राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश (Harivansh) ने नई दिल्ली में भारतीय लोकतंत्र के 75 वर्षों पर आधारित पुस्तक '75 Years of Indian Democracy' और दो शोध पत्रिकाओं का विमोचन किया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राज्यसभा (Rajya Sabha) के उपसभापति श्री हरिवंश (Harivansh) ने नई दिल्ली (New Delhi) स्थित अपने सरकारी आवास पर भारतीय लोकतंत्र और चुनावी इतिहास पर आधारित पुस्तक '75 Years of Indian Democracy: The Indian Election Story in Facts & Figures (1950–2025)' का विमोचन किया। इस अवसर पर 'इंडियन जर्नल ऑफ इलेक्टोरल स्टडीज़ (Indian Journal of Electoral Studies-IJES)' और 'इंडियन जर्नल ऑफ सोशियो-इकोनॉमिक स्टडीज़ (Indian Journal of Socio-Economic Studies-IJSES)' के प्रथम अंकों का भी लोकार्पण किया गया।
इंडियास्टैट पब्लिकेशन्स (Indiastat Publications) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक वर्ष 1950 से 2025 तक भारत की लोकतांत्रिक और निर्वाचन यात्रा का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करती है। इसमें लोकसभा चुनावों के सांख्यिकीय आंकड़े, ऐतिहासिक घटनाक्रम, निर्वाचन क्षेत्रवार जानकारी, विषयगत विश्लेषण, मानचित्र और चित्रात्मक प्रस्तुतियां शामिल हैं। पुस्तक में 1951-52 के पहले आम चुनाव से लेकर प्रत्येक लोकसभा चुनाव का क्रमबद्ध विवरण दिया गया है।
प्रकाशन को अद्यतन बनाए रखने के लिए इसमें जनवरी से जून 2026 के दौरान हुए प्रमुख चुनावी और राजनीतिक घटनाक्रमों का एक परिशिष्ट (Addendum) भी जोड़ा गया है। इससे यह पुस्तक भारतीय चुनावी इतिहास और लोकतांत्रिक विकास से जुड़े शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बन गई है।
विमोचित शोध पत्रिकाओं में 'इंडियन जर्नल ऑफ इलेक्टोरल स्टडीज़ (IJES)' निर्वाचन प्रणाली, लोकतांत्रिक संस्थाओं, मतदान व्यवहार, निर्वाचन सुधार और तुलनात्मक चुनावी अध्ययनों पर शोध को बढ़ावा देगी। वहीं 'इंडियन जर्नल ऑफ सोशियो-इकोनॉमिक स्टडीज़ (IJSES)' अर्थव्यवस्था, समाज, शासन, लोकनीति और सतत विकास जैसे विषयों पर साक्ष्य-आधारित शोध के लिए मंच उपलब्ध कराएगी।
इस अवसर पर हरिवंश (Harivansh) जी ने कहा कि गंभीर शोध, प्रलेखन और तथ्य-आधारित अध्ययन को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी पहलें लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार, सात दशकों से अधिक के चुनावी इतिहास को एक ही ग्रंथ में समेटने वाला यह प्रकाशन शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और भावी पीढ़ियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री साबित होगा।
इंडियास्टैट पब्लिकेशन्स (Indiastat Publications) के निदेशक एवं पुस्तक तथा दोनों शोध पत्रिकाओं के संपादक डॉ. आर. के. ठुकराल (Dr. R. K. Thukral) ने कहा कि यह पहल शोध समुदाय, शैक्षणिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और आम पाठकों तक प्रामाणिक चुनावी एवं सामाजिक-आर्थिक आंकड़े और शोध सामग्री पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इन प्रकाशनों के विमोचन और शोधपरक पहलों को प्रोत्साहन देने के लिए हरिवंश (Harivansh) जी का आभार व्यक्त किया।
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार टाइम्स नाउ नवभारत के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर सुमित अवस्थी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार टाइम्स नाउ नवभारत के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर सुमित अवस्थी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' देश के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक प्रमुख मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और बेहतरीन कार्य के दम पर पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस अवसर पर देशभर से चयनित 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सुमित अवस्थी का विशेष संबोधन होगा। मीडिया जगत में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले सुमित अवस्थी पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य, नेतृत्व और मीडिया की नई चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक होने के साथ-साथ उन्हें नई दिशा देने वाला भी होगा।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
समाचार4मीडिया का 's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के वरिष्ठ मीडिया पेशेवरों से सीखने और संवाद का अवसर भी देता है।
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जानिए, कौन हैं सुमित अवस्थी
टीवी न्यूज की दुनिया के जाने-माने चेहरे और सीनियर न्यूज एंकर सुमित अवस्थी वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। टाइम्स नेटवर्क से पहले वह ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में थे। उन्होंने करीब ढाई साल से ‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) में बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभाई और 'हम भारत के लोग' व ‘खबरों की खबर’ नाम से शो होस्ट किया।
