प्रसार भारती और सरकार के उन तमाम कदमों की पड़ताल, जो एक पुराने सरकारी प्रसारक को ग्लोबल मीडिया पॉवर बनाने की कोशिश में लगे हैं
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Vikas Saxena
जब भी भारत में सरकारी टेलीविजन और रेडियो की बात होती है, तो दो नाम जेहन में सबसे पहले आते हैं- दूरदर्शन और आकाशवाणी। ये दोनों नाम सिर्फ दो चैनल या रेडियो स्टेशन नहीं हैं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की यादों और भावनाओं से जुड़े हैं। दूरदर्शन की रामायण और महाभारत देखकर बड़ी हुई पीढ़ी आज भी उन धुनों को भूली नहीं है, और आकाशवाणी की वो मखमली आवाजें आज भी लाखों दिलों में गूंजती हैं। लेकिन वक्त बदला, जमाना बदला, और मीडिया की दुनिया ने ऐसी करवट ली कि नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, और प्राइवेट न्यूज चैनलों के शोर में ये आवाजें कुछ धीमी पड़ती गईं।
लेकिन अब ये तस्वीर बदलने की कोशिश हो रही है। प्रसार भारती और केंद्र सरकार ने मिलकर एक ऐसी योजना बनाई है जिसका मकसद है- दूरदर्शन और आकाशवाणी को न सिर्फ भारत के कोने-कोने तक पहुंचाना, बल्कि इन्हें BBC वर्ल्ड और अल-जजीरा की तरह एक ग्लोबल ब्रैंड बनाना। तो आइए जानते हैं कि आखिर इस दिशा में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और आज की तारीख में यह कोशिश कहां तक पहुंची है।
₹2,539 करोड़ का BIND मिशन- बुनियाद को मजबूत करने की कोशिश
किसी भी इमारत को ऊंचा उठाने से पहले उसकी नींव मजबूत करनी होती है। प्रसार भारती के मामले में भी यही हुआ। सरकार ने "ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट" यानी BIND योजना की शुरुआत 2021 में की, जो 2026 तक चलनी है। इस योजना के तहत करीब 2,539 करोड़ रुपए का भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है।
यह पैसा कहां खर्च हो रहा है? पुराने और घिसे-पिटे ट्रांसमीटरों की जगह नए डिजिटल ट्रांसमीटर लगाए जा रहे हैं। स्टूडियो को आधुनिक बनाया जा रहा है। पुरानी तकनीक को हटाकर नई प्रणालियां लाई जा रही हैं। 2017 से अब तक 1,200 से ज्यादा पुराने एनालॉग ट्रांसमीटर हटाए जा चुके हैं और उनकी जगह डिजिटल ट्रांसमीटर लग चुके हैं। यह एक बड़ा काम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि दूरदर्शन और आकाशवाणी की आवाज और तस्वीर साफ और बेहतर गुणवत्ता की हो।
आकाशवाणी के FM स्टेशनों की बात करें तो 2017 में जहां देशभर में 413 स्टेशन थे, वहीं 2021 तक यह संख्या बढ़कर 485 हो गई, लेकिन वर्तमान में आकाशवाणी के 585 FM स्टेशन हैं और कुल स्टेशन 420+ हैं। BIND योजना के अनुसार FM कवरेज को 80.23% आबादी और 66.29% भौगोलिक क्षेत्र तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यह आंकड़ा खुद ब खुद बता देता है कि आकाशवाणी किस पैमाने पर काम करती है।
DD फ्री डिश- गांव-गांव तक फ्री टेलीविजन
शहरों में तो केबल और OTT का बोलबाला है, लेकिन गांवों और दूर-दराज के इलाकों में आज भी टेलीविजन देखने के लिए डिश की जरूरत होती है। यहां दूरदर्शन का DD फ्री डिश प्लेटफॉर्म एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह भारत का सबसे बड़ा फ्री-टू-एयर DTH सेवा है, जो 2024 तक लगभग 4.9 करोड़ घरों तक पहुंच चुकी है।
मतलब साफ है- किसी को कोई मासिक सब्सक्रिप्शन नहीं देना, कोई महंगा रिचार्ज नहीं कराना। एक बार डिश लगाओ और दर्जनों चैनल मुफ्त में देखो। यह व्यवस्था खासतौर पर उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो महंगे DTH प्लान का बोझ नहीं उठा सकते। DD फ्री डिश पर अभी 35 से ज्यादा चैनल उपलब्ध हैं, जिनमें 6 राष्ट्रीय चैनल, 28 क्षेत्रीय चैनल और एक अंतरराष्ट्रीय चैनल शामिल हैं। दूरदर्शन देश के 24 से ज्यादा भाषाओं और विभिन्न बोलियों में कंटेंट प्रसारित करता है, जो उसकी विविधता और समावेशी सोच को दर्शाता है।
WAVES OTT- डिजिटल युग में दूरदर्शन की नई पहचान
अब बात करते हैं उस कदम की, जिसे प्रसार भारती की डिजिटल क्रांति कहा जा सकता है। नवंबर 2024 में दूरदर्शन ने अपना खुद का OTT प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसका नाम है "WAVES"। यह प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम की तर्ज पर बनाया गया है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह मुफ्त में उपलब्ध है और इस पर परिवार के सभी सदस्यों के लिए साफ-सुथरा और सांस्कृतिक कंटेंट है।
WAVES पर अभी 12 भाषाओं में कंटेंट मिलता है और आगे चलकर सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं को इसमें शामिल करने की योजना है। इस प्लेटफॉर्म की एक और खास बात है- यह Open Network for Digital Commerce यानी ONDC के साथ भी जुड़ा है, जिससे दर्शक मनोरंजन के साथ-साथ खरीदारी भी कर सकते हैं। यह एक अनूठा प्रयोग है जो मीडिया और ई-कॉमर्स को एक ही मंच पर लाता है।
