सूत्रों के मुताबिक वह फिलहाल नेटवर्क के साथ अपनी भूमिका में बने हुए हैं और उनके संस्थान छोड़ने की समय सीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) के नेशनल सेल्स हेड अरुण सिंह रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक वह फिलहाल नेटवर्क के साथ अपनी भूमिका में बने हुए हैं और उनके संस्थान छोड़ने की समय सीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बता दें कि अरुण सिंह रावत वर्ष 2017 से रिपब्लिक वर्ल्ड नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे। इस दौरान उन्होंने नेटवर्क के प्रमुख ब्रैंड्स रिपब्लिक टीवी (Republic TV), रिपब्लिक भारत (Republic Bharat) और रिपब्लिक बांग्ला (Republic Bangla) की सेल्स और मोनेटाइजेशन स्ट्रेटेजी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, नेटवर्क के विस्तार के दौर में रावत प्रमुख कमर्शियल लीडर्स में शामिल रहे। खासतौर पर हिंदी न्यूज मार्केट में नेटवर्क की मजबूत मौजूदगी बनाने में उनका अहम योगदान माना जाता है। उनके कार्यकाल में रिपब्लिक नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे बड़े बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की।
रिपब्लिक वर्ल्ड से पहले अरुण सिंह रावत नेटवर्क18 (Network18) के साथ अकाउंट ग्रुप हेड-सेल्स के पद पर कार्य कर चुके हैं। वहां उन्होंने मारुति, हुंडई, डाबर, माइक्रोसॉफ्ट और नेस्ले जैसे बड़े क्लाइंट्स को संभाला। इस दौरान वह CNN-News18 और CNBC-TV18 जैसे जाने-माने ब्रैंड्स के लिए भी काम कर चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने श्री अधिकारी ब्रदर्स (Shri Adhikari Brothers) ग्रुप में भी काम किया है, जहां उन्होंने मस्ती (Mastiii) और दबंग (Dabangg) जैसे लोकप्रिय चैनलों के लिए कॉरपोरेट सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभाली थी।
टेलीविजन सेल्स, मीडिया प्लानिंग और बिजनेस डेवलपमेंट में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले अरुण सिंह रावत को इंडस्ट्री में मजबूत एजेंसी रिलेशन और रेवेन्यू ग्रोथ रणनीतियों के लिए जाना जाता है। FMCG, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और टेलीकॉम जैसे सेक्टर्स में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
किरण मणि को दो दशक से अधिक का अनुभव है। JioStar से पहले वह करीब 13 वर्षों तक गूगल के साथ जुड़े रहे। इसके अलावा उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी दिग्गज कंपनियों में भी काम किया है।
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डिजिटल और टेक इंडस्ट्री से जुड़ा एक बड़ा नाम अब OpenAI के साथ नई पारी शुरू करने जा रहा है। दरअसल, जियोस्टार (JioStar) के सीईओ (Digital) किरण मणि इस सप्ताह कंपनी को अलविदा कहने जा रहे हैं। वह अगले महीने से OpenAI में एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किरण मणि सिंगापुर से काम करेंगे और OpenAI के चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर जेसन क्वोन को रिपोर्ट करेंगे। माना जा रहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में OpenAI की स्ट्रैटेजी और विस्तार को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका होगी।
किरण मणि ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए JioStar में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि उदय शंकर और आकाश अंबानी ने उनके सोचने के तरीके और महत्वाकांक्षा को नई दिशा दी।
टेक और डिजिटल इकोसिस्टम में किरण मणि को दो दशक से अधिक का अनुभव है। JioStar से पहले वह करीब 13 वर्षों तक गूगल (Google) के साथ जुड़े रहे। इसके अलावा उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और आईबीएम (IBM) जैसी दिग्गज कंपनियों में भी काम किया है।
मीडिया और टेक इंडस्ट्री में किरण मणि की पहचान एक मजबूत डिजिटल रणनीतिकार के तौर पर रही है। ऐसे में OpenAI में उनकी नियुक्ति को कंपनी के एशिया-प्रशांत विस्तार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संदीप भूषण के पास कंज्यूमर, डिजिटल और मीडिया बिजनेस में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह इससे पहले मेटा में इंडिया डायरेक्टर, ग्लोबल मार्केटिंग सॉल्यूशंस के पद पर कार्यरत थे।
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कॉलर आईडी और स्पैम ब्लॉकिंग प्लेटफॉर्म ट्रूकॉलर (Truecaller) ने मेटा (Meta) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी संदीप भूषण को अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल करने की घोषणा की है। कंपनी का मानना है कि संदीप भूषण का लंबा अनुभव ट्रूकॉलर की आगे की स्ट्रैटेजी और विस्तार योजनाओं में अहम भूमिका निभाएगा।
संदीप भूषण के पास कंज्यूमर, डिजिटल और मीडिया बिजनेस में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह इससे पहले मेटा में इंडिया डायरेक्टर, ग्लोबल मार्केटिंग सॉल्यूशंस के पद पर कार्यरत थे।
अपने करियर के दौरान उन्होंने सैमसंग (Samsung) में स्मार्टफोन बिजनेस से जुड़े मार्केटिंग और ऑपरेटर पार्टनरशिप्स पर काम किया। इसके अलावा वह WSJ-Mint के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और वहां COO की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत यूनिलीवर (Unilever) से की थी, जहां उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम किया।