सुमित अवस्थी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब ढाई दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। ‘एनडीटीवी’ में जुलाई 2023 में अपनी पारी शुरू करने से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ में वाइस प्रेजिडेंट (न्यूज व प्रॉडक्शन) के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। सुमित अवस्थी ने वर्ष 2018 में ‘एबीपी न्यूज’ में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) में डिप्टी मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह ‘जी न्यूज’ (Zee News) में रेजिडेंट एडिटर भी रह चुके हैं।
सुमित अवस्थी करीब पांच साल तक ‘आजतक’ (Aaj Tak) में भी रह चुके हैं। यहां वह डिप्टी एडिटर के तौर पर कार्यरत थे। सुमित राजनीति में अच्छी पकड़ और बेहतर रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अब तक ‘दादा साहेब फाल्के एक्सीलेंस अवॉर्ड‘ और ‘माधव ज्योति अवॉर्ड‘ समेत प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) से भी नवाजा जा चुका है।
सुमित अवस्थी का जन्म लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में हुआ है। केंद्रीय विद्यालय, इंदौर से अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने इंदौर में ही ‘होलकर साइंस कॉलेज’ से ग्रेजुएशन की है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित ‘भारतीय विद्या भवन‘ से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आईपीओ से पहले बड़ा नेतृत्व बदलाव किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आईपीओ से पहले बड़ा नेतृत्व बदलाव किया है। कंपनी ने पंकज पवार को नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने किरण थॉमस की जगह ली है। इस बदलाव की जानकारी कंपनी के ड्राफ्ट आईपीओ दस्तावेजों के हवाले से सामने आई है।
पंकज पवार फिलहाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) भी हैं। अब वह जियो प्लेटफॉर्म्स के CEO की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। माना जा रहा है कि कंपनी के आईपीओ की तैयारियों के बीच यह नियुक्ति एक अहम कदम है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 34,000 करोड़ रुपये) जुटाने के लिए आईपीओ लाने की योजना पर काम कर रही है। यह भारत के सबसे बड़े संभावित आईपीओ में से एक माना जा रहा है।
कंपनी की ओर से अभी इस नियुक्ति और आईपीओ की समयसीमा को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, उद्योग जगत का मानना है कि नए नेतृत्व के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ रणनीति और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
संचित कश्यप इससे पहले टीवी टुडे नेटवर्क के लोकप्रिय हिंदी डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'द लल्लनटॉप' में करीब दो साल तक जुड़े रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री के अनुभवी सेल्स प्रोफेशनल संचित कश्यप ने इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जॉइन कर लिया है। उन्हें सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और डिजिटल वीडियो मॉनेटाइजेशन के हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नई भूमिका में वह समूह के डिजिटल वीडियो बिजनेस और उससे होने वाली कमाई (मॉनेटाइजेशन) को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे।
संचित कश्यप इससे पहले टीवी टुडे नेटवर्क के लोकप्रिय हिंदी डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'द लल्लनटॉप' में करीब दो साल तक जुड़े रहे। यहां उन्होंनेनेशनल सेल्स (ब्रैंड सॉल्यूशंस) के हेड के रूप में काम किया। इससे पहले वह लल्लनटॉप इम्पैक्ट में जनरल मैनेजर की भूमिका भी निभा चुके हैं।
लल्लनटॉप से पहले संचित कश्यप करीब तीन साल तक NDTV में सेल्स के वाइस प्रेजिडेंट रहे। इसके अलावा उन्होंने मैजिकपिन में जनरल मैनेजर और नेशनल वर्टिकल हेड के तौर पर भी काम किया। वहीं, टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क में उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक सेवाएं दीं, जहां टाइम्स नाउ और ET नाउ के लिए उत्तर भारत में कंटेंट मार्केटिंग सेल्स की जिम्मेदारी संभाली।
उनके करियर की शुरुआत CNBC TV18 की स्पेशल इवेंट्स टीम 'फोकस' से हुई थी। इसके बाद उन्होंने NDTV Media में बिजनेस इवेंट्स और कस्टमाइज्ड सॉल्यूशंस, Zee Entertainment में ज़ी टीवी के विज्ञापन बिक्री विभाग सहित कई बड़ी मीडिया कंपनियों में अहम भूमिकाएं निभाईं। पिछले दो दशकों में उन्होंने विज्ञापन बिक्री, ब्रांड सॉल्यूशंस और मीडिया बिजनेस से जुड़े कई क्षेत्रों में काम किया है।
