पत्रकारिता और सियासत का रिश्ता बहुत पुराना है। वर्ष 2021 में भी कई पत्रकारों ने खबरों की दुनिया से निकलकर राजनीति का हाथ थाम लिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
पत्रकारिता और सियासत का रिश्ता बहुत पुराना है। वर्ष 2021 में भी कई पत्रकारों ने खबरों की दुनिया से निकलकर राजनीति का हाथ थाम लिया। हालांकि इनमें से कुछ ने पार्टी की सदस्यता हासिल की और कुछ पार्टी की मीडिया टीम का हिस्सा बनकर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
रोहित सक्सेना :
इस फेहरिस्त की शुरुआत ‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ के ग्रुप सीईओ व मैनेजिंग एडिटर रहे रोहित सक्सेना से करते हैं, जो अब सक्रिय राजनीति की दुनिया में अपने कदम रख चुके हैं। दरअसल, इस साल जून में उन्होंने उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी (आप) की सदस्यता ग्रहण की थी। हालांकि अक्टूबर में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
वैसे दो दशक से ज्यादा समय तक प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दे चुके रोहित सक्सेना की खेलों में भी रुचि रही है। वे ताइक्वांडो के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं और कई बार अपने वेट के यूपी चैंपियन रहने के साथ कोरिया से 2nd DAN ब्लैक बेल्ट हैं। देश के कई खेल संगठनों (ताइक्वांडो, बॉक्सिंग और बॉड़ी बिल्डिंग) के चेयरमैन और अध्यक्ष होने के साथ 21 वर्षो में मीडिया के शुरुआती पद से ग्रुप सीईओ तक का मुकाम हासिल किया है। रोहित भारत सरकार की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल के वारिष्ठ सलाहकार भी हैं।
खेलों और समाज के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए उन्हें कुछ महीने पहले एशिया पैसिफिक चैंबर ऑफ कॉमर्स व टोंगा की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी की ओर से ‘एशिया पैसिफिक एक्सिलेंस अवॉर्ड’ के लिए चुना जा चुका है। यह सम्मान उन्हें ‘मोस्ट प्रॉमिसिंग पर्सनॉलिटी ऑफ द ईयर’ कैटेगरी के तहत मिला।
आनंद दुबे :
जुलाई में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 15 प्रदेश प्रवक्ता की घोषणा की, जिसमें मऊ जनपद के निवासी व जी न्यूज के पूर्व पत्रकार आनंद दुबे का नाम भी शामिल था। आनंद दुबे ‘जी न्यूज’ में पांच वर्षों तक रहे। उन्होंने जुलाई, 2014 में जी न्यूज जॉइन किया था। वे यहां सीनियर प्रड्यूसर थे। इसके पहले वे पी7 न्यूज चैनल में दो साल तक रहे। इसके अतिरिक्त आनंद दुबे ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वे ‘इंडिया टीवी’, ‘सहारा समय’, ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘अमर उजाला’ में काम कर चुके हैं।
इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘हिन्दुस्तान’ फ्रीलांसर के तौर पर योगादन दिया है।
जवाहर सरकार :
पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस साल जुलाई में राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया, जिसके बाद उन्हें राज्यसभा के लिए उपचुनाव में निर्विरोध चुन लिया गया। जवाहर सरकार तृणमूल कांग्रेस सदस्य दिनेश त्रिवेदी द्वारा सदन की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुयी सीट के लिए चुने गए थे। त्रिवेदी बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।
लगभग 70 वर्ष के जवाहर सरकार कोलकाता के रहने वाले हैं। जवाहर सरकार ने राजनीति शास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक, समाज शास्त्र में एक एम.ए और इतिहास में और एक एम.ए किया है। वह यूनाइटेड किंगडम के कैंब्रिज तथा ससेक्स विश्वविद्यालयों से प्रशिक्षित होने के अलावा न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।
डॉ. पंकज श्रीवास्तव :
सितंबर में कांग्रेस पार्टी ने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पंकज श्रीवास्तव को मीडिया एवं कम्युनिकेशन विभाग का वाइस चेयरमैन नियुक्त किया। बता दें कि डॉ. श्रीवास्तव को इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया में काम करने का दो दशकों से ज्यादा का अनुभव रहा है।
उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत ‘अमर उजाला’ अखबार से की थी। इसके बाद वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आ गए और लखनऊ में ‘स्टार न्यूज’ (अब एबीपी न्यूज) से अपनी पारी को आगे बढ़ाया। लखनऊ के बाद उन्होंने नई दिल्ली में ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज18 इंडिया), ‘सहारा समय’, ‘सूर्या समाचार’ व ‘स्वराज न्यूज’ चैनल में अपना योगदान दिया।
अवनीश त्यागी :
सितंबर में वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी ने भारतीय जनता पार्टी को जॉइन कर लिया और उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने उन्हें बीजेपी का प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया। बता दें कि अवनीश त्यागी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह काफी समय तक राजधानी लखनऊ में हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ के राज्य ब्यूरो में कार्यरत रहे हैं और कुछ महीने पहले ही वहां से सेवानिवृत्त हुए हैं।
प्रदीप यादव :