संदीप भूषण ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि ट्रूकॉलर ने वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहां यूजर ट्रस्ट और मोनेटाइजेशन दोनों का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इकोसिस्टम के तेजी से विकसित होने के दौर में यह संतुलन किसी भी कंपनी की बड़ी ताकत बन सकता है।
उन्होंने कहा कि वह बोर्ड और मैनेजमेंट टीम के साथ मिलकर कंपनी की अगली विकास यात्रा में योगदान देने को लेकर उत्साहित हैं।
ट्रूकॉलर के सह-संस्थापक नामी जारिंगहलाम (Nami Zarringhalam) ने कहा कि संदीप भूषण का बोर्ड में शामिल होना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि हाई-ग्रोथ मार्केट्स, खासकर भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र को लेकर उनकी समझ कंपनी के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
कंपनी के अनुसार, संदीप भूषण फिलहाल Traya Health के बोर्ड सदस्य भी हैं। ट्रूकॉलर में उनकी कोई शेयरहोल्डिंग नहीं है और उन्हें कंपनी, उसके प्रबंधन तथा बड़े शेयरधारकों से स्वतंत्र निदेशक माना गया है।
निरुपमा के एस पिछले करीब साढ़े आठ वर्षों से ‘एशियानेट न्यूज नेटवर्क’ से जुड़ी थीं। यहां उन्होंने डिजिटल टीम का नेतृत्व किया और कन्नड़ डिजिटल पत्रकारिता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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वरिष्ठ पत्रकार निरुपमा के एस ने ‘वनइंडिया कन्नड़’ की एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल ली है। खास बात यह है कि उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भी इसी संस्थान से की थी और अब 19 साल बाद एक बार फिर उसी संगठन में लीडरशिप भूमिका में लौटी हैं।
निरुपमा के एस ने लिंक्डइन पर अपनी नई पारी की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि जब उन्होंने 19 साल पहले ‘वनइंडिया’ में कॉपी एडिटर के तौर पर काम शुरू किया था, तब उन्हें डिजिटल दुनिया की ज्यादा समझ नहीं थी। शिवमोग्गा में जिला रिपोर्टर के रूप में काम करने के बाद उन्हें यह भी लगता था कि ऑनलाइन प्रकाशित खबरों को आखिर कौन पढ़ेगा। लेकिन समय के साथ यही सफर उनके पेशेवर जीवन का सबसे बड़ा बदलाव बन गया।
उन्होंने अपने करियर के दौरान ‘कन्नड़प्रभा डॉट कॉम’, ‘विजय कर्नाटक’ और बाद में ‘एशियानेट सुवर्णा न्यूज’ के डिजिटल विभाग में काम किया। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव, डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप और फेक न्यूज के दौर में फैक्ट-चेकिंग की अहमियत को करीब से समझा।
निरुपमा के एस पिछले करीब साढ़े आठ वर्षों से ‘एशियानेट न्यूज नेटवर्क’ से जुड़ी थीं। यहां उन्होंने डिजिटल टीम का नेतृत्व किया और कन्नड़ डिजिटल पत्रकारिता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में वेबसाइट ट्रैफिक बढ़ाने, यूट्यूब व्यूअरशिप और सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के लिए कई नई स्ट्रैटेजी पर काम किया गया।
हाल ही में अपनी विदाई पोस्ट में उन्होंने ‘कन्नड़प्रभा’ और ‘सुवर्णा न्यूज’ के साथ बिताए वर्षों को अपने करियर का सबसे सुनहरा दौर बताया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने उन्हें पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर काफी कुछ सिखाया।
अब ‘वनइंडिया कन्नड़’ की एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद निरुपमा ने कहा है कि वह एक मजबूत टीम के साथ सार्थक पत्रकारिता करने और लगातार सीखने की इस यात्रा को आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में डिजिटल मीडिया के नए अवसरों को लेकर भी उत्साह जताया।
करीब 23 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव वाली निरुपमा के एस ने अपने करियर में जिला रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल एडिटोरियल लीडरशिप तक का लंबा सफर तय किया है। उन्होंने ‘टाइम्स इंटरनेट’ में भी काम किया, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हार्ड न्यूज रिपोर्टिंग, कंटेंट एडिटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डिजिटल स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। निरुपमा ने गुजरात यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने पत्रकारिता, अंग्रेजी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है।
24 मई 1965 को जन्मे वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई आज 62 वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। अक्टूबर 2026 में वह पत्रकारिता के 38 सक्रिय वर्ष पूरे करेंगे और आज भी पूरी ऊर्जा के साथ इस पेशे में सक्रिय हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यह खबर एक ऐसे पत्रकार की है, जिनका नाम भारतीय मीडिया के इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज है। जी हां, यहां बात हो रही है वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की, जिन्होंने दशकों से भारतीय पत्रकारिता की दिशा तय की है।वह आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 24 मई 1965 को जन्मे राजदीप आज 62 वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। आने वाले अक्टूबर 2026 में वह पत्रकारिता के 38 सक्रिय वर्ष पूरे करेंगे और आज भी पूरी ऊर्जा के साथ इस पेशे में सक्रिय हैं।
