हालांकि, कंपनी ने यूजर्स को आश्वासन दिया कि उनके याहू खाते, ई-मेल और सर्च सर्विस किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
अमेरिकन वेब सर्विस प्रोवाइडर ‘याहू’ (Yahoo) ने 26 अगस्त से भारत में अपनी कंटेंट सर्विसेज को बंद कर दिया है। याहू की मालिकान कंपनी ‘वेरिजन मीडिया’ (Verizon Media) ने ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ (FDI) के नए नियमों के कारण यह फैसला लिया है। इन नियमों में डिजिटल मीडिया आउटलेट्स में 26 प्रतिशत से ज्यादा एफडीआई को इजाजत नहीं दी गई है।
'याहू' की ओर से जिन कंटेंट सर्विसेज को बंद किया गया है, उनमें याहू न्यूज, याहू क्रिकेट, याहू फाइनेंस, एंटरटेनमेंट और मेकर्स इंडिया शामिल हैं। हालांकि, कंपनी ने यूजर्स को आश्वासन दिया है कि उनके याहू खाते, ई-मेल और सर्च सर्विस किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होगी।
इस बारे में ‘याहू’ के होमपेज पर एक स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘26 अगस्त 2021 से ‘याहू इंडिया’ अब कंटेंट पब्लिश नहीं करेगा। आपके याहू खाते, ई-मेल और सर्च एक्सपीरिएंस किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होंगे और पहले की तरह चलते रहेंगे। आपके सपोर्ट और रीडरशिप के लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं।’

‘याहू’ की ओर से कहा गया है, ’ हमने इस निर्णय को जल्दबाजी में नहीं लिया है। दरअसल, भारत में कंपनी के संचालन को देश के नियामक कानूनों में हाल के बदलावों ने काफी प्रभावित किया है, जिनमें भारत में डिजिटल कंटेंट को ऑपरेट और पब्लिश करने वाली मीडिया कंपनियों के विदेशी स्वामित्व को सीमित किया गया है।’
OpenAI पर अमेरिका में क्लास एक्शन मुकदमा दायर हुआ है। आरोप है कि ChatGPT यूजर्स का डेटा Google और Meta के साथ बिना उचित सहमति के साझा किया गया।
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Samachar4media Bureau
OpenAI एक नए कानूनी विवाद में घिर गया है। अमेरिका में कंपनी के खिलाफ क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ChatGPT यूजर्स का डेटा बिना उचित सहमति के Google और Meta के साथ साझा किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि ChatGPT.com पर Meta Pixel और Google Analytics जैसे ट्रैकिंग टूल्स का इस्तेमाल किया गया, जिनकी मदद से यूजर्स की जानकारी थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच सकती थी।
मुकदमे में दावा किया गया है कि यूजर्स के सवाल, ईमेल एड्रेस और अन्य निजी जानकारी ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए प्रोसेस की गई हो सकती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लोग AI चैटबॉट्स को निजी और सुरक्षित बातचीत की जगह मानते हैं, जहां वे स्वास्थ्य, वित्तीय और कानूनी मुद्दों तक पर चर्चा करते हैं।
याचिका में कहा गया है कि ChatGPT, Claude, Gemini और Perplexity जैसे AI प्लेटफॉर्म्स इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को गोपनीयता की उचित उम्मीद थी, लेकिन वेबसाइट पर मौजूद एनालिटिक्स और विज्ञापन संबंधी कोड ने इस भरोसे को कमजोर किया।
आज 2026 में भारत में ऐप बैन एक "नया सामान्य" बन चुका है- राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी, फर्जी लोन ऐप्स से लेकर डेटा चोरी तक, सरकार का डिजिटल हथौड़ा लगातार चल रहा है।
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Vikas Saxena
जून 2020 की एक शाम करोड़ों भारतीयों के मोबाइल से अचानक TikTok गायब हो गया। उसी रात भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया और इसके साथ ही देश की डिजिटल दुनिया में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हुई। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। 2026 तक आते-आते भारत में ऐप बैन अब आम बात बन चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी, फर्जी लोन ऐप्स से लेकर डेटा चोरी तक, सरकार का डिजिटल हथौड़ा लगातार चल रहा है।
कितने ऐप्स बैन हुए?- एक चौंकाने वाला आंकड़ा
भारत सरकार ने जून 2020 से अब तक IT अधिनियम की धारा 69A के तहत हजारों ऐप्स और वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाया है। पहली बड़ी कार्रवाई 29 जून 2020 को हुई जब गलवान घाटी संघर्ष के बाद 59 चीनी ऐप्स- जिनमें TikTok, UC Browser, SHAREit, CamScanner, WeChat शामिल थे, एक झटके में बैन कर दिए गए। इसके बाद जुलाई 2020 में 47 और सितंबर 2020 में 118 और नवंबर 2020 में 43 और ऐप्स बैन हुए। 2020 के अंत तक 267 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लग चुका था।
