एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के पिता नंद किशोर गोयनका का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के पिता नंद किशोर गोयनका का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।
डॉ. सुभाष चंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पिता के निधन की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, "आज सुबह हमारे प्रिय पिता नंद किशोर गोयनका ने अंतिम सांस ली। परिवार के सभी सदस्य दुखी हैं, लेकिन मेरी इच्छा है कि हम उनके 96 वर्षों के जीवन का उत्सव मनाएं, जो समाज सेवा, गौ सेवा और राष्ट्रीय सेवा को समर्पित रहा। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक भी थे।"
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नंद किशोर गोयनका के पार्थिव शरीर को मुंबई से हरियाणा ले जाया जाएगा। फिलहाल पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित आवास पर रखा गया है। अंतिम दर्शन के बाद बुधवार सुबह हरियाणा के अग्रोहा स्थित गोयनका उद्यान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
नंद किशोर गोयनका अपने सामाजिक कार्यों, गौ सेवा और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
बता दें कि डॉ. सुभाष चंद्रा के अलावा नंद किशोर गोयनका के तीन बेटे नंद लक्ष्मी गोयल, जवाहर गोयल और अशोक गोयल और हैं। सभी मीडिया के बिजनेस में बड़ा नाम हैं।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनी 'हेड डिजिटल वर्क्स' (Head Digital Works) ने सुप्रीम कोर्ट में दो अहम फैसलों पर पुनर्विचार (रिव्यू) की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनी 'हेड डिजिटल वर्क्स' (Head Digital Works) ने सुप्रीम कोर्ट में दो अहम फैसलों पर पुनर्विचार (रिव्यू) की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं। कंपनी का कहना है कि 27 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के दोनों फैसलों में ऐसे कानूनी पहलू हैं, जिनमें स्पष्ट त्रुटियां हैं। इन फैसलों का असर सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टैक्स व्यवस्था, संवैधानिक कानून और यहां तक कि पारंपरिक खेलों पर भी पड़ सकता है।
कंपनी ने संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत दो अलग-अलग रिव्यू याचिकाएं दाखिल की हैं। पहली याचिका ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी लगाने संबंधी फैसले को चुनौती देती है, जबकि दूसरी याचिका तमिलनाडु और कर्नाटक के ऑनलाइन गेमिंग कानूनों को संवैधानिक रूप से सही ठहराने वाले फैसले पर पुनर्विचार की मांग करती है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस सप्ताह कई अन्य ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां भी सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह की रिव्यू याचिकाएं दाखिल करेंगी।
याचिकाओं में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्किल गेम्स (कौशल आधारित खेल) और जुए के बीच वर्षों से चले आ रहे कानूनी अंतर को नजरअंदाज कर दिया है। साथ ही जीएसटी कानून की गलत व्याख्या की गई है, विधायी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया और ऐसे कानूनी सिद्धांत स्थापित कर दिए गए हैं जिनका असर गेमिंग सेक्टर से कहीं आगे तक जा सकता है।
दोनों याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि इन मामलों की सुनवाई खुली अदालत (ओपन कोर्ट) में की जाए। कंपनी का कहना है कि यदि इन फैसलों पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो इससे गंभीर न्यायिक अन्याय होगा।
GST पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
पहली रिव्यू याचिका सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है जिसमें ऑनलाइन गेमिंग पर लागू जीएसटी व्यवस्था को संवैधानिक रूप से सही माना गया था। इस फैसले में गेम्सक्राफ्ट समेत कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
