कंपनियों ने साल 2025 के दौरान सरकार को लाइसेंस फीस के रूप में 618.20 करोड़ रुपये जमा किए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाएं देने वाली कंपनियों ने साल 2025 के दौरान सरकार को लाइसेंस फीस के रूप में 618.20 करोड़ रुपये जमा किए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए जनवरी 2026 में सरकार को 141.44 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस मिली।
ये आंकड़े देश के प्रसारण कारोबार में DTH कंपनियों की नियामकीय जिम्मेदारियों और सरकार को मिलने वाले राजस्व को दिखाते हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट में DTH सेवाओं के लाइसेंस, फीस की दर और प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों से जुड़े नियमों की भी जानकारी दी गई है।
देश में चार निजी DTH ऑपरेटर कर रहे हैं काम
DTH यानी डायरेक्ट-टू-होम एक सैटेलाइट आधारित टीवी प्रसारण सेवा है। इसमें टीवी चैनलों के डिजिटल सिग्नल सैटेलाइट के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाए जाते हैं। घरों में लगी डिश एंटीना के जरिए इन सिग्नल को रिसीव किया जाता है।
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पहली DTH सेवा वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। फिलहाल भारत में चार निजी DTH ऑपरेटर काम कर रहे हैं। इनके अलावा दूरदर्शन की ओर से मुफ्त DTH सेवा भी उपलब्ध कराई जाती है।
DTH सेवाओं के संचालन के लिए कंपनियों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति और लाइसेंस लेना होता है। मंत्रालय इन कंपनियों के संचालन से जुड़े नियमों और लाइसेंस फीस की व्यवस्था को देखता है।
कंपनियों को AGR का 8% देना होता है लाइसेंस फीस
मंत्रालय ने 16 सितंबर 2022 को भारत में DTH प्रसारण सेवाओं के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों में लाइसेंस फीस, प्लेटफॉर्म सर्विस चैनल और बुनियादी ढांचे को साझा करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन नियमों के तहत DTH ऑपरेटरों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR का 8% लाइसेंस फीस के रूप में सरकार को देना होता है। यह फीस हर तिमाही जमा कराई जाती है।
AGR का मतलब एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू है। आसान भाषा में कहें तो यह कंपनी की कुल कमाई में से नियमों के तहत तय कटौतियों और समायोजनों के बाद निकाली गई वह रकम है, जिसके आधार पर लाइसेंस फीस तय होती है। इसलिए कंपनियों को अपनी पूरी कमाई का 8% नहीं, बल्कि निर्धारित AGR का 8% देना होता है।
2025 में ₹618.20 करोड़ जमा किए
मंत्रालय की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान DTH ऑपरेटरों ने लाइसेंस फीस के रूप में कुल 618.20 करोड़ रुपये जमा किए।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही की लाइसेंस फीस के तौर पर जनवरी 2026 में सरकार को 141.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह तीसरी तिमाही का भुगतान है, जबकि 618.20 करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 से जुड़ा है।
इसलिए इन दोनों आंकड़ों को एक ही अवधि की कमाई या भुगतान मानकर जोड़ना सही नहीं होगा। दोनों अलग-अलग समयावधियों से संबंधित हैं।
प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों के लिए भी तय हैं नियम
DTH ऑपरेटरों को प्लेटफॉर्म सर्विस (PS) चैनल चलाने की भी अनुमति है। ये ऐसे चैनल होते हैं जिन्हें संबंधित DTH ऑपरेटर अपने प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराता है। इनके लिए भी मंत्रालय ने दिशानिर्देश तय किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, किसी DTH ऑपरेटर की कुल चैनल क्षमता में प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों की हिस्सेदारी अधिकतम 5% तक हो सकती है। इसके अलावा हर प्लेटफॉर्म सर्विस चैनल के पंजीकरण के लिए 10,000 रुपये का एकमुश्त और गैर-वापसी योग्य शुल्क देना होता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य DTH ऑपरेटरों के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध चैनलों और सेवाओं को तय नियमों के दायरे में रखना है।
बुनियादी ढांचे को साझा करने के लिए भी प्रावधान
मंत्रालय की ओर से जारी DTH दिशानिर्देशों में बुनियादी ढांचे को साझा करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इसका मकसद प्रसारण सेवाओं के संचालन से जुड़ी व्यवस्था को नियमों के दायरे में रखना है।
