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प्रेस क्लब पर पुलिस का हमला, जबरदस्त लाठीचार्ज, कई पत्रकार बुरी तरह घायल
रैली के आयोजन के बारे में जानकारी देने के लिए प्रेस क्लब में चल रही थी प्रेस ब्रीफिंग
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
यह वाकई में दिलचस्प मामला है कि प्रेस क्लब तक पर पुलिस हमला कर देती है, लाठीचार्ज करती है और आंसू गैस के गोले छोड़ती है। ऐसे में पत्रकारों के पास तो कोई हथियार होता नहीं है, उनको तो बस अपनी जान बचानी है। भागे, दौड़े और कई लोग बुरी तरह घायल भी हो गए। यह घटना इंडिया की होती तो शायद सरकार के लिए अपना बचाव करना मुश्किल हो जाता। यह घटना है पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद की, जहां पर प्रेस क्लब में कार्यक्रम चल रहा था और पुलिस ने अचानक बिना कोई चेतावनी दिए सीधे लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
दरअसल 22 अक्टूबर वो तारीख है, जिस दिन 1947 में पाकिस्तान ने कश्मीर पर कबायली सेनाओं के साथ हाथ मिलाकर हमला किया था और पीओके पर कब्जा कर लिया था। उसके बाद भारतीय सेनाओं ने राजा हरि सिंह के विलय पत्र पर साइन करने के बाद उस हमले का जवाब दिया था और वह तारीख थी 27 अक्टूबर। ऐसे में पीओके के लोग और वहां की पॉलिटिकल पार्टियां 22 अक्टूबर को पाकिस्तान के आक्रमण के विरोध में काला दिवस मनाते आए हैं और वर्षों से मना रहे हैं। इसी संबंध में मुजफ्फराबाद के प्रेस क्लब में प्रेस ब्रीफिंग कार्यक्रम रखा गया था और कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था थी जम्मू कश्मीर पीपुल्स नेशनल एलाइंस।
ऐसे में जबकि पाकिस्तान दुनियाभर के मंचों पर भारत द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर विरोध जता रहा है, कश्मीर के लोगों के लिए आवाज उठा रहा है उसके अपने ही कब्जे वाले कश्मीर में कब्जे के खिलाफ कोई काला दिवस मनाया जाए, यह पाकिस्तानी सरकार को मंजूर नहीं होगा। क्योंकि पहले से ही गिलगित बलूचिस्तान के लोग परेशानी का सबब बने हुए हैं। ऐसे में काला दिवस और मनाया जाए तो दुनिया भर के मंचों पर यह मैसेज जाएगा कि पाकिस्तान के कब्जे से वहां के लोग खुश नहीं हैं। इसलिए पाकिस्तानी सरकार ने इस कार्यक्रम को मंजूरी देने से मना कर दिया था।
दरअसल यह प्रेस ब्रीफिंग कार्यक्रम था, जिसमें एक रैली के बारे में बताया जाना था। 22 अक्टूबर को बड़ी रैली रखी गई थी तो सबसे पहले इस प्रेस ब्रीफिंग पर ही पाकिस्तानी पुलिस का हमला हुआ। प्रेस क्लब पर हुए इस हमले में कई पत्रकार बुरी तरह घायल और चोटिल हो गए हैं। उसके बाद पाकिस्तानी सरकार ने पाकिस्तानी कब्जे के विरोध में जो रैली आयोजित की गई थी, उस पर भी लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे अफरा-तफरी मच गई। तमाम लोग घायल हो गए। बहुत से लोगों की गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन पाकिस्तानी प्रेस क्लब में जो हुआ, उसकी निंदा अब पूरी दुनिया में होनी शुरू हो गई है। तमाम मीडिया संगठन इस हमले के विरोध में आ गए हैं और पाकिस्तान को दुनिया भर में शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है।
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