27 मई के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन ऑनलाइन गेम्स में पैसे दांव पर लगाए जाते हैं, उन्हें जीएसटी के उद्देश्य से बेटिंग और गैंबलिंग माना जाएगा, चाहे वह खेल कौशल आधारित हो या किस्मत पर आधारित। अदालत ने सीजीएसटी एक्ट, 2017 की कई धाराओं और नियमों को वैध ठहराया था। साथ ही 2023 में ऑनलाइन गेमिंग के लिए बनाए गए नए टैक्स नियमों को स्पष्ट करने वाला संशोधन बताते हुए उन्हें पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू माना था। अदालत ने यह भी कहा था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ नहीं बल्कि "एक्शनेबल क्लेम" के सप्लायर हैं और लंबित कारण बताओ नोटिसों का निपटारा नियम 31B के तहत किया जाए।
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि इन सभी निष्कर्षों में गंभीर कानूनी खामियां हैं और इन पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
'बेटिंग और गैंबलिंग' की परिभाषा बदलने का आरोप
कंपनी का सबसे बड़ा तर्क यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने "बेटिंग और गैंबलिंग" की संवैधानिक परिभाषा ही बदल दी है।
याचिका के अनुसार, अदालत ने यह मान लिया कि जिस भी गतिविधि में किसी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगाया जाता है, वह बेटिंग और गैंबलिंग है, चाहे वह पूरी तरह कौशल आधारित खेल ही क्यों न हो।
कंपनी का कहना है कि यह व्याख्या सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पुराने फैसलों, जैसे State of Bombay v. R.M.D. Chamarbaugwala, R.M.D. Chamarbaugwala v. Union of India और Dr. K.R. Lakshmanan v. State of Tamil Nadu के विपरीत है। इन फैसलों में स्पष्ट कहा गया था कि यदि किसी खेल में कौशल की भूमिका प्रमुख है तो वह संवैधानिक रूप से संरक्षित व्यवसाय है, भले ही उसमें पैसे लगाए जाएं।
याचिका में कहा गया है कि संविधान पीठ के फैसलों से अलग राय केवल बड़ी संविधान पीठ ही दे सकती थी, दो न्यायाधीशों की पीठ नहीं।
कंपनी का दावा है कि इस फैसले से स्किल गेम और चांस गेम के बीच का कानूनी अंतर लगभग समाप्त हो गया है, जबकि यही अंतर भारतीय गेमिंग कानून की बुनियाद रहा है।
फैसले का असर पारंपरिक खेलों पर भी पड़ सकता है
हेड डिजिटल वर्क्स ने कहा है कि इस फैसले का असर सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग तक सीमित नहीं रहेगा।
याचिका में कहा गया है कि क्रिकेट, टेनिस और अन्य प्रतियोगी खेलों में खिलाड़ी एंट्री फीस जमा करते हैं और उसी से पुरस्कार राशि तैयार होती है। चूंकि किसी भी खेल का नतीजा पहले से तय नहीं होता, इसलिए अदालत की व्याख्या के अनुसार इन्हें भी बेटिंग और गैंबलिंग की श्रेणी में रखा जा सकता है। इससे पारंपरिक खेलों में निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
कंपनी का कहना है कि अदालत ने यह मान लिया कि किसी भी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगाना अपने आप में सार्वजनिक नैतिकता के खिलाफ है, जबकि कौशल आधारित प्रतियोगिताओं की प्रकृति पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
'एक्शनेबल क्लेम' की व्याख्या पर भी सवाल
कंपनी ने जीएसटी कानून में "एक्शनेबल क्लेम" की व्याख्या पर भी सवाल उठाए हैं।
याचिका में कहा गया है कि अदालत ने यह मान लिया कि जैसे ही खिलाड़ी एंट्री फीस जमा करता है, उसी समय एक्शनेबल क्लेम बन जाता है। जबकि कंपनी का कहना है कि ऐसा दावा तभी बन सकता है जब प्रतियोगिता पूरी हो जाए और विजेता तय हो जाए।
कंपनी ने अदालत के सामने तीन सवाल भी उठाए हैं—
प्रतियोगिता शुरू होने के समय एक्शनेबल क्लेम किसके पास होता है?
नतीजा आने से पहले यह दावा किसके खिलाफ होता है?
यदि तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से खेल रद्द हो जाए तो उस स्थिति में क्या होगा?