DTH कंपनियों को लाइसेंस फीस का भुगतान तिमाही आधार पर करना होता है। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को मिलने वाली यह फीस भारत कोष के जरिए जमा कराई जाती है।
कुल मिलाकर, मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि DTH ऑपरेटरों ने कैलेंडर वर्ष 2025 में सरकार को 618.20 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस के रूप में दिए। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए जनवरी 2026 में 141.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। DTH कंपनियों के लिए AGR का 8% लाइसेंस फीस, तिमाही भुगतान और प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों की सीमा जैसे नियम इस कारोबार की नियामकीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
अमेरिका स्थित स्वास्थ्य सेवा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी UnitedHealth Group की इकाई Optum में अरुणिमा मेहता को मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका स्थित स्वास्थ्य सेवा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी UnitedHealth Group की इकाई Optum में अरुणिमा मेहता को मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। समाचार4मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, इस नई भूमिका में वह कंपनी की ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ में योगदान देंगी और अमेरिका सहित विभिन्न देशों की अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ मिलकर काम करेंगी।
Optum में अरुणिमा मेहता की नई जिम्मेदारी में वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक विकास में योगदान देने के साथ-साथ नेतृत्व की अधिक व्यापक भूमिका निभाना भी शामिल है। इस नियुक्ति के साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ काम करने और कंपनी के वैश्विक कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
इससे पहले अरुणिमा मेहता Financial Software & Systems (FSS) में ग्लोबल मार्केटिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थीं। यहां उन्होंने वैश्विक मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। अरुणिमा मेहता इससे पहले Abbott में एसोसिएट डायरेक्टर (Marketing Excellence) और वोडाफोन आइडिया में वाइस प्रेजिडेंट (कम्युनिकेशंस) के पद पर भी काम कर चुकी हैं।
बता दें कि UnitedHealth Group दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। वर्ष 2026 की Fortune Global 500 सूची में इसे चौथा स्थान दिया गया है। कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग 447 अरब अमेरिकी डॉलर है और दुनियाभर में इसके करीब 4 लाख कर्मचारी हैं।
भारत में भी Optum की मजबूत मौजूदगी है। इसके प्रमुख केंद्र बेंगलुरु, गुरुग्राम, नोएडा, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई में हैं। कंपनी इन प्रमुख शहरों में अपने ऑपरेशंस के जरिए लगभग 38,000 से 40,000 प्रोफेशनल्स को रोजगार देती है।
इसके साथ ही पूनम पांडेय नवभारत टाइम्स के 80 साल के इतिहास में इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बन गई हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स (NBT) में वरिष्ठ पत्रकार पूनम पांडेय को नेशनल ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही वह नवभारत टाइम्स के 80 साल के इतिहास में इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाली पहली महिला बन गई हैं।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की रहने वाली पूनम पांडेय राष्ट्रीय राजनीति की रिपोर्टिंग करती रही हैं। उनकी रिपोर्टिंग के प्रमुख विषयों में भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और देश की राजनीति शामिल हैं। इसके अलावा वह भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मामलों और विदेश मामलों पर भी नियमित रूप से लिखती हैं। वह वर्ष 2014 से भारतीय संसद की रिपोर्टिंग कर रही हैं।
पूनम पांडेय ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इसके बाद उन्होंने CNBC आवाज के साथ अपने करियर की शुरुआत की। वह आज तक न्यूज चैनल में भी काम कर चुकी हैं।
उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही वह ब्रिटेन के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) के फेलोशिप कार्यक्रम के तहत चेवनिंग फेलो भी हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी कर ली है। दोनों ने 30 अक्टूबर को निजी समारोह में शादी की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी कर ली है। दोनों ने 30 अक्टूबर को निजी समारोह में शादी की। शनिवार, 31 अक्टूबर को दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी शादी की तस्वीरें साझा कर इस खबर की जानकारी दी।
उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर निधि राजदान के साथ कई तस्वीरें साझा कीं। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'A new journey began yesterday' यानी 'कल से एक नई यात्रा शुरू हुई।' उन्होंने अपने संदेश के साथ अंगूठी वाला इमोजी भी लगाया।
A new journey began yesterday 💍@Nidhi https://t.co/BXbdLq2d1H
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) October 31, 2026
वहीं, निधि राजदान ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यही तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने अपने पोस्ट में मजाकिया और हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा, 'It's done bro' और इसके साथ अंगूठी वाला इमोजी लगाया। दोनों की पोस्ट सामने आने के बाद उन्हें बधाई संदेश मिलने लगे।
It’s done bro 💍 @OmarAbdullah https://t.co/I3V5HnCz7C
— Nidhi Razdan (@Nidhi) October 31, 2026
पहले पायल नाथ से हुई थी उमर अब्दुल्ला की शादी
उमर अब्दुल्ला की यह दूसरी शादी है। इससे पहले उन्होंने साल 1994 में पायल नाथ से शादी की थी। दोनों के दो बेटे हैं, जाहिर और जमीर। हालांकि, कुछ साल बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और वे अलग-अलग रहने लगे थे। उमर जम्मू-कश्मीर में रहते थे, जबकि पायल अपने बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही थीं।
दोनों के बीच लंबे समय तक कानूनी विवाद भी चला। इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से उनकी शादी खत्म करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 32 साल पुराना उनका वैवाहिक रिश्ता कानूनी तौर पर समाप्त हो गया।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी की खबर राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।
वह 6 नवंबर को हैदराबाद के न्यूज चैनल ‘6 टीवी भारत’ (6TV Bharat) से ग्रुप एडिटर के तौर पर जुड़ेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र ने ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) में करीब 14 साल का सफर पूरा करने के बाद अब नई पारी शुरू करने का फैसला किया है। वह 6 नवंबर को हैदराबाद के न्यूज चैनल ‘6 टीवी भारत’ (6TV Bharat) से ग्रुप एडिटर के तौर पर जुड़ेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की है।
सुधीर मिश्र ने बताया कि नवभारत टाइम्स में उनका आज आखिरी साप्ताहिक कॉलम प्रकाशित हुआ है। करीब 14 साल तक हर शनिवार प्रकाशित होने वाले इस कॉलम को अखबार के साथ-साथ ऑनलाइन और सोशल मीडिया के पाठकों ने भी खूब पढ़ा। उन्होंने अपने पाठकों का आभार जताते हुए इस लंबे सफर के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
अपनी नई जिम्मेदारी के बारे में बताते हुए सुधीर मिश्र ने कहा कि हैदराबाद के 6 टीवी भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत लखनऊ और दिल्ली से हो चुकी है। इन प्लेटफॉर्म्स के लिए टीमें काम कर रही हैं और अब इस काम को आगे बढ़ाने तथा विस्तार देने की योजना है। चैनल का हिंदी प्लेटफॉर्म ‘6 टीवी भारत’ और अंग्रेजी प्लेटफॉर्म ‘ऑनस्पॉट’ (OnSpot) के नाम से संचालित होगा।
सुधीर मिश्र ने अपने नए सफर के उद्देश्य को साझा करते हुए कहा कि उनकी कोशिश तेजी से विभाजित होते समाज के सामने ऐसी पत्रकारिता प्रस्तुत करने की होगी, जो लोगों को जोड़े, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे और जीवन में खुशहाली लाने वाली सकारात्मक ऊर्जा पैदा करे। उन्होंने इस दिशा में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की।
उन्होंने स्वीकार किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी मेहनत, समझ और अनुशासन की जरूरत होगी। हालांकि, उन्हें भरोसा है कि लोगों का साथ मिलने से कोई भी मुश्किल काम असंभव नहीं है। अपनी पोस्ट के आखिर में उन्होंने सभी का आभार जताया और नए सफर के लिए लोगों से सहयोग की उम्मीद जताई।