WAVES के लॉन्च के बाद से इसने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, मिडिल ईस्ट, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी दर्शक जोड़े हैं। यानी यह सिर्फ घरेलू दर्शकों के लिए नहीं, बल्कि दुनियाभर में बसे भारतीयों के लिए भी उपलब्ध है।
NewsOnAir ऐप- जेब में पूरा आकाशवाणी
जिस तरह स्मार्टफोन ने दुनिया बदल दी, उसी तरह प्रसार भारती ने अपना ऐप बनाया- NewsOnAir। यह ऐप एक तरह से जेब में रखा हुआ पूरा आकाशवाणी और दूरदर्शन है। इस ऐप पर 230 से ज्यादा लाइव रेडियो चैनल सुन सकते हैं- इनमें 205 से अधिक घरेलू चैनल और 25 वर्ल्ड सर्विस चैनल शामिल हैं।
ऐप पर हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती और मराठी में खबरें पढ़ सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं और पॉडकास्ट सुन सकते हैं। इसमें एक जियो-मैपिंग फीचर भी है, जिससे आप अपने राज्य या इलाके के हिसाब से रेडियो स्टेशन ढूंढ सकते हैं। प्रसार भारती इसे "एक सच्चे ग्लोबल डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर पहला कदम" बताता है। इस ऐप के 2 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं और 21 करोड़ से अधिक लोग इसे सुन चुके हैं, जो बताता है कि डिजिटल माध्यम से प्रसार भारती की पहुंच कितनी तेजी से बढ़ रही है।
यूट्यूब और सोशल मीडिया- 2 करोड़ सब्सक्राइबर का आंकड़ा
आज की पीढ़ी जानकारी और मनोरंजन के लिए सबसे पहले यूट्यूब खोलती है। प्रसार भारती ने इस बदलाव को समझा और 2017 से डिजिटल-फर्स्ट रणनीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि प्रसार भारती के 190 से ज्यादा यूट्यूब चैनल हैं और 300 से ज्यादा ट्विटर हैंडल हैं।
2021 में अकेले एक साल में इन 185 से अधिक यूट्यूब चैनलों पर 1 अरब से ज्यादा व्यूज आए और कुल 9 करोड़ 40 लाख घंटे की "वॉच टाइम" दर्ज की गई। DD न्यूज और DD नेशनल दोनों के यूट्यूब चैनल 2021 तक 40 लाख सब्सक्राइबर पार कर चुके थे। कुल मिलाकर प्रसार भारती के सभी प्लेटफॉर्म्स पर यूट्यूब सब्सक्राइबर की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा हो गई है। यह संख्या बताती है कि भले ही टेलीविजन देखने वाले कम हो रहे हों, लेकिन डिजिटल दुनिया में दूरदर्शन और आकाशवाणी की पहुंच तेजी से बढ़ रही है।
पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो यह वह इलाका है जहां कनेक्टिविटी हमेशा से एक चुनौती रही है। लेकिन प्रसार भारती के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने यहां 22 करोड़ से ज्यादा व्यूज और 10 लाख से अधिक यूट्यूब सब्सक्राइबर हासिल किए हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
DD इंडिया और ग्लोबल पहुंच- 190 देशों तक भारत की आवाज
दूरदर्शन का इंटरनेशनल चैनल DD इंडिया आज 190 से ज्यादा देशों में सैटेलाइट के जरिए उपलब्ध है। यह चैनल विदेशों में बसे भारतीयों और उनके परिवारों के लिए एक पुल की तरह काम करता है। 2022 में प्रसार भारती ने YuppTV के साथ एक MOU साइन किया, जिसके तहत DD इंडिया अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में OTT प्लेटफॉर्म के जरिए भी उपलब्ध हो गया।
DD इंडिया को 2019 में एक फुल-फ्लेज्ड अंग्रेजी न्यूज चैनल के रूप में दोबारा लॉन्च किया गया था। BARC के आंकड़ों के मुताबिक मई 2022 में DD इंडिया भारत का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला अंग्रेजी न्यूज चैनल बन गया था, जिसके 80 लाख से ज्यादा अनोखे दर्शक थे- यह आंकड़ा किसी भी प्रतिद्वंद्वी चैनल के दोगुने से भी ज्यादा था। यह उपलब्धि बताती है कि जब कंटेंट और रणनीति सही हो, तो सरकारी चैनल भी प्राइवेट से आगे निकल सकते हैं।
इसके अलावा, सरकार "DD इंटरनेशनल" नाम का एक और चैनल लाने की तैयारी में थी, जो BBC वर्ल्ड और अल-जजीरा की तर्ज पर बनाया जाना था। इसका मकसद सिर्फ प्रवासी भारतीयों तक पहुंचना नहीं, बल्कि दुनिया के आम दर्शकों तक भारत का नजरिया पहुंचाना था।
आकाशवाणी की एक्सटर्नल सर्विस- 27 भाषाओं में दुनिया से बात
आकाशवाणी की एक्सटर्नल सर्विस किसी बड़े इंटरनेशनल रेडियो नेटवर्क से कम नहीं है। यह सर्विस 27 भाषाओं में- जिनमें 11 भारतीय और 16 विदेशी भाषाएँ शामिल हैं- 100 से ज्यादा देशों में प्रसारण करती है। हाई-पावर शॉर्टवेव ट्रांसमीटरों के जरिए यह आवाजें दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचती हैं।
एक जनरल ओवरसीज सर्विस भी है जो अंग्रेजी में रोज साढ़े आठ घंटे का प्रसारण करती है। इसकी शुरुआत 1939 में हुई थी, जब ब्रिटिश सरकार ने इसे नाजी प्रचार का मुकाबला करने के लिए शुरू किया था। आज यह सर्विस भारत की सोच, संस्कृति और विचारों को दुनिया तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