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप यादव ने इस साल अक्टूबर में पत्रकारिता को अलविदा कह दिया और इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपने कुछ साथियों के साथ ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) की सदस्यता ग्रहण कर ली। मूल रूप से इटावा के रहने वाले प्रदीप यादव को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। इस दौरान वह तमाम बड़े मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह पिछले करीब पांच साल से टाइम्स समूह में कार्यरत थे।
प्रदीप यादव ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत कानपुर से दैनिक जागरण समूह के साथ की थी। उसके बाद वह लखनऊ में हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़ गए और यहां करीब पांच वर्ष तक कार्य किया। इसके बाद वह दिल्ली चले गए, जहां ‘जी बिजनेस’ में चार वर्षों तक काम किया। पिछले करीब 5 सालों से वह टाइम्स समूह में कार्यरत थे। इस दौरान वह 'इकनॉमिक टाइम्स' के ऑनलाइन संस्करण में रहे और अंत में 'नवभारत टाइम्स' के डिजिटल संस्करण के लिए काम कर रहे थे।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रदीप यादव ने राजनीति विज्ञान और पत्रकारिता विषय में एमए किया है। इसके अलावा उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं सृजनात्मक लेखन में डिप्लोमा किया है।
रवि कर्नानी को बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोट किया गया है। वह दो दशक से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हैं और जनरल मैनेजर थे।
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Samachar4media Bureau
रवि कर्नानी (Ravi Karnani) को बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (Bennett Coleman & Co. Ltd.-BCCL), द टाइम्स ऑफ इंडिया (The Times of India) में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोट किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में कर्नानी ने कहा कि वह बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर खुश हैं।
कर्नानी पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कंपनी के कारोबार और संचालन से जुड़े क्षेत्रों में लंबा अनुभव हासिल किया है। बीसीसीएल के साथ उनका लंबे समय का जुड़ाव संगठन में उनके योगदान को दर्शाता है।
प्रमोशन से पहले कर्नानी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर उनकी नियुक्ति बीसीसीएल और द टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ उनके पेशेवर सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
नेहा मल्होत्रा को जी लाइव के लाइव बिजनेस में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया है। वह मार्केटिंग फंक्शन का नेतृत्व करेंगी और कंपनी के विस्तार व ऑडियंस एंगेजमेंट पर फोकस करेंगी।
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Samachar4media Bureau
नेहा मल्होत्रा (Neha Malhotra) को जी लाइव (Zee Live) के लाइव बिजनेस में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया है। अपनी नई भूमिका में वह मार्केटिंग फंक्शन का नेतृत्व करेंगी और कंपनी के विस्तार को आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगी।
नेहा को मीडिया, एंटरटेनमेंट और डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने बड़े स्तर की मार्केटिंग पहलों का नेतृत्व किया है। वह कंज्यूमर-केंद्रित ब्रांड तैयार करने, बिजनेस ग्रोथ बढ़ाने और ऑडियंस एंगेजमेंट वाले कैंपेन विकसित करने से जुड़े काम कर चुकी हैं।
हाल ही में नेहा जी म्यूजिक (Zee Music) में म्यूजिक मार्केटिंग फंक्शन का नेतृत्व कर रही थीं। यहां उन्होंने मार्केटिंग टीम को तैयार करने और उसका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही, अलग-अलग तरह के म्यूजिक कंटेंट के लिए मार्केटिंग कैंपेन चलाए और प्रतिस्पर्धी बाजार में लेबल की मौजूदगी मजबूत करने में योगदान दिया।
इससे पहले वह वननेटिव स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड (OneNative Studio Pvt Ltd) में पार्टनर और बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थीं। यहां उनकी जिम्मेदारियों में स्ट्रैटेजिक मार्केटिंग मैनेजमेंट, बिजनेस स्ट्रैटेजी और डिजिटल मार्केटिंग सॉल्यूशंस शामिल थे।
सरेगामा इंडिया लिमिटेड (Saregama India Ltd.) में नेहा ने पैन-इंडिया म्यूजिक मार्केटिंग और ऑडियो मोनेटाइजेशन का नेतृत्व किया। उन्होंने कई भाषाओं में म्यूजिक कंटेंट के लिए मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, ऑडियंस ग्रोथ और रेवेन्यू बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली।
जी लाइव में अपनी नई भूमिका में नेहा ब्रांड बिल्डिंग, कंज्यूमर मार्केटिंग, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, कंटेंट-आधारित मार्केटिंग और बिजनेस ग्रोथ के अपने अनुभव का इस्तेमाल करेंगी। उनका फोकस कंपनी के विस्तार के अगले चरण को आगे बढ़ाने और ऑडियंस के साथ गहरा जुड़ाव बनाने पर रहेगा।
नेहा वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की पूर्व छात्रा हैं। उनके पास बिजनेस समझ के साथ डेटा आधारित मार्केटिंग का अनुभव है। कंज्यूमर बिहेवियर की उनकी समझ और मीडिया-एंटरटेनमेंट में रुचि उन्हें ऐसी मार्केटिंग रणनीतियां तैयार करने में मदद करती है, जो बिजनेस ग्रोथ के साथ ऑडियंस से लंबे समय तक जुड़ाव बनाने पर फोकस करती हैं।
