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‘कादम्बिनी’ पत्रिका के प्रभारी संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा का निधन
कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
देश में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। वहीं इस बीच कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। कोविड संक्रमण के बाद दिल्ली के बत्रा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा 2006 से हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर के साथ एक लंबी पारी खेल रहे थे। 2 महीने पहले तक वे ‘कादंबिनी’ पत्रिका के प्रभारी संपादक थे। सौम्य स्वभाव के राजीव कटारा की हर विषय की अच्छी पकड़ थी।
कटारा ‘चौथी दुनिया’, ‘अमर उजाला’ समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे। 1983 में ‘नवभारत टाइम्स’ से ट्रेनिंग लेने के बाद ‘चौथी दुनिया’, ‘संडे ’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘माया’, ‘आजतक’, ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक भास्कर’ में काम करने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े। समाचार4मीडिया से एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि 1986 में ‘चौथी दुनिया’ ने उन्हें पत्रकारिता का बड़ा ब्रेक दिया। वे कहते थे कि कमर वहीद नकवी, रामकृपाल सिंह और संतोष भारतीय की टीम ने बहुत कुछ सिखाया। वो उनकी पत्रकारिता का यादगार दौर था। वहां काम करते वक्त गजब का आत्मविश्वास पैदा होता था।
उन्होंने बताया था कि अजय चौधरी, वीरेंद्र सैंगर, अर्चना झा, आदियोग के साथ उन्होंने वहां खूब काम किया। उसके बाद उदयन शर्मा के साथ ‘संडे ऑब्जर्वर’ के जरिए उन्होंने अपनी पारी आगे बढ़ाई। करीब साढ़े तीन साल वहां काम करने के बाद वे ‘राष्ट्रीय सहारा’ गए। उस दौरान सुमिता, शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकार उनके साथी रहे। वहां नौ महीने काम करने के बाद ‘माया’ जॉइन की, पर वहां भी वे नौ महीने ही काम कर पाए। उसके बाद वे ‘आजतक’ चले गए।
इसके बाद 1996 में उनकी जागरण में बतौर फीचर एडिटर दिल्ली में जॉइनिंग हुई। जागरण के साथ उन्होंने फीचर के कई प्रयोग किए। सहस्त्राब्दि अंकों का संयोजन किया। 2001 में ‘अमर उजाला’ के साथ सातों दिनों के फीचर पेज की शुरुआती की। 2003 में सीएसई की फैलोशिप के अंतर्गत बैतूल में उन्होंने काम किया। फिर 2006 में ‘हिन्दुस्तान’ आए और यहां रिसर्च और स्पेशल प्रोजेक्ट के इंजार्च, खेल संपादक के पद पर काम करते हुए ‘कादम्बिनी’ का प्रभार इस वर्ष सितंबर तक संभाला।
पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के देने लिए उन्हें 2013 के ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था।
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