नवभारत टाइम्स में आज यह मेरा आख़िरी साप्ताहिक कॉलम है । करीब १४ साल तक मैंने इस कॉलम को लिखा । हर शनिवार छपने वाले इस कॉलम को अख़बार के अलावा हमारे ऑनलाइन और सोशल मीडिया के पाठकों ने भी ख़ूब पढ़ा । आप सब का आभार! पाँच November तक नवभारत टाइम्स में काम करने के बाद मैं 6 नवंबर 6 टीवी भारत को ग्रुप एडिटर के तौर पर जॉइन करूँगा । हैदराबाद के इस चैनल के डिजिटल प्लेटफॉर्म को लखनऊ और दिल्ली से शुरू किया जा चुका है, टीम काम कर रही हैं, इसके लिंक नीचे पोस्ट में हैं । इसे ही आगे और विस्तार देने की योजना है । हिंदी में 6tv भारत नाम से और इंग्लिश में ऑनस्पॉट. । कोशिश रहेगी तेजी से विभाजित होते समाज के सामने कुछ ऐसी पत्रकारिता की जाये जो लोगों को जोड़े, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे और जिंदगी को खुशहाल बनाने की पॉजिटिव एनर्जी पैदा करे । मुझे मालूम है कि इस काम में बहुत मेहनत, समझ और अनुशासन की जरूरत होगी लेकिन आप लोगों का साथ है तो कुछ भी मुश्किल नहीं । आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया
— सुधीर मिश्र Sudhir Misra (@SudhirMisraNBT) October 31, 2026
व्हाइट ब्रिज ने अपनी ऑनलाइन मौजूदगी और कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी की तलाश शुरू की है। कंपनी SEO, सोशल मीडिया, कंटेंट और परफॉर्मेंस मार्केटिंग का अनुभव चाहती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
व्हाइट ब्रिज (White Bridge) ने अपनी ऑनलाइन मौजूदगी मजबूत करने और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी (Digital Marketing Agency) की तलाश शुरू की है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की है।
व्हाइट ब्रिज की सीईओ एश्ले (Ashley) ने एक पोस्ट में अनुभवी और भरोसेमंद डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी के साथ काम करने की इच्छा जताई है। उन्होंने एजेंसियों से अपना पोर्टफोलियो और संपर्क विवरण साझा करने को कहा है।
कंपनी ऐसी एजेंसी की तलाश कर रही है, जिसे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (Search Engine Optimization) और सर्च इंजन मार्केटिंग (Search Engine Marketing), सोशल मीडिया मैनेजमेंट, कंटेंट क्रिएशन एवं मार्केटिंग, पेड एडवरटाइजिंग कैंपेन, वेबसाइट ऑप्टिमाइजेशन, डिजिटल मार्केटिंग स्ट्रैटेजी और परफॉर्मेंस एनालिटिक्स का अनुभव हो।
एश्ले ने अपनी पोस्ट में कहा कि हेल्थकेयर इंडस्ट्री में काम करने वाली एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों और संबंधित सिफारिशें रखने वाले लोगों से संपर्क करने या डायरेक्ट मैसेज के जरिए अपना पोर्टफोलियो और संपर्क विवरण साझा करने की अपील की है।
गेमिंग कंपनी नजारा टेक्नोलॉजीज ने ब्लूटाइल गेम्स और बेस्टप्ले सिस्टम्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में 734.35 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त का भुगतान कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गेमिंग कंपनी नजारा टेक्नोलॉजीज ने ब्लूटाइल गेम्स और बेस्टप्ले सिस्टम्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में 734.35 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त का भुगतान कर दिया है। कंपनी ने यह रकम अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी नजारा टेक्नोलॉजीज यूके लिमिटेड के जरिए चुकाई है। इस भुगतान के बाद दोनों कंपनियां नजारा यूके की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां बनी हुई हैं और नजारा टेक्नोलॉजीज की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी के रूप में काम कर रही हैं।
नजारा टेक्नोलॉजीज ने 30 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि कंपनी ने 29 अक्टूबर 2026 को अपनी सहायक कंपनी नजारा यूके में 7.70 करोड़ डॉलर (करीब 734.35 करोड़ रुपये) का निवेश किया था। यह रकम नजारा यूके के इक्विटी शेयरों की सदस्यता के जरिए दी गई।
इसके बाद 30 अक्टूबर को नजारा यूके ने ब्लूटाइल गेम्स और बेस्टप्ले के विक्रेताओं को अधिग्रहण की दूसरी किस्त के तौर पर 7.70 करोड़ डॉलर (करीब 734.35 करोड़ रुपये) का नकद भुगतान किया।
करीब 2,990 करोड़ रुपये का है अधिग्रहण सौदा