वह ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) में सीनियर कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर जुड़े हुए थे और यहां प्राइम टाइम शो ‘चक्रView’ होस्ट कर रहे थे।
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वरिष्ठ पत्रकार और टीवी न्यूज की दुनिया के जाने-माने एंकर सुमित अवस्थी से जुड़ी एक खबर सामने आई है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली इस खबक के अनुसार सुमित अवस्थी ने ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) से इस्तीफा दे दिया है। वह इस समूह के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) में सीनियर कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर जुड़े हुए थे और यहां प्राइम टाइम शो ‘चक्रView’ होस्ट कर रहे थे। इस शो के जरिए उन्होंने खबरों को नए नजरिए से पेश करने और दिन के प्रमुख घटनाक्रमों की गहराई से पड़ताल करने पर खास ध्यान दिया।
सुमित अवस्थी ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है। बता दें कि सुमित अवस्थी ने दिसंबर 2025 में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के साथ अपनी नई पारी शुरू की थी। इससे पहले वह करीब ढाई साल तक ‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जुड़े हुए थे। वहां उन्होंने ‘हम भारत के लोग’ और ‘खबरों की खबर’ जैसे कार्यक्रमों को होस्ट किया था।
एनडीटीवी में जुलाई 2023 में अपनी पारी शुरू करने से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ में वाइस प्रेजिडेंट (न्यूज व प्रॉडक्शन) के तौर पर कार्यरत थे। सुमित अवस्थी ने वर्ष 2018 में ‘एबीपी न्यूज’ में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) में डिप्टी मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह ‘जी न्यूज’ (Zee News) में रेजिडेंट एडिटर भी रह चुके हैं।
सुमित अवस्थी करीब पांच साल तक ‘आजतक’ (AajTak) में भी रह चुके हैं। यहां वह डिप्टी एडिटर के तौर पर कार्यरत थे। सुमित राजनीति में अच्छी पकड़ और बेहतर रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अब तक ‘दादा साहेब फाल्के एक्सीलेंस अवॉर्ड‘ और ‘माधव ज्योति अवॉर्ड‘ समेत प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) से भी नवाजा जा चुका है।
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ है। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय, इंदौर से स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद इंदौर के होलकर साइंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। फिर दिल्ली स्थित ‘भारतीय विद्या भवन’ से पत्रकारिता की पढ़ाई की।
कॉनफ्लुएंस आर्किटेक्ट्स ने तनुश्री सहदेव को हेड ऑफ कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। वह कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, ब्रांड पोजिशनिंग और स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट से जुड़े कार्य संभालेंगी।
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कॉनफ्लुएंस आर्किटेक्ट्स (Confluence Architects) ने तनुश्री सहदेव (Tanushree Sahdev) को हेड ऑफ कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Head of Corporate Communications) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, ब्रांड पोजिशनिंग, कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी और स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी।
तनुश्री सहदेव को पब्लिक रिलेशंस (Public Relations), ब्रांड स्ट्रैटेजी, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और रेप्युटेशन मैनेजमेंट के क्षेत्र में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनकी नियुक्ति से कंपनी की कम्युनिकेशन पहलों को मजबूती मिलने और हितधारकों के साथ जुड़ाव बेहतर होने की उम्मीद है।
कॉनफ्लुएंस आर्किटेक्ट्स से जुड़ने से पहले तनुश्री सहदेव टेनॉन ग्रुप (Tenon Group) में डिप्टी जनरल मैनेजर- कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले उन्होंने सिनर्जी एडवांस्ड मेटल्स लिमिटेड (Synergy Advanced Metals Ltd.) में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर के रूप में भी काम किया है।
कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के अलावा तनुश्री का अनुभव कई अन्य क्षेत्रों में भी रहा है। उन्होंने भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के साथ कंसल्टेंट के रूप में काम किया है। इसके अलावा वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) में गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी सेवाएं दे चुकी हैं।
देश में मीडिया के बदलते स्वरूप और उससे जुड़े नियमन को लेकर संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना एजेंडा तय कर दिया है।
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Vikas Saxena
