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पवन खेड़ा ने बीजेपी पर साधा निशाना, कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर कही ये बात
गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है कि पार्टी आरएसएस के ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलती है। आरएसएस ही यह तय करता है कि देश का पीएम कौन होगा, फिर भी उनसे कोई सवाल नहीं पूछा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया, ‘अमित शाह, जेपी नड्डा और एलके आडवाणी किस तरह से बीजेपी के प्रेजिडेंट चुने गए? अमित शाह को किसने चुना? क्या वो वोटिंग के द्वारा पार्टी प्रेजिडेंट चुने गए? यदि आप अमित शाह को छोड़ भी दें तो क्या आरएसएस प्रमुख चुने गए या मोहन भागवत चुने गए?’
‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में पवन खेड़ा का कहना है, ’बीजेपी का रिमोट कंट्रोल नागपुर में अपंजीकृत आरएसएस के हाथों में है, जो यह तय करता है कि देश का नेतृत्व कौन करेगा और उनसे किसी तरह का सवाल नहीं पूछा जाता है। लेकिन वे लोग 135 साल पुरानी लोकतांत्रिक पॉलिटिकल पार्टी पर सवाल उठाते हैं, जिसका अपना एक इतिहास है।’
पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान कांग्रेस में नेतृत्व संकट को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में खेड़ा ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व का कोई संकट नहीं है। राहुल गांधी देश के एकमात्र नेता हैं जो मोदी से आमने-सामने बात कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 2019 के चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेने और पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का साहस दिखाया, जबकि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी थी।
इस बातचीत के दौरान खेड़ा का यह भी कहना था कि कांग्रेस बहुत ही व्यवस्थित और अनुशासित पार्टी है। पार्टी में राज्यों के प्रभारी महासचिव और संगठन के प्रभारी महासचिव होते हैं। उन्होंने कहा कि बिना सिस्टम के कांग्रेस इतने सालों में न तो चुनाव जीत पाती और न ही सत्ता में होती।
भारत की विदेश नीति के बारे में खेड़ा का कहना था, ‘पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और कुछ नहीं बल्कि प्रचार कार्यक्रम (diaspora events) हैं। आप इवेंट मैनेजमेंट के साथ विदेश नीति नहीं बना सकते। मोदी को मेगा इवेंट पसंद हैं। अगर इस तरह के कार्यक्रमों से मदद मिलती, तो क्या चीन हमारे देश में घुसपैठ करता? प्रधानमंत्री ने घुसपैठ की बात से इनकार किया। चीन से क्यों डरते हैं मोदी? वह चीन को क्लीन चिट देते हैं और कहते हैं कि उसने कोई घुसपैठ नहीं की।‘
खेड़ा ने कहा कि क्योंकि मोदी चीन से डरते हैं, इसलिए उन्होंने पिछले साल दलाई लामा को उनके जन्मदिन पर बधाई भी नहीं दी थी और उससे एक साल पहले, उनकी सरकार ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता को सम्मानित करने के लिए दिल्ली में एक कार्यक्रम रद्द कर दिया था।
इसके साथ ही खेड़ा ने यह भी कहा कि चाहे कोई भी सरकार सत्ता में हो, विदेश नीति एक सतत प्रक्रिया है और घरेलू राजनीति में बदलाव से प्रभावित नहीं होती है। अगर एक प्रधानमंत्री ने कई देशों का दौरा करने, वहां कार्यक्रम करने और अपनी विदेश यात्राओं से घरेलू राजनीति को प्रभावित करने का फैसला किया, तो यह उनकी शैली है। खेड़ा का यह भी कहना था कि लोगों को अब मोदी की बयानबाजी की जरूरत नहीं है। भारत को अब बदलाव की जरूरत है।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत दिसंबर 2021 तक अपनी टीकाकरण की समय सीमा को पूरा कर लेगा? खेड़ा ने कहा, ‘इस समय सीमा में टीकाकरण पूरा करने के लिए सरकार को प्रतिदिन 86,50,000 टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा और हर महीने 35 करोड़ टीके खरीदने होंगे। चूंकि फिलहाल हम इस आंकड़े की बराबरी करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए यह संभावना नहीं है कि सरकार इस समय सीमा में टीकाकरण पूरा कर लेगी।
पेगासस जासूसी मामले पर खेड़ा का कहना था कि अब तक सरकार ने पेगासस सॉफ्टवेयर के उपयोग से इनकार नहीं किया है। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो सरकार को इस आशय का एक बयान देना चाहिए और जांच शुरू करानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों, सीबीआई निदेशक, सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ विपक्षी नेताओं, महिला पत्रकारों, नौकरशाहों के परिवार की महिला सदस्यों और यहां तक कि आरएसएस नेताओं के फोन हैक होना एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को एक बयान देना चाहिए कि उसने पेगासस को नहीं खरीदा है और राष्ट्रीय हित में इस मामले में जांच शुरू करनी चाहिए। प्रधानमंत्री चीन और इस्राइल के साथ खड़े हैं, लेकिन अपने देश के साथ नहीं। क्यों?’
संसद में हंगामे के बारे में खेड़ा का कहना था कि कांग्रेस 50 सांसदों वाली पार्टी है। सरकार किसानों के मुद्दों, पेगासस जासूसी कांड, कोविड और इससे हुए मौतों जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'अगर वे संसदीय स्थायी समिति के मुद्दों पर चर्चा करने से दूर भागते हैं तो आप उनसे संसद सत्र चलाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? भाजपा संसद सत्र नहीं चलाना चाहती, क्योंकि उन्हें वह आईना दिखाया जाएगा, जिसे वह देखना नहीं चाहती।'
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