लल्लनटॉप से विदाई के दौरान संचित कश्यप ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश भी साझा किया। उन्होंने उन्हें यह जिम्मेदारी देने के लिए गौरव वर्मा का आभार जताया और अपने सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने अपने सफर को यादगार बताते हुए टीम के साथ बिताए पलों और पोस्ट-इवेंट सेलिब्रेशन का भी जिक्र किया। अंत में उन्होंने लल्लनटॉप की चर्चित टैगलाइन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्ता आगे भी बना रहेगा।
इंडियन एक्सप्रेस में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मीडिया कंपनियां डिजिटल वीडियो कारोबार और उससे होने वाली आय पर तेजी से फोकस कर रही हैं। ऐसे में संचित कश्यप का लंबा अनुभव समूह की डिजिटल रणनीति को नई मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल मीडिया और इवेंट्स क्षेत्र से जुड़ी कंपनी SAB Events & Governance Now Media Limited को बड़ी राहत मिली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया और इवेंट्स क्षेत्र से जुड़ी कंपनी SAB Events & Governance Now Media Limited को बड़ी राहत मिली है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई ने कंपनी के प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (PPIRP) के तहत पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही श्री अधिकारी ब्रदर्स समूह की अगुवाई में कंपनी के पुनर्गठन और कारोबार को नई दिशा देने का रास्ता साफ हो गया है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि NCLT ने 10 जुलाई को अपने आदेश में इस रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी। योजना के तहत कंपनी में नई पूंजी का निवेश किया जाएगा, कर्ज का पुनर्गठन होगा और कारोबार को फिर से मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे।
रेजोल्यूशन प्लान के अनुसार कंपनी में करीब 32.62 करोड़ रुपये की नई पूंजी लाई जाएगी। यह निवेश Sri Adhikari Brothers Assets Holding Pvt. Ltd., Sri Adhikari Brothers Digital Network Pvt. Ltd. और अन्य रणनीतिक व वित्तीय निवेशकों के माध्यम से किया जाएगा।
योजना के तहत Sri Adhikari Brothers Digital Network Pvt. Ltd. का SAB Events & Governance Now Media Limited के साथ विलय प्रस्तावित है। हालांकि यह विलय कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत तय कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रभावी होगा। विलय के बाद कंपनी का नाम Sri Adhikari Brothers Digital Network Limited रखा जाएगा।
कंपनी ने बताया कि वह 'Governance Now' ब्रांड के तहत डिजिटल मीडिया और इवेंट्स (MICE) कारोबार संचालित करती है। कोविड-19 महामारी के दौरान इवेंट कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ, विज्ञापन और प्रायोजन से होने वाली आय में गिरावट आई और कंपनी वित्तीय संकट में पहुंच गई। इसी वजह से कंपनी ने प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रक्रिया का सहारा लिया था।
रेजोल्यूशन प्लान के तहत परिचालन लेनदारों (Operational Creditors) का बकाया 100 प्रतिशत चुकाया जाएगा, जबकि वित्तीय लेनदारों को स्वीकृत योजना के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी की शेयरहोल्डिंग और पूंजी संरचना में भी बदलाव होगा तथा नए निवेशकों को शेयर आवंटित किए जाएंगे। हालांकि कंपनी की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई पर पहले की तरह जारी रहेगी।
NCLT ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि रेजोल्यूशन प्लान सभी संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होगा। इसके क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी, जो योजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू कराएगी।
NCLT की मंजूरी के साथ अब SAB Events & Governance Now Media Limited के पुनर्गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी। कंपनी को उम्मीद है कि नई पूंजी, बेहतर वित्तीय ढांचे और कारोबारी पुनर्गठन के जरिए वह भविष्य में अपनी स्थिति को और मजबूत बना सकेगी।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के पिता नंद किशोर गोयनका का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के पिता नंद किशोर गोयनका का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।
डॉ. सुभाष चंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पिता के निधन की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, "आज सुबह हमारे प्रिय पिता नंद किशोर गोयनका ने अंतिम सांस ली। परिवार के सभी सदस्य दुखी हैं, लेकिन मेरी इच्छा है कि हम उनके 96 वर्षों के जीवन का उत्सव मनाएं, जो समाज सेवा, गौ सेवा और राष्ट्रीय सेवा को समर्पित रहा। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक भी थे।"
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नंद किशोर गोयनका के पार्थिव शरीर को मुंबई से हरियाणा ले जाया जाएगा। फिलहाल पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित आवास पर रखा गया है। अंतिम दर्शन के बाद बुधवार सुबह हरियाणा के अग्रोहा स्थित गोयनका उद्यान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