देश में मीडिया के बदलते स्वरूप और उससे जुड़े नियमन को लेकर संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Communications and Information Technology) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना एजेंडा तय कर दिया है। समिति इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कामकाज से जुड़े 12 अहम विषयों की जांच और समीक्षा करेगी। इस सूची में प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के कानूनों से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, टीवी रेटिंग (TRP), पे-टीवी के घटते ग्राहक और प्रसार भारती तक शामिल हैं।
खास बात यह है कि समिति ने पहली बार मीडिया से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ समीक्षा के दायरे में रखा है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में मीडिया के नियमन, सरकारी प्रसारण व्यवस्था, डिजिटल कंटेंट और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कई मुद्दों पर संसदीय स्तर पर चर्चा हो सकती है।
समिति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े निम्नलिखित 12 विषयों को जांच और समीक्षा के लिए चुना है।
ये हैं समिति के एजेंडे में शामिल 12 विषय
समिति सभी तरह के मीडिया पर लागू कानूनों और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। इसमें प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया से जुड़े नियम शामिल हैं। इसका मकसद यह देखना है कि अलग-अलग मीडिया माध्यमों के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था किस तरह काम कर रही है और बदलते मीडिया परिदृश्य में इसमें किस तरह के बदलाव की जरूरत हो सकती है।
प्रसार भारती के कामकाज को भी समिति ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। इसके तहत आकाशवाणी और दूरदर्शन के कामकाज, उनकी भूमिका और संगठन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकारी प्रसारण सेवाओं की पहुंच और बदलते मीडिया बाजार में उनकी प्रासंगिकता भी इस विषय के तहत महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) का भी व्यापक आकलन किया जाएगा। इसमें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति, उससे जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है। यह क्षेत्र डिजिटल वितरण, ओटीटी और बदलते दर्शक व्यवहार के कारण तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव और उनसे जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी समिति करेगी। इसमें ओटीटी सेवाओं का विस्तार, डिजिटल कंटेंट और उनके नियमन से जुड़े सवाल अहम रहेंगे। मौजूदा समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म मनोरंजन के बड़े माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में इनके लिए लागू नियमों और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है।
केंद्रीय संचार ब्यूरो (Central Bureau of Communication-CBC) के कामकाज की भी समीक्षा होगी। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है और सरकारी विज्ञापनों के प्रचार-प्रसार तथा संचार गतिविधियों से जुड़ा है। समिति इसके कामकाज और जिम्मेदारियों की समीक्षा करेगी। मीडिया संस्थानों के लिए सरकारी विज्ञापन से जुड़ी व्यवस्था के लिहाज से भी यह विषय अहम है।
समिति सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के भाग-3 (Part III) को लागू करने की स्थिति की समीक्षा करेगी।
यह हिस्सा डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़े नियमों और आचार संहिता से संबंधित है। इसके तहत डिजिटल मीडिया के लिए शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी आती है। इस समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि इन नियमों को किस तरह लागू किया जा रहा है और मौजूदा व्यवस्था में किन मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।
यह समिति के एजेंडे का एक अहम तकनीकी विषय है। इसमें भारत में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) से जुड़े पूरे इकोसिस्टम की समीक्षा की जाएगी।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए जाने वाले ऑडियो और वीडियो कंटेंट को भी इसमें शामिल किया गया है। यानी एआई से बनने वाले वीडियो, आवाज और दूसरे ऑडियो-विजुअल कंटेंट का क्षेत्र भी संसदीय समीक्षा के दायरे में रहेगा।
यह विषय ऐसे समय में अहम है, जब मीडिया और मनोरंजन इंडस्ट्री में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कंटेंट बनाने के तरीके बदल रहे हैं।
देश में कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों (Community Radio Stations) की स्थिति की भी समीक्षा होगी। समिति इनके विस्तार, उपलब्ध अवसरों और सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार करेगी।
कम्युनिटी रेडियो स्थानीय समुदायों की आवाज को मंच देने का काम करते हैं। ऐसे में इनके विकास, पहुंच और कामकाज से जुड़े मुद्दे इस समीक्षा का हिस्सा होंगे।
डिजिटल और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों पर भी समिति विचार करेगी। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव, सोशल मीडिया की भूमिका और उनसे जुड़ी चुनौतियों को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही आगे की राह (Way Forward) पर भी चर्चा होगी। यानी डिजिटल और सोशल मीडिया के क्षेत्र में आने वाले समय में किस तरह की व्यवस्था और नीतिगत दिशा की जरूरत है, इस पर समिति विचार कर सकती है।
