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टीवी चैनल्स को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कवरेज में सतर्कता बरतनी चाहिए: राहुल महाजन
राहुल महाजन ने सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया के बीच फर्क करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे) के अवसर पर एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप की ओर से एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय मीडिया जगत की जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिम्मेदार पत्रकारिता का उत्सव मनाना और मीडिया की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
वेबिनार में शामिल प्रमुख वक्ताओं में आलोक मेहता (वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित), प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश (वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ और निदेशक, इंडिया हैबिटैट सेंटर), राहुल महाजन (वरिष्ठ पत्रकार) और मुकेश शर्मा (डायरेक्टर, जर्नलिज्म- कलेक्टिव न्यूजरूम) शामिल रहे।
वरिष्ठ पत्रकार राहुल महाजन ने एक्सचेंज4मीडिया के वेबिनार में सरकार की हालिया एडवाइजरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टीवी चैनल्स को राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों की रिपोर्टिंग में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस तरह की एडवाइजरी पहले भी जारी की जाती रही हैं और मुख्यधारा मीडिया ने आमतौर पर इनका पालन किया है।
उन्होंने कहा, “2611 के बाद से मीडिया ने अपनी रिपोर्टिंग में कई अहम सबक सीखे हैं। अब खबरों की कवरेज में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऐसी कोई जानकारी प्रसारित न हो जिससे देश की सुरक्षा या सुरक्षा बलों को नुकसान हो।”
राहुल महाजन ने सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया के बीच फर्क करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, “हमें यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और मुख्यधारा मीडिया की रिपोर्टिंग में अंतर है। दर्शकों को भी यह विवेकपूर्वक तय करना चाहिए कि वे अपनी जानकारी किन स्रोतों से ले रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसका एक कारण यह है कि कई बार कॉर्पोरेट स्वामित्व वाले मीडिया संस्थानों में पत्रकारों पर खबरों को दिखाने या न दिखाने को लेकर दबाव डाला जाता है। “मीडिया हाउसों को इस बात पर आत्ममंथन करना होगा कि क्या वे स्वतंत्र पत्रकारिता कर पा रहे हैं या उनके व्यावसायिक हितों के कारण संपादकीय स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है,” उन्होंने कहा।
प्रेस की स्वतंत्रता के सवाल पर राहुल महाजन ने माना कि सरकारों या सत्ताधारी दलों की ओर से मीडिया पर खबरों को प्रभावित करने का दबाव आता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दबाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और कॉर्पोरेट स्तर पर भी होता है।
उन्होंने अंत में कहा कि मीडिया में एक नए मॉडल की जरूरत है जो स्वतंत्रता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा, “शायद हमें पब्लिक फंडेड मीडिया जैसे मॉडल पर भी विचार करना चाहिए, जिससे मीडिया को किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के बिना निष्पक्ष रूप से काम करने की आजादी मिल सके।”
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