राजदीप का करियर केवल पदों की सूची नहीं, बल्कि वह सफर है जिसने भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता को नया रूप दिया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी, जब वे 1988 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से जुड़े और मुंबई संस्करण के सिटी एडिटर बने। राजदीप ने ब्रॉडकास्ट मीडिया में अपना सफर 1994 में शुरू किया, जब उन्होंने प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद NDTV (New Delhi Television) में बतौर पॉलिटिकल एडिटर (राजनीतिक संपादक) जॉइन किया। इसके बाद वे NDTV 24x7 और NDTV इंडिया के मैनेजिंग एडिटर बने। वहां उन्होंने ‘द बिग फाइट’ जैसे चर्चित शो को होस्ट किया।
17 अप्रैल 2005 को NDTV से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने CNN और टीवी18 के साथ मिलकर अपनी मीडिया कंपनी ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्ट न्यूज (GBN)’ शुरू की और CNN-IBN की नींव रखी, जो 17 दिसंबर 2005 को ऑन एयर हुआ। इसी समूह में 'चैनल 7' को भी शामिल किया गया, जिसे बाद में IBN7 के नाम से जाना गया। इसके अंतर्गत IBN-लोकमत जैसा चैनल भी शामिल हुआ।
राजदीप सरदेसाई CNN-IBN के पहले एडिटर-इन-चीफ बने और यह चैनल दिसंबर 2005 में ऑन-एयर हुआ। मई 2014 में जब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने CNN-IBN, IBN7 और CNBC-TV18 जैसे नेटवर्क 18 समूह के चैनलों का अधिग्रहण किया, तो इसके कुछ ही हफ्तों बाद 1 जुलाई 2014 को राजदीप सरदेसाई और CNN-IBN की पूरी फाउंडिंग टीम ने नेटवर्क18 समूह से इस्तीफा दे दिया।
अपने करियर के दौरान उन्होंने प्राइमटाइम न्यूज एंकरिंग की, बड़े-बड़े एडिटोरियल टीम्स का नेतृत्व किया और भारत और विदेश के कई अहम व्यक्तित्वों का इंटरव्यू किया। वर्तमान में राजदीप सरदेसाई इंडिया टुडे ग्रुप के साथ कंसल्टिंग एडिटर के रूप में जुड़े हुए हैं।
राजदीप को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें 2008 में मिला ‘पद्मश्री’ प्रमुख है। इसके अलावा 2002 के गुजरात दंगों की रिपोर्टिंग के लिए उन्हें ‘इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टर्स अवार्ड’ और ‘रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड’ भी मिला।
वे एक प्रतिष्ठित लेखक भी हैं। उनकी किताबों में शामिल हैं:
The Election that Changed India (2014)
Democracy’s XI: The Great Indian Cricket Story
Newsman: Tracking India in the Modi Era (2018)
How Modi Won India (2019)
The Election that Surprised India (2024)
साथ ही, उन्होंने ‘The Truth Hurts’ जैसे संग्रह में भी योगदान दिया है, जिसमें 2002 के दंगों में मीडिया की भूमिका को समझाया गया।
राजदीप का पारिवारिक जीवन भी खासा प्रेरणादायक रहा है। वे अहमदाबाद, गुजरात में जन्मे। उनके पिता दिलीप सरदेसाई भारतीय टेस्ट क्रिकेटर थे और उनकी मां नंदिनी सरदेसाई मुंबई की सामाजिक कार्यकर्ता और सेंट जेवियर्स कॉलेज की समाजशास्त्र विभाग की प्रमुख रही हैं। पढ़ाई की बात करें तो राजदीप ने कैम्पियन स्कूल और कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से स्कूली शिक्षा ली। फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और आगे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून में डिग्रियां हासिल कीं। ऑक्सफोर्ड में उन्होंने यूनिवर्सिटी की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और क्रिकेट ‘ब्लू’ की उपाधि प्राप्त की।
राजदीप की कहानी सिर्फ एक पत्रकार की नहीं, बल्कि उस जुनून की है जो सच की खोज में कभी नहीं थमता। एक ऐसे दौर में जब मीडिया लगातार बदल रहा है, राजदीप सरदेसाई जैसी शख्सियतें यह भरोसा दिलाती हैं कि पत्रकारिता की रीढ़ अब भी मजबूत है, जहां खबर सिर्फ शब्द नहीं, जिम्मेदारी होती है।
अपने तेज, आक्रामक और बेबाक एंकरिंग स्टाइल के लिए मशहूर टीवी पत्रकार अर्पिता आर्या की इस समूह के साथ यह दूसरी पारी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अपने तेज, आक्रामक और बेबाक एंकरिंग स्टाइल के लिए मशहूर टीवी पत्रकार अर्पिता आर्या ने नेटवर्क18 के साथ दोबारा अपनी पारी शुरू कर दी है। उन्होंने इस समूह के हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) में बतौर एंकर जॉइन किया है।
इस बारे में न्यूज18 इंडिया ने सोशल मीडिया पर एक प्रोमो भी जारी किया है। इस प्रोमो में कहा गया है कि अब नए तेवर में दिखेंगी अर्पिता आर्या, देश के नंबर 1 न्यूज़ चैनल News18 इंडिया के साथ।
अब नए तेवर में दिखेंगी अर्पिता आर्या,
— News18 India (@News18India) May 21, 2026
देश के नंबर 1 न्यूज़ चैनल
News18 इंडिया के साथ#News18India | @ARPITAARYA pic.twitter.com/GA4z45J5Ib
विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो वह यहां शाम पांच बजे का शो होस्ट करेंगी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। बता दें कि समाचार4मीडिया ने पिछले महीने छह अप्रैल को ही विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि अर्पिता आर्या दोबारा से ‘नेटवर्क18’ जॉइन करने जा रही हैं। अब इस खबर पर आधिकारिक रूप से मुहर लग गई है।
यह भी पढ़ें: जल्द इस न्यूज चैनल की स्क्रीन पर दोबारा नजर आ सकती हैं अर्पिता आर्या!