फरवरी 2022 में एक और बड़ी कार्रवाई हुई जब 54 और चीनी ऐप्स, जिनमें Garena Free Fire भी शामिल था, बैन हुए। MeitY ने तब स्पष्ट रूप से कहा था कि ये ऐप्स "कैमरे, माइक्रोफोन और GPS के जरिए जासूसी कर रहे थे और यूजर का डेटा विदेशी सर्वर पर भेज रहे थे।" इस तरह 2020 से फरवरी 2022 तक कुल 321 चीनी ऐप्स भारत में बैन हो चुके थे।
लेकिन 2025 में तो सारे रिकॉर्ड टूट गए। अप्रैल-मई 2025 के बीच- पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़े भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच- MeitY ने धारा 69A के तहत तीन अलग-अलग आदेशों में Google को 3,000 से अधिक ऐप्स हटाने के निर्देश दिए। इस सूची में VPN, इस्लामिक धार्मिक ऐप्स, AI टूल्स, कैलकुलेटर तक शामिल थे- और अधिकांश पाकिस्तानी डेवलपर्स से जुड़े पाए गए। इससे पहले फरवरी 2025 में 119 और ऐप्स बैन किए गए, जिनमें ज्यादातर चीन और हांगकांग से जुड़े वीडियो-वॉयस चैट प्लेटफॉर्म थे।
धारा 69A- IT अधिनियम की यह धारा ही सरकार का सबसे बड़ा डिजिटल हथियार है। इसके तहत "राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था" के नाम पर किसी भी ऐप या वेबसाइट को बिना न्यायिक समीक्षा के बंद किया जा सकता है। आदेश गोपनीय रखे जाते हैं- यानी न यूजर को पता, न डेवलपर को स्पष्टीकरण।
सरकार ऐप्स क्यों बंद करती है?
TikTok बैन शायद भारत के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी घटना है। बैन के समय भारत में TikTok के 20 करोड़ से अधिक एक्टिव यूजर्स थे- चीन के बाहर यह दुनिया का सबसे बड़ा TikTok मार्केट था। एक झटके में इन 20 करोड़ लोगों के पास कोई प्लेटफॉर्म नहीं रहा। छोटे शहरों और गांवों के लाखों क्रिएटर्स- जो TikTok पर अपनी आवाज और आजीविका ढूंढ रहे थे- रातोरात बेरोजगार हो गए।
लेकिन इस खाली जगह को भरने की होड़ मच गई। मेटा ने एक हफ्ते के भीतर Instagram Reels लॉन्च किया। Google ने YouTube Shorts उतारा। भारतीय ऐप्स- Moj, Josh, Chingari, Roposo- अरबों की फंडिंग के साथ मैदान में आए।
आंकड़े बताते हैं कि Moj ने दो साल से भी कम समय में 16 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हासिल कर लिए। Josh के 17.9 करोड़ यूजर्स हो गए। Instagram Reels में 2021-22 के बीच 171% की वृद्धि हुई और 2.2 अरब इंटरेक्शन दर्ज हुए। YouTube Shorts 2022 में भारत में 3,940% बढ़ा और 1.5 अरब एंगेजमेंट तक पहुंचा। लेकिन 2023 आते-आते तस्वीर साफ हो गई- भारतीय ऐप्स पिछड़ गए और असली फायदा Meta और Google को हुआ। आज 2026 में भारत YouTube का सबसे बड़ा मार्केट है (लगभग 50 करोड़ मंथली यूजर्स) और Instagram के 48 करोड़ से अधिक यूजर्स यहां हैं।
TikTok 2026 में भी बैन है। 2025 में एक बार वेबसाइट कुछ यूजर्स को खुलती दिखी तो सोशल मीडिया पर "TikTok वापस आ गया" ट्रेंड हो गया- लेकिन MeitY ने तुरंत स्पष्ट किया: "कोई अनब्लॉकिंग ऑर्डर जारी नहीं हुआ है। ऐसी खबरें गलत और भ्रामक हैं।"
बेटिंग ऐप्स- अरबों का अंडरवर्ल्ड
अगर चीनी ऐप्स का बैन सुर्खियों में रहा, तो बेटिंग ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई की असली कहानी और भी चौंकाने वाली है।
Mahadev Online Book मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ED की जांच में सामने आया कि यह ऐप दुबई से चलाए जाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट का हिस्सा था- Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे कई डोमेन इसी नेटवर्क से जुड़े थे। ED की chargesheet के अनुसार सिंडिकेट की मासिक कमाई करीब 450 करोड़ रुपये आंकी गई। 2023 में ED ने पहली बड़ी कार्रवाई में 417 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। नवंबर 2023 में MeitY ने Mahadev समेत 22 अवैध बेटिंग ऐप्स को बैन किया।
मार्च 2026 में ED ने ताजा कार्रवाई में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की दुबई स्थित संपत्तियां- जिनमें Burj Khalifa के फ्लैट भी शामिल हैं- कुर्क कीं, जिनकी कीमत करीब 1,700 करोड़ रुपये है। इस मामले में अब तक कुल जब्ती, सीज़र और फ्रीजिंग मिलाकर 4,336 करोड़ रुपये हो चुके हैं।
बड़े बदलाव की बात करें तो PROGA- Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। यह कानून अगस्त 2025 में संसद के दोनों सदनों से पास हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इसके तहत भारत में सभी रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग- चाहे स्किल आधारित हो या भाग्य आधारित पर प्रतिबंध है। हालांकि ई-स्पोर्ट्स और नॉन-मॉनेटरी सामाजिक गेम्स इससे अलग लीगल कैटेगरी में हैं। Betway, 1xBet, Parimatch, MELBET जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म अब भारत में अवैध हैं। 2026 की शुरुआत तक अधिकारियों ने 7,800 से अधिक अवैध बेटिंग और जुए की वेबसाइट्स ब्लॉक की हैं- एक ही कार्रवाई में 242 साइट्स एक साथ ब्लॉक की गईं। IPL और क्रिकेट मैचों के दौरान बेटिंग ऐप्स के surrogate विज्ञापनों पर भी सख्त रोक लगाई गई है।