कंपनी का कहना है कि इन सवालों पर विचार किए बिना अदालत ने गलत निष्कर्ष निकाला।
'प्लेटफॉर्म सिर्फ सुविधा देते हैं, सप्लायर नहीं'
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता कराने का माध्यम होते हैं। वे न तो खेल में हिस्सा लेते हैं और न ही विजेता तय करते हैं।
कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म खिलाड़ियों की जीत की राशि के मालिक कभी नहीं बनते। ऐसे में उन्हें "एक्शनेबल क्लेम" का सप्लायर नहीं माना जा सकता।
'सप्लाई' की व्याख्या भी गलत
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी कानून की धारा 7 के तहत "सप्लाई" शब्द की गलत व्याख्या की है।
कंपनी का कहना है कि अदालत ने केवल किसी अधिकार के बनने को ही वस्तु की सप्लाई मान लिया, जबकि जीएसटी कानून में अधिकारों के हस्तांतरण और वस्तुओं के हस्तांतरण के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है।
2023 के GST संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू करने पर आपत्ति
कंपनी ने 2023 में किए गए जीएसटी संशोधनों को भी चुनौती दी है।
उसका कहना है कि इन संशोधनों के जरिए "ऑनलाइन गेमिंग", "ऑनलाइन मनी गेमिंग" और "स्पेसिफाइड एक्शनेबल क्लेम" जैसी नई परिभाषाएं जोड़ी गईं और टैक्स की गणना का नया तरीका बनाया गया। इसलिए इन्हें केवल स्पष्टीकरण नहीं कहा जा सकता और न ही इन्हें पुराने मामलों पर लागू किया जा सकता है।
रूल 31A पर भी उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि रूल 31A ऑनलाइन गेमिंग के लिए टैक्स की सही वैल्यू तय करने का कोई स्पष्ट तरीका नहीं देता था। बाद में रूल 31B के जरिए पूरी तरह नई व्यवस्था बनाई गई। ऐसे में रूल 31B पुराने नियमों की कमियों को पूर्व प्रभाव से दूर नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 14 का भी हवाला
कंपनी ने कहा है कि ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के साथ अलग व्यवहार कर अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
याचिका के मुताबिक सामान्य तौर पर जीएसटी वास्तविक लेनदेन मूल्य पर लगता है, लेकिन ऑनलाइन गेमिंग के लिए अलग मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है, जिस पर अदालत ने पर्याप्त विचार नहीं किया।
ऑनलाइन गेमिंग कानूनों पर भी मांगा पुनर्विचार
जीएसटी विवाद के अलावा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी पुनर्विचार मांगा है, जिसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के ऑनलाइन गेमिंग कानूनों को वैध माना गया था।
इस फैसले में मद्रास हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के उन आदेशों को पलट दिया गया था, जिनमें स्किल गेम्स पर दांव लगाने को अपराध बनाने वाले प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था।
कंपनी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने संवैधानिक फैसलों की अनदेखी की और मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे बिना अलग निष्कर्ष दे दिया।
'Res Extra Commercium' पर भी सवाल
हेड डिजिटल वर्क्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार यह माना कि किसी अनिश्चित परिणाम पर पैसा लगते ही वह गतिविधि व्यवसाय के दायरे से बाहर हो जाती है, चाहे उसमें कौशल की भूमिका कितनी भी अधिक क्यों न हो।
कंपनी के अनुसार, यदि यह सिद्धांत लागू रहा तो इसका असर बीमा, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और फॉरवर्ड मार्केट जैसे कई वैध कारोबारी क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
संघीय ढांचे और विधायी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं देखा कि ऑनलाइन गेमिंग डिजिटल नेटवर्क के जरिए संचालित होती है, जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि संसद द्वारा बनाए गए Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 (PROGA) से जुड़े संवैधानिक सवाल पहले से सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के सामने लंबित हैं। ऐसे में राज्यों के कानूनों को वैध ठहराने से पहले इन पहलुओं पर विस्तार से विचार होना चाहिए था।
तमिलनाडु कानून को लेकर भी आपत्ति
हेड डिजिटल वर्क्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के तमिलनाडु कानून की वैधता पर विचार किया, जबकि बाद में 2023 का नया कानून लागू हो चुका था।
कंपनी का कहना है कि मद्रास हाईकोर्ट ने 2023 के कानून की अलग से समीक्षा करते हुए रम्मी और पोकर को चांस गेम की श्रेणी से बाहर रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस तर्क पर अलग से विचार नहीं किया।