नंद किशोर गोयनका अपने सामाजिक कार्यों, गौ सेवा और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
बता दें कि डॉ. सुभाष चंद्रा के अलावा नंद किशोर गोयनका के तीन बेटे नंद लक्ष्मी गोयल, जवाहर गोयल और अशोक गोयल और हैं। सभी मीडिया के बिजनेस में बड़ा नाम हैं।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनी 'हेड डिजिटल वर्क्स' (Head Digital Works) ने सुप्रीम कोर्ट में दो अहम फैसलों पर पुनर्विचार (रिव्यू) की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनी 'हेड डिजिटल वर्क्स' (Head Digital Works) ने सुप्रीम कोर्ट में दो अहम फैसलों पर पुनर्विचार (रिव्यू) की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं। कंपनी का कहना है कि 27 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के दोनों फैसलों में ऐसे कानूनी पहलू हैं, जिनमें स्पष्ट त्रुटियां हैं। इन फैसलों का असर सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टैक्स व्यवस्था, संवैधानिक कानून और यहां तक कि पारंपरिक खेलों पर भी पड़ सकता है।
कंपनी ने संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत दो अलग-अलग रिव्यू याचिकाएं दाखिल की हैं। पहली याचिका ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी लगाने संबंधी फैसले को चुनौती देती है, जबकि दूसरी याचिका तमिलनाडु और कर्नाटक के ऑनलाइन गेमिंग कानूनों को संवैधानिक रूप से सही ठहराने वाले फैसले पर पुनर्विचार की मांग करती है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस सप्ताह कई अन्य ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां भी सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह की रिव्यू याचिकाएं दाखिल करेंगी।
याचिकाओं में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्किल गेम्स (कौशल आधारित खेल) और जुए के बीच वर्षों से चले आ रहे कानूनी अंतर को नजरअंदाज कर दिया है। साथ ही जीएसटी कानून की गलत व्याख्या की गई है, विधायी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया और ऐसे कानूनी सिद्धांत स्थापित कर दिए गए हैं जिनका असर गेमिंग सेक्टर से कहीं आगे तक जा सकता है।
दोनों याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि इन मामलों की सुनवाई खुली अदालत (ओपन कोर्ट) में की जाए। कंपनी का कहना है कि यदि इन फैसलों पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो इससे गंभीर न्यायिक अन्याय होगा।
GST पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
पहली रिव्यू याचिका सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है जिसमें ऑनलाइन गेमिंग पर लागू जीएसटी व्यवस्था को संवैधानिक रूप से सही माना गया था। इस फैसले में गेम्सक्राफ्ट समेत कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
27 मई के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन ऑनलाइन गेम्स में पैसे दांव पर लगाए जाते हैं, उन्हें जीएसटी के उद्देश्य से बेटिंग और गैंबलिंग माना जाएगा, चाहे वह खेल कौशल आधारित हो या किस्मत पर आधारित। अदालत ने सीजीएसटी एक्ट, 2017 की कई धाराओं और नियमों को वैध ठहराया था। साथ ही 2023 में ऑनलाइन गेमिंग के लिए बनाए गए नए टैक्स नियमों को स्पष्ट करने वाला संशोधन बताते हुए उन्हें पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू माना था। अदालत ने यह भी कहा था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ नहीं बल्कि "एक्शनेबल क्लेम" के सप्लायर हैं और लंबित कारण बताओ नोटिसों का निपटारा नियम 31B के तहत किया जाए।
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि इन सभी निष्कर्षों में गंभीर कानूनी खामियां हैं और इन पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
'बेटिंग और गैंबलिंग' की परिभाषा बदलने का आरोप
कंपनी का सबसे बड़ा तर्क यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने "बेटिंग और गैंबलिंग" की संवैधानिक परिभाषा ही बदल दी है।
याचिका के अनुसार, अदालत ने यह मान लिया कि जिस भी गतिविधि में किसी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगाया जाता है, वह बेटिंग और गैंबलिंग है, चाहे वह पूरी तरह कौशल आधारित खेल ही क्यों न हो।
कंपनी का कहना है कि यह व्याख्या सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पुराने फैसलों, जैसे State of Bombay v. R.M.D. Chamarbaugwala, R.M.D. Chamarbaugwala v. Union of India और Dr. K.R. Lakshmanan v. State of Tamil Nadu के विपरीत है। इन फैसलों में स्पष्ट कहा गया था कि यदि किसी खेल में कौशल की भूमिका प्रमुख है तो वह संवैधानिक रूप से संरक्षित व्यवसाय है, भले ही उसमें पैसे लगाए जाएं।
याचिका में कहा गया है कि संविधान पीठ के फैसलों से अलग राय केवल बड़ी संविधान पीठ ही दे सकती थी, दो न्यायाधीशों की पीठ नहीं।