फर्जी लोन ऐप्स- जब कर्ज बना जाल
फर्जी लोन ऐप्स का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा है। ये ऐप्स पहले लोगों को तुरंत लोन देने का लालच देते थे। इसके बाद मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी और दूसरे डेटा तक पहुंच मांग लेते थे। फिर शुरू होता था लोगों को डराने-धमकाने और ब्लैकमेल करने का खेल।
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां लोगों को इतना परेशान किया गया कि कुछ ने आत्महत्या तक कर ली।
जांच में पता चला कि इन फर्जी ऐप्स के पीछे कई शेल कंपनियां थीं, जिनका संबंध चीन से जुड़ा बताया गया। ये कंपनियां एक ही सिस्टम से कई नकली लोन ऐप्स चला रही थीं। ED ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया।
सरकार ने सख्ती दिखाते हुए एक अभियान में 94 फर्जी लोन ऐप्स को एक साथ बंद किया। वहीं Google ने भी अपनी नीति बदल दी। पिछले दो साल में Play Store से 4,700 से ज्यादा अवैध लोन ऐप्स हटाए गए। अब सिर्फ RBI से जुड़े या रजिस्टर्ड संस्थानों के ऐप्स को ही Play Store पर रहने की अनुमति है।
दिसंबर 2025 में सिर्फ एक महीने के भीतर 87 अवैध लोन ऐप्स बंद किए गए। वहीं मार्च 2026 में RBI ने 47 और फर्जी ऐप्स हटवाए।
RBI ने जुलाई 2025 से Digital Lending Directory को जरूरी कर दिया है। इसके तहत हर वैध लोन ऐप का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। हालांकि, फर्जी ऐप्स नए नाम से फिर लौट आते हैं। इसी वजह से Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) लगातार इन ऐप्स पर नजर रखता है।
ऐड इंडस्ट्री पर असर- बजट का नया ठिकाना
ऐप बैन ने भारत के डिजिटल ऐड इंडस्ट्री की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
TikTok बैन से पहले ब्रांड्स के पास short-form video पर खर्च करने का एक सस्ता और viral माध्यम था। TikTok के जाने के बाद वह पूरा बजट Instagram Reels और YouTube Shorts की तरफ शिफ्ट हो गया- और Meta व Google और ताकतवर हो गए।
Dentsu-e4m के Digital Advertising Report 2026 के अनुसार, 2025 में भारत का डिजिटल विज्ञापन मार्केट ₹71,621 करोड़ का था- जो 19% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। 2026 में यह ₹84,977 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। डिजिटल विज्ञापन अब कुल भारतीय विज्ञापन मार्केट का 59% हिस्सा बन चुका है- 2016 में यह महज 12% था।
इंफ्लुएंसर मार्केटिंग भी एक बड़ा सेक्टर बन चुकी है। 2025 में यह इंडस्ट्री 3,000-3,500 करोड़ रुपये का था और 22% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। 2027 तक यह 4,500-5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। EY की रिपोर्ट के अनुसार influencer marketing का वैश्विक मार्केट 2026 में लगभग 40 करोड़ डॉलर हो सकता है।
बेटिंग ऐप्स पर क्रैकडाउन ने surrogate advertising को भी झटका दिया। IPL जैसे क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान फैंटेसी गेमिंग और बेटिंग ऐप्स करोड़ों का विज्ञापन खर्च करते थे- अब यह दरवाजा बंद हो चुका है।
डिजिटल स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा- यह बहस खत्म नहीं हुई
ऐप बैन के मुद्दे पर दो पक्ष हमेशा से आमने-सामने रहे हैं।
सरकार का पक्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और नागरिक संरक्षण सर्वोपरि है। जब विदेशी सर्वर पर करोड़ों भारतीयों का डेटा जा रहा हो, जब ऐप्स आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हों, तो कार्रवाई अनिवार्य है।
आलोचकों का पक्ष: धारा 69A की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। बैन के आदेश गोपनीय रखे जाते हैं। यूजर्स और डेवलपर्स को कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता। 3,000 ऐप्स को एक साथ बैन करना और उसकी वजह न बताना- यह चिंताजनक है। Access Now जैसी डिजिटल अधिकार संस्थाओं ने चेताया है कि TikTok बैन ने भारत में सरकारी सेंसरशिप को बढ़ावा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने Shreya Singhal मामले में धारा 69A को वैध माना था लेकिन गोपनीयता की आलोचना भी की थी। Shein जैसे ऐप्स को Reliance के साथ साझेदारी में वापसी की इजाजत मिली, लेकिन हजारों छोटे ऐप्स बिना स्पष्टीकरण बंद पड़े हैं- यह असमानता भी सवाल उठाती है।
भारतीय ऐप इकोसिस्टम- जीत या हार?
