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जानें, क्यों न्यूज चैनल्स पर मेहरबान हो रहे हैं एडवरटाइजर्स
एफएमसीजी सेक्टर की ओर से न्यूज चैनल्स पर दिए जाने वाले विज्ञापनों में आई है काफी बढ़ोतरी
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में इस साल काफी उछाल देखने को मिला है, फिर चाहे वो हिंदी चैनल हों, अंग्रेजी हों अथवा रीजनल चैनल ही क्यों न हों। दरअसल, इस साल कई ऐसी बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में यह इजाफा हुआ है। इनमें हम पुलवामा में हुए आतंकी हमले, पाकिस्तान पर भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक और अब लोकसभा चुनाव का उदाहरण ले सकते हैं। न्यूज चैनल्स ने इन सभी घटनाओं को काफी बड़े स्तर पर कवर किया है और व्युअरशिप बढ़ने से एडवर्टाइजर्स ने भी इस जॉनर में काफी रुचि दिखाई है। यही कारण है कि न्यूज चैनल्स पर ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर्स गुड्स’ (FMCG) ब्रैंड्स के विज्ञापनों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यानी कह सकते हैं कि इसके पीछे सिर्फ चुनाव ही कारण नहीं है, बल्कि अन्य बड़ी घटनाओं के चलते भी ऐसा हुआ है।
इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने इंडस्ट्री से जुड़े कुछ दिग्गजों से बात की, जिनका कहना है कि फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) के हटने के कारण भी एफएमसीजी ब्रैंड्स की ओर से न्यूज चैनल्स को दिए जाने वाले विज्ञापन में बढ़ोतरी हुई है।
एक रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद अपने हिंदी एंटरटेनमेंट चैनल्स को डीडी फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। इनमें ‘कलर्स रिश्ते’ (Colors Rishtey) और ‘जी अनमोल’ (Zee Anmol) जैसे कई चैनल्स शामिल हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि टियर-टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल्स के आगे बढ़ने में काफी मदद की है। अविनाश पांडे ने कहा, ‘यदि आप आजकल की टीवी की दुनिया को देखें तो डीडी फ्रीडिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूज देखने वालों की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। यदि हम डीडी फ्रीडिश के पैटर्न को देखें तो सबसे पहले इस पर न्यूज जॉनर ही आया था, ऐसे में उसी का विस्तार हुआ है। आखिर, कोई भी सर्विस प्रोवाइडर तभी अपना विस्तार करेगा, जब उसके पास कंटेंट होगा। इसके बाद टियर-टू (Tier-II) शहरों में इस प्लेटफॉर्म पर जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स शामिल हुए, जिन्हें अब हटा लिया गया है। यही कारण है कि इन जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की पहुंच काफी घट गई है।’
अविनाश पांडे का कहना है, ‘इन दिनों लोकसभा चुनाव की कवरेज के कारण न्यूज जॉनर में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है, ऐसे में डीडी फ्रीडिश पर कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की कमी के कारण एफएमसीजी समेत प्रॉडक्ट निर्माताओं के लिए हिंदी न्यूज काफी बेहतरीन माध्यम बन गया है। यही नहीं, जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के मुकाबले न्यूज चैनल्स पर इन कंपनियों का खर्च भी कम आ रहा है। जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर किए जाने वाले खर्च के लगभग आधे में ही इन ब्रैंड्स की पहुंच 90 मिलियन से 100 मिलियन लोगों तक हो रही है। एडवर्टाइजर्स को यह समझना चाहिए कि यह काफी प्रभावी मॉडल है और निश्चित रूप में टियर टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल का शेयर बढ़ाने में काफी मदद की है।’
इस बारे में ‘इमामी लिमिटेड’ (Emami Ltd) के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मीडिया) बशाब सरकार (Bashab Sarkar) ने बताया कि कैसे उनकी कंपनी के लिए यह एक वरदान की तरह रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि फरवरी के मध्य में हुई डीडी फ्रीडिश की नीलामी में कई बड़े चैनल नेटवर्क्स ने हिस्सा नहीं लिया, जिसका प्रभाव मार्च से उनके फ्री टू एयर जनरल एंटरटेमेंट चैनल की रेटिंग पर पड़ा। ऐसे में फ्रीडिश पर बचे चैनलों को फायदा हुआ। यह इमामी जैसे उन एडवर्टाइजर्स के लिए एक तरह से वरदान साबित हुआ, जो ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस करते हैं। दरअसल चुनाव और अन्य बड़ी घटनाओं के कारण इन क्षेत्रों में हिंदी न्यूज चैनल्स देखने वालों की संख्या काफी बढ़ने से उनके एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी काफी इजाफा है।’
वहीं, ‘डाबर इंडिया लिमिटेड’ (Dabur India Ltd) के हेड (मीडिया) राजीब दुबे ने भी इस बात से सहमति जताई है कि डीडी फ्रीडिश से जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के हटने का असर दिखा है। उन्होंने कहा, हम न्यूज जॉनर में निवेश करना जारी रखेंगे, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इसे देखते हैं। इससे बड़ी संख्या में व्युअरशिप मिलती है।
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