AI एंकर और नई तकनीक- भविष्य की ओर एक कदम
जो बात सबसे ज्यादा चौंकाती है, वो यह है कि दूरदर्शन के किसान चैनल ने AI एंकर लॉन्च किए हैं- "AI कृष" और "AI भूमि"। ये दोनों 24 घंटे, 7 दिन, 50 भाषाओं में खबरें और जानकारी दे सकते हैं। यह भारत का पहला सरकारी टेलीविजन चैनल बन गया है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंकर काम कर रहे हैं। इससे किसानों और ग्रामीण दर्शकों को उनकी अपनी भाषा में खेती-बाड़ी, पर्यावरण और ग्रामीण विकास से जुड़ी जानकारी मिलती है।
इसके अलावा दूरदर्शन के कई चैनल अब HD यानी हाई डेफिनिशन में प्रसारित हो रहे हैं, जो तस्वीर की गुणवत्ता को काफी बेहतर बनाता है और अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों के मुकाबले खड़े होने में मदद करता है।
PB-SHABD- मीडिया इकोसिस्टम में नया खिलाड़ी
मार्च 2024 में प्रसार भारती ने PB-SHABD नाम की एक न्यूज शेयरिंग सर्विस शुरू की। SHABD का मतलब है "प्रसार भारती-शेयर्ड ऑडियो-विजुअल्स फॉर ब्रॉडकास्ट एंड डिसेमिनेशन"। यह सर्विस देश के अलग-अलग मीडिया संगठनों को रोजाना 1,000 से ज्यादा स्टोरी वीडियो, ऑडियो, टेक्स्ट और फोटो के रूप में उपलब्ध कराती है।
1,200 से ज्यादा रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर और 60 राउंड-द-क्लॉक एडिट डेस्क के साथ यह सर्विस 50 से ज्यादा कैटेगरी में कंटेंट देती है- जिसमें कृषि, प्रौद्योगिकी, विदेश मामले और राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। एक साल में 2,500 से ज्यादा मीडिया क्लाइंट इस सर्विस से जुड़ चुके हैं। यानी प्रसार भारती अब सिर्फ प्रसारक नहीं, बल्कि एक न्यूज एजेंसी की तरह भी काम कर रहा है।
Content Syndication Policy 2025- कमाई और पहुंच दोनों
2025 में प्रसार भारती ने एक ड्राफ्ट Content Syndication Policy तैयार की है, जो इसके कंटेंट को मॉनिटाइज करने और दुनियाभर में फैलाने का रास्ता खोलती है। इस नीति के तहत दूरदर्शन और आकाशवाणी का पुराना और नया सभी कंटेंट- जिसमें आर्काइव्ड प्रोग्राम्स, सरकारी कार्यक्रम, त्योहार, खेल और OTT पर डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट शामिल है- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स को बेचा जा सकेगा।
यह नीति भारत की सांस्कृतिक पहुंच बढ़ाने और प्रसार भारती की आमदनी बढ़ाने, दोनों के लिए अहम है। इसमें अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स के साथ रणनीतिक गठजोड़ की भी बात है, जिससे भारत की सांस्कृतिक धरोहर दुनिया के दर्शकों तक पहुंच सके।
कमाई का हिसाब और चुनौतियां
इन तमाम कोशिशों का असर अब दिखने भी लगा है। 2022 से 2025 के बीच दूरदर्शन और आकाशवाणी ने गैर-सरकारी विज्ञापनों से 587 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की। यह आंकड़ा बताता है कि निजी विज्ञापनदाता भी अब सरकारी प्रसारकों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। प्रसार भारती आज भी मुख्य रूप से सरकारी अनुदान पर निर्भर है। 2023-24 में उसे 2,644 करोड़ रुपए का सरकारी आवंटन मिला, जो 2024-25 में घटकर करीब 2,380 करोड़ रुपए रह गया- यानी लगभग 10 फीसदी की कटौती। यह कटौती कंटेंट प्रोडक्शन, तकनीकी उन्नयन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजनाओं पर असर डालती है। BBC जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों की तुलना में प्रसार भारती के पास संसाधन अभी भी सीमित हैं।
बड़े राष्ट्रीय आयोजन और लाइव कवरेज- सार्वजनिक प्रसारक की असली ताकत
सरकारी प्रसारक की असली ताकत तब दिखती है जब देश में कोई बड़ा आयोजन हो। महाकुंभ 2025 में दूरदर्शन ने दर्जनों कैमरों की मदद से शाही स्नान का लाइव प्रसारण किया, जो करोड़ों दर्शकों ने देखा। ISRO के सैटेलाइट लॉन्च हों या WAVES 2025 जैसा मीडिया समिट- दूरदर्शन वहां मौजूद रहता है और देश को जोड़ता है। यह कवरेज उस भरोसे और विश्वसनीयता को दर्शाती है जो सरकारी प्रसारक के पास होती है।
आगे का रास्ता- कहां जाना है और कितना दूर है मंजिल
आज प्रसार भारती उस मोड़ पर खड़ा है जहां पुरानी परंपरा और नई तकनीक दोनों का मेल हो रहा है। WAVES OTT, AI एंकर, NewsOnAir ऐप, PB-SHABD, और DD इंडिया की ग्लोबल स्ट्रेटेजी- ये सब मिलकर एक नई कहानी लिख रहे हैं। लेकिन जो मंजिल तय की गई है- BBC वर्ल्ड और अल-जजीरा जैसा ग्लोबल मीडिया पॉवर बनना- वो अभी भी दूर है।
इसके लिए जरूरी है कि बजट की कमी दूर हो, कंटेंट की गुणवत्ता में और सुधार आए, प्राइवेट और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स के साथ और ज्यादा गठजोड़ हो, और नौकरशाही की धीमी रफ्तार को बदला जाए। जिस तरह चीन का CGTN और कतर का अल-जजीरा दुनियाभर में अपना नेटवर्क बिछा चुके हैं, उसी तरह भारत को भी एक ताकतवर, स्वतंत्र और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया ब्रैंड की जरूरत है।