खुली अदालत में सुनवाई की मांग
दोनों रिव्यू याचिकाओं में हेड डिजिटल वर्क्स ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इन मामलों की सुनवाई चैंबर में नहीं बल्कि खुली अदालत में की जाए।
कंपनी का कहना है कि यह मामला सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग तक सीमित नहीं है। इसका असर देश की जीएसटी व्यवस्था, डिजिटल स्किल गेमिंग उद्योग और संवैधानिक कानून की भविष्य की दिशा पर भी पड़ेगा।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की जोधपुर इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। टीम में युवा पत्रकार दीक्षित परिहार को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (Indian Federation of Working Journalists-IFWJ) की जोधपुर इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। अध्यक्ष प्रदीप जोशी के नेतृत्व में गठित नई टीम में युवा पत्रकार दीक्षित परिहार को सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दीक्षित परिहार के सचिव नियुक्त होने की घोषणा के बाद जोधपुर में उनके समर्थकों, शुभचिंतकों और युवा साथियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समर्थकों ने केक काटकर खुशी मनाई तथा पुष्पमालाएं पहनाकर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर दीक्षित परिहार ने संगठन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन पर जताए गए विश्वास पर वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के हितों की रक्षा, संगठन को मजबूत बनाने और निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।
कार्यक्रम में मौजूद साथियों ने दीक्षित परिहार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व, सक्रियता और समर्पण से संगठन को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हर बार की तरह इस बार भी हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हर बार की तरह इस बार भी हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' मीडिया जगत के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक बड़ा मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट काम के दम पर पत्रकारिता की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। इस समारोह में देशभर से चुने गए 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
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युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
समाचार4मीडिया का 's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के सीनियर मीडिया प्रोफेशनल्स से सीखने और संवाद का अवसर भी देता है।
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जानिए, कौन हैं वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर
हिंदी दैनिक अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर, हिंदी पत्रकारिता जगत में एक ऐसा नाम हैं, जो अपने काम और प्रोफेशनल नजरिए के लिए जाने जाते हैं।। पत्रकारिता में उन्हें 40 साल से भी ज्यादा का लंबा अनुभव हो गया है।
आज कल जिस उम्र में लोग करियर की शुरुआत करते हैं, उस उम्र में उन्होंने वह गौरव हासिल किया, जहां तक पहुंचने की चाहत लेकर पत्रकारिता से जुड़े अधिकांश युवा इस इंडस्ट्री में आते हैं। यानी महज 24 वर्ष की आयु में वे 'आज' अखबार का संपादक बने और फिर संपादक के तौर पर पहले 'आज', फिर 'आजतक' न्यूज चैनल, हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' और फिर 'हिन्दुस्तान' के समूह संपादक बन गए। इन दिनों वे 'हिन्दुस्तान' के प्रधान संपादक के तौर पर कार्यरत हैं।
30 जून 1960 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी के गांव चंदीकारा में जन्मे शशि शेखर ने आगरा के बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से हिंदी, संस्कृत, इंग्लिश और इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में स्नातकोत्तर किया। शशि शेखर ने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी हासिल किया है। 1980 में उन्होंने पत्रकारिता में कदम रखा।