टेलीविजन चैनलों की टीआरपी रेटिंग (TRP Ratings) का तंत्र भी समिति के एजेंडे में है। इसके तहत मीडिया चैनलों की रेटिंग तय करने के मौजूदा तरीके और उससे जुड़ी व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा।
टीआरपी टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विज्ञापन बाजार में चैनलों की स्थिति और विज्ञापनदाताओं के फैसलों में इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में रेटिंग की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दे इस समीक्षा में अहम हो सकते हैं।
पे-टीवी (Pay-TV) के ग्राहकों से जुड़े नियामकीय मुद्दों को भी समिति ने अपने एजेंडे में जगह दी है। इसमें भुगतान करके टीवी चैनल देखने वाले ग्राहकों के आधार से जुड़े नियमों और चुनौतियों की समीक्षा की जाएगी।
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पारंपरिक पे-टीवी सेवाओं के सामने ओटीटी और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। दर्शकों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने से पे-टीवी कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
सूची का आखिरी विषय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के कामकाज की समीक्षा से जुड़ा है। इसके तहत मंत्रालय के इन उपक्रमों की कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका का अध्ययन किया जाएगा।
इस विषय के जरिए समिति मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और संगठनों के कामकाज से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगी।
पहले भी उठ चुका है एक साझा मीडिया कानून का मुद्दा
मीडिया के सभी माध्यमों को एक व्यापक कानूनी व्यवस्था के तहत लाने का मुद्दा पहले भी संसदीय समिति के सामने आ चुका है। समिति ने मार्च 2025 में अपनी 11वीं रिपोर्ट में सरकार को एक व्यापक मीडिया विधेयक (Media Bill) लाने की संभावना तलाशने की सिफारिश की थी।
इसके साथ ही प्रिंट, प्रसारण और डिजिटल मीडिया को एक ही दायरे में लाने के लिए मीडिया काउंसिल बनाने का सुझाव भी दिया गया था। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी एक साझा कानून की जरूरत का समर्थन किया है।
वहीं, अगस्त 2026 में पेश समिति की 28वीं रिपोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बीच डिजिटल मीडिया के नियमन से जुड़ी जिम्मेदारियों के बंटवारे का मुद्दा उठाया गया था।
अब इन 12 विषयों पर रहेगी नजर
2026-27 के लिए तय किए गए इन 12 विषयों से साफ है कि संसदीय समिति केवल मीडिया कानूनों तक सीमित नहीं रहेगी। उसका एजेंडा सरकारी प्रसारण, फिल्म इंडस्ट्री, ओटीटी, सोशल मीडिया, एआई से तैयार कंटेंट, टीवी रेटिंग, पे-टीवी और सरकारी विज्ञापन व्यवस्था तक फैला हुआ है।
हालांकि, इन विषयों को समीक्षा के लिए चुने जाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार ने इनके लिए नए कानून या नियम लागू करने का फैसला कर लिया है। फिलहाल समिति इन विषयों की जांच और समीक्षा करेगी। इसके बाद उसकी सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय हो सकता है।
देश में डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाएं देने वाली कंपनियों ने साल 2025 के दौरान सरकार को लाइसेंस फीस के रूप में 618.20 करोड़ रुपये जमा किए।
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Vikas Saxena
देश में डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाएं देने वाली कंपनियों ने साल 2025 के दौरान सरकार को लाइसेंस फीस के रूप में 618.20 करोड़ रुपये जमा किए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए जनवरी 2026 में सरकार को 141.44 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस मिली।
ये आंकड़े देश के प्रसारण कारोबार में DTH कंपनियों की नियामकीय जिम्मेदारियों और सरकार को मिलने वाले राजस्व को दिखाते हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट में DTH सेवाओं के लाइसेंस, फीस की दर और प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों से जुड़े नियमों की भी जानकारी दी गई है।
देश में चार निजी DTH ऑपरेटर कर रहे हैं काम
DTH यानी डायरेक्ट-टू-होम एक सैटेलाइट आधारित टीवी प्रसारण सेवा है। इसमें टीवी चैनलों के डिजिटल सिग्नल सैटेलाइट के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाए जाते हैं। घरों में लगी डिश एंटीना के जरिए इन सिग्नल को रिसीव किया जाता है।
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पहली DTH सेवा वर्ष 2003 में शुरू हुई थी। फिलहाल भारत में चार निजी DTH ऑपरेटर काम कर रहे हैं। इनके अलावा दूरदर्शन की ओर से मुफ्त DTH सेवा भी उपलब्ध कराई जाती है।
DTH सेवाओं के संचालन के लिए कंपनियों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति और लाइसेंस लेना होता है। मंत्रालय इन कंपनियों के संचालन से जुड़े नियमों और लाइसेंस फीस की व्यवस्था को देखता है।
कंपनियों को AGR का 8% देना होता है लाइसेंस फीस
मंत्रालय ने 16 सितंबर 2022 को भारत में DTH प्रसारण सेवाओं के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों में लाइसेंस फीस, प्लेटफॉर्म सर्विस चैनल और बुनियादी ढांचे को साझा करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन नियमों के तहत DTH ऑपरेटरों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR का 8% लाइसेंस फीस के रूप में सरकार को देना होता है। यह फीस हर तिमाही जमा कराई जाती है।
