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मीडिया के बारे में कही गई इस बात से PCI खफा, CM को भेजा नोटिस
केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं। इसके लिए विज्ञापन को सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यानी बात मानने वाले को ‘विज्ञापन’ और नहीं मानने वाले को ‘इंतजार’। इसी तरह का ‘प्रयास’ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल किया था, जिसके कारण अब उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ा है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने गहलोत को नोटिस भेजकर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। इसके आलावा, सोशल मीडिया पर अपने इस अलोकतांत्रिक ‘प्रयास’ के लिए उनकी आलोचना भी हो रही है। वहीं, विपक्ष में बैठी भाजपा भी एकदम से आक्रामक हो गई है। दरअसल, सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बातों-बातों में यह कह डाला था कि विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी। पत्रकारों से मुखातिब होते हुए गहलोत ने कहा था ‘मीडिया संस्थान करोड़ों के विज्ञापन लेते हैं, लेकिन सरकार की योजनाओं का कोई प्रचार-प्रसार नहीं करते। इसके लिए मीडिया वालों को फोन करके अनुरोध करना पड़ता है. हम नज़र रखे हुए हैं, विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी।’
मुख्यमंत्री की इस तरह खुलेआम ‘धमकी’ को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीरता से लिया है। पीसीआई अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने नोटिस जारी करते हुए अशोक गहलोत से प्रेस काउंसिल एक्ट 1979 की धारा 13 के तहत दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इस नोटिस पर मुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं दी है, लेकिन भाजपा को उन्हें निशाने पर लेने का मौका जरूर मिल गया है। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि ‘अशोक गहलोत देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनसे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने नोटिस भेजा है, इससे साबित होता है कि मौजूदा सरकार मीडिया की आजादी के लिए खतरा है।
बता दें कि 1966 में अस्तित्व में आई प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) एक अर्द्ध न्यायिक और स्वायत्त संगठन है। पीसीआई के पास दो स्पष्ट अधिकार हैं। पहला प्रेस और पत्रकारों की आजादी की रक्षा करना और दूसरा पत्रकारिता में नैतिकता की निगरानी और इसके ऊंचे मानकों को बरकरार रखना।
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