अर्पिता आर्या की इस समूह के साथ यह दूसरी पारी है। अपनी पहली पारी के दौरान अर्पिता करीब छह साल तक ‘न्यूज18 इंडिया’ के साथ जुड़ी रही थीं। ‘न्यूज18’ पर वह ‘मुद्दा गरम है’, ‘खबर पक्की है’, ‘सौ बात की एक बात’ और ‘हम तो पूछेंगे’ जैसे शो होस्ट करती थीं।
इसके बाद उन्होंने अगस्त 2021 में ‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह जॉइन कर लिया था। वह इस समूह के हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ (AajTak) में बतौर एंकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं, जहां से कुछ समय पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और अब फिर नेटवर्क18 की टीम में शामिल हो गई हैं।
अर्पिता अपने बेबाक अंदाज और निडर रवैये के लिए जानी जाती हैं। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली अर्पिता को मीडिया में काम करने का एक दशक से ज्यादा का अनुभव है। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘KTV’ कानपुर के साथ की थी। पूर्व में वह ‘एपीएन’ और ‘न्यूज एक्सप्रेस’ चैनल में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से अर्पिता आर्या को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
गुजरात के सबसे बड़ा और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' (The Sandesh Limited) ने जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 29 मई 2026 को आयोजित की जाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गुजरात के सबसे बड़ा और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड'(The Sandesh Limited) ने जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 29 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। यह बैठक कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस में होगी, जिसमें मार्च 2026 तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने शेयर बाजार को भेजी सूचना में बताया कि बोर्ड बैठक में स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी देने और रिकॉर्ड पर लेने पर फैसला होगा। इसके साथ ही ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।
बैठक में कंपनी के इक्विटी शेयरधारकों के लिए फाइनल डिविडेंड की सिफारिश पर भी चर्चा होगी। यह डिविडेंड 10 रुपये फेस वैल्यू वाले इक्विटी शेयरों पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिया जा सकता है। हालांकि, अंतिम मंजूरी कंपनी की आगामी सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की स्वीकृति के बाद ही मिलेगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि सेबी के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों और कंपनी की आंतरिक नीति के तहत ट्रेडिंग विंडो 1 अप्रैल 2026 से बंद है। यह विंडो वित्तीय नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी।
Basilic Fly Studio ने बताया कि 13 मई 2026 की पोस्टल बैलेट नोटिस व उससे जुड़ा एक्सप्लेनेटरी स्टेटमेंट शेयरधारकों को भेजा जा रहा है, ताकि कंपनी अपने सदस्यों से एक खास प्रस्ताव पर मंजूरी मांग सके।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Basilic Fly Studio Limited ने अपने शेयरधारकों के लिए पोस्टल बैलेट नोटिस जारी किया है। कंपनी ने यह जानकारी 20 मई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी। कंपनी ने बताया कि 13 मई 2026 की पोस्टल बैलेट नोटिस और उससे जुड़ा एक्सप्लेनेटरी स्टेटमेंट शेयरधारकों को भेजा जा रहा है। इसके जरिए कंपनी अपने सदस्यों से एक खास प्रस्ताव पर मंजूरी मांग रही है।
यह प्रस्ताव कंपनी एक्ट 2013 की धारा 185 के तहत किसी संस्था को लोन देने, गारंटी देने या सिक्योरिटी उपलब्ध कराने से जुड़ा है। इसके लिए स्पेशल रेजोल्यूशन पास कराया जाएगा।
कंपनी ने कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के लागू नियमों के अनुसार पोस्टल बैलेट नोटिस सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जा रहा है। यह नोटिस उन्हीं शेयरधारकों को भेजा जाएगा जिनके ईमेल पते कंपनी या डिपॉजिटरी के पास रजिस्टर्ड हैं। 15 मई 2026 को कट-ऑफ डेट माना गया है।
कंपनी ने ई-वोटिंग की सुविधा देने के लिए National Securities Depository Limited (NSDL) की सेवाएं ली हैं। रिमोट ई-वोटिंग 21 मई 2026 सुबह 9 बजे से शुरू होगी और 19 जून 2026 शाम 5 बजे तक चलेगी।
कंपनी ने बताया कि पोस्टल बैलेट नोटिस उसकी वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगा।
क्या है पूरा मामला?
कंपनी अपने बोर्ड ऑफ डायरेकर्स को यह अधिकार देना चाहती है कि वह कंपनी की किसी सब्सिडियरी, एसोसिएट, जॉइंट वेंचर, ग्रुप एंटिटी या ऐसी किसी संस्था को, जिसमें कंपनी के किसी डायरेक्टर की रुचि हो, 50 करोड़ रुपये तक का लोन दे सके, गारंटी दे सके या सिक्योरिटी उपलब्ध करा सके।
यह रकम एक बार में या अलग-अलग हिस्सों में दी जा सकती है। कंपनी के मुताबिक यह पैसा संबंधित संस्था की मुख्य कारोबारी गतिविधियों और उससे जुड़े कामों में इस्तेमाल होगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि बोर्ड जरूरत के हिसाब से नियम और शर्तें तय करेगा और जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेगा। इसके अलावा सरकारी या रेगुलेटरी मंजूरियां लेने का अधिकार भी बोर्ड के पास होगा।
शेयरधारकों को सिर्फ ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा
कंपनी ने साफ किया कि इस पोस्टल बैलेट के लिए कोई फिजिकल फॉर्म या प्री-पेड लिफाफा नहीं भेजा जाएगा। शेयरधारक सिर्फ रिमोट ई-वोटिंग के जरिए ही अपने पक्ष या विपक्ष में वोट दे सकेंगे।
कंपनी ने ई-वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा कराने के लिए एम. अलगर और डी. सरवनन, डिजिग्नेटेड पार्टनर्स, Alagar & Associates LLP को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया है।
रिजल्ट कब आएगा?