AGR का मतलब एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू है। आसान भाषा में कहें तो यह कंपनी की कुल कमाई में से नियमों के तहत तय कटौतियों और समायोजनों के बाद निकाली गई वह रकम है, जिसके आधार पर लाइसेंस फीस तय होती है। इसलिए कंपनियों को अपनी पूरी कमाई का 8% नहीं, बल्कि निर्धारित AGR का 8% देना होता है।
2025 में ₹618.20 करोड़ जमा किए
मंत्रालय की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान DTH ऑपरेटरों ने लाइसेंस फीस के रूप में कुल 618.20 करोड़ रुपये जमा किए।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही की लाइसेंस फीस के तौर पर जनवरी 2026 में सरकार को 141.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह तीसरी तिमाही का भुगतान है, जबकि 618.20 करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 से जुड़ा है।
इसलिए इन दोनों आंकड़ों को एक ही अवधि की कमाई या भुगतान मानकर जोड़ना सही नहीं होगा। दोनों अलग-अलग समयावधियों से संबंधित हैं।
प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों के लिए भी तय हैं नियम
DTH ऑपरेटरों को प्लेटफॉर्म सर्विस (PS) चैनल चलाने की भी अनुमति है। ये ऐसे चैनल होते हैं जिन्हें संबंधित DTH ऑपरेटर अपने प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराता है। इनके लिए भी मंत्रालय ने दिशानिर्देश तय किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, किसी DTH ऑपरेटर की कुल चैनल क्षमता में प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों की हिस्सेदारी अधिकतम 5% तक हो सकती है। इसके अलावा हर प्लेटफॉर्म सर्विस चैनल के पंजीकरण के लिए 10,000 रुपये का एकमुश्त और गैर-वापसी योग्य शुल्क देना होता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य DTH ऑपरेटरों के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध चैनलों और सेवाओं को तय नियमों के दायरे में रखना है।
बुनियादी ढांचे को साझा करने के लिए भी प्रावधान
मंत्रालय की ओर से जारी DTH दिशानिर्देशों में बुनियादी ढांचे को साझा करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इसका मकसद प्रसारण सेवाओं के संचालन से जुड़ी व्यवस्था को नियमों के दायरे में रखना है।
DTH कंपनियों को लाइसेंस फीस का भुगतान तिमाही आधार पर करना होता है। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को मिलने वाली यह फीस भारत कोष के जरिए जमा कराई जाती है।
कुल मिलाकर, मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि DTH ऑपरेटरों ने कैलेंडर वर्ष 2025 में सरकार को 618.20 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस के रूप में दिए। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए जनवरी 2026 में 141.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। DTH कंपनियों के लिए AGR का 8% लाइसेंस फीस, तिमाही भुगतान और प्लेटफॉर्म सर्विस चैनलों की सीमा जैसे नियम इस कारोबार की नियामकीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) ने अपने संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से खुद को अलग कर लिया है।
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Samachar4media Bureau
जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) ने अपने संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से खुद को अलग कर लिया है। कंपनी का कहना है कि यह मामला डॉ. सुभाष चंद्रा और प्रमोटर समूह की कंपनियों से जुड़ा है। इसका कंपनी के कामकाज या संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कंपनी की ओर से यह सफाई ऐसे समय में आई है, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पहले से ही 1,322 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच कर रहा है। यह मामला LIC Housing Finance Limited की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है। इसमें डॉ. सुभाष चंद्रा और तीन अन्य लोगों के नाम हैं।
जी एंटरटेनमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी के संज्ञान में आया है कि डॉ. सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत हैसियत से संबोधित करते हुए ECIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई LIC Housing Finance की ओर से पहले दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ी CBI जांच के आधार पर हुई है। प्रवक्ता ने साफ किया कि यह मामला डॉ. सुभाष चंद्रा और प्रमोटर कंपनियों से संबंधित है और इसका जी एंटरटेनमेंट या उसके कामकाज से कोई संबंध नहीं है।
980 करोड़ रुपये के दो कर्ज हैं जांच के केंद्र में
CBI ने सितंबर में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया था कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने LIC Housing Finance से कर्ज लेने के लिए अपनी व्यक्तिगत संपत्ति की कीमत बढ़ाकर दिखाई थी। आरोप है कि इस आधार पर दो कर्ज मंजूर कराए गए, जिनकी कुल रकम 980 करोड़ रुपये थी। बाद में ये कर्ज नॉन-परफॉर्मिंग एक्सपोजर यानी ऐसे कर्ज बन गए, जिनकी वसूली में दिक्कत आ रही है।
