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मोदी के ‘अच्छे दिनों’ का आईना है वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे की ये रिपोर्ट
‘सीएनएन-न्यूज़18' के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे की एक रिपोर्ट को ख़ासा पसंद किया जा रहा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
‘सीएनएन-न्यूज़18' के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे की एक रिपोर्ट को ख़ासा पसंद किया जा रहा है। इसे पसंद किये जाने की दो प्रमुख वजह हैं, सबसे पहली तो यही कि रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गांव जयापुर की है और दूसरी यह कि रिपोर्ट को निष्पक्ष तरीके से तैयार किया गया है।
आमतौर पर या कहें कि मौजूदा समय में नेताओं को प्रभावित करने वाली अधिकांश ख़बरों में ‘निष्पक्षता’ कम ही नज़र आती है। कोई किसी के समर्थन में अभियान चलाता है तो कोई किसी के विरोध में। ऐसे में भूपेंद्र चौबे ने जो है, उसे वैसा ही दिखाने का प्रयास किया है। जयापुर वाराणसी का एक गांव है, जिसे प्रधानमंत्री ने कुछ साल पहले गोद लिया था। लिहाजा चुनावी माहौल में इसकी चर्चा स्वाभाविक हो जाती है। चौबे ने पूरे गांव का दौरा किया और लोगों से ‘अच्छे दिनों’ पर कई सवाल किये। इतना ही नहीं, उन्होंने सड़क किनारे लगे नल से पानी पीकर यह भी दर्शाने का प्रयास किया कि ‘मोदी के इस गांव’ में स्थिति शहरों से ज्यादा बेहतर है।
भूपेंद्र चौबे की रिपोर्ट इस बात पर केंद्रित है कि क्या मोदी के आने से गांव की किस्मत बदली? मसलन, ग्रामीणों के आवास, रोजगार, मूलभूत सुविधाएं आदि। इसके लिए वो हर उस जगह गए, जहां असल तस्वीर सामने आ सकती थी। वैसे तो कई चैनलों ने जयापुर को कवर किया, लेकिन अधिकांश ‘खाट पंचायत’ तक ही सिमटकर रह गए। जबकि चौबे ने हकीकत से देश को रूबरू कराने के लिए गलियों की ख़ाक तक छानी। उन्होंने जहां महिला सशक्तिकरण के लिए बनाये गए कारखाने में सोलर सिस्टम से मशीनों के संचालन को रेखांकित किया, वहीं बिजली कटौती की समस्या को भी बताना नहीं भूले। एक तरफ छोटे से गांव में सोलर का इस्तेमाल विकास को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ बिजली संकट अहसास दिलाता है कि विकास के दायरे को व्यापक करने की ज़रूरत है।
भूपेंद्र चौबे ने ‘मोदी जी का अटल नगर’ की तस्वीर भी दर्शकों तक पहुंचाई। जयापुर का यह वो इलाका है, जहां दलित वर्ग के लोग रहते हैं। चौबे ने यहां के लोगों से बात की और यह भी जाना कि उनके पक्के आशियाने मोदीकाल से पहले की देन हैं या बाद की। दौरा पूरा करने के बाद चौबे यह बताना भी नहीं भूले कि अमेठी जैसे देश के प्रमुख संसदीय क्षेत्रों के मुकाबले जयापुर बेहतर नज़र आता है। सोशल मीडिया पर चौबे को इस रिपोर्ट के लिए तारीफ मिल रही है। आशु नामक यूजर ने लिखा है, ‘भूपेन्द्र चौबे ने बहुत ही अच्छा काम किया। वे गांव गए, लोगों से बात की। उन्होंने सनसनी उत्पन्न करने की बजाय असल तस्वीर दिखाई है।’
चौबे के पास पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। ‘नेटवर्क18’ समूह का हिस्सा बनने से पहले वो ‘एनडीटीवी’ में थे। वहां पांच साल की पारी खेलने के बाद उन्होंने वर्ष 2005 में सीएनएन-न्यूज़ 18 (CNN-IBN) में कदम रखा और तब से अब तक यहीं अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। बीस वर्षों से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय चौबे की न सिर्फ अंग्रेजी बल्कि हिंदी भाषा पर भी काफी अच्छी् पकड़ है। तमाम बड़ी शख्सियतों का इंटरव्यू कर चुके भूपेंद्र चौबे सीएनएन-न्यूज18 पर प्राइम टाइम शो ‘व्यूपॉइंट’ (Viewpoint) को भी पेश करते हैं।
भूपेंद्र चौबे की रिपोर्ट आप यहां देख सकते हैं-
#ABillionVotes – Right on the edge of Jayapur in Varanasi, is an experiment in Indian politics. You can compare this to the most high-profile constituencies in India to this area which is called ‘Modiji Ka Atal Nagar’.
— News18 (@CNNnews18) April 24, 2019
Watch #CItizenManifesto with @bhupendrachaube. pic.twitter.com/hCaDTjabBh
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