कंपनी का दावा है कि इस फैसले से स्किल गेम और चांस गेम के बीच का कानूनी अंतर लगभग समाप्त हो गया है, जबकि यही अंतर भारतीय गेमिंग कानून की बुनियाद रहा है।
फैसले का असर पारंपरिक खेलों पर भी पड़ सकता है
हेड डिजिटल वर्क्स ने कहा है कि इस फैसले का असर सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग तक सीमित नहीं रहेगा।
याचिका में कहा गया है कि क्रिकेट, टेनिस और अन्य प्रतियोगी खेलों में खिलाड़ी एंट्री फीस जमा करते हैं और उसी से पुरस्कार राशि तैयार होती है। चूंकि किसी भी खेल का नतीजा पहले से तय नहीं होता, इसलिए अदालत की व्याख्या के अनुसार इन्हें भी बेटिंग और गैंबलिंग की श्रेणी में रखा जा सकता है। इससे पारंपरिक खेलों में निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
कंपनी का कहना है कि अदालत ने यह मान लिया कि किसी भी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगाना अपने आप में सार्वजनिक नैतिकता के खिलाफ है, जबकि कौशल आधारित प्रतियोगिताओं की प्रकृति पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
'एक्शनेबल क्लेम' की व्याख्या पर भी सवाल
कंपनी ने जीएसटी कानून में "एक्शनेबल क्लेम" की व्याख्या पर भी सवाल उठाए हैं।
याचिका में कहा गया है कि अदालत ने यह मान लिया कि जैसे ही खिलाड़ी एंट्री फीस जमा करता है, उसी समय एक्शनेबल क्लेम बन जाता है। जबकि कंपनी का कहना है कि ऐसा दावा तभी बन सकता है जब प्रतियोगिता पूरी हो जाए और विजेता तय हो जाए।
कंपनी ने अदालत के सामने तीन सवाल भी उठाए हैं—
प्रतियोगिता शुरू होने के समय एक्शनेबल क्लेम किसके पास होता है?
नतीजा आने से पहले यह दावा किसके खिलाफ होता है?
यदि तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से खेल रद्द हो जाए तो उस स्थिति में क्या होगा?
कंपनी का कहना है कि इन सवालों पर विचार किए बिना अदालत ने गलत निष्कर्ष निकाला।
'प्लेटफॉर्म सिर्फ सुविधा देते हैं, सप्लायर नहीं'
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता कराने का माध्यम होते हैं। वे न तो खेल में हिस्सा लेते हैं और न ही विजेता तय करते हैं।
कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म खिलाड़ियों की जीत की राशि के मालिक कभी नहीं बनते। ऐसे में उन्हें "एक्शनेबल क्लेम" का सप्लायर नहीं माना जा सकता।
'सप्लाई' की व्याख्या भी गलत
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी कानून की धारा 7 के तहत "सप्लाई" शब्द की गलत व्याख्या की है।
कंपनी का कहना है कि अदालत ने केवल किसी अधिकार के बनने को ही वस्तु की सप्लाई मान लिया, जबकि जीएसटी कानून में अधिकारों के हस्तांतरण और वस्तुओं के हस्तांतरण के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है।
2023 के GST संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू करने पर आपत्ति
कंपनी ने 2023 में किए गए जीएसटी संशोधनों को भी चुनौती दी है।
उसका कहना है कि इन संशोधनों के जरिए "ऑनलाइन गेमिंग", "ऑनलाइन मनी गेमिंग" और "स्पेसिफाइड एक्शनेबल क्लेम" जैसी नई परिभाषाएं जोड़ी गईं और टैक्स की गणना का नया तरीका बनाया गया। इसलिए इन्हें केवल स्पष्टीकरण नहीं कहा जा सकता और न ही इन्हें पुराने मामलों पर लागू किया जा सकता है।
रूल 31A पर भी उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि रूल 31A ऑनलाइन गेमिंग के लिए टैक्स की सही वैल्यू तय करने का कोई स्पष्ट तरीका नहीं देता था। बाद में रूल 31B के जरिए पूरी तरह नई व्यवस्था बनाई गई। ऐसे में रूल 31B पुराने नियमों की कमियों को पूर्व प्रभाव से दूर नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 14 का भी हवाला
कंपनी ने कहा है कि ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के साथ अलग व्यवहार कर अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
याचिका के मुताबिक सामान्य तौर पर जीएसटी वास्तविक लेनदेन मूल्य पर लगता है, लेकिन ऑनलाइन गेमिंग के लिए अलग मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है, जिस पर अदालत ने पर्याप्त विचार नहीं किया।
ऑनलाइन गेमिंग कानूनों पर भी मांगा पुनर्विचार
जीएसटी विवाद के अलावा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी पुनर्विचार मांगा है, जिसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के ऑनलाइन गेमिंग कानूनों को वैध माना गया था।
इस फैसले में मद्रास हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के उन आदेशों को पलट दिया गया था, जिनमें स्किल गेम्स पर दांव लगाने को अपराध बनाने वाले प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था।
कंपनी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने संवैधानिक फैसलों की अनदेखी की और मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे बिना अलग निष्कर्ष दे दिया।
'Res Extra Commercium' पर भी सवाल
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार यह माना कि किसी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगते ही वह गतिविधि व्यवसाय के दायरे से बाहर हो जाती है, चाहे उसमें कौशल की भूमिका कितनी भी अधिक क्यों न हो।