जब-जब चीनी ऐप्स बैन हुए, "Atmanirbhar App Ecosystem" का नारा बुलंद हुआ। लेकिन हकीकत क्या है?
भारतीय ऐप्स की कहानी मिली-जुली रही। Moj और Josh ने तेज शुरुआत की लेकिन लंबे समय में Instagram और YouTube के आगे टिक नहीं पाए। Koo- जिसे Twitter का भारतीय विकल्प कहा जाता था- 2023 में बंद हो गया। Chingari, Roposo जैसे ऐप्स हाशिए पर हैं।
दूसरी तरफ, सरकारी ऐप्स ने जरूर अच्छा प्रदर्शन किया- DigiLocker, BHIM, CoWIN, ONDC जैसे प्लेटफॉर्म ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत को मजबूत किया।
असली सवाल यह है: TikTok के बैन से सबसे ज्यादा फायदा किसे हुआ? Meta और Google को- दोनों अमेरिकी कंपनियां भारत में और बड़ी हो गईं। "Atmanirbhar" के नाम पर खाली जगह भरी एक और विदेशी Big Tech ने।
क्या भारत डिजिटल संप्रभुता का नया मॉडल बना रहा है?
2020 से 2026 के बीच भारत ने जो डिजिटल नीति अपनाई है, वह दुनिया में अपनी तरह का मॉडल है। चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध, फर्जी लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई, बेटिंग इंडस्ट्री को कानून से बांधना, भू-राजनीतिक तनाव के जवाब में हजारों ऐप्स ब्लॉक करना- यह सब मिलकर एक ऐसे भारत की तस्वीर बनाते हैं जो अपने डिजिटल स्पेस को भी संप्रभु क्षेत्र मानता है।
लेकिन इस मॉडल की सफलता के लिए जरूरी है पारदर्शिता- कि बैन क्यों हुआ, किसके कहने पर हुआ, और इसे कैसे चुनौती दी जा सकती है। बिना इसके, "डिजिटल सार्वभौमिता" और "डिजिटल सेंसरशिप" के बीच की रेखा धुंधली पड़ती रहेगी।
भारत का डिजिटल मार्केट 102 करोड़ इंटरनेट यूजर्स का है (सितंबर 2025 तक)। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन मार्केट है। इसकी सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसकी आजादी भी।
दो दशक से अधिक के पत्रकारिता अनुभव वाले अनिल पांडेय की प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है।
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Samachar4media Bureau
जागरण समूह की डिजिटल कंपनी 'दैनिक जागरण डिजिटल' (Jagran New Media) ने वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को हाल ही में प्रमोशन का तोहफा देते हुए मैनेजिंग एडिटर के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वे एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
दो दशक से अधिक के पत्रकारिता अनुभव वाले अनिल पांडेय की प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है। डिजिटल न्यूजरूम मैनेजमेंट, कंटेंट स्ट्रैटेजी, ऑडियंस ग्रोथ, ऑडियो-विजुअल स्ट्रैटेजी, टीम बिल्डिंग और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट में उन्हें खास विशेषज्ञता हासिल है।
वर्तमान में वह नेटवर्क के फ्लैगशिप डिजिटल प्लेटफॉर्म jagran.com के साथ-साथ naidunia.com, punjabijagran.com, inextlive.com, thedailyjagran.com, gujaratijagran.com, marathijagran.com, onlymyhealth.com, herzindagi.com और जागरण समूह के यूट्यूब चैनल्स जैसे विभिन्न लैंग्वेज और नॉन-न्यूज वर्टिकल्स का नेतृत्व कर रहे हैं।
अनिल पांडेय ‘जागरण न्यू मीडिया’ के साथ नवंबर 2021 से जुड़े हुए हैं। दैनिक जागरण से पहले वे ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ के पोर्टल ‘जनसत्ता‘, और अमर उजाला डिजिटल में लंबे समय तक कार्य कर चुके हैं। यहां उन्होंने पूरी वेबसाइट के साथ-साथ डिजिटल हाइपरलोकल नेटवर्क को नए सिरे से स्ट्रक्चर एवं अलाइन किया था।
डिजिटल मीडिया में लगभग दो दशक से कार्यरत अनिल पांडेय ‘अमर उजाला‘ डिजिटल से पहले ‘जागरण न्यू मीडिया‘ की वेबसाइट ‘नईदुनिया डॉट कॉम‘ में कार्यरत थे। उनके नेतृत्व में ही इस वेबसाइट को बनाया गया था। इससे पहले वह ‘हिंदुस्तान टाइम्स‘ डिजिटल, ‘दैनिक भास्कर अखबार और डिजिटल‘ एवं ‘वेबदुनिया डॉट कॉम‘ में भी रह चुके हैं।
अनिल पांडेय को बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर समाचार4मीडिया की ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
YouTube ने Brandcast 2026 में नए विज्ञापन टूल्स लॉन्च किए हैं। इनमें AI आधारित Sponsorships, Connected TV Shopping और Affiliate Partnerships शामिल हैं।
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Samachar4media Bureau
YouTube ने Brandcast 2026 इवेंट में विज्ञापनदाताओं के लिए कई नए AI और कॉमर्स आधारित एड प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं। कंपनी का कहना है कि अब ब्रांड्स को ब्रांड बिल्डिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं होगी। सबसे बड़ा ऐलान “Buy with Google Pay” फीचर का रहा। इसके जरिए Connected TV पर विज्ञापन देखते समय यूजर्स सिर्फ दो क्लिक में सीधे खरीदारी कर सकेंगे।