कंपनी के मुताबिक, ब्लूटाइल गेम्स और बेस्टप्ले के अधिग्रहण के लिए कुल 30.302 करोड़ डॉलर (करीब 2,990 करोड़ रुपये) का भुगतान किया जाना है। इसमें से 7.70 करोड़ डॉलर की दूसरी किस्त का भुगतान कर दिया गया है। बाकी रकम का भुगतान संशोधित शेयर खरीद समझौते (Amended Share Purchase Agreement) में तय शर्तों और तरीके के अनुसार किया जाएगा।
नजारा ने कहा है कि बाकी भुगतान को लेकर आगे की जानकारी उचित समय पर शेयर बाजार को दी जाएगी।
पहले भी दी गई थी अधिग्रहण की जानकारी
नजारा टेक्नोलॉजीज ने इस सौदे से जुड़ी जानकारी इससे पहले 18 मार्च, 16 जून, 3 अगस्त और 6 अगस्त 2026 को भी शेयर बाजार को दी थी। ताजा जानकारी कंपनी ने सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की है।
इस सौदे के तहत ब्लूटाइल गेम्स और बेस्टप्ले का अधिग्रहण नजारा टेक्नोलॉजीज यूके के माध्यम से किया जा रहा है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ताजा भुगतान के बाद भी दोनों टारगेट कंपनियां नजारा यूके की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां बनी हुई हैं।
'रेडियो सिटी' की मूल कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड अब अपनी कमाई बढ़ाने के लिए रेडियो विज्ञापनों के साथ-साथ ब्रैंडेड कंटेंट, कॉन्सर्ट, इवेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल गतिविधियों पर भी जोर दे रही है।
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'रेडियो सिटी' की मूल कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड अब अपनी कमाई बढ़ाने के लिए रेडियो विज्ञापनों के साथ-साथ ब्रैंडेड कंटेंट, कॉन्सर्ट, इवेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल गतिविधियों पर भी जोर दे रही है। कंपनी खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने का फैसला उनकी लागत और उनसे होने वाली कमाई को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।
म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के सीईओ एब्राहम थॉमस ने 27 अक्टूबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों पर आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी की रणनीति और प्रदर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही में कंपनी को पिछले कुछ समय से लागू की गई रणनीतिक और परिचालन पहलों का फायदा मिला है। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले कंपनी की कमाई में नरमी रही, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण और कामकाज की बेहतर क्षमता के चलते मुनाफे में सुधार हुआ है।
थॉमस के मुताबिक, कंपनी का मुख्य लक्ष्य ऐसा कारोबारी मॉडल तैयार करना है, जो बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत बना रहे। इसके लिए कंपनी अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाने, विज्ञापनदाताओं के साथ रिश्ते मजबूत करने और मुनाफे को टिकाऊ बनाने पर काम कर रही है।
रेडियो और दूसरे प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाने पर फोकस
एब्राहम थॉमस ने बताया कि कंपनी की रणनीति चार प्रमुख बातों पर आधारित है। इनमें रेडियो और रेडियो प्लस प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाना, विज्ञापनदाताओं को एकीकृत मीडिया सेवाएं देना, टिकाऊ और मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करना और कामकाज के साथ लागत को अधिक प्रभावी बनाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि रेडियो सिटी ब्रैंडेड कंटेंट, इवेंट, स्पॉन्सरशिप, डिजिटल समाधान और विज्ञापनदाताओं के लिए एकीकृत पेशकशों के जरिए कमाई के नए रास्ते तलाश रही है। कंपनी की कोशिश प्रमुख विज्ञापनदाताओं के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने, उनसे मिलने वाले कारोबार का हिस्सा बढ़ाने और अपने सभी प्लेटफॉर्म का बेहतर इस्तेमाल करने की है।
दूसरी तिमाही में 8% बढ़ी कमाई
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में म्यूजिक ब्रॉडकास्ट का राजस्व 41 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 37.8 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के राजस्व में सालाना आधार पर करीब 8% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, पहली तिमाही के 44.5 करोड़ रुपये के मुकाबले दूसरी तिमाही में राजस्व कम रहा।
कंपनी ने इस दौरान खर्चों में अच्छी कटौती की। दूसरी तिमाही में कुल खर्च 34.8 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 43.3 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी के कुल खर्च में सालाना आधार पर करीब 20% की कमी आई।