वोटिंग पूरी होने के बाद स्क्रूटिनाइजर अपनी रिपोर्ट कंपनी के चेयरमैन या अधिकृत व्यक्ति को सौंपेंगे। इसके बाद 23 जून 2026 तक नतीजों की घोषणा की जाएगी। रिजल्ट कंपनी की वेबसाइट, NSDL की वेबसाइट और NSE की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी के मुताबिक बोर्ड ऑफ डायरेकर्स हर प्रस्ताव का सावधानी से मूल्यांकन करेगा और कंपनी के हित में फैसला लिया जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि लोन या गारंटी का इस्तेमाल सिर्फ संबंधित संस्था के मुख्य कारोबार और उससे जुड़े कामों के लिए ही होगा।
कंपनी के बोर्ड ने इस स्पेशल रेजोल्यूशन को मंजूरी देने की सिफारिश शेयरधारकों से की है।
डॉ. अनुराग बत्रा और धीरज सिन्हा ने भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री को तेजी से बदल रही ताकतों और भविष्य को लेकर इंडस्ट्री में बने मजबूत आशावाद पर विस्तार से चर्चा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गोवाफेस्ट 2026 में इस बार विज्ञापन इंडस्ट्री के भविष्य को लेकर सिर्फ डर और चिंता की बातें नहीं हुईं, बल्कि एक ऐसी बातचीत देखने को मिली जिसने इंडस्ट्री के बदलते दौर को नई नजर से समझाने की कोशिश की। इस खास सेशन में McCann Group के सीईओ धीरज सिन्हा और 'BW बिजनेसवर्ल्ड' व 'एक्सचेंज4मीडिया' ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा आमने-सामने थे। बातचीत को डॉ. अनुराग बत्रा ने होस्ट किया। दोनों ने मिलकर भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलावों और उसके भविष्य पर खुलकर चर्चा की।
इस साल गोवाफेस्ट का माहौल थोड़ा अलग था। एक तरफ इंडस्ट्री क्रिएटिविटी, बड़े कैंपेन और इनोवेशन का जश्न मना रही थी, वहीं दूसरी तरफ AI, छोटी होती टीमों, बदलते बिजनेस मॉडल और एजेंसियों के भविष्य को लेकर चिंता भी साफ नजर आ रही थी।
इसी माहौल में धीरज सिन्हा और डॉ. अनुराग बत्रा की बातचीत शुरू हुई। यह बातचीत इसलिए खास रही क्योंकि इसमें सिर्फ डर फैलाने वाली बातें या दिखावटी पॉजिटिविटी नहीं थी। दोनों ने एक-दूसरे की बातों को आगे बढ़ाते हुए यह समझाने की कोशिश की कि विज्ञापन इंडस्ट्री खत्म नहीं हो रही, बल्कि खुद को नए तरीके से बदल रही है।
विज्ञापन खत्म नहीं हो रहा, बदल रहा है
धीरज सिन्हा ने बातचीत की शुरुआत विज्ञापन इंडस्ट्री को लेकर फैल रही निराशा के खिलाफ अपनी राय रखते हुए की। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा आधा भरा गिलास देखने वाला इंसान हूं। जब दुनिया के कई बाजार सिर्फ 4% ग्रोथ की बात कर रहे हैं, तब भारत 15% ग्रोथ की बात कर रहा है। भारत तेजी से एक बड़ी कंज्यूमर इकोनॉमी बन रहा है। ऐसे में कोई न कोई तो नए ब्रांड बनाएगा ही।”
धीरज सिन्हा के मुताबिक, अभी जो बदलाव दिख रहे हैं, वह इंडस्ट्री के खत्म होने का संकेत नहीं बल्कि उसके बदलने का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “हां, विज्ञापन बदल रहा है। बिजनेस मॉडल बदल रहा है। लेकिन मैं आज भी विज्ञापन इंडस्ट्री को लेकर बेहद सकारात्मक हूं।”
डॉ. अनुराग बत्रा ने उनकी बात से सहमति जताई, लेकिन एक अहम बात भी जोड़ी। उन्होंने कहा कि सवाल अब यह नहीं है कि विज्ञापन बढ़ रहा है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या एजेंसियां खुद को इतनी तेजी से बदल पा रही हैं कि वे इस ग्रोथ का हिस्सा बनी रहें।
उन्होंने कहा, “आज भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की है। अगले साल यह 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकती है। विज्ञापन बढ़ रहा है, ब्रांड्स पैसा खर्च कर रहे हैं, बिजनेस स्टोरीटेलिंग में निवेश कर रहे हैं। लेकिन भविष्य की विज्ञापन एजेंसी शायद वैसी न दिखे जैसी आज हम जानते हैं।”
यहीं से इस पूरे सेशन का असली टोन तय हो गया। यह बातचीत बचने की नहीं, खुद को नए तरीके से बनाने की थी।
अब साथ आ रहे हैं टेक्नोलॉजी, विज्ञापन और एंटरटेनमेंट
इस चर्चा का एक बड़ा मुद्दा था कि दुनिया भर में अब टेक्नोलॉजी, विज्ञापन और एंटरटेनमेंट एक साथ मिल रहे हैं। डॉ. बत्रा ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है जब सिलिकॉन वैली, मैडिसन एवेन्यू और हॉलीवुड जैसी तीन अलग-अलग दुनिया एक-दूसरे के करीब आ रही हैं।
उन्होंने कहा, “जो एजेंसियां टेक्नोलॉजी, स्टोरीटेलिंग और एंटरटेनमेंट को एक साथ जोड़ पाएंगी, वही भविष्य में सफल होंगी।”