कंपनी के अनुसार, यदि यह सिद्धांत लागू रहा तो इसका असर बीमा, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और फॉरवर्ड मार्केट जैसे कई वैध कारोबारी क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
संघीय ढांचे और विधायी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं देखा कि ऑनलाइन गेमिंग डिजिटल नेटवर्क के जरिए संचालित होती है, जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि संसद द्वारा बनाए गए Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 (PROGA) से जुड़े संवैधानिक सवाल पहले से सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के सामने लंबित हैं। ऐसे में राज्यों के कानूनों को वैध ठहराने से पहले इन पहलुओं पर विस्तार से विचार होना चाहिए था।
तमिलनाडु कानून को लेकर भी आपत्ति
हेड डिजिटल वर्क्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के तमिलनाडु कानून की वैधता पर विचार किया, जबकि बाद में 2023 का नया कानून लागू हो चुका था।
कंपनी का कहना है कि मद्रास हाईकोर्ट ने 2023 के कानून की अलग से समीक्षा करते हुए रम्मी और पोकर को चांस गेम की श्रेणी से बाहर रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस तर्क पर अलग से विचार नहीं किया।
खुली अदालत में सुनवाई की मांग
दोनों रिव्यू याचिकाओं में हेड डिजिटल वर्क्स ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इन मामलों की सुनवाई चैंबर में नहीं बल्कि खुली अदालत में की जाए।
कंपनी का कहना है कि यह मामला सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग तक सीमित नहीं है। इसका असर देश की जीएसटी व्यवस्था, डिजिटल स्किल गेमिंग उद्योग और संवैधानिक कानून की भविष्य की दिशा पर भी पड़ेगा।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की जोधपुर इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। टीम में युवा पत्रकार दीक्षित परिहार को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (Indian Federation of Working Journalists-IFWJ) की जोधपुर इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। अध्यक्ष प्रदीप जोशी के नेतृत्व में गठित नई टीम में युवा पत्रकार दीक्षित परिहार को सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दीक्षित परिहार के सचिव नियुक्त होने की घोषणा के बाद जोधपुर में उनके समर्थकों, शुभचिंतकों और युवा साथियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समर्थकों ने केक काटकर खुशी मनाई तथा पुष्पमालाएं पहनाकर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर दीक्षित परिहार ने संगठन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन पर जताए गए विश्वास पर वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के हितों की रक्षा, संगठन को मजबूत बनाने और निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।
कार्यक्रम में मौजूद साथियों ने दीक्षित परिहार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व, सक्रियता और समर्पण से संगठन को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हर बार की तरह इस बार भी हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हर बार की तरह इस बार भी हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' मीडिया जगत के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक बड़ा मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट काम के दम पर पत्रकारिता की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। इस समारोह में देशभर से चुने गए 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस बार कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर का विशेष संबोधन होगा। मीडिया इंडस्ट्री में लंब अनुभव रखने वाली शशि शेखर अपने अनुभव, नेतृत्व और पत्रकारिता के बदलते दौर पर युवाओं से अपने विचार साझा करेंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक और मार्गदर्शक साबित होगा।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
समाचार4मीडिया का 's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के सीनियर मीडिया प्रोफेशनल्स से सीखने और संवाद का अवसर भी देता है।
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
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जानिए, कौन हैं वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर
हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर, हिंदी पत्रकारिता जगत में एक ऐसा नाम हैं, जो अपने काम और प्रोफेशनल नजरिए के लिए जाने जाते हैं।। पत्रकारिता में उन्हें 40 साल से भी ज्यादा का लंबा अनुभव हो गया है।