यह सफर मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। दूरदर्शन और आकाशवाणी के पास एक ऐसी विरासत है जो किसी भी प्राइवेट चैनल के पास नहीं है- भारत की सामूहिक स्मृति, उसकी भाषाओं की विविधता, और उसकी संस्कृति की अनंत गहराई। अगर इस विरासत को आधुनिक तकनीक और सही रणनीति का साथ मिले, तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा दर्शक दूरदर्शन की धुन सुनकर कहेगा- "हां, यही है भारत की आवाज।"
Pitch BFSI Summit 2026 का चौथा संस्करण आज आयोजित हो रहा है। इस समिट में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ एक मंच पर जुट रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
समिट के एजेंडे में BFSI सेक्टर में तेजी से हो रहे बदलाव और उन प्रमुख ट्रेंड्स पर चर्चा होगी, जो यह तय कर रहे हैं कि ब्रैंड ग्राहकों से किस तरह जुड़ रहे हैं।
ग्राहकों की उम्मीदों में लगातार बदलाव के बीच BFSI ब्रैंड तकनीक, पारदर्शिता और ग्राहकों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाते हुए उनके साथ बेहतर रिश्ते बनाने के नए तरीके तलाश रहे हैं। समिट में BFSI मार्केटिंग में AI, डेटा, क्रिएटिविटी और पर्सनलाइजेशन के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा होगी।
इंडस्ट्री लीडर्स इस बात पर चर्चा करेंगे कि ब्रैंड तेजी से बंटे हुए मीडिया माहौल, बदलते ग्राहक व्यवहार और ज्यादा प्रासंगिक व जिम्मेदार कम्युनिकेशन की बढ़ती जरूरत के बीच कैसे आगे बढ़ सकते हैं।
Pitch BFSI Summit 2026 तेजी से बदलते डिजिटल माहौल में नए तरीके से ग्राहकों से जुड़ने के मुद्दों पर चर्चा के लिए BFSI कम्युनिटी को एक मंच पर ला रहा है। समिट में BFSI मार्केटर्स के सामने मौजूद कई अहम चुनौतियों पर बातचीत होगी। इनमें कस्टमर अटेंशन, बढ़ती कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट, AI आधारित मार्केटिंग, डेटा और पर्सनलाइजेशन, क्रिएटर के जरिए फाइनेंशियल कम्युनिकेशन और मीडिया की बदलती भूमिका शामिल हैं।
चर्चा में यह भी देखा जाएगा कि ब्रैंड इनोवेशन के साथ-साथ प्राइवेसी और जिम्मेदार कम्युनिकेशन का ध्यान रखते हुए ग्राहकों के साथ मजबूत रिश्ते कैसे बना सकते हैं।
समिट में कई अहम कीनोट और पैनल डिस्कशन भी होंगे। इनमें AI आधारित बैंकिंग का वास्तव में क्या मतलब है, इंश्योरेंस सेक्टर की संभावनाओं पर अभी भी पर्याप्त मार्केटिंग क्यों नहीं हो रही है, ग्राहकों का ध्यान अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बंटने के बीच ब्रैंड अपनी प्रासंगिकता कैसे बनाए रख सकते हैं और भारत फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में दुनिया भर में भरोसेमंद पहचान कैसे बना सकता है जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी, कस्टमर एंगेजमेंट और इनोवेशन से जुड़े इन सत्रों के जरिए Pitch BFSI Summit 2026 इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को अपने अनुभव, विचार और भविष्य की रणनीतियां साझा करने का मंच देगा।
समिट के बाद Pitch Finovate - BFSI Marketing Awards का आयोजन होगा। इन अवॉर्ड्स का उद्देश्य BFSI क्षेत्र में सफल मार्केटिंग रणनीतियां, कैंपेन और नए आइडिया तैयार करने और लागू करने वाले लोगों और काम को सम्मानित करना है।
इस साल जूरी के चेयर वेंकट नागेश्वर चलसानी, चीफ एग्जिक्यूटिव, AMFI हैं। वहीं डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ, BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया को- जूरी चेयर हैं। जूरी में इंडस्ट्री के कई वरिष्ठ लीडर्स, बिजनेस हेड्स और विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों का लंबा अनुभव रखते हैं।
जी मीडिया कॉर्पोरेशन (Zee Media Corporation Limited) की 27वीं सालाना आम बैठक यानी AGM 22 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
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Vikas Saxena
जी मीडिया कॉर्पोरेशन (Zee Media Corporation Limited) की 27वीं सालाना आम बैठक यानी AGM 22 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और 12:14 बजे खत्म हुई। कंपनी ने बताया कि बैठक में रखे गए सभी तीनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।
बैठक में कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों और संबंधित रिपोर्टों को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया था। इसे शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया। दूसरे प्रस्ताव के तहत सुरेंद्र सिंह को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र थे।
तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया।