खर्चों में कमी का असर कंपनी के मुनाफे पर भी दिखाई दिया। दूसरी तिमाही में परिचालन स्तर पर टैक्स से पहले मुनाफा 1.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को इस मद में 13.3 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वहीं, रिपोर्टेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स यानी कर से पहले दर्ज मुनाफा 8.9 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 6.4 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
पहली छमाही में खर्च 23% घटे
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी का राजस्व 85.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 87.2 करोड़ रुपये था। इस तरह राजस्व में सालाना आधार पर करीब 2% की गिरावट आई।
हालांकि, इस दौरान कंपनी ने खर्चों को काफी कम किया। पहली छमाही में कुल खर्च 70.4 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 91.7 करोड़ रुपये था। यानी खर्चों में करीब 23% की कमी आई।
पहली छमाही में परिचालन स्तर पर टैक्स से पहले मुनाफा 5.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 20.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वहीं, रिपोर्टेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स 21.2 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल पहली छमाही में यह 6.3 करोड़ रुपये के घाटे में था।
थॉमस ने कहा कि पहली छमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनी की लागत कम करने की पहल और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने से उसे फायदा मिला है। अब कंपनी की कोशिश इस मजबूत परिचालन स्थिति के आधार पर आगे राजस्व बढ़ाने की है।
कुल कमाई में 18-20% हिस्सा गैर-विज्ञापन कारोबार का
कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान कंपनी से पूछा गया कि उसकी कुल कमाई में पारंपरिक रेडियो विज्ञापनों और दूसरे स्रोतों का कितना योगदान है। इस पर सीएफओ राजीव शाह ने बताया कि कंपनी के राजस्व में एफसीटी और एनएफसीटी का अनुपात फिलहाल 80:20 है।
यहां एफसीटी यानी फ्री कमर्शियल टाइम से मतलब रेडियो पर विज्ञापनों के लिए बेचे जाने वाले पारंपरिक समय से है। वहीं, एनएफसीटी में ब्रैंडेड कंटेंट, इवेंट, स्पॉन्सरशिप और अन्य गैर-पारंपरिक विज्ञापन गतिविधियों से होने वाली कमाई शामिल होती है।
एब्राहम थॉमस ने बताया कि कंपनी की कुल कमाई में फिलहाल गैर-एफसीटी कारोबार का योगदान करीब 18-20% है। कंपनी इस हिस्से को और बढ़ाना चाहती है। इसके लिए वह नए कार्यक्रमों और अनुभव आधारित गतिविधियों पर काम कर रही है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में कॉन्सर्ट और इवेंट की तैयारी
कॉन्फ्रेंस कॉल में एब्राहम थॉमस से पूछा गया कि क्या कंपनी दूसरी छमाही में गैर-एफसीटी कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़े कॉन्सर्ट और इवेंट आयोजित करने की योजना बना रही है।
इस पर उन्होंने कहा कि कंपनी टियर-2 और टियर-3 बाजारों में कई तरह की अनुभव आधारित गतिविधियां आयोजित करने की प्रक्रिया में है। इन बाजारों में कंपनी को अच्छी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं और यहां उसकी मजबूत मौजूदगी भी है। इसी ताकत का इस्तेमाल करते हुए कंपनी कॉन्सर्ट और दूसरे कार्यक्रमों की संभावनाएं तलाश रही है।
हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित संख्या या राजस्व वृद्धि का अनुमान नहीं दिया। उनका कहना था कि कंपनी ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाना चाहती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उनसे कितना राजस्व हासिल हो सकता है और उनकी लागत कितनी आती है। कंपनी का जोर केवल कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय मुनाफे को ध्यान में रखकर काम करने पर है।
खर्चों में कटौती का फायदा आगे भी मिलने की उम्मीद
कंपनी से यह भी पूछा गया कि करीब एक साल पहले शुरू की गई खर्चों में कटौती की पहल आगे जारी रहेगी या नहीं। इस पर राजीव शाह ने बताया कि पिछले तीन तिमाहियों से कंपनी का तिमाही खर्च लगभग 39-40 करोड़ रुपये के आसपास रहा है और आगे भी इसे इसी स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद है।
पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में कुल खर्च में करीब 1 करोड़ रुपये की बचत हुई। हालांकि, कर्मचारी खर्च में करीब 60 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई, लेकिन दूसरे खर्चों में लगभग 1.6 करोड़ रुपये की बचत की गई। इस तरह कुल मिलाकर कंपनी को करीब 1 करोड़ रुपये की बचत हुई।
कंपनी के पास 283 करोड़ रुपये की नकदी
कॉल के दौरान कंपनी से उसकी नकदी की स्थिति और शेयर बायबैक की संभावनाओं के बारे में भी पूछा गया। इस पर राजीव शाह ने बताया कि कंपनी के पास करीब 283 करोड़ रुपये की नकदी है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कंपनी शेयर बायबैक की योजना बना रही है, तो उन्होंने साफ किया कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। वहीं, डिबेंचर से जुड़े ब्याज खर्च में कमी आने के बाद शेयरधारकों को डिविडेंड देने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कंपनी अभी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकती।
दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, लेकिन कोई गाइडेंस नहीं
आने वाली दो तिमाहियों और पूरे वित्त वर्ष के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर एब्राहम थॉमस ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ अगले दो क्वार्टर में बाजार की गति बनी रहेगी। कंपनी भी उम्मीद कर रही है कि इस साल का त्योहारी सीजन पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहेगा।
हालांकि, कंपनी ने दूसरी छमाही के राजस्व या मुनाफे को लेकर कोई निश्चित अनुमान नहीं दिया। राजीव शाह ने कहा कि बाजार की मौजूदा स्थिति और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं को देखते हुए कंपनी अगले दो साल के लिए कोई गाइडेंस देने की स्थिति में नहीं है।
उन्होंने कहा कि कंपनी बाजार की गतिविधियों पर नजर रखेगी। अगर बाजार में सुधार आता है तो कंपनी उसका फायदा उठाने के लिए तैयार है। फिलहाल राजस्व का प्रदर्शन बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। वहीं, कंपनी को उम्मीद है कि लागत पर नियंत्रण के चलते मौजूदा मुनाफे की स्थिति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मुनाफे को टिकाऊ बनाना कंपनी का लक्ष्य
कॉन्फ्रेंस कॉल के समापन पर एब्राहम थॉमस ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले मुनाफे में अच्छा सुधार दर्ज किया है। इसका मुख्य कारण खर्चों पर अनुशासन और कामकाज के अधिक प्रभावी ढांचे का फायदा है।
उन्होंने माना कि पिछली तिमाही के मुकाबले राजस्व में नरमी रही, लेकिन कंपनी ने सकारात्मक ईबीआईटीडीए और पीएटी दर्ज किया और वित्त वर्ष की पहली छमाही में अपने प्रदर्शन को मजबूत किया।
थॉमस ने कहा कि आगे भी कंपनी का ध्यान अपने प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाने, विज्ञापनदाताओं के साथ संबंध मजबूत करने, आय के नए स्रोत विकसित करने और टिकाऊ व मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करने पर रहेगा।
डिश टीवी इंडिया लिमिटेड (Dish TV India Limited) के चीफ कस्टमर एक्सपीरियंस ऑफिसर (CCEO) स्वामी मेहरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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डिश टीवी इंडिया लिमिटेड (Dish TV India Limited) के चीफ कस्टमर एक्सपीरियंस ऑफिसर (CCEO) स्वामी मेहरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 30 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि उनका इस्तीफा 30 अक्टूबर को कारोबारी समय समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही वह कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट का हिस्सा भी नहीं रहेंगे।
कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी है।
Dish TV की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, स्वामी मेहरा ने कंपनी से बाहर नए अवसरों को तलाशने के लिए इस्तीफा दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि उनके इस्तीफे के पीछे इसके अलावा कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।
स्वामी मेहरा ने अपने इस्तीफे में कंपनी के प्रबंधन और सहकर्मियों का सहयोग, मार्गदर्शन और भरोसा जताने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले अनुभवों और अवसरों के लिए भी कंपनी का धन्यवाद किया और भविष्य के लिए कंपनी और उसकी टीम को शुभकामनाएं दीं।