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LEADING FROM THE FRONT: निर्भीक पत्रकारिता की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे सुधीर अग्रवाल
‘एक्सचेंज4मीडिया’ द्वारा शुरू किए गए ‘Leading From The Front’ कॉलम की सीरीज के तहत आज हम ‘दैनिक भास्कर कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (DB Corp Ltd) के एमडी सुधीर अग्रवाल के बारे में बात कर रहे हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
यह वर्ष 1984 की बात है, जब मध्य प्रदेश भोपाल गैस त्रासदी से जूझ रहा था, जिसने रातों-रात हजारों लोगों की जान ले ली थी। उस दौरान तत्कालीन राज्य सरकार की धमकियों का सामना करते हुए द्वारका प्रसाद अग्रवाल द्वारा संचालित ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) अखबार ने यह सुनिश्चित किया कि त्रासदी के बारे में पूरी कवरेज लोगों तक पहुंचनी चाहिए और कोई हिस्सा रिपोर्टिंग से छूट न जाए।
अखबार के मालिक और द्वारका प्रसाद के बेटे रमेश अग्रवाल पर दबाव बनाते हुए तमाम निहित ताकतों द्वारा गैस रिसाव की कवरेज अथवा अखबार के भविष्य के बीच किसी एक का चयन करने के लिए कहा गया। लेकिन, दैनिक भास्कर ने सिर्फ सच का साथ दिया और सही पक्ष को चुनते हुए निडरता के साथ अपनी कवरेज में जुटा रहा।
दशकों बाद वर्ष 2021 में द्वारका प्रसाद के पोते और रमेश अग्रवाल के बेटे सुधीर अग्रवाल ने दैनिक भास्कर की इसी विचारधारा और संस्कृति को दोहराते हुए महामारी की विस्तृत कवरेज की।
महामारी के दौरान जब अधिकांश मेनस्ट्रीम मीडिया विनाशकारी कोविड-19 के प्रभाव को नरम रूप से प्रचारित कर रहा था, तब दैनिक भास्कर सबसे आगे था, जो इस महामारी का सिलसिलेवार विवरण दे रहा था। दैनिक भास्कर द्वारा बड़े पैमाने पर जारी की गईं कुछ न्यूज रिपोर्ट्स सरकार के दावों से बिल्कुल अलग थीं।
जल्द ही दैनिक भास्कर पर टैक्स चोरी का आरोप लगा और भोपाल कार्यालय परिसर में छापेमारी की गई। तमाम लोगों का मानना था कि चूंकि दैनिक भास्कर ने महामारी की वास्तविकताओं से पर्दा उठाते हुए संपूर्ण कवरेज की है और यह कवरेज उन आंकड़ों से मेल नहीं खाती है, जिसे सरकार दिखाना चाहती थी, इसलिए ये छापे प्रतिशोध से प्रेरित थे।
'समाचार4मीडिया' की सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) द्वारा शुरू किए गए ‘Leading From The Front’ कॉलम की सीरीज के तहत आज हम ‘दैनिक भास्कर कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (DB Corp Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो समूह की निर्भीक पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
सुधीर अग्रवाल डीबी कॉर्प की स्थापना के बाद से कंपनी के बोर्ड में रहे हैं। न्यूजपेपर प्रिंटिंग और पब्लिकेशन में 30 वर्षों के अनुभव के साथ वह अपने भाइयों गिरीश अग्रवाल और पवन अग्रवाल के साथ संस्थान की प्रेरक शक्ति हैं। वह भोपाल स्थित मुख्यालय से यह मीडिया कंपनी चलाते हैं।
मूल रूप से ‘सुबह सवेरे’ (Subah Savere) नाम से दैनिक भास्कर को वर्ष 1948 में द्वारका प्रसाद द्वारा मध्य प्रदेश में एक हिंदी अखबार की जरूरत को पूरा करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। वर्ष 1958 में इसका नाम बदलकर ‘दैनिक भास्कर’ कर दिया गया। भोपाल गैस त्रासदी की अपनी बेहतरीन कवरेज से इस अखबार ने मध्य प्रदेश में तमाम टॉप पब्लिकेशंस को पीछे छोड़ दिया और राज्य के बाहर भी विस्तार करना शुरू कर दिया।