कंपनी के मुताबिक, एजीएम में कुल 70 शेयरधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 5 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से, जबकि 65 पब्लिक शेयरधारक थे।
AGM में रिमोट ई-वोटिंग और बैठक के दौरान हुई ई-वोटिंग के नतीजों की जांच नीलम गुप्ता एंड एसोसिएट्स की प्रोपराइटर नीलम गुप्ता ने स्क्रूटिनाइजर के तौर पर की। उनकी रिपोर्ट के आधार पर तीनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हुए।
मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बता दें कि NBDA वर्तमान में देश के प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स का शीर्ष संगठन है।
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‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ (NBDA) ने ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को वर्ष 2026-27 के लिए सर्वसम्मति से फिर प्रेजिडेंट चुना है। मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बता दें कि NBDA वर्तमान में देश के प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स का शीर्ष संगठन है। इसके 29 प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स सदस्य हैं, जिनके तहत 136 न्यूज चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इससे पहले NBDA की 19वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में MM TV Ltd. का प्रतिनिधित्व करने वाले जयंत एम मैथ्यू का बोर्ड में स्वागत किया गया। उन्हें NBDA के बोर्ड में नियुक्त किया गया है।
इसी बैठक में ‘टाइम्स ग्रुप’ की डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसी एंड कंटेंट एश्योरेंस) रचना बर्मन और ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ की ग्रुप जनरल काउंसल क्षिप्रा जटाना को NBDA का स्थायी निदेशक बनाया गया।
NBDA बोर्ड के अन्य सदस्य
आईसीसी चेयरमैन जय शाह के जन्मदिन पर उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रमुख फैसलों और महिला क्रिकेट, टेस्ट क्रिकेट तथा वैश्विक क्रिकेट से जुड़े बदलावों पर नजर डालते हैं।
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आज क्रिकेट जगत, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (International Cricket Council) के चेयरमैन जय शाह (Jay Shah) का जन्मदिन मना रहा है। जय शाह पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) यानी बीसीसीआई (BCCI) के सचिव रहे और अब आईसीसी के सबसे कम उम्र के चेयरमैन हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट में पे पैरिटी पॉलिसी (Pay Parity Policy) लागू की गई, जिसके तहत भारतीय महिला क्रिकेटरों को पुरुष क्रिकेटरों के बराबर मैच फीस देने का फैसला किया गया। यह भारतीय खेलों में इस तरह का पहला कदम बताया गया।
जय शाह के कार्यकाल में महिला प्रीमियर लीग (Women’s Premier League) की शुरुआत भी हुई। लंबे समय से चर्चा में रही इस लीग की शुरुआत के बाद इसमें ब्रॉडकास्ट डील्स (Broadcast Deals), फ्रेंचाइजी निवेश और दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली।
टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए टेस्ट क्रिकेट इंसेंटिव स्कीम (Test Cricket Incentive Scheme) भी शुरू की गई। इसके तहत भारतीय टेस्ट सीजन में खेलने वाले खिलाड़ियों की मैच फीस में बढ़ोतरी की गई। इसका उद्देश्य लंबे फॉर्मेट के प्रति खिलाड़ियों की दिलचस्पी बनाए रखना था।
बीसीसीआई में उनके कार्यकाल के दौरान घरेलू खिलाड़ियों की सैलरी और प्राइज मनी (Prize Money) में बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) का निर्माण और कोविड-19 महामारी के दौरान आईपीएल (IPL) का बायो-सिक्योर आयोजन भी हुआ।
एशियन क्रिकेट काउंसिल (Asian Cricket Council) के अध्यक्ष के तौर पर जय शाह ने एशिया कप (Asia Cup) को मजबूत मल्टी-वेन्यू टूर्नामेंट के तौर पर आगे बढ़ाने और एशिया में क्रिकेट के विस्तार पर भी काम किया।
दिसंबर 2024 में आईसीसी चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालने के बाद जय शाह ने वैश्विक स्तर पर क्रिकेट को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक (Los Angeles 2028 Olympics) में वापस लाने की दिशा में काम किया। इसके साथ ही इंटरनेशनल क्रिकेट में टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन (Technology Integration) और कैलेंडर रिफॉर्म (Calendar Reform) से जुड़े प्रयास भी जारी रहे।
पूर्व में सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18), रॉयटर्स (Reuters), टाइम्स नाउ (Times Now) और बिजनेस टुडे (Business Today) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं आकाशदीप
