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पुलिस ने मानी गलती, 3 महीने बाद ABP मांझा के संवाददाता को मिला इंसाफ
महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस ने न्यूज चैनल एबीपी माझा के पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामला लगभग तीन महीने बाद बंद कर दिया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस ने न्यूज चैनल एबीपी माझा के पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामला लगभग तीन महीने बाद बंद कर दिया है। पुलिस ने स्वीकार किया है कि लॉकडाउन के दौरान बांद्रा रेलवे स्टेशन पर भीड़ एकत्र करने के एक मामले में एबीपी माझा के संवाददाता राहुल कुलकर्णी को गिरफ्तार करना उनकी गलती थी।
चूंकि मामले में राहुल कुलकर्णी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का कोई सबूत नहीं है, पुलिस ने 21 जुलाई को बांद्रा अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की और कहा कि कुलकर्णी की रिपोर्ट गलत नहीं थी, लेकिन इसे देखने वाले लोगों ने इसे गलत संदर्भ में लिया।
क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जब कुलकर्णी को एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया, तब उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी न्यूज रिपोर्ट रेलवे की प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन शुरू करने की योजना को लेकर आंतरिक सूचना पर आधारित थी।’
क्लोजर रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुलकर्णी ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी बांद्रा स्टेशन का जिक्र तक नहीं किया था। रिपोर्ट में कहा गया, ‘उनकी न्यूज रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों का नाम शामिल नहीं था। यह बताया गया था कि प्रवासियों के लिए ट्रेनों की व्यवस्था करने पर विचार किया जा रहा है।’
क्लोजर रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रवासी मजदूरों के बीच एक संदेश बहुत वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि ‘बांद्रा रेलवे स्टेशन जाना है जल्दी चलो, न्यूज चैनल पर भी सरकार ने गांव भेजने के लिए ट्रेन चालू कर दी है’ लेकिन कुलकर्णी की रिपोर्ट में इसका भी जिक्र नहीं था।
क्लोजर रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘लोगों ने विश्वास किया कि उनके गृहनगरों तक ले जाने के लिए लंबी दूरी की ये ट्रेन उपनगरीय लाइन स्टेशन से रवाना नहीं होंगी, बल्कि बांद्रा स्टेशन से चलेंगी इसलिए वे बांद्रा टर्मिनल के बाहर इकट्ठा हुए।’
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे लगे कि कुलकर्णी ने गलत रिपोर्टिंग की, बल्कि इसे लोगों द्वारा गलत संदर्भ में लिया गया।
पुलिस ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि अपराध को ‘सी समरी’ के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जिसका अर्थ होता है कि गलती से मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने अदालत से धारा 169 सीआरपीसी के तहत उन्हें आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया था।
इस मामले पर कुलकर्णी ने कहा, ‘अदालत ने पुलिस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और मुझे राहत मिल गई है। मामला दर्ज होने के बाद मैंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का दरवाजा खटखटाया था। मेरे माता-पिता ने भी वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया था और पुलिस के इस व्यवहार को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।’
उन्होंने कहा, ‘यह बहुत ही खतरनाक ट्रेंड है, जहां सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलना चाहती है जबकि इसे बचाकर रखना चाहिए।’
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