शशि शेखर को 40 साल की पत्रकारिता का अनुभव है। वे प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन तीनों विधाओं में माहिर हैं। उनके करिअर की शुरुआत 1980 में वाराणसी के प्रसिद्ध दैनिक ‘आज’ से हुई। वर्ष 1984 में वे ‘आज’ अखबार के रेजिडेंट एडिटर बनाये गये। उन्होंने यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश में ‘आज’ अखबार का विस्तार किया। महज 24 साल की उम्र में वे आज अखबार के संपादक बन गए। वे ‘आज’ के इलाहाबाद और आगरा संस्करण के संपादक रहे। इसके बाद जनवरी 2001 से जुलाई 2002 तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कदम रखा और 'आजतक' न्यूज चैनल के साथ काम किया। वहां डेढ़ साल रहने के बाद वे वापस प्रिंट मीडिया में आ गए और इस बार उन्होंने अमर उजाला मेरठ में कार्यकारी संपादक का कार्यभार संभाला। पत्रकारिता तथा समाचारपत्र प्रबंधन में उनकी कार्यकुशलता से प्रभावित होकर अमर उजाला मैनेजमेंट ने उनको ग्रुप एडिटर और प्रेजिडेंट (न्यूज) नियुक्त किया। वे जुलाई 2002 से सितंबर 2009 तक 'अमर उजाला' अखबार में इस पद पर बने रहे। फिर सितंबर 2009 में वे ‘हिन्दुस्तान’ के साथ ‘नंदन’, ‘कांदबिनी’ और ‘लाइव हिंदुस्तान डॉट काम’ के मुख्य संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्हें ‘हिन्दुस्तान’ का प्रधान संपादक बनाया गया।
शशि शेखर के बारे में कहा जाता है कि वे काम करते हुए कभी थकते नहीं हैं। अपनी इस असीम ऊर्जा से वे अपने अधीन कार्यरत सहकर्मियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में इस बार 'आजतक', 'इंडिया टुडे' व 'गुड न्यूज टुडे' के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सुप्रिय प्रसाद प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया जगत के बहुचर्चित 'समाचार4मीडिया हिंदी पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में इस बार 'आजतक', 'इंडिया टुडे' व 'गुड न्यूज टुडे' के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सुप्रिय प्रसाद प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से यह प्रतिष्ठित अवार्ड समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
's4m पत्रकारिता 40 अंडर 40' मीडिया जगत के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक बड़ा मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट काम के दम पर पत्रकारिता की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। इस समारोह में देशभर से चुने गए 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस बार कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण सुप्रिय प्रसाद का विशेष संबोधन होगा। मीडिया इंडस्ट्री में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाली सुप्रिय प्रसाद अपने अनुभव, नेतृत्व और पत्रकारिता के बदलते दौर पर युवाओं से अपने विचार साझा करेंगी। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक और मार्गदर्शक साबित होगा।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
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जानिए, कौन हैं सुप्रिय प्रसाद
हर दिन दौड़ती-चिल्लाती, कभी-कभी भ्रम फैलाती भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में सुप्रिय प्रसाद एक ऐसे प्रकाशस्तंभ की तरह खड़े हैं, जो न शोर से डगमगाते हैं, न टीआरपी की आंधियों से हिलते हैं।
तीन दशकों से भी अधिक समय तक पत्रकारिता की इस यात्रा में सुप्रिय प्रसाद सिर्फ घटनाओं को रिपोर्ट नहीं करते, वे उन्हें अर्थ देते हैं, उनमें संदर्भ भरते हैं और देश को एक आईना दिखाते हैं- एक ऐसा आईना जो सच्चाई को न तो तोड़ता है, न मरोड़ता है।
झारखंड के दुमका से दिल्ली तक की यात्रा
दुमका में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मां के इलाज के लिए वे पटना आए और पत्रकारों की संगत में आकर लिखने-पढ़ने की लत लग गई। चुनावी मौसम था और उन्होंने प्रभात खबर के लिए रिपोर्टिंग शुरू की। यहीं से पत्रकारिता का शौक पेशे में बदला। आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दुमका की जेल में हुई उनकी गिरफ्तारी की रिपोर्टिंग करते हुए सुप्रिय ने रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखी और पत्रकारिता की ताकत को महसूस किया।
इसके बाद 1994 में दिल्ली आए, IIMC से पत्रकारिता की पढ़ाई की और 10 जून 1995 को ‘आजतक’ से अपनी प्रोफेशनल पारी शुरू की। शुरुआत में तीन महीने के लिए रखे गए थे, लेकिन जल्दी ही उनकी प्रतिभा ने उन्हें असिस्टेंट न्यूज कोऑर्डिनेटर बना दिया।
'आजतक' से 'न्यूज 24' और फिर दोबारा 'आजतक' तक का सफर
13 वर्षों तक 'आजतक' में विभिन्न भूमिकाओं में काम करने के बाद उन्होंने 'न्यूज 24' की लॉन्चिंग टीम में बड़ी भूमिका निभाई और फिर दोबारा ‘आजतक’ लौटकर बतौर ग्रुप मैनेजिंग एडिटर और अब ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में ‘आजतक’ ने 100 हफ्तों तक टीआरपी की शीर्षता बरकरार रख चुका है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