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स्टार्टअप पॉलिसी फोरम (SPF) ने आकाशदीप बरुआ को अपना कम्युनिकेशंस लीड नियुक्त किया है। SPF में अपनी नई भूमिका में आकाशदीप सोशल मीडिया, कम्युनिकेशंस और मीडिया रिलेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही वह संगठन के वर्कफ्लो में AI के इस्तेमाल को बढ़ाने और SPF के पॉलिसी पक्ष को प्रमुख ऑडियंस तक पहुंचाने का काम भी करेंगे।
आकाशदीप को प्रमुख न्यूजरूम्स में काम करने का सात साल से अधिक का अनुभव है। पूर्व में उन्होंने सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18), रॉयटर्स (Reuters), टाइम्स नाउ (Times Now) और बिजनेस टुडे (Business Today) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।
स्टार्टअप पॉलिसी फोरम की प्रेजिडेंट और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) श्वेता राजपाल कोहली ने आकाशदीप की नियुक्ति पर कहा कि वह न्यूजरूम के अनुभव और प्रोडक्ट-ग्रोथ माइंडसेट का अनोखा मेल लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि SPF को ऐसी कम्युनिकेशंस व्यवस्था की जरूरत है, जो गुणवत्ता से समझौता किए बिना तेजी और बड़े स्तर पर काम कर सके।
वहीं, आकाशदीप बरुआ ने कहा कि SPF पॉलिसी और उसके द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले स्टार्टअप्स के बीच एक नई दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस काम को उन लोगों तक पहुंचाने के तरीके को आकार देने के लिए उत्साहित हैं, जिन तक यह पहुंचना जरूरी है।
शो में चुनावों से पहले देश की बड़ी राजनीतिक खबरों और मुद्दों पर होगी चर्चा, लॉन्च एपिसोड में IIT Bombay, DUSU, ‘छात्रों की गूंज’ और उत्तर प्रदेश में बुलडोजर स्वागत जैसे विषय शामिल होंगे।
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Samachar4media Bureau
जानी-मानी टीवी पत्रकार और NDTV की मैनेजिंग एडिटर पद्मजा जोशी जल्द ही दर्शकों के लिए नया साप्ताहिक राजनीतिक शो ‘Politics Zindabad’ लेकर आ रही हैं। इसकी जानकारी उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के जरिए साझा की है।
पद्मजा जोशी ने अपने पोस्ट में बताया कि यह नया शो चुनावों की ओर बढ़ते देश के राजनीतिक माहौल के बीच बड़ी राजनीतिक खबरों और घटनाक्रमों पर केंद्रित होगा। इसका प्रसारण हर शुक्रवार रात 8 बजे किया जाएगा।
पद्मजा जोशी ने बताया कि शो का विशेष लॉन्च एपिसोड इसी सप्ताह प्रसारित होगा। इस एपिसोड में IIT Bombay, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU), ‘छात्रों की गूंज’ और उत्तर प्रदेश में बुलडोजर स्वागत जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
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— Padmaja Joshi (@PadmajaJoshi) September 21, 2026
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बता दें कि पद्मजा जोशी ने पिछले वर्ष NDTV में बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी नई पारी शुरू की थी। इसके साथ ही वह NDTV 24x7 पर प्राइम टाइम एंकरिंग की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। इससे पहले वह TV9 Network में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में कार्यरत थीं। अपने लंबे पत्रकारिता करियर में वह स्टार न्यूज (अब एबीपी न्यूज), हेडलाइंस टुडे, टाइम्स नाउ और TV9 Network जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में मनीष सिंघल का सफर उद्यमिता, दर्शकों की पसंद को समझने और स्थापित खिलाड़ियों को चुनौती देने के साहस की कहानी है।
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Samachar4media Bureau
भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में मनीष सिंघल का सफर उद्यमिता, दर्शकों की पसंद को समझने और स्थापित खिलाड़ियों को चुनौती देने के साहस की कहानी है। हाल ही में Enterr10 Television के संस्थापक मनीष सिंघल का जन्मदिन था। इस मौके पर 'दंगल टीवी' की सफलता के पीछे की सोच और विजन को याद किया गया।
मनीष सिंघल ने 2004 में इंदौर से Enterr10 Television की शुरुआत की। उन्होंने इसके लिए मुंबई और दिल्ली जैसे देश के पारंपरिक मीडिया केंद्रों से अलग इंदौर को चुना। शुरुआत में यह कारोबार उनके शॉपिंग और टेली-कॉमर्स बिजनेस के विस्तार के तौर पर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक बड़े टेलीविजन कारोबार में बदल गया।
2009 में लॉन्च हुआ 'दंगल टीवी'
इस सफर में सबसे बड़ा मोड़ 2009 में 'दंगल टीवी' के लॉन्च के साथ आया। शुरुआत में 'दंगल' एक भोजपुरी फिल्म चैनल था। इसके बाद 2015 में इसे हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) के रूप में पेश किया गया। यह बदलाव दिखाता है कि मनीष सिंघल दर्शकों की बदलती पसंद को समझने और हिंदी भाषी दर्शकों के लिए अलग तरह का कंटेंट तैयार करने में सक्षम रहे।