आज कल जिस उम्र में लोग करियर की शुरुआत करते हैं, उस उम्र में उन्होंने वह गौरव हासिल किया, जहां तक पहुंचने की चाहत लेकर पत्रकारिता से जुड़े अधिकांश युवा इस इंडस्ट्री में आते हैं। यानी महज 24 वर्ष की आयु में वे 'आज' अखबार का संपादक बने और फिर संपादक के तौर पर पहले 'आज', फिर 'आजतक' न्यूज चैनल, हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' और फिर 'हिन्दुस्तान' के समूह संपादक बन गए। इन दिनों वे 'हिन्दुस्तान' के प्रधान संपादक के तौर पर कार्यरत हैं।
30 जून 1960 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी के गांव चंदीकारा में जन्मे शशि शेखर ने आगरा के बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से हिंदी, संस्कृत, इंग्लिश और इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में स्नातकोत्तर किया। शशि शेखर ने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी हासिल किया है। 1980 में उन्होंने पत्रकारिता में कदम रखा।
शशि शेखर को 40 साल की पत्रकारिता का अनुभव है। वे प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन तीनों विधाओं में माहिर हैं। उनके करिअर की शुरुआत 1980 में वाराणसी के प्रसिद्ध दैनिक ‘आज’ से हुई। वर्ष 1984 में वे ‘आज’ अखबार के रेजिडेंट एडिटर बनाये गये। उन्होंने यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश में ‘आज’ अखबार का विस्तार किया। महज 24 साल की उम्र में वे आज अखबार के संपादक बन गए। वे ‘आज’ के इलाहाबाद और आगरा संस्करण के संपादक रहे। इसके बाद जनवरी 2001 से जुलाई 2002 तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कदम रखा और 'आजतक' न्यूज चैनल के साथ काम किया। वहां डेढ़ साल रहने के बाद वे वापस प्रिंट मीडिया में आ गए और इस बार उन्होंने अमर उजाला मेरठ में कार्यकारी संपादक का कार्यभार संभाला। पत्रकारिता तथा समाचारपत्र प्रबंधन में उनकी कार्यकुशलता से प्रभावित होकर अमर उजाला मैनेजमेंट ने उनको ग्रुप एडिटर और प्रेजिडेंट (न्यूज) नियुक्त किया। वे जुलाई 2002 से सितंबर 2009 तक 'अमर उजाला' अखबार में इस पद पर बने रहे। फिर सितंबर 2009 में वे ‘हिन्दुस्तान’ के साथ ‘नंदन’, ‘कांदबिनी’ और ‘लाइव हिंदुस्तान डॉट काम’ के मुख्य संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्हें ‘हिन्दुस्तान’ का प्रधान संपादक बनाया गया।
शशि शेखर के बारे में कहा जाता है कि वे काम करते हुए कभी थकते नहीं हैं। अपनी इस असीम ऊर्जा से वे अपने अधीन कार्यरत सहकर्मियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में इस बार 'आजतक', 'इंडिया टुडे' व 'गुड न्यूज टुडे' के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सुप्रिय प्रसाद प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में इस बार 'आजतक', 'इंडिया टुडे' व 'गुड न्यूज टुडे' के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सुप्रिय प्रसाद प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से यह प्रतिष्ठित अवार्ड समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' मीडिया जगत के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक बड़ा मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट काम के दम पर पत्रकारिता की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। इस समारोह में देशभर से चुने गए 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस बार कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण सुप्रिय प्रसाद का विशेष संबोधन होगा। मीडिया इंडस्ट्री में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाली सुप्रिय प्रसाद अपने अनुभव, नेतृत्व और पत्रकारिता के बदलते दौर पर युवाओं से अपने विचार साझा करेंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक और मार्गदर्शक साबित होगा।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
समाचार4मीडिया का 's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के वरिष्ठ मीडिया पेशेवरों से सीखने और संवाद का अवसर भी देता है।
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
अगर आप भी इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं या इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। इच्छुक प्रतिभागी इसी लिंक के माध्यम से अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं-
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जानिए, कौन हैं सुप्रिय प्रसाद
हर दिन दौड़ती-चिल्लाती, कभी-कभी भ्रम फैलाती भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में सुप्रिय प्रसाद एक ऐसे प्रकाशस्तंभ की तरह खड़े हैं, जो न शोर से डगमगाते हैं, न टीआरपी की आंधियों से हिलते हैं।
तीन दशकों से भी अधिक समय तक पत्रकारिता की इस यात्रा में सुप्रिय प्रसाद सिर्फ घटनाओं को रिपोर्ट नहीं करते, वे उन्हें अर्थ देते हैं, उनमें संदर्भ भरते हैं और देश को एक आईना दिखाते हैं- एक ऐसा आईना जो सच्चाई को न तो तोड़ता है, न मरोड़ता है।
झारखंड के दुमका से दिल्ली तक की यात्रा
