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सरकार-सेना के ‘निशाने’ पर चल रहे वरिष्ठ पत्रकार ने लिया अब बड़ा फैसला
इसी साल अप्रैल में संपादकों और प्रमुख पत्रकारों की वैश्विक संस्था 'द इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट' की तरफ से मिला था 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम हीरो' पुरस्कार
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
सरकार के खिलाफ लिखने की सजा एक और पत्रकार को उठानी पड़ी। पाकिस्तान के सबसे चर्चित पत्रकार सिरिल अलमिदा ने अंग्रेजी अखबार ‘डॉन’ के सहायक संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया है। वह लंबे समय से दबाव में चल रहे थे। सिरिल के इस्तीफे के बाद एक बार फिर यह साफ हो गया है कि इमरान खान सरकार और सेना, मीडिया पर अंकुश लगाने की कोशिशों को परवान चढ़ाने में लगी हैं। हाल ही में एक विदेशी पत्रकार को भी लाहौर से बैरंग लौटा दिया गया था, जबकि इसके पास सभी जरूरी दस्तावेज थे।
सिरिल अलमिदा ‘डॉन’ के साथ पिछले 11 वर्षों से जुड़े हुए थे और साप्ताहिक कॉलम लिखते थे। ट्विटर पर अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा है कि वह अपना कॉलम समाप्त कर रहे हैं और मीडिया से ब्रेक ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने ऐसे भी संकेत दिए हैं कि वो मीडिया में दोबारा वापसी नहीं करेंगे।
Some more work news, belatedly: I have resigned from Dawn and ended the Sunday column. Am deeply grateful for the readership and affection over the years. There is no plan to return to writing in the foreseeable future, a break from the media appears to be on the cards. ?
— cyril almeida (@cyalm) October 20, 2019
सिरिल अलमिदा के पाकिस्तानी सरकार और सेना से रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे थे। इसकी वजह थी देश में असैन्य और फौज के रिश्तों की एक 'आलोचनात्मक और अनवरत कवरेज'। दरअसल, अलमिदा ने बर्खास्त प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और फौज के अधिकारियों के बीच एक बैठक के बारे में खुलासा किया था। इस बैठक में शरीफ ने आतंकवादियों के खिलाफ कथित रूप से कार्रवाई की मांग की थी। इसे डॉनलीक्स के रूप में जाना जाता है और पाकिस्तानी सेना इस पर नाराज थी। मामला सामने आने के बाद सेना ने अधिकारियों और पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद सरकार की तरफ से अलमिदा पर ट्रेवल बैन लगा दिया गया था। हालांकि, मीडिया के भारी विरोध को देखते हुए सरकार को झुकना पड़ा।
अपने इस खुलासे के लिए सिरिल को इसी साल अप्रैल में संपादकों और प्रमुख पत्रकारों की वैश्विक संस्था 'द इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट' (आईपीआई) की तरफ से 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम हीरो' पुरस्कार से नवाजा गया था। आईपीआई के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम हीरो पुरस्कारों से उन पत्रकारों को नवाजा जाता है, जिन्होंने प्रेस की आजादी को बढ़ावा देने के लिए अहम योगदान दिया हो, खासतौर पर निजी रूप से जोखिम लिया हो। सेना का कहना है कि अलमिदा ने तथ्यों को किनारे रखकर रिपोर्टिंग की, जबकि अलमिदा का कहना है कि उन्होंने जो खुलासा किया वो पूरी तरह सही था।
जिस तरह से सेना और सरकार द्वारा लगातार ‘डॉन’ और सिरिल अलमिदा पर दबाव बनाया जा रहा था, उससे काफी पहले ही यह साफ हो गया था कि सिरिल पद छोड़ सकते हैं। रविवार को उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी। सिरिल के इस कदम से पाकिस्तान सरकार एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के निशाने पर आ गई है। तमाम मीडिया संस्थानों ने इसके लिए इमरान खान सरकार की आलोचना की है।
टैग्स इस्तीफा सिरिल अलमिदा पाकिस्तानी पत्रकार नवाज शरीफ