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क्यों संकट में है न्यूज मीडिया, बरखा दत्त ने बताई वजह
फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन’ के हैदराबाद चैप्टर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बरखा दत्त ने विभिन्न मुद्दों पर रखे अपने विचार
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
वरिष्ठ टीवी पत्रकार बरखा दत्त ने ‘नागरिकता संशोधन कानून’ (CAA) और ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर’ (NRC) को लेकर अपना विरोध जताया है। ‘फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन’ (FlO) के हैदराबाद चैप्टर की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बरखा दत्त का कहना था, ‘मैं सीएए और एनआरसी का इसलिए विरोध करती हूं, क्योंकि इसे धर्म से जोड़ दिया गया है और एनआरसी इसमें सीएए को और धार दे रहा है।’
इस मौके पर मीडिया के साथ बातचीत के दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव और इसमें किसकी जीत की संभावना है, के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बरखा दत्त का कहना था, ‘पत्रकारिता में बीस साल से ज्यादा के अनुभव के दौरान मैंने एक बात ये सीखी है कि चुनाव के बारे में पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसमें कुछ भी हो सकता है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केजरीवाल को फायदा होता दिखाई दे रहा है। लोग विधानसभा और लोकसभा चुनाव को अलग-अलग नजरिये से देखते हैं और उसी के अनुसार वोट करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘अपने ऑनलाइन मीडिया वेंचर के साथ अब मैं ऑनलाइन के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हूं। कई जाने-माने टीवी पत्रकार जैसे करन थापर और विक्रम चंद्रा भी ऑनलाइन की ओर मुड़ चुके हैं।’ मीडिया संस्थानों के वित्तीय संकट के बारे में चर्चा करते हुए बरखा दत्त का कहना था कि अब ऑनलाइन आर्टिकल पढ़ने के लिए भुगतान करने का समय आ गया है। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘न्यूयार्क टाइम्स’ पहले से ही इस दिशा में काम कर रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बारे में बरखा दत्त का कहना था कि यह गंभीर दौर से गुजर रहा है। रिपोर्टिंग का दायरा सिकुड़ रहा है। अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए पैसे कमाने के तहत नए-नए आइडिया को लेकर मीडिया संस्थान थक चुके हैं। न्यूज देखने के लिए अधिकांश लोग भुगतान नहीं करना चाहते हैं। इसके साथ ही बरखा दत्त का यह भी कहना था कि न्यूज मीडिया में पैसा नहीं है और न्यूज मीडिया इन दिनों संकट में है।
बरखा दत्त के अनुसार, ‘बच्चों को मीडिया के बारे में पढ़ाए जाने की जरूरत है। मीडिया की पढ़ाई को भी कोर्स का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। चूंकि मीडिया काफी प्रभाशाली है, ऐसे में बच्चों को भी सही-गलत मीडिया की पहचान होनी चाहिए। बच्चों के लिए स्कूल में एक क्लास होनी चाहिए, जिसमें न्यूज प्रोग्राम दिखाए जाने चाहिए। इसके अलावा डिबेट और विभिन्न विषयों पर चर्चा भी कराए जाने की जरूरत है, ताकि बच्चे यह समझ सकें कि मीडिया कैसे काम करती है।’
बरखा दत्त ने कहा, ‘मेरी किताब The Unquiet Land अच्छा कर रही है। देश में विपक्षी पार्टियों की असफलता को लेकर मैं नई किताब लेकर आ रही हूं। यह किताब इस साल बाजार में आ जाएगी।’ उन्होंने कहा कि टुकड़े-टुकड़े को आजकल काफी प्रचारित किया जा रहा है। अब असहमतिपूर्ण राय को देशद्रोह के रूप में दिखाया जा रहा है, यह काफी दुखद है।
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में महिलाओं के प्रदर्शन के बारे में बरखा दत्त का कहना था, ‘जब महिलाएं आवाज उठाती हैं तो सरकार उनकी सुनती है, वहीं जब पुरुष विरोध प्रदर्शन करते हैं तो सरकार बल का इस्तेमाल करती है। इसलिए जब महिलाओं को कहीं कुछ गलत लगता है तो उन्हें ज्यादा से ज्यादा संख्या में आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।’
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