टीआरपी नहीं, विश्वसनीयता का चेहरा
सुप्रिय प्रसाद को उनकी राजनीतिक समझ, तकनीकी पकड़ और संपादकीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। वे न सिर्फ तेज रफ्तार खबरों की दुनिया में संतुलन की मिसाल हैं, बल्कि युवा पत्रकारों के लिए एक मार्गदर्शक भी हैं। उनकी शैली में अनुशासन है, पर अहंकार नहीं। उनकी आवाज में दृढ़ता है, पर दिखावा नहीं।
वे सोशल मीडिया पर तो हैं, लेकिन किसी विचारधारा से खुद को नहीं जोड़ते। उनका पत्रकारिता के प्रति दृष्टिकोण तटस्थता और वस्तुनिष्ठता पर आधारित है।
व्यक्तिगत जीवन में भी अनुशासन और सादगी
उनकी निजी जिंदगी भी उनके पेशेवर आचरण की तरह सादगी से भरी है। न स्मोकिंग, न शराब लेकिन खाने के शौकीन सुप्रिय को नॉनवेज बेहद पसंद है। ‘आजतक’ की पत्रकार अनुराधा प्रीतम उनकी जीवनसंगिनी हैं, जिनसे उन्होंने लव मैरिज की। मजाक में अक्सर कहते हैं- "मेरी जिंदगी में AP हमेशा बॉस रहे हैं- अरुण पुरी, अनुराधा प्रसाद या फिर पत्नी अनुराधा प्रीतम।"
एक पत्रकार नहीं, एक युग का प्रतिनिधि
सुप्रिय प्रसाद उन विरले संपादकों में हैं जो तेज आवाज में नहीं, ठहराव में भरोसा रखते हैं। उनके लिए स्टोरी महज खबर नहीं, एक जिम्मेदारी है, जिसे तथ्यों, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ निभाना होता है। वे दिखाते हैं कि टेलीविजन पत्रकारिता आज भी सच्चाई के साथ खड़ी हो सकती है और रेटिंग्स से परे भी विश्वसनीयता संभव है।
मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी Prime Focus Limited के खिलाफ चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) समाप्त हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी Prime Focus Limited के खिलाफ चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) समाप्त हो गई है। कंपनी ने जानकारी में बताया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 10 जुलाई 2026 की सुनवाई में मौखिक रूप से कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच के 6 मई 2026 के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ चल रही CIRP बंद कर दी गई और इंट्रिम रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल (Interim Resolution Professional) को उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया गया।
कंपनी ने बताया कि मामले की सुनवाई 9 और 10 जुलाई 2026 को NCLAT की प्रधान पीठ, नई दिल्ली में हुई। 9 जुलाई की सुनवाई के दौरान NCLAT को बताया गया कि कंपनी के खिलाफ जारी सार्वजनिक नोटिस के बाद किसी भी लेनदार की ओर से कोई दावा प्राप्त नहीं हुआ। इस पर न्यायाधिकरण ने IRP को इस संबंध में शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया।
10 जुलाई की सुनवाई में IRP ने शपथपत्र दाखिल कर पुष्टि की कि कंपनी के खिलाफ कोई दावा प्राप्त नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि संबंधित पक्षों के बीच अपने विवादों के समाधान के लिए सशर्त सहमति बनी है।
इन तथ्यों के आधार पर NCLAT ने मौखिक रूप से कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए NCLT के 6 मई 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया, कंपनी के खिलाफ चल रही CIRP समाप्त कर दी और IRP को कार्यमुक्त कर दिया। इसके अलावा, NCLAT ने अपने रजिस्ट्रार के पक्ष में बनाई गई फिक्स्ड डिपॉजिट पर लगी लियन (Lien) हटाने का भी निर्देश दिया। समझौते के अनुसार संबंधित भुगतान किए जाएंगे।
कंपनी ने कहा कि CIRP समाप्त होने के साथ ही दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की धारा 14 के तहत लागू मोरेटोरियम भी समाप्त हो गया है। इसके साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) की सभी शक्तियां पूरी तरह बहाल हो गई हैं और कंपनी का कारोबार पहले की तरह सामान्य रूप से जारी है।
रिपब्लिक टीवी में चीफ मैनेजर के रूप में कार्यरत रहीं तनुश्री नेटवर्क में नेशनल और रीजनल न्यूज चैनलों की सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ (Republic Media Network) से तनुश्री ने इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका कंपनी के साथ करीब 1.6 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
रिपब्लिक टीवी में चीफ मैनेजर के रूप में कार्यरत रहीं तनुश्री नेटवर्क में नेशनल और रीजनल न्यूज चैनलों की सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके कार्यक्षेत्र में बेंगलुरु और चेन्नई बाजार शामिल थे। इस दौरान उन्होंने रिपब्लिक टीवी, रिपब्लिक भारत, रिपब्लिक बांग्ला और रिपब्लिक कन्नड़ के लिए नेटवर्क सेल्स का नेतृत्व किया।