दुमका में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मां के इलाज के लिए वे पटना आए और पत्रकारों की संगत में आकर लिखने-पढ़ने की लत लग गई। चुनावी मौसम था और उन्होंने प्रभात खबर के लिए रिपोर्टिंग शुरू की। यहीं से पत्रकारिता का शौक पेशे में बदला। आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दुमका की जेल में हुई उनकी गिरफ्तारी की रिपोर्टिंग करते हुए सुप्रिय ने रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखी और पत्रकारिता की ताकत को महसूस किया।
इसके बाद 1994 में दिल्ली आए, IIMC से पत्रकारिता की पढ़ाई की और 10 जून 1995 को ‘आजतक’ से अपनी प्रोफेशनल पारी शुरू की। शुरुआत में तीन महीने के लिए रखे गए थे, लेकिन जल्दी ही उनकी प्रतिभा ने उन्हें असिस्टेंट न्यूज कोऑर्डिनेटर बना दिया।
'आजतक' से 'न्यूज 24' और फिर दोबारा 'आजतक' तक का सफर
13 वर्षों तक 'आजतक' में विभिन्न भूमिकाओं में काम करने के बाद उन्होंने 'न्यूज 24' की लॉन्चिंग टीम में बड़ी भूमिका निभाई और फिर दोबारा ‘आजतक’ लौटकर बतौर ग्रुप मैनेजिंग एडिटर और अब ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में ‘आजतक’ ने 100 हफ्तों तक टीआरपी की शीर्षता बरकरार रख चुका है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
टीआरपी नहीं, विश्वसनीयता का चेहरा
सुप्रिय प्रसाद को उनकी राजनीतिक समझ, तकनीकी पकड़ और संपादकीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। वे न सिर्फ तेज रफ्तार खबरों की दुनिया में संतुलन की मिसाल हैं, बल्कि युवा पत्रकारों के लिए एक मार्गदर्शक भी हैं। उनकी शैली में अनुशासन है, पर अहंकार नहीं। उनकी आवाज में दृढ़ता है, पर दिखावा नहीं।
वे सोशल मीडिया पर तो हैं, लेकिन किसी विचारधारा से खुद को नहीं जोड़ते। उनका पत्रकारिता के प्रति दृष्टिकोण तटस्थता और वस्तुनिष्ठता पर आधारित है।
व्यक्तिगत जीवन में भी अनुशासन और सादगी
उनकी निजी जिंदगी भी उनके पेशेवर आचरण की तरह सादगी से भरी है। न स्मोकिंग, न शराब लेकिन खाने के शौकीन सुप्रिय को नॉनवेज बेहद पसंद है। ‘आजतक’ की पत्रकार अनुराधा प्रीतम उनकी जीवनसंगिनी हैं, जिनसे उन्होंने लव मैरिज की। मजाक में अक्सर कहते हैं- "मेरी जिंदगी में AP हमेशा बॉस रहे हैं- अरुण पुरी, अनुराधा प्रसाद या फिर पत्नी अनुराधा प्रीतम।"
एक पत्रकार नहीं, एक युग का प्रतिनिधि
सुप्रिय प्रसाद उन विरले संपादकों में हैं जो तेज आवाज में नहीं, ठहराव में भरोसा रखते हैं। उनके लिए स्टोरी महज खबर नहीं, एक जिम्मेदारी है, जिसे तथ्यों, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ निभाना होता है। वे दिखाते हैं कि टेलीविजन पत्रकारिता आज भी सच्चाई के साथ खड़ी हो सकती है और रेटिंग्स से परे भी विश्वसनीयता संभव है।
मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी Prime Focus Limited के खिलाफ चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) समाप्त हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी Prime Focus Limited के खिलाफ चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) समाप्त हो गई है। कंपनी ने जानकारी में बताया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 10 जुलाई 2026 की सुनवाई में मौखिक रूप से कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच के 6 मई 2026 के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ चल रही CIRP बंद कर दी गई और इंट्रिम रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल (Interim Resolution Professional) को उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया गया।
कंपनी ने बताया कि मामले की सुनवाई 9 और 10 जुलाई 2026 को NCLAT की प्रधान पीठ, नई दिल्ली में हुई। 9 जुलाई की सुनवाई के दौरान NCLAT को बताया गया कि कंपनी के खिलाफ जारी सार्वजनिक नोटिस के बाद किसी भी लेनदार की ओर से कोई दावा प्राप्त नहीं हुआ। इस पर न्यायाधिकरण ने IRP को इस संबंध में शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया।
10 जुलाई की सुनवाई में IRP ने शपथपत्र दाखिल कर पुष्टि की कि कंपनी के खिलाफ कोई दावा प्राप्त नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि संबंधित पक्षों के बीच अपने विवादों के समाधान के लिए सशर्त सहमति बनी है।
इन तथ्यों के आधार पर NCLAT ने मौखिक रूप से कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए NCLT के 6 मई 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया, कंपनी के खिलाफ चल रही CIRP समाप्त कर दी और IRP को कार्यमुक्त कर दिया। इसके अलावा, NCLAT ने अपने रजिस्ट्रार के पक्ष में बनाई गई फिक्स्ड डिपॉजिट पर लगी लियन (Lien) हटाने का भी निर्देश दिया। समझौते के अनुसार संबंधित भुगतान किए जाएंगे।
कंपनी ने कहा कि CIRP समाप्त होने के साथ ही दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की धारा 14 के तहत लागू मोरेटोरियम भी समाप्त हो गया है। इसके साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) की सभी शक्तियां पूरी तरह बहाल हो गई हैं और कंपनी का कारोबार पहले की तरह सामान्य रूप से जारी है।