YouTube का उद्देश्य टीवी विज्ञापनों को केवल जागरूकता तक सीमित रखने के बजाय उन्हें शॉपिंग आधारित अनुभव में बदलना है। कंपनी ने “Custom Sponsorships” नामक AI आधारित टूल भी पेश किया है। यह फीचर ब्रांड्स के लिए ट्रेंडिंग और सांस्कृतिक पलों से जुड़े वीडियो को ऑटोमैटिक तरीके से सामने लाएगा। इसके अलावा YouTube ने Affiliate Partnerships Boost लॉन्च किया है, जिससे ब्रांड्स उन क्रिएटर्स के ऑर्गेनिक कंटेंट को प्रमोट कर सकेंगे, जहां उनके प्रोडक्ट पहले से टैग हैं।
क्रिएटर्स YouTube Shopping affiliate links के जरिए कमाई भी कर पाएंगे। वीडियो विज्ञापन निर्माण को आसान बनाने के लिए कंपनी ने Multimodal Video Creation टूल पेश किया है। यह Gemini, Veo और Nano Banana जैसे Google AI मॉडल्स की मदद से कुछ टेक्स्ट प्रॉम्प्ट्स के जरिए पूरा वीडियो तैयार करेगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने यूट्यूब चैनल “4PM” को बड़ी राहत देते हुए उसके चैनल को अस्थायी तौर पर फिर से बहाल करने का आदेश दिया है।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली हाई कोर्ट ने यूट्यूब चैनल “4PM” को बड़ी राहत देते हुए उसके चैनल को अस्थायी तौर पर फिर से बहाल करने का आदेश दिया है। करीब दो महीने पहले केंद्र सरकार ने इस चैनल को “राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था” से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए ब्लॉक कर दिया था।
यह आदेश दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 5 मई को सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका संजय शर्मा और एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से केंद्र सरकार और यूट्यूब के खिलाफ दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि सरकार ने न तो चैनल ब्लॉक करने के कारण साफ तौर पर बताए और न ही ब्लॉकिंग ऑर्डर की कॉपी उपलब्ध कराई। साथ ही इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) के अंतिम आदेश की जानकारी भी नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं ने IDC की कार्यवाही को भी पारदर्शी नहीं बताया।
हालांकि अदालत ने चैनल को राहत देते हुए यह भी कहा कि 26 ऐसे वीडियो, जिन्हें सरकार ने “आपत्तिजनक” बताया है, फिलहाल ब्लॉक ही रहेंगे।
कोर्ट ने मामले में नई IDC सुनवाई कराने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने कहा कि कमेटी साफ तौर पर बताए कि चैनल पर कौन-सा कंटेंट आपत्तिजनक माना जा रहा है। साथ ही यदि याचिकाकर्ता अपने कंटेंट का पक्ष रखना चाहते हैं तो उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को यह छूट भी दी कि वह चैनल की निगरानी जारी रख सकता है और भविष्य में किसी भी कथित आपत्तिजनक सामग्री पर कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि IDC की सिफारिशें और मंत्रालय के अंतिम फैसले की जानकारी याचिकाकर्ताओं को दी जाए।
केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि 4PM चैनल को आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत ब्लॉक किया गया था। सरकार के मुताबिक इस प्रक्रिया की शुरुआत Ministry of External Affairs और एक सुरक्षा एजेंसी के समन्वय से हुई थी, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनि एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने ब्लॉकिंग निर्देश जारी किए।
सरकार का आरोप है कि चैनल “डिजिटल लॉबिंग” के जरिए ऑनलाइन कंटेंट के माध्यम से जनमत और नीति से जुड़े मुद्दों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। केंद्र ने यह भी कहा कि चैनल ने पहलगाम आतंकी हमले, मणिपुर की स्थिति और भारत की विदेश नीति व सैन्य कार्रवाई को लेकर भ्रामक और साजिश जैसे नैरेटिव फैलाए।
सरकार ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि यूट्यूब का विज्ञापन और रिकमेंडेशन सिस्टम ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देता है जो लोगों को अलग-अलग विचारधाराओं के “इको चैंबर” में ले जाता है और इससे संगठित प्रभाव अभियान चलाने में मदद मिल सकती है।
वहीं 4PM के एडिटर-इन-चीफ संजय शर्मा ने पहले भी आरोप लगाया था कि उनकी संस्था को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि उन पर आपराधिक मानहानि के केस, इनकम टैक्स विभाग, आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों की जांच हुई, यहां तक कि उनके दफ्तर पर हमला भी किया गया।