तनुश्री सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट क्षेत्र की अनुभवी प्रोफेशनल हैं। उन्हें मीडिया, टेलीकॉम और कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से पहले उन्होंने करीब सात वर्षों तक न्यूज नेशन में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा वह 92.7 बिग एफएम, भारती एयरटेल और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
PTI से जुड़ने से पहले नेहा यादव हिंदुस्तान टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश की प्रमुख समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने नेहा यादव को सीनियर प्रोड्यूसर के पद पर प्रमोट किया है। उन्होंने अपने प्रमोशन की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।
इस प्रमोशन से पहले नेहा यादव PTI में प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत थीं। PTI से जुड़ने से पहले नेहा यादव हिंदुस्तान टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वहां उन्होंने करीब दो वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
दीपक जैकब ने इस्तीफा देकर निजी कानूनी प्रैक्टिस में वापसी की है। उन्होंने कंपनी में कानूनी, नियामकीय और सार्वजनिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ड्रीम स्पोर्ट्स (Dream Sports) के प्रेसिडेंट और ग्रुप जनरल काउंसिल दीपक जैकब (Deepak Jacob) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और लगभग पांच वर्ष बाद निजी कानूनी प्रैक्टिस में लौट गए हैं। इस दौरान उन्होंने कंपनी के कानूनी, नियामकीय (रेगुलेटरी) और सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी) से जुड़े मामलों का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में ड्रीम स्पोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया, वहीं ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में बदलते नियमों, कर व्यवस्था और अनुपालन संबंधी चुनौतियों का भी सामना किया।
दीपक जैकब देश के अनुभवी कानूनी और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। करीब तीन दशक के अपने करियर में उन्होंने स्वतंत्र वकालत, लॉ फर्म और कई प्रमुख टेक्नोलॉजी, मीडिया तथा डिजिटल कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। अब निजी प्रैक्टिस में लौटने के बाद वह कंपनियों, प्रमोटर्स और बोर्ड्स को कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियामकीय मामलों, मुकदमों और सार्वजनिक नीति से जुड़े जटिल विषयों पर सलाह देंगे।
ड्रीम स्पोर्ट्स में उन्होंने कानूनी मामलों के अलावा रेगुलेटरी अफेयर्स, गवर्नमेंट रिलेशंस, ट्रस्ट एंड सेफ्टी, लॉ एन्फोर्समेंट समन्वय और कंटेंट गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में कंपनी ने तेजी से बदलते कानूनी माहौल के बीच अपने संचालन और गवर्नेंस ढांचे को मजबूत किया। ड्रीम11 (Dream11), फैनकोड (FanCode), ड्रीमसेटगो (DreamSetGo) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए कंपनी 22 करोड़ से अधिक यूजर्स तक पहुंचती है।
ड्रीम स्पोर्ट्स से पहले दीपक जैकब ने 13 वर्षों से अधिक समय तक द वॉल्ट डिज्नी कंपनी (The Walt Disney Company) में कार्य किया, जहां वह भारत, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए प्रेसिडेंट एवं चीफ रीजनल काउंसिल (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर एंड इंटरनेशनल) रहे। डिज्नी स्टार (Disney Star) में उन्होंने केबल टीवी डिजिटाइजेशन कार्यक्रम और प्रसारण क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण नीतियों को लागू कराने में अहम भूमिका निभाई। वह ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कंप्लेंट्स काउंसिल (BCCC) की स्थापना से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों में भी शामिल रहे।
इससे पहले वह रिलायंस इन्फोकॉम (Reliance Infocomm), ईबे (eBay), स्टार इंडिया (Star India) और 21st सेंचुरी फॉक्स (21st Century Fox) जैसी कंपनियों में भी वरिष्ठ कानूनी पदों पर कार्य कर चुके हैं। उद्योग जगत उन्हें ऐसे विशेषज्ञ के रूप में देखता है, जिन्होंने जटिल कानूनी और नियामकीय चुनौतियों को व्यावसायिक रणनीति में बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