धीरज सिन्हा ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अब क्लाइंट सिर्फ विज्ञापन कैंपेन नहीं चाहते। उन्होंने कहा, “आज क्लाइंट्स को सिर्फ कैंपेन नहीं चाहिए। उन्हें बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन चाहिए। उन्हें डेटा इंटेलिजेंस चाहिए। उन्हें रियल टाइम में कंज्यूमर की समझ चाहिए। क्रिएटिविटी आज भी जरूरी है, लेकिन अब सिर्फ क्रिएटिविटी काफी नहीं है।”
डॉ. बत्रा ने पब्लिसिस जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते डेटा, AI और ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ कदम बढ़ा दिए, इसलिए उनका पूरा बिजनेस नैरेटिव बदल गया।
उन्होंने कहा, “पब्लिसिस ने बदलाव को जल्दी समझ लिया था। उन्होंने डेटा, AI और ट्रांसफॉर्मेशन में निवेश किया। इसी वजह से उनके बारे में लोगों की सोच भी बदल गई।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी होल्डिंग कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खुद को अलग साबित करने की है।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “पुरानी होल्डिंग कंपनियां अब क्लाउड किचन जैसी हो गई हैं। बाहर अलग-अलग ब्रांड्स दिखते हैं, लेकिन अंदर का सिस्टम लगभग एक जैसा होता है। अब सवाल यह है कि आप खुद को सच में अलग कैसे दिखाएंगे?”
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या उसकी अपनी सोच भी हो सकती है
इस बातचीत का एक दिलचस्प हिस्सा तब आया जब चर्चा इंडस्ट्री की अपनी मानसिकता पर पहुंची। धीरज सिन्हा ने माना कि इंडस्ट्री के अंदर जरूरत से ज्यादा नकारात्मक माहौल बन गया है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “हर सुबह मैं ट्रेड मीडिया देखता हूं और सोचता हूं कि आज कौन सी बुरी खबर पढ़ने को मिलेगी।”
लेकिन इसके बाद उन्होंने गंभीर होकर कहा कि इसके लिए इंडस्ट्री के बड़े लीडर्स भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “अगर इंडस्ट्री के बड़े लोग ही बार-बार कहेंगे कि इंडस्ट्री खत्म हो रही है, तो वही सबसे बड़ा नैरेटिव बन जाएगा।”
डॉ. बत्रा ने भी इस बात से सहमति जताई और माना कि इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म्स और लीडरशिप ने डर को ज्यादा बढ़ाया है, संभावनाओं को कम दिखाया है।
उन्होंने कहा, “हमने अपनी अच्छी बातों को उतना सेलिब्रेट नहीं किया। ईमानदारी जरूरी है, लेकिन सही नजरिया रखना भी जरूरी है।”
दोनों बार-बार एक बात पर लौटे कि भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री आज भी बढ़ रही है। एजेंसियां असरदार काम कर रही हैं। नए बिजनेस बन रहे हैं। नया टैलेंट सामने आ रहा है। फॉर्मेट बदल सकता है, लेकिन स्टोरीटेलिंग की जरूरत कभी खत्म नहीं होगी।
AI सबकुछ बदल रहा है, लेकिन इंसानी क्रिएटिविटी अभी भी सबसे खास
पूरी बातचीत में AI सबसे बड़ा विषय रहा, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि दोनों में से किसी ने भी इसे खतरे के रूप में नहीं देखा। दोनों का मानना था कि AI काम करने के तरीके पूरी तरह बदल देगा, लेकिन इंसानी सोच और ओरिजिनैलिटी की अहमियत और बढ़ जाएगी।
डॉ. बत्रा ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बड़ी कंपनी के CEO अपने ऑफिस में दो लैपटॉप रखते हैं। एक रोजमर्रा के काम के लिए और दूसरा सिर्फ AI टूल्स एक्सपेरिमेंट करने के लिए, क्योंकि उनकी कंपनी बाहरी LLM एक्सेस की अनुमति नहीं देती।
उन्होंने कहा, “क्लाइंट्स पहले से सीख रहे हैं। अगर एजेंसियां उसी रफ्तार से नहीं सीखेंगी, तो यह खतरनाक होगा।” धीरज सिन्हा ने माना कि AI आने वाले समय में कंपनियों की संरचना पूरी तरह बदल देगा।
उन्होंने कहा, “हां, पारंपरिक सेटअप में लोगों की संख्या कम हो सकती है। लेकिन एंटरप्रेन्योरशिप बढ़ेगी। आज एक क्रिएटर अकेले भी एजेंसी जैसा काम कर सकता है। AI ऑपरेशनल निर्भरता कम करता है और व्यक्ति की क्षमता बढ़ाता है।”
फिर भी दोनों का मानना था कि AI के दौर में असली और इंसानी सोच की कीमत और बढ़ेगी। डॉ. बत्रा ने कहा, “जितना AI बढ़ेगा, उतनी इंसानी खासियत की अहमियत बढ़ेगी। AI सामान्य काम बहुत अच्छे से कर लेगा, लेकिन असली भावनाएं, ओरिजिनल सोच और इंसानी समझ अभी भी इंसानों के पास ही है।”
धीरज सिन्हा ने भी इसी बात को अपने तरीके से कहा। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी काम को तेज कर सकती है, लेकिन सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी इंसानी समझ से ही आता है।”
सिर्फ परफॉर्मेंस मार्केटिंग से नहीं बनते बड़े ब्रांड