एफआईआर के मुताबिक, पहला कर्ज 500 करोड़ रुपये का था, जिसे Vasant Sagar Properties Pvt Ltd को दिया गया था। इसमें Pan India Infra Projects Pvt Ltd सह-कर्जदार थी। यह कर्ज पुराने कर्ज को चुकाने, अतिरिक्त रकम देने और कारोबार बढ़ाने के लिए मंजूर किया गया था।
दूसरा कर्ज 480 करोड़ रुपये का था, जो Digital Subscriber Management and Consultancy Services Pvt Ltd को दिया गया था। इसमें Spirit Infra Power and Multi Ventures Pvt Ltd सह-कर्जदार थी। यह कर्ज किराये से होने वाली कमाई के आधार पर सिक्योरिटाइजेशन व्यवस्था के तहत दिया गया था।
दोनों कर्जों के लिए डॉ. सुभाष चंद्रा ने गारंटी दी थी। जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या कर्ज मंजूर कराने के लिए उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ाकर दिखाई गई थी।
संपत्ति के मूल्यांकन में अंतर की जांच
LIC Housing Finance ने जांचकर्ताओं को बताया कि DIM & Co की ओर से 28 मार्च 2018 को जारी एक प्रमाणपत्र में डॉ. सुभाष चंद्रा की संपत्ति करीब 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, 6 जुलाई 2018 को MPJ & Co की ओर से जारी दूसरे प्रमाणपत्र में उनकी संपत्ति का मूल्य 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।
CBI की एफआईआर में इन आंकड़ों की तुलना दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 के तहत बाद में हुई कार्यवाही में डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से दिए गए बयानों से की गई है। इन कार्यवाही के दौरान उन्होंने 2024 में अपनी संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये बताई थी। साथ ही कहा था कि 2017-18 में भी उनकी संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी।
CBI का आरोप है कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने चार कर्जदार कंपनियों और उनके अधिकारियों के साथ मिलकर LIC Housing Finance से कर्ज मंजूर कराने की कोशिश की। आरोपों के मुताबिक, संपत्ति का मूल्य बढ़ाकर दिखाने के लिए गलत दस्तावेज तैयार किए गए और कर्ज की रकम मिलने के बाद उसका गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और जांच के नतीजे सामने आने बाकी हैं।
व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया भी चर्चा में
यह जांच डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़ी व्यक्तिगत दिवालिया समाधान प्रक्रिया के बीच हो रही है। इस प्रक्रिया में उनके गारंटर होने और कर्जदाताओं की बकाया रकम की वसूली को लेकर विवाद चल रहा है।
CBI की शिकायत से तीन दिन पहले डॉ. सुभाष चंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ गठित करने का विरोध किया था, जिसे उनके व्यक्तिगत दिवालिया मामले की सुनवाई करनी थी।
इससे पहले NCLT की विशेष पांच सदस्यीय पीठ ने उनकी भुगतान योजना की मंजूरी पर रोक लगा दी थी। पीठ का कहना था कि पहले दिया गया फैसला स्पष्ट बहुमत से नहीं आया था। साथ ही डॉ. सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या उससे जुड़े अधिकार किसी और को देने से भी रोक दिया गया था।
इससे पहले NCLT के दो सदस्यों के बीच फैसले को लेकर मतभेद हुआ था। इसके बाद तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा ने IBC की धारा 114 के तहत सुभाष चंद्रा की ओर से पेश भुगतान योजना को मंजूरी दी थी और असहमत कर्जदाताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया था।
इस योजना के तहत गारंटर के रूप में डॉ. सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे। इसके अलावा मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से अलग से 1,494 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव था। रिपोर्ट के मुताबिक, 80.8% वोटिंग हिस्सेदारी वाले कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।
हालांकि, LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank ने इस योजना का विरोध किया था। LIC Housing Finance का कहना था कि उसके करीब 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से व्यक्तिगत तौर पर सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव था। कंपनी ने इस योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताया था।
इस मामले में कर्जदाताओं के करीब 22,000 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये के समझौते को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आने के बाद भी यह प्रक्रिया चर्चा में रही है।
अमेरिका स्थित स्वास्थ्य सेवा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी UnitedHealth Group की इकाई Optum में अरुणिमा मेहता को मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
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अमेरिका स्थित स्वास्थ्य सेवा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी UnitedHealth Group की इकाई Optum में अरुणिमा मेहता को मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। समाचार4मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, इस नई भूमिका में वह कंपनी की ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ में योगदान देंगी और अमेरिका सहित विभिन्न देशों की अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ मिलकर काम करेंगी।