'दंगल' ने पारिवारिक ड्रामा, पौराणिक कथाओं और क्राइम आधारित कार्यक्रमों के जरिए धीरे-धीरे अपनी मजबूत ऑडियंस बनाई। चैनल की पहुंच शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण बाजारों तक बनी। इसकी सफलता ने उस पुरानी धारणा को भी चुनौती दी कि हिंदी एंटरटेनमेंट की दुनिया में सिर्फ पुराने बड़े ब्रॉडकास्टर्स, बड़े बजट और महानगरों से चलने वाले नेटवर्क ही आगे रह सकते हैं।
‘मास इंडिया’ को समझना बनी रणनीति
मनीष सिंघल की रणनीति के केंद्र में बड़े पैमाने पर भारतीय दर्शकों को समझना रहा है। इंडस्ट्री में चल रहे ट्रेंड को फॉलो करने के बजाय उन्होंने ऐसी कहानियों पर ध्यान दिया, जिनमें लोगों को अपने रिश्ते, भावनाएं और सांस्कृतिक मूल्य नजर आएं। दर्शकों को प्राथमिकता देने वाली इस सोच ने 'दंगल' को अलग-अलग इलाकों के दर्शकों से जोड़ने में मदद की और फ्री-टू-एयर टीवी सेगमेंट में एक मजबूत खिलाड़ी के तौर पर उसकी पहचान बनाई।
उनकी प्रतिस्पर्धा को लेकर सोच भी अलग रही है। उनका फॉर्मूला “'दंगल' versus 'दंगल'” रहा है। इसका मतलब है कि नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा पैमाना उसके प्रतिस्पर्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उसका अपना पिछला प्रदर्शन होना चाहिए।
ओरिजिनल कंटेंट पर बढ़ाया फोकस
मनीष सिंघल ने ओरिजिनल और इन-हाउस प्रोग्रामिंग में निवेश कर 'दंगल' की क्रिएटिव स्वतंत्रता को भी मजबूत किया। इससे नेटवर्क को कंटेंट, प्रोडक्शन और शेड्यूलिंग पर ज्यादा नियंत्रण मिला। साथ ही, दर्शकों की बदलती पसंद के हिसाब से तेजी से बदलाव करने में भी मदद मिली।
टीवी से आगे बढ़ा 'दंगल' का सफर
डिजिटल खपत बढ़ने के साथ मनीष सिंघल ने 'दंगल' ब्रैंड को पारंपरिक टीवी से आगे ले जाने की कोशिश की। 2022 में 'दंगल प्ले' की शुरुआत के साथ Enterr10 ने स्ट्रीमिंग की दुनिया में कदम रखा।
'दंगल प्ले' की कमान उनके बेटे अक्षत सिंघल संभाल रहे हैं। इस तरह कारोबार में एक तरफ मनीष सिंघल का मास-मार्केट ब्रॉडकास्टिंग अनुभव है, तो दूसरी तरफ अगली पीढ़ी का डिजिटल-फर्स्ट नजरिया भी जुड़ रहा है।
विदेशों तक पहुंचा 'दंगल'
मनीष सिंघल के नेतृत्व में नेटवर्क ने भारत से बाहर भी विस्तार की दिशा में काम किया है। 'दंगल' की इंटरनेशनल मार्केट्स में डिस्ट्रीब्यूशन और उसके कंटेंट की सिंडिकेशन के जरिए भारतीय मनोरंजन को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
कंपनी की क्षेत्रीय और हाई-डेफिनिशन पेशकशों की योजनाएं भी उसके मल्टीलिंगुअल और मल्टीप्लेटफॉर्म विस्तार की दिशा को दिखाती हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों तक पहुंच
विज्ञापनदाताओं के लिए भी 'दंगल' छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण बाजारों तक पहुंचने का एक जरिया बनकर उभरा है। इसकी व्यापक पहुंच और आम भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझने की क्षमता ने इसे उन ब्रैंड्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण बनाया है, जो महानगरों से आगे अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं।
मनीष सिंघल का सफर यह दिखाता है कि पारंपरिक मीडिया केंद्रों से बाहर रहकर भी बड़ा मीडिया कारोबार खड़ा किया जा सकता है। इंदौर से टेलीविजन कारोबार शुरू करने से लेकर 'दंगल' को राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले एंटरटेनमेंट ब्रैंड में बदलने तक, उनका सफर बताता है कि दर्शकों की सही समझ, लगातार बेहतर अमल और बड़े फैसले लेने का साहस प्रतिस्पर्धी बाजार में भी बदलाव ला सकता है।
Tips Music ने अपने शेयर बायबैक कार्यक्रम के 10वें दिन यानी 21 सितंबर 2026 को 12,416 इक्विटी शेयर वापस खरीदे। कंपनी ने ये शेयर औसतन 658.39 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे।
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Vikas Saxena
Tips Music ने अपने शेयर बायबैक कार्यक्रम के 10वें दिन यानी 21 सितंबर 2026 को 12,416 इक्विटी शेयर वापस खरीदे। कंपनी ने ये शेयर औसतन 658.39 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे। इसके साथ ही बायबैक के तहत अब तक वापस खरीदे गए शेयरों की कुल संख्या 3,37,116 हो गई है।
कंपनी ने BSE और NSE को दी गई रोजाना रिपोर्ट में बताया कि इन सभी शेयरों की खरीदारी ITI Securities Broking Limited के जरिए की गई। 21 सितंबर को BSE पर कोई शेयर नहीं खरीदा गया, जबकि NSE पर 12,416 शेयर खरीदे गए। इस दिन कोई शेयर क्लोज-आउट या MSEI पर ट्रेड नहीं हुआ।
10वें दिन खरीदारी में बड़ी गिरावट
10वें दिन शेयर बायबैक की मात्रा पिछले दिन के मुकाबले काफी कम रही। 18 सितंबर को कंपनी ने 63,000 शेयर वापस खरीदे थे, जबकि 21 सितंबर को यह संख्या घटकर 12,416 शेयर रह गई।
21 सितंबर की खरीदारी का पूरा विवरण:

पहले के दिनों में कितने शेयर खरीदे गए?
18 सितंबर को कंपनी ने 63,000 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 2,000 और NSE पर 61,000 शेयर शामिल थे। औसत खरीद कीमत ₹657.45 रही। इसके साथ कुल बायबैक 3,24,700 शेयर हो गया था।
17 सितंबर को कंपनी ने 64,000 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 2,000 और NSE पर 62,000 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹657.25 रही और कुल बायबैक 2,61,700 शेयर पहुंच गया था।
16 सितंबर को कंपनी ने 62,000 शेयर खरीदे थे। BSE पर 2,000 और NSE पर 60,000 शेयर खरीदे गए। औसत कीमत ₹658.40 रही और कुल बायबैक 1,97,700 शेयर हो गया था।
11 सितंबर को कंपनी ने 39,143 शेयर वापस खरीदे थे। इनमें BSE के 2,000 और NSE के 37,143 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹660.20 रही और कुल बायबैक 77,700 शेयर तक पहुंच गया था।
10 सितंबर को कंपनी ने 38,069 शेयर खरीदे थे। BSE पर 1,000 और NSE पर 37,069 शेयर खरीदे गए। औसत कीमत ₹651.79 रही।
बायबैक की शुरुआत 9 सितंबर 2026 को हुई थी। पहले दिन कंपनी ने 488 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 100 और NSE पर 388 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹649 प्रति शेयर रही।
₹44.50 करोड़ तक का है बायबैक
Tips Music ने 9 सितंबर को अपने सार्वजनिक ऐलान में बायबैक से जुड़ी समयसीमा को स्पष्ट करने के लिए एक करेक्शन जारी किया था। कंपनी के मुताबिक, बायबैक का अधिकतम आकार ₹44.50 करोड़ है। बायबैक पूरा करने की अंतिम तारीख इनमें से जो पहले आएगी, वह होगी:
कंपनी को इस अंतिम तारीख से पहले सभी भुगतान संबंधी दायित्व पूरे करने होंगे।
बायबैक की मुख्य शर्तें
कंपनी का बायबैक अधिकतम 66 कारोबारी दिनों तक खुला रहेगा और तय शर्तों के तहत इससे पहले भी बंद किया जा सकता है।
शेयरधारकों ने दी थी मंजूरी
शेयरधारकों ने AGM में विशेष प्रस्ताव के जरिए शेयर बायबैक को मंजूरी दी थी। 2 सितंबर 2026 को जारी वोटिंग नतीजों के मुताबिक, बायबैक प्रस्ताव के पक्ष में 9,92,51,965 वोट पड़े, जबकि 4,01,238 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव को 99.5974% वोट मिले। प्रमोटर्स ने बायबैक प्रस्ताव के पक्ष में पूरी तरह मतदान किया। वहीं, संस्थागत निवेशकों में करीब 3.08% वोट प्रस्ताव के खिलाफ पड़े।
₹750 प्रति शेयर का अधिकतम भाव
कंपनी ने बायबैक के लिए अधिकतम कीमत ₹750 प्रति शेयर तय की है। यह हाल की बाजार कीमतों के मुकाबले प्रीमियम पर है।
कंपनी के मुताबिक, ₹750 की कीमत 29 जुलाई 2026 को BSE के क्लोजिंग प्राइस से 9.50% अधिक और बोर्ड बैठक की सूचना से पहले के दो हफ्तों के BSE वॉल्यूम-वेटेड औसत भाव से 8.01% अधिक है। कंपनी ने यह भी बताया है कि उस पर कोई बकाया उधारी या कर्ज नहीं है। बायबैक के बाद भी कंपनी का सुरक्षित और असुरक्षित कर्ज, पेड-अप शेयर कैपिटल और फ्री रिजर्व के मुकाबले नियामकीय सीमा के भीतर रहेगा।
पारुल बुधिराजा ने ओगिल्वी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह सितंबर 2026 तक इंडिपेंडेंट फ्रैक्शनल सीएमओ और स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट रहीं।
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Samachar4media Bureau
पारुल बुधिराजा (Parul Budhiraja) ने ओगिल्वी (Ogilvy) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (Executive Vice President) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इसकी जानकारी उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए दी।
अपनी पोस्ट में पारुल ने लिखा कि वह ओगिल्वी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई पोजिशन शुरू करने को लेकर खुश हैं। ओगिल्वी से जुड़ने से पहले पारुल अप्रैल 2024 से सितंबर 2026 तक इंडिपेंडेंट फ्रैक्शनल सीएमओ (Independent Fractional CMO) और स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट (Strategic Consultant) के तौर पर काम कर रही थीं।
इससे पहले वह चीइल इंडिया (Cheil India) और कॉन्ट्रैक्ट इंडिया (Contract India) के साथ भी काम कर चुकी हैं।
'पिच बीएफसीआई समिट' (Pitch BFSI Summit) का चौथा संस्करण मुंबई में 23 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल होंगे।
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Samachar4media Bureau
'पिच बीएफसीआई समिट' (Pitch BFSI Summit) का चौथा संस्करण मुंबई में 23 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल होंगे। सम्मेलन में भारत के बदलते वित्तीय परिदृश्य, इससे जुड़े अवसरों और चुनौतियों के साथ-साथ आने वाले समय में विकास की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
इस सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण ‘India’s Next Decade: From Financialisation to Wealth Creation’ विषय पर होने वाली फायरसाइड चैट होगी। इसमें HSBC Mutual Fund के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर कैलाश कुलकर्णी और BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉ. अन्नुराग बत्रा शामिल होंगे।
इस बातचीत में चर्चा होगी कि औपचारिक वित्तीय उत्पादों में भारतीयों की बढ़ती भागीदारी को किस तरह लोगों और परिवारों के लिए लंबे समय में संपत्ति बनाने के अवसर में बदला जा सकता है।
फायरसाइड चैट में भारतीय निवेशकों के बदलते व्यवहार, म्यूचुअल फंड और दूसरे वित्तीय उत्पादों की बढ़ती भूमिका और अगले दशक में देश की बचत एवं निवेश व्यवस्था में होने वाले बदलावों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे अधिक भारतीय पारंपरिक बचत की आदतों से आगे बढ़कर व्यवस्थित तरीके से संपत्ति बनाने की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में वित्तीय क्षेत्र में भरोसा, भागीदारी और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के तरीकों पर भी बातचीत होगी।
दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में कई अहम बातचीत, मुख्य वक्ताओं के सत्र और पैनल चर्चाएं होंगी। इनमें बीएफएसआई क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल, एसआईपी और बीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़ी संभावनाएं, और जब लोगों का ध्यान अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बंटा हुआ है, तब ब्रांड अपनी प्रासंगिकता कैसे बनाए रखें, जैसे विषय शामिल होंगे।