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संसद में पत्रकारों की एंट्री सीमित करने पर एकजुट हुए पत्रकार, निकाला मार्च
कोविड के नाम पर संसद भवन परिसर में पत्रकारों की गतिविधियों को सीमित करने को लेकर गुरुवार को तमाम पत्रकार राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतर आए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
कोविड के नाम पर संसद भवन परिसर में पत्रकारों की गतिविधियों को सीमित करने को लेकर गुरुवार को तमाम पत्रकार राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। देशभर के प्रिंट और टीवी मीडिया के पत्रकारों ने गुरुवार को सरकार के खिलाफ प्रेस क्लब से संसद भवन तक पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में देशभर के कई नामचीन पत्रकार शामिल रहे।
पत्रकारों ने कहा कि स्वतंत्र मीडिया के बिना लोकतंत्र संभव नहीं है और इसलिए संसद भवन में पत्रकारों की एंट्री सुनिश्चित की जाए।
इस मार्च से पहले पत्रकारों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के दफ्तर में पत्रकारों के संगठनों की एक बैठक हुआ, जिसमें प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, प्रेस एसोसिएशन, इंडियन वुमेन्स प्रेस कोर, दिल्ली पत्रकार संघ और वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल रहे।
Restore the entry of journalists in the Parliament pic.twitter.com/fqWO0iKnd6
— Press Club of India (@PCITweets) December 2, 2021
प्रेस क्लब के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा का कहना है कि सरकार ने संसद की वास्तविक खबरों को बाहर न आने देने के लिए पत्रकारों के संसद की कार्यवाही कवर करने पर रोक लगा रखी है और केवल चुनिन्दा संगठनों के पत्रकारों को पास दे रही है।
पत्रकार संगठनों की यह भी मांग है कि लंबे समय तक संसद कवर करनेवाले पत्रकारों के विशेष स्थायी पास फिर से दिया जाए। जो उनके पेशे की गरिमा और सम्मान के अनुरूप है। फिलहाल सरकार ने इस पर भी रोक लगा रखी है। साथ ही जिन पत्रकारों को सत्र की पूरी अवधि के लिए जो पास बनते थे, उनके लिए भी पहले की तरह पास बनाएं जाएं ताकि वे सदन की कार्यवाही कवर कर सकें।
पत्रकारों ने यह भी मांग की है कि संसद के दोनों सदनों की प्रेस सलाहकार समितियों का नए सिरे से गठन किया जाए, क्योंकि दो साल से उनका गठन नहीं हुआ है।
वहीं बुधवार को राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले में एक पत्र लिखते हुए सभापति एम. वेंकैया नायडू से हस्तक्षेप की मांग की है। खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि संसद का यह लगातार पांचवां सत्र है, जब कुछ पत्रकारों और मीडिया संगठनों को ही संसद भवन परिसर में प्रवेश करने और सीमित पत्रकारों को ही सदनों की कार्यवाही की रिपोर्टिंग की अनुमति दी जा रही है। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकारों का केंद्रीय कक्ष में प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पत्रकारों को सांसदों से बातचीत करने से रोका जा रहा है। पत्रकारों को लोकतंत्र के इस मंदिर में मनमाने प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष के नेता ने कहा कि सत्र के दौरान की राजनीति की नब्ज संसद में होती है और मीडिया ने हमेशा देशवासियों को संसद में चल रहे ज्वलंत मुद्दों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि संसद में कोविड मानकों का पालन होना चाहिए लेकिन पत्रकारों को केंद्रीय कक्ष और पुस्तकालय तथा अन्य प्रमुख स्थानों पर जाने से रोका जाना स्वीकार्य नहीं है। पत्रकारों को अपने कर्तव्य पालन से रोका नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘आपसे अनुरोध है कि इस मामले में हस्तक्षेप करें जिससे पत्रकार प्रतिबंधों से पूर्व की भांति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।’
वहीं गुरुवार को टीएमसी ने संसद में मीडिया को प्रतिबंधित करने के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की। पार्टी ने संसद की कार्यवाही को कवर करने के लिए मीडिया को सभी सुविधाएं तत्काल बहाल करने का आह्वान किया। पार्टी ने एक बयान में इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह का प्रतिबंध लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
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