Optum में अरुणिमा मेहता की नई जिम्मेदारी में वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक विकास में योगदान देने के साथ-साथ नेतृत्व की अधिक व्यापक भूमिका निभाना भी शामिल है। इस नियुक्ति के साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ काम करने और कंपनी के वैश्विक कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
इससे पहले अरुणिमा मेहता Financial Software & Systems (FSS) में ग्लोबल मार्केटिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थीं। यहां उन्होंने वैश्विक मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। अरुणिमा मेहता इससे पहले Abbott में एसोसिएट डायरेक्टर (Marketing Excellence) और वोडाफोन आइडिया में वाइस प्रेजिडेंट (कम्युनिकेशंस) के पद पर भी काम कर चुकी हैं।
बता दें कि UnitedHealth Group दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। वर्ष 2026 की Fortune Global 500 सूची में इसे चौथा स्थान दिया गया है। कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग 447 अरब अमेरिकी डॉलर है और दुनियाभर में इसके करीब 4 लाख कर्मचारी हैं।
भारत में भी Optum की मजबूत मौजूदगी है। इसके प्रमुख केंद्र बेंगलुरु, गुरुग्राम, नोएडा, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई में हैं। कंपनी इन प्रमुख शहरों में अपने ऑपरेशंस के जरिए लगभग 38,000 से 40,000 प्रोफेशनल्स को रोजगार देती है।
इसके साथ ही पूनम पांडेय नवभारत टाइम्स के 80 साल के इतिहास में इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बन गई हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स (NBT) में वरिष्ठ पत्रकार पूनम पांडेय को नेशनल ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही वह नवभारत टाइम्स के 80 साल के इतिहास में इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाली पहली महिला बन गई हैं।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की रहने वाली पूनम पांडेय राष्ट्रीय राजनीति की रिपोर्टिंग करती रही हैं। उनकी रिपोर्टिंग के प्रमुख विषयों में भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और देश की राजनीति शामिल हैं। इसके अलावा वह भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मामलों और विदेश मामलों पर भी नियमित रूप से लिखती हैं। वह वर्ष 2014 से भारतीय संसद की रिपोर्टिंग कर रही हैं।
पूनम पांडेय ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इसके बाद उन्होंने CNBC आवाज के साथ अपने करियर की शुरुआत की। वह आज तक न्यूज चैनल में भी काम कर चुकी हैं।
उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही वह ब्रिटेन के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) के फेलोशिप कार्यक्रम के तहत चेवनिंग फेलो भी हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी कर ली है। दोनों ने 30 अक्टूबर को निजी समारोह में शादी की।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी कर ली है। दोनों ने 30 अक्टूबर को निजी समारोह में शादी की। शनिवार, 31 अक्टूबर को दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी शादी की तस्वीरें साझा कर इस खबर की जानकारी दी।
उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर निधि राजदान के साथ कई तस्वीरें साझा कीं। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'A new journey began yesterday' यानी 'कल से एक नई यात्रा शुरू हुई।' उन्होंने अपने संदेश के साथ अंगूठी वाला इमोजी भी लगाया।
A new journey began yesterday 💍@Nidhi https://t.co/BXbdLq2d1H
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) October 31, 2026
वहीं, निधि राजदान ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यही तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने अपने पोस्ट में मजाकिया और हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा, 'It's done bro' और इसके साथ अंगूठी वाला इमोजी लगाया। दोनों की पोस्ट सामने आने के बाद उन्हें बधाई संदेश मिलने लगे।
It’s done bro 💍 @OmarAbdullah https://t.co/I3V5HnCz7C
— Nidhi Razdan (@Nidhi) October 31, 2026
पहले पायल नाथ से हुई थी उमर अब्दुल्ला की शादी
उमर अब्दुल्ला की यह दूसरी शादी है। इससे पहले उन्होंने साल 1994 में पायल नाथ से शादी की थी। दोनों के दो बेटे हैं, जाहिर और जमीर। हालांकि, कुछ साल बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और वे अलग-अलग रहने लगे थे। उमर जम्मू-कश्मीर में रहते थे, जबकि पायल अपने बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही थीं।
दोनों के बीच लंबे समय तक कानूनी विवाद भी चला। इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से उनकी शादी खत्म करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 32 साल पुराना उनका वैवाहिक रिश्ता कानूनी तौर पर समाप्त हो गया।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी की खबर राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।