दोनों इस बात पर भी सहमत दिखे कि इंडस्ट्री अब जरूरत से ज्यादा परफॉर्मेंस मार्केटिंग पर निर्भर हो गई है।
डॉ. बत्रा ने कहा कि परफॉर्मेंस विज्ञापन तुरंत रिजल्ट जरूर देता है, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे बड़े ब्रांड नहीं बन सकते। उन्होंने कहा, “परफॉर्मेंस विज्ञापन एक बाघ की तरह है। जब तक उसे खाना देते रहेंगे, वह काम करता रहेगा। जैसे ही रोकेंगे, असर खत्म हो जाएगा। असली ब्रांड बिल्डिंग लंबे समय की याद बनाती है।”
धीरज सिन्हा ने माना कि IPL जैसे बड़े विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स में पिछले कुछ वर्षों में क्रिएटिविटी ऊपर-नीचे हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री को छोटे समय के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “एक अच्छा साल या एक कमजोर साल क्रिएटिविटी तय नहीं करता। विज्ञापन 12 महीने का खेल नहीं है। बड़े ब्रांड कई सालों में बनते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री हर साल खुद को साबित करने की जल्दबाजी में रहती है।
उन्होंने कहा, “हम हर 12 महीने में खुद को मापते हैं क्योंकि अवॉर्ड्स हर साल होते हैं और बिजनेस रिपोर्टिंग हर तिमाही में होती है। लेकिन असली क्रिएटिव असर बनने में समय लगता है।”
भविष्य की एजेंसी छोटी होगी, लेकिन ज्यादा तेज और एंटरप्रेन्योरियल
सेशन का सबसे व्यावहारिक हिस्सा ऑपरेशनल बदलावों पर चर्चा थी।
डॉ. बत्रा ने पत्रकारिता का उदाहरण देते हुए कहा कि आज एक व्यक्ति AI टूल्स की मदद से रिपोर्टिंग, शूटिंग, एडिटिंग और पब्लिशिंग सबकुछ अकेले कर सकता है। उन्होंने कहा, “एजेंसियों में भी यही बदलाव आएगा। सबसे जरूरी चीज कंज्यूमर की समझ, स्ट्रैटेजी और क्रिएटिविटी रहेगी। बाकी चीजें ज्यादा सेंट्रलाइज्ड और एफिशिएंट हो जाएंगी।”
धीरज सिन्हा ने इसे गिरावट नहीं बल्कि बदलाव बताया। उन्होंने कहा, “अब वैल्यू बड़े स्ट्रक्चर से हटकर व्यक्ति की क्षमता में जा रही है। छोटी टीमें, तेज टैलेंट और एंटरप्रेन्योरियल सोच ही भविष्य तय करेगी।”
डॉ. बत्रा ने यह भी कहा कि भारत में इस समय छोटे-छोटे क्रिएटिव बिजनेस तेजी से बढ़ रहे हैं। मीम एजेंसियां, क्रिएटर स्टूडियोज और इंडिपेंडेंट कंटेंट कंपनियां इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा, “इस इंडस्ट्री में इस समय एंटरप्रेन्योरशिप की जबरदस्त ऊर्जा है और यह बहुत पॉजिटिव संकेत है।”
AI के दौर में इंसानी जुड़ाव की अहमियत और बढ़ेगी
हालांकि पूरी बातचीत AI और ऑटोमेशन पर केंद्रित रही, लेकिन सबसे भावुक हिस्सा इंसानी रिश्तों और जुड़ाव को लेकर था।
डॉ. बत्रा ने कहा कि जैसे-जैसे डिजिटल अनुभव ज्यादा ऑटोमेटेड होते जाएंगे, लोग असली इंसानी अनुभवों की तरफ ज्यादा आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा, “जितना AI बढ़ेगा, इंसानी टच उतना ही ज्यादा कीमती होगा। यही वजह है कि हॉस्पिटैलिटी, लाइव एक्सपीरियंस और एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग तेजी से बढ़ रही है।”
धीरज सिन्हा ने भी गोवाफेस्ट का उदाहरण देते हुए सहमति जताई। उन्होंने कहा, “लोग आज भी साथ बैठना, मिलना, सहयोग करना और आइडियाज को सेलिब्रेट करना चाहते हैं।”
इसके बाद बातचीत संस्कृति, राजनीति और कंज्यूमर बिहेवियर तक पहुंची, जहां दोनों ने कहा कि इवेंट्स, कम्युनिटीज और लाइव एक्सपीरियंस अब ब्रांड बिल्डिंग का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।
डर की नहीं, बदलाव की बातचीत
सेशन के अंत में चर्चा फिर उसी बड़े सवाल पर पहुंची कि इंडस्ट्री तभी बचती है जब वह खुद को बदलना सीखती है, लेकिन अपनी पहचान नहीं खोती।
धीरज सिन्हा और डॉ. बत्रा दोनों के मुताबिक विज्ञापन इंडस्ट्री की असली पहचान आज भी स्टोरीटेलिंग, सांस्कृतिक समझ और इंसानी सोच ही है। सिर्फ उसके काम करने के तरीके, स्ट्रक्चर और बिजनेस मॉडल बदल रहे हैं।
डॉ. बत्रा ने इसे भगवान शिव के “क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन” के विचार से जोड़ते हुए कहा, “कई बार नए मॉडल आने के लिए पुराने बिजनेस मॉडल टूटने जरूरी होते हैं। यह खत्म होना नहीं, बल्कि नया जन्म है।”
धीरज सिन्हा ने भी बातचीत को सकारात्मक अंदाज में खत्म किया। उन्होंने कहा, “जिंदगी बहुत बड़ी है। इसमें साथ रहने और असर पैदा करने की जगह हमेशा रहती है। और हमारी इंडस्ट्री में आज भी बहुत बड़ा असर पैदा करने की ताकत है।”