दीपक जैकब का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा संरक्षण और प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े नियम लगातार बदल रहे हैं। वहीं ड्रीम स्पोर्ट्स भी फैंटेसी स्पोर्ट्स से आगे बढ़कर स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, कंटेंट और कॉमर्स कारोबार का विस्तार कर रही है, जिससे कंपनी के लिए मजबूत कानूनी और नीतिगत नेतृत्व पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने पिछले साल नवंबर में इस संस्थान में जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदी न्यूज चैनल ‘जनतंत्र टीवी’ (Jantantra TV) के एडिटर-इन-चीफ जितेंद्र शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले साल नवंबर में इस चैनल में जॉइन किया था। समाचार4मीडिया से बातचीत में जितेंद्र शर्मा ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। जितेंद्र शर्मा ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल उन्होंने इस बारे में कुछ भी अपडेट नहीं दिया है।
जितेंद्र शर्मा इससे पहले ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। मूल रूप से हिसार (हरियाणा) के रहने वाले जितेंद्र शर्मा को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘जी मीडिया’ (Zee Media) से की थी।
इस मीडिया संस्थान के साथ अपने करीब दो दशक के सफर में उन्होंने विभिन्न अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2024 में उन्होंने यहां से अपनी पारी को विराम देकर ‘आईटीवी नेटवर्क’ जॉइन कर लिया था। उस समय जितेंद्र शर्मा ‘जी न्यूज’ में एडिटर दिल्ली ब्यूरो और क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो डिफेंस स्टडीज में ग्रेजुएट जितेंद्र शर्मा ने हिसार स्थित ‘गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी’ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 1600 और 140 नंबर सीरीज के इस्तेमाल को लेकर मीडिया में आई कुछ खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 1600 और 140 नंबर सीरीज के इस्तेमाल को लेकर मीडिया में आई कुछ खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। प्राधिकरण ने कहा कि इन खबरों से लोगों के बीच गलतफहमी फैल सकती है, इसलिए दोनों नंबर सीरीज के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना जरूरी है।
TRAI ने बताया कि 1600xx नंबर सीरीज का इस्तेमाल केवल बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की विनियमित संस्थाएं, जैसे RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA के तहत आने वाली कंपनियां, अपने मौजूदा ग्राहकों से सेवा और लेन-देन (Service & Transaction) से जुड़े कॉल करने के लिए कर सकती हैं। इसके अलावा, सरकारी विभाग भी नागरिकों से आधिकारिक संवाद के लिए इसी सीरीज का उपयोग कर सकते हैं।
TRAI के अनुसार, 1600 सीरीज शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि ग्राहकों और नागरिकों को भरोसेमंद कॉल की पहचान आसानी से हो सके। टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन (TCCCPR) के तहत 1600 सीरीज से आने वाली कॉल को किसी भी तरह टैग, ब्लॉक या फिल्टर करने की अनुमति नहीं है।
वहीं, 140xx नंबर सीरीज का इस्तेमाल केवल प्रमोशनल कॉल करने के लिए किया जाएगा। किसी भी क्षेत्र की कंपनी अगर 140 सीरीज से प्रचार संबंधी कॉल करना चाहती है, तो उसे TCCCPR के तहत अपने टेलीकॉम सेवा प्रदाता के साथ पंजीकरण कराना होगा और नियमों का पालन करना होगा।
TRAI ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे डू नॉट डिस्टर्ब (DND) रजिस्ट्री के जरिए तय करें कि वे 140 सीरीज से आने वाली प्रमोशनल कॉल प्राप्त करना चाहते हैं या नहीं। ग्राहक चाहें तो सभी सेक्टर या किसी विशेष सेक्टर की प्रमोशनल कॉल बंद कर सकते हैं। यदि किसी सेक्टर को DND पर ब्लॉक किया गया है, तो उस सेक्टर से 140 सीरीज के जरिए कोई प्रमोशनल कॉल नहीं आएगी।
ग्राहक अपनी DND प्राथमिकता TRAI DND ऐप सहित कई माध्यमों से दर्ज या बदल सकते हैं।
TRAI ने यह भी स्पष्ट किया कि 140 सीरीज के नंबरों को टैग या फिल्टर करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे उन ग्राहकों में भ्रम पैदा हो सकता है जिन्होंने DND में किसी सेक्टर से प्रमोशनल कॉल प्राप्त करने की अनुमति दी हुई है। ऐसे मामलों में केवल DND रजिस्ट्री के आधार पर कॉल को ब्लॉक किया जा सकता है।
TRAI ने कहा कि इन दोनों नंबर सीरीज को लेकर बनाए गए नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद संचार उपलब्ध कराना है तथा किसी भी तरह की गलत जानकारी से बचाना है।