संजय शर्मा ने यह भी दावा किया कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका यूट्यूब चैनल कुछ समय के लिए हटाया गया था, लेकिन बाद में उसे बहाल कर दिया गया। पहलगाम हमले के बाद सरकार ने फिर चैनल ब्लॉक करने का आदेश दिया था और उन्हें “एंटी-नेशनल” बताया गया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसके बाद सरकार ने अपना आदेश वापस ले लिया।
भारत में पत्रकारिता का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक खबरों का मतलब था सुबह अखबार और शाम को टीवी न्यूज।
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Vikas Saxena
भारत में पत्रकारिता का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक खबरों का मतलब था सुबह अखबार और शाम को टीवी न्यूज। बड़े न्यूज स्टूडियो, तेज आवाज में बोलते एंकर और “ब्रेकिंग न्यूज” की होड़ ही टीवी पत्रकारिता की पहचान बन चुकी थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
आज बड़ी संख्या में लोग मोबाइल स्क्रीन पर खबरें देख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना नहीं है कि प्लेटफॉर्म बदल गया है, बल्कि खबर पेश करने का तरीका भी बदल गया है। अब दर्शक लंबी बहस और शोर-शराबे से ज्यादा ऐसे लोगों को सुनना पसंद कर रहे हैं जो सीधे कैमरे में देखकर सरल भाषा में बात करें, तथ्यों के साथ समझाएं और दर्शकों को सिर्फ “व्युअर” नहीं बल्कि अपनी ऑडियंस समझें।
यहीं से शुरू हुआ “क्रिएटर जर्नलिज्म” यानी क्रिएटर पत्रकारिता का दौर। यह ऐसी पत्रकारिता है जो बड़े टीवी स्टूडियो से नहीं, बल्कि यूट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से निकल रही है।
भारत में यूट्यूब अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है। यह न्यूज, विश्लेषण, एक्सप्लेनर, इंटरव्यू और जनमत का बड़ा मंच बन चुका है। यही वजह है कि आज पारंपरिक मीडिया और स्वतंत्र क्रिएटर्स के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।
भारत और यूट्यूब: दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल दर्शक वर्ग
भारत आज यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। स्टैटिस्टा और गूगल ऐड्स के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में यूट्यूब की विज्ञापन पहुंच करीब 51 से 52 करोड़ यूजर्स के आसपास है। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा यूट्यूब दर्शक भारत में मौजूद हैं।
दुनियाभर में यूट्यूब के करीब 2.5 से 2.7 अरब मंथली एक्टिव यूजर्स माने जाते हैं। भारत का योगदान इसमें लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है सस्ता मोबाइल इंटरनेट, किफायती स्मार्टफोन और क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की तेज बढ़त।
कुछ साल पहले तक यूट्यूब को केवल गानों, कॉमेडी वीडियो या मनोरंजन मंच के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब लोग यहां न्यूज, राजनीति, करेंट अफेयर्स, वित्त, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी बड़ी संख्या में वीडियो देख रहे हैं।
भारत में डिजिटल ऑडियंस खास तौर पर “वीडियो-फर्स्ट” हो चुकी है। यानी लोग खबरें पढ़ने से ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की डिजिटल न्यूज रिपोर्ट भी बताती है कि भारत समेत कई देशों में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स न्यूज देखने का बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं।
यही वजह है कि आज यूट्यूब क्रिएटर्स का प्रभाव कई टीवी एंकरों के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी ज्यादा दिखाई देता है।
क्रिएटर पत्रकारिता: नए दौर के डिजिटल पत्रकार
भारत में यूट्यूब आधारित पत्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दो तरह के लोग दिखाई देते हैं।
पहला वर्ग उन पत्रकारों का है जिन्होंने टीवी न्यूज छोड़कर स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए। दूसरा वर्ग उन युवाओं का है जो कभी किसी न्यूज रूम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने रिसर्च आधारित कंटेंट और एक्सप्लेनर वीडियो के जरिए बड़ी ऑडियंस बना ली।
रवीश कुमार: टीवी से डिजिटल तक
पूर्व एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार इस बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं। 2022 में एनडीटीवी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। कुछ ही समय में उनका चैनल भारत के सबसे बड़े स्वतंत्र न्यूज प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया।
डिजिटल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके चैनल के सब्सक्राइबर्स करोड़ों में हैं और उनके वीडियो अरबों बार देखे जा चुके हैं। रवीश कुमार की लोकप्रियता यह दिखाती है कि दर्शक सिर्फ बड़े मीडिया ब्रांड को नहीं, बल्कि भरोसेमंद चेहरों को भी फॉलो करते हैं।
