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इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा ने कहा, कभी नहीं भूलूंगा 25 जून की वह 'काली रात'
देश में 21 महीनों तक इमरजेंसी लागू रही। 45 साल पहले लगी देश में लगी इस इमरजेंसी का दर्द आज भी लोगों के जहन में ताजा हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
देश में आज ही के दिन पहली बार इमरजेंसी लगी थी। 25 जून 1975 की आधी रात तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस समय के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तखत लेकर इमरजेंसी की घोषणा कर दी। कैबिनेट से चर्चा किए बगैर ये घोषणा की गई। तीन घंटों के भीतर तमाम अखबारों की बिजली काट दी गई और विरोधी नेताओं की धरपकड़ शुरू कर दी गई। इंदिरा गांधी की सरकार ने तमाम नेताओं को अलग-अलग जेलों में बंद कर दिया, लेकिन कुछ नेता ऐसे भी थे, जिन्होंने वेश बदलकर सरकार को चकमा दिया और भूमिगत हो गए। 26 जून की सुबह 7 बजे इंदिरा ने ऑल इंडिया रेडियो के जरिये जनता को संबोधित कर आपातकाल लगाने के फैसले के बारे में बताया। देश में 21 महीनों तक आपातकाल लागू रहा। 45 साल पहले देश में लगी इस इमरजेंसी का दर्द आज भी लोगों के जहन में ताजा हैं। इनमें से ही एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा हैं।
ट्विटर के जरिये उन्होंने इमरजेंसी के दौर को याद करते हुए अपने दर्द को साझा किया है और बताया कि कैसे उस दौर में लोगों के मौलिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘45 साल पहले की 25 जून की काली रात कभी नहीं भूलेगी। इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए इमरजेंसी लगाई। सारे विरोधी नेताओं को जेल भेजा। अख़बारों की आज़ादी छीन ली। जबरन नसबंदियां हुईं। थानों में जुल्म हुए। सब कुछ याद है।’
45 साल पहले की 25 जून की काली रात कभी नहीं भूलेगी. इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए इमर्जेन्सी लगाई. सारे विरोधी नेताओं को जेल भेजा. अख़बारों की आज़ादी छीन ली. ज़बरन नसबंदियाँ हुईं. थानों में ज़ुल्म हुए. सब कुछ याद है. #Emergency
— Rajat Sharma (@RajatSharmaLive) June 25, 2020
उन्होंने आगे लिखा, ‘जब इमरजेंसी लगी मैं कॉलेज में था, उम्र बस 18 साल। जयप्रकाश आंदोलन में सक्रिय था। कुछ महीने अंडरग्राउंड रहकर अखबार निकाला। पकड़े गये। पुलिस ने बहुत पिटाई की। आज भी पैरों पर मार के निशान है। कई महीने जेल में रहा। सब याद है।’
जब इमर्जेन्सी लगी मैं कॉलेज में था,उम्र बस 18 साल. जयप्रकाश आंदोलन में सक्रिय था. कुछ महीने अंडरग्राउंड रह कर अख़बार निकाला. पकड़े गये. पुलिस ने बहुत पिटाई की. आज भी पैरों पर मार के निशान है. कई महीने जेल में रहा. सब याद है. #Emergency
— Rajat Sharma (@RajatSharmaLive) June 25, 2020
रजत शर्मा यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते इमरजेंसी में कैसा खौफ था। उस वक्त न प्राइवेट टीवी था, न सोशल मीडिया। लाखों लोग जेल में थे। अख़बारों पर सेंसर, अदालतों के गले में फंदा, पुलिस के जुल्म, न बोलने की आजादी, न कोई अधिकार। सब याद है।’
आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते इमर्जेन्सी में कैसा ख़ौफ़ था. उस वक्त न प्राइवेट टीवी था,न सोशल मीडिया. लाखों लोग जेल में थे.अख़बारों पर सेंसर, अदालतों के गले में फंदा, पुलिस के ज़ुल्म, न बोलने की आज़ादी, न कोई अधिकार. सब याद है. #Emergency
— Rajat Sharma (@RajatSharmaLive) June 25, 2020
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