1995 तक आते-आते यह राज्य का नंबर वन और देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला दैनिक अखबार बन गया था। वर्तमान में इस पांच अखबारों और 61 एडिशंस के साथ इस पब्लिकेशन की पूरी देश में मौजूदगी है। इसकी पाठक संख्या छह करोड़ से अधिक है। इस समूह की डिजिटल शाखा, डीबी डिजिटल के हिंदी, गुजराती और मराठी में चार पोर्टल और तीन ऐप हैं। कंपनी की सफलता और विस्तार का अधिकांश श्रेय अग्रवाल और उनके अद्वितीय नेतृत्व को जाता है।
डीबी कॉर्प की ऑफिशियल वेबसाइट पर कहा गया है, ‘वह हमारे दीर्घकालिक विजन और हमारी कंपनी के प्रदर्शन की मॉनीटरिंग के साथ ही समग्र व्यावसायिक योजनाएं तैयार करने के लिए जिम्मेदार हैं। उनके गतिशील नेतृत्व और भविष्य के लिए स्पष्ट विजन के साथ कंपनी देश में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बनने की दिशा में आगे बढ़ी है।’
अग्रवाल के तेजतर्रार नेतृत्व का एक प्रमुख उदाहरण वर्ष 2005 में एक प्रमुख पब्लिकेशन के खिलाफ तख्तापलट है, जो 1,000 करोड़ रुपये के विज्ञापन बाजार की रक्षा करते हुए सबसे बड़े प्रिंट विज्ञापनदाता के रूप में शासन कर रहा था। मीडिया दिग्गज सुभाष चंद्रा के साथ जुड़ने के बाद अग्रवाल ने प्रतिद्वंद्वी पब्लिकेशन के प्रभुत्व वाले विज्ञापन बाजार पर दावा करने के लिए एक साहसिक कदम उठाया। इसके तहत वरिष्ठ पत्रकारों, दिग्गज मार्केटर्स, सेल्सपर्सन और डिस्ट्रीब्यूशन विशेषज्ञों के साथ अग्रवाल और चंद्रा ने डिलिजेंट मीडिया कॉर्प के तहत ‘डेली न्यूज एंड एनालिसिस’ (DNA) लॉन्च किया।
हालांकि, आक्रामक रणनीतियों ने दैनिक भास्कर की जबरदस्त वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन सुधीर अग्रवाल का मानना है कि पब्लिकेशन की वृद्धि का श्रेय पूरी तरह से पत्रकारिता की उत्कृष्ट गुणवत्ता को जाता है। उनके नेतृत्व में इस पब्लिकेशन ने वर्ष 2015 में ‘नो नेगेटिव मंडे’ (No Negative Monday) कैंपेन शुरू करके जिम्मेदार पत्रकारिता की दिशा में भी कदम उठाए। इसके तहत दैनिक भास्कर ने हर सोमवार के संस्करण में अच्छी खबर को पहले रखकर और नकारात्मक खबर को एक बॉक्स में रखकर सकारात्मक खबर को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
वर्ष 2004 में एक्सचेंज4मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में सुधीर अग्रवाल ने कहा था, ‘दैनिक भास्कर पूरी तरह से मार्केटिंग के कारण सफल है, यह एक बड़ी गलतफहमी है। इसके विपरीत, कंटेंट डेवलपमेंट पर हमारे मजबूत फोकस के कारण हमारे अखबार ने मौजूदा स्तर हासिल कर लिया है। मार्केटिंग संभावित पाठकों को ऑफर के द्वारा अपने साथ ला सकती है, लेकिन एक निष्ठावान पाठक वर्ग केवल प्रासंगिक सामग्री यानी बेहतर कंटेंट से ही बनता है। हम अपने पाठकों की संपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और समाचारों के स्थानीयकरण पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं। ये प्रयास समूह की सफलता का सार हैं।’
जहां तक संपादकीय नैतिकता का सवाल है, सुधीर अग्रवाल दैनिक भास्कर में भी सख्त रुख अपनाते हैं। उनका कहना है, ‘हमारे समाचार पत्र प्रोफेशनल्स द्वारा चलाए जाते हैं। परिवार का कोई भी सदस्य संपादकीय पद पर नहीं है। हम समाचारों में तटस्थता बनाए रखते हैं और यह पूरी तरह से पाठक केंद्रित हैं। हम किसी भी राजनीतिक दल के प्रति निष्ठा नहीं रखते हैं। वे आते हैं और चले जाते हैं। हमारी निष्ठा पाठकों के प्रति है।’ उनके कुशल नेतृत्व के कारण कंपनी को विश्लेषकों और निवेशक कम्युनिटी द्वारा सबसे तेजी से बढ़ते मीडिया समूहों में से एक माना जाता है।
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