अजीत अंजुम: ग्राउंड रिपोर्टिंग का डिजिटल चेहरा
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम भी उन बड़े नामों में शामिल हैं जिन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। लंबे समय तक टीवी न्यूज इंडस्ट्री में काम करने के बाद उन्होंने यूट्यूब को अपना मुख्य मंच बनाया।
अजीत अंजुम की खास पहचान उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और चुनावी कवरेज मानी जाती है। वे अक्सर छोटे शहरों, गांवों और आम लोगों के बीच जाकर रिपोर्टिंग करते हैं। यही वजह है कि उनकी पत्रकारिता को “ग्राउंड कनेक्टेड जर्नलिज्म” कहा जाता है।
उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और चुनाव, राजनीति, किसान आंदोलन, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर उनके वीडियो को बड़ी संख्या में देखा जाता है।
डिजिटल दौर में अजीत अंजुम की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक आज भी फील्ड रिपोर्टिंग और जमीनी पत्रकारिता को महत्व देते हैं। जहां टीवी न्यूज पर स्टूडियो बहसों का दबदबा बढ़ा है, वहीं यूट्यूब पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अलग पहचान मिल रही है।
पुण्य प्रसून बाजपेयी: टीवी के तेज तेवर से डिजिटल पत्रकारिता तक
वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी भी उन चर्चित चेहरों में शामिल हैं जिन्होंने टीवी न्यूज से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत उपस्थिति बनाई। लंबे समय तक विभिन्न न्यूज चैनलों में एंकरिंग और राजनीतिक विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों पर अपनी अलग पहचान बनाई।
पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने तीखे राजनीतिक विश्लेषण, सत्ता से सवाल पूछने की शैली और गहरे मुद्दों पर आधारित कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उन्होंने लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो, विश्लेषण और समसामयिक मुद्दों पर आधारित कंटेंट के जरिए बड़ी ऑडियंस तैयार की।
उनके वीडियो खास तौर पर उन दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं जो टीवी की तेज बहसों की बजाय विस्तार से मुद्दों को समझना चाहते हैं।
पुण्य प्रसून बाजपेयी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि डिजिटल पत्रकारिता ने अनुभवी टीवी पत्रकारों को एक नया मंच दिया है, जहां वे बिना समय की पाबंदी के अपनी बात रख सकते हैं और सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं।
ध्रुव राठी: एक्सप्लेनर पत्रकारिता का बड़ा चेहरा
ध्रुव राठी भारत के सबसे चर्चित डिजिटल क्रिएटर्स में गिने जाते हैं। उनके वीडियो राजनीति, प्रशासन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उन्होंने यूट्यूब पर “एक्सप्लेनर फॉर्मेट” को लोकप्रिय बनाया। यानी जटिल मुद्दों को आसान भाषा, ग्राफिक्स और रिसर्च के जरिए समझाना।
उनके अलग-अलग चैनलों और बहुभाषी ऑडियंस को मिलाकर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके वीडियो पर अरबों व्यूज आ चुके हैं। ध्रुव राठी की सफलता ने यह साबित किया कि यूट्यूब पर लंबी और रिसर्च आधारित पत्रकारिता भी बड़े स्तर पर सफल हो सकती है।
नितीश राजपूत: हिंदी डिजिटल ऑडियंस की नई पसंद
नितीश राजपूत ने हिंदी ऑडियंस के बीच एक्सप्लेनर और करेंट अफेयर्स वीडियो के जरिए मजबूत पहचान बनाई है। उनके वीडियो खास तौर पर युवा दर्शकों में लोकप्रिय हैं क्योंकि वे कठिन विषयों को सरल हिंदी में समझाने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके सब्सक्राइबर्स करोड़ों के करीब पहुंच चुके हैं और उनके वीडियो लगातार हाई एंगेजमेंट हासिल करते हैं।
बरखा दत्त और मोजो स्टोरी
टीवी पत्रकारिता का बड़ा नाम रही बरखा दत्त ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म “मोजो स्टोरी” शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग और फील्ड पत्रकारिता की वजह से इस प्लेटफॉर्म को काफी पहचान मिली। यूट्यूब पर मोजो स्टोरी ने स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता का एक अलग मॉडल पेश किया।
फेय डिसूजा: शांत और तथ्य आधारित पत्रकारिता
मिरर नाउ की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर फेय डिसूजा भी डिजिटल पत्रकारिता की बड़ी आवाज बन चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे सनसनीखेज पत्रकारिता से दूर रहकर शांत और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग करती हैं।
डिजिटल ऑडियंस के एक बड़े वर्ग को यह तरीका ज्यादा भरोसेमंद लगता है।
आखिर दर्शक टीवी न्यूज से दूर क्यों जा रहे हैं?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग टीवी छोड़कर मोबाइल पर न्यूज देखने लगे?
