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बजट से यूं सकते में आ गई है प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री, अखबार-मैगजीनों को लगा झटका

देश में छोटे, मझोले क्षेत्रीय अखबार सरकार के निर्णय से काफी प्रभावित होंगे

पंकज शर्मा 6 years ago

पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट में अखबारों और मैगजींस में इस्तेमाल होने वाले कागज यानी न्यूजप्रिंट पर दस प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगा दी गई है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि आज के समय में एक तरफ तो प्रिंट मीडिया को डिजिटल मीडिया से वैसे ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी तरफ विज्ञापन भी ज्यादा नहीं मिल रहे हैं। अभी तक प्रिंट मीडिया को आगे बढ़ने की जो उम्मीदें थीं, उन्हें इस तरह की कस्टम ड्यूटी से करारा झटका लगेगा। माना जा रहा है कि न्यूजप्रिंट पर लगाई गई कस्टम ड्यूटी से अखबार अथवा मैगजींस मालिकों के साथ ही पाठकों पर भी काफी असर पड़ेगा, क्योंकि कस्टम ड्यूटी लगने से न्यूजप्रिंट महंगा होने के कारण अखबार और मैगजींस महंगे हो जाएंगे।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसे समय में जब अखबार सरकार से कुछ सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि बढ़ते खर्चे और कम होते एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के कारण उन्हें हो रही आर्थिक परेशानियों से निपटा जा सके, लेकिन इस तरह की कस्टम ड्यूटी लगाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। अंग्रेजी अखबार तो इस वृद्धि को झेल भी सकते हैं, क्योंकि उन्हें सरकार के साथ ही निजी इंडस्ट्री से भी काफी विज्ञापन मिलते हैं, लेकिन क्षेत्रीय भाषा के छोटे, बड़े और मझोले अखबारों के साथ ऐसा नहीं है, जबकि देशभर में उनकी अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में इन अखबारों के मालिक सरकार के इस निर्णय से काफी प्रभावित होंगे।

न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लोगों के अनुसार, सरकार को अपने इस कदम के बारे में दोबारा सोचना चाहिए और न्यूजप्रिंट तैयार करने वालों की बातों में नहीं आना चाहिए। क्योंकि कस्टम ड्यूटी बढ़ने से न्यूजप्रिंट के स्थानीय उत्पादनकर्ता इसकी कीमतें बढ़ा देंगे और इस कारण अखबार और मैगजींस महंगे हो जाएंगे। इसके बाद अखबार भी अपनी कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे। कीमतें बढ़ने से अखबारों/मैगजींस का सर्कुलेशन काफी बुरी तरह प्रभावित होगा।

अखबारों/मैगजींस के कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार का यह कदम जनविरोधी है और सरकार को इस टैक्स को तुरंत हटा देना चाहिए। एक तरफ तो पत्रकारों को दी गई सुविधाओं को एक-एक कर वापस लिया जा रहा है, जिससे उन्हें काम करने में काफी परेशानी हो रही है, दूसरी तरफ पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों की विभिन्न मांगों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न्यूज प्रिंट पर लगाई गई कस्टम ड्यूटी और कुछ नहीं, बस लोगों की आजादी पर एक तरह का हमला ही है।

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