अगर गोवाफेस्ट की इस बातचीत से एक बात साफ निकलकर सामने आई, तो वह यह थी कि विज्ञापन इंडस्ट्री अपने आखिरी दौर में नहीं है, बल्कि एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।
वह अमित हरिया की जगह लेंगे, जिन्होंने कंपनी में करीब 19 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी ‘शेमारू एंटरटेनमेंट’ (Shemaroo Entertainment) ने आशीष गुप्ता को अपना नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। वह अमित हरिया की जगह लेंगे, जिन्होंने कंपनी में करीब 19 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।
कंपनी के मुताबिक, आशीष गुप्ता अपनी नई भूमिका में शेमारू एंटरटेनमेंट के वित्तीय और कारोबारी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
शेमारू एंटरटेनमेंट से जुड़ने से पहले आशीष गुप्ता ‘BARC India’ में CFO के पद पर कार्यरत थे। उन्हें वित्तीय प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस का लंबा अनुभव हासिल है।
इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए शेमारू एंटरटेनमेंट के सीईओ हिरेन गडा ने कहा कि अमित हरिया ने कंपनी की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि अमित कंपनी की वित्तीय प्रगति और बदलावों का अहम हिस्सा रहे हैं। कंपनी उनके समर्पण के लिए आभार व्यक्त करती है और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती है।
हिरेन गडा ने आगे कहा कि शेमारू एंटरटेनमेंट खुद को भविष्य के लिए तैयार संगठन के रूप में विकसित कर रही है और ऐसे महत्वपूर्ण दौर में आशीष गुप्ता का कंपनी से जुड़ना बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योगों में आशीष का व्यापक अनुभव और उनकी मजबूत रणनीतिक व संचालन क्षमता कंपनी के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने और अगले विकास चरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कंपनी ने उन्हें अपने दो प्रमुख वर्टिकल्स—‘प्रियस ब्रैंड एंड बिजनेस पार्टनर्स’ और ‘प्रियस हेल्थकेयर’ के लिए स्ट्रैटेजिक पीआर जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशंस सेक्टर की प्रमुख कंपनी ‘प्रियस कम्युनिकेशंस’ (Prius Communications) ने संजय शर्मा को डायरेक्टर-पीआर के पद पर नियुक्त किया है। कंपनी ने उन्हें अपने दो प्रमुख वर्टिकल्स—‘प्रियस ब्रैंड एंड बिजनेस पार्टनर्स’ और ‘प्रियस हेल्थकेयर’ के लिए स्ट्रैटेजिक पीआर जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
संजय शर्मा के पास मीडिया, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, ब्रैंड मैनेजमेंट और जर्नलिज्म के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में विज्ञापन, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, मार्केटिंग कम्युनिकेशन, मीडिया रिलेशंस और ब्रैंड स्ट्रैटेजी जैसे क्षेत्रों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।
इससे पहले वह इंडियन एयरलाइंस/एयर इंडिया, डालमिया ग्रुप, जिंदल ग्रुप, बिरला ग्रुप, हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप और आईटीवी नेटवर्क जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
नई जिम्मेदारी को लेकर संजय शर्मा ने कहा कि वह अपनी नई भूमिका को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनके मुताबिक, आज के दौर में कम्युनिकेशन केवल विजिबिलिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि भरोसा, विश्वसनीयता और हितधारकों के साथ मजबूत संबंध बनाने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रियस ने हेल्थकेयर, कॉरपोरेट रेप्युटेशन और ब्रांड कम्युनिकेशन के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है और वह कंपनी की आगे की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए उत्सुक हैं।
वहीं, ‘प्रियस ब्रैंड एंड बिजनेस पार्टनर्स’ के फाउंडर और सीईओ तथा पब्लिक रिलेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (दिल्ली चैप्टर) के चेयरमैन बलदेव राज ने कहा कि संजय शर्मा का कंपनी में स्वागत करते हुए उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि संजय शर्मा का व्यापक अनुभव, मीडिया की गहरी समझ और रणनीतिक पीआर विशेषज्ञता कंपनी की नेतृत्व टीम को और मजबूत करेगी।
बलदेव राज के अनुसार, कंपनी लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रही है और ऐसे समय में संजय शर्मा का मार्गदर्शन ग्राहकों, टीम और कंपनी की दीर्घकालिक विकास योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।