इसकी कई वजहें हैं।
पिछले कुछ वर्षों में टीवी न्यूज पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वहां तथ्यों से ज्यादा चीख-पुकार दिखाई देती है। प्राइम टाइम बहसों में कई बार चर्चा से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। इससे दर्शकों का एक वर्ग धीरे-धीरे टीवी से दूर हुआ। इसके मुकाबले यूट्यूब क्रिएटर्स लंबे फॉर्मेट में बिना रुकावट अपनी बात रखते हैं।
भारत की नई डिजिटल पीढ़ी मोबाइल पर ही कंटेंट देखती है। आज बड़ी संख्या में युवा ऑडियंस टीवी नहीं देखती। उनके लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम और पॉडकास्ट ही सूचना के मुख्य स्रोत बन चुके हैं।
यूट्यूब एल्गोरिदम दर्शक की पसंद के हिसाब से कंटेंट दिखाता है। अगर कोई व्यक्ति राजनीति देखता है तो उसे उसी तरह के वीडियो ज्यादा दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यूजर्स अपने पसंदीदा क्रिएटर्स से जुड़ाव महसूस करते हैं।
टीवी न्यूज में समय सीमित होता है। लेकिन यूट्यूब पर क्रिएटर्स 20 मिनट, 40 मिनट या एक घंटे तक किसी मुद्दे को विस्तार से समझा सकते हैं। यही वजह है कि एक्सप्लेनर पत्रकारिता तेजी से लोकप्रिय हुई है।
आईपीएल और डिजिटल बदलाव
भारत में मनोरंजन और खेल देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और मीडिया ट्रैकिंग डेटा बताते हैं कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों में डिजिटल दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक टीवी की वृद्धि धीमी पड़ रही है। जियोस्टार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक आईपीएल के दौरान करोड़ों यूजर्स डिजिटल माध्यमों पर मैच देख रहे हैं।
इसका मतलब साफ है- दर्शक गए नहीं, बल्कि मंच बदल गया है। जहां पहले पूरा परिवार टीवी के सामने बैठता था, अब हर व्यक्ति अपने मोबाइल पर अलग-अलग कंटेंट देख रहा है।
मेटा (Meta) ने Instagram डायरेक्ट मैसेज के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर बंद करने का फैसला लिया है। अब कंपनी जरूरत पड़ने पर मैसेज, फोटो, वीडियो और वॉइस नोट्स तक एक्सेस कर सकेगी।
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मेटा (Meta) ने इंस्टाग्राम (Instagram) यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव करते हुए डायरेक्ट मैसेज (DM) में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर बंद करने का फैसला लिया है। 8 मई 2026 से यह फीचर आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है। इसके बाद कंपनी जरूरत पड़ने पर यूजर्स के मैसेज, फोटो, वीडियो और वॉइस नोट्स तक पहुंच बना सकेगी।
अब तक इंस्टाग्राम पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक वैकल्पिक फीचर था, जिसे यूजर्स खुद ऑन कर सकते थे। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुत कम लोगों ने इस सुविधा का इस्तेमाल किया, जिसके चलते मेटा ने इसे बंद करने का फैसला लिया। कंपनी ने एन्क्रिप्टेड चैट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ऐप के जरिए नोटिफिकेशन भेजकर जरूरी बातचीत और मीडिया डाउनलोड करने की सलाह दी है। फीचर बंद होने के बाद ये चैट्स उपलब्ध नहीं रहेंगी।
मेटा इससे पहले फेसबुक मैसेंजर (Facebook Messenger) में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग को डिफॉल्ट फीचर बना चुकी है, लेकिन इंस्टाग्राम पर इसका विस्तार सीमित ही रहा। अब इंस्टाग्राम सामान्य एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करेगा, जो डेटा ट्रांसफर के दौरान सुरक्षा देता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर प्लेटफॉर्म कंटेंट देख सकेगा।
पत्रकार सृष्टि श्रीवास्तव ने एबीपी न्यूज (ABP News) के साथ नई पारी शुरू की है। इससे पहले वह टाइम्स नाउ नवभारत में फीचर डेस्क पर लाइफस्टाइल, धर्म और ट्रैवल कंटेंट संभाल रही थीं।
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पत्रकार सृष्टि श्रीवास्तव ने 'टाइम्स नाउ नवभारत' को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अब हिंदी न्यूज चैनल एबीपी न्यूज (ABP News) के साथ अपने बतौर कॉपी एडिटर नए सफर की शुरुआत की है। डिजिटल मीडिया और फीचर लेखन में रूचि रखने वाली सृष्टि पिछले 5 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
सृष्टि इससे पहले टाइम्स ग्रुप (Times Group) के हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म टाइम्स नाउ नवभारत (Times Now Navbharat) से जुड़ी थीं। यहां वह फीचर डेस्क पर लाइफस्टाइल, धर्म और ट्रैवल बीट कवर कर रही थीं।
उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत साल 2021 में नवभारत टाइम्स (Navbharat Times) डिजिटल के फिल्म डेस्क से की थी। इसके बाद साल 2023 में वह टाइम्स नाऊ नवभारत से जुड़ीं और फीचर पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई।
बिहार के सिवान से ताल्लुक रखने वाली सृष्टि ने अपनी स्कूली शिक्षा विद्या मंदिर विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री हासिल की। समाचार4मीडिया की ओर से सृष्टि श्रीवास्तव को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।
ज़ी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) ने जियोस्टार (JioStar) पर बिना लाइसेंस गाने इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने दिल्ली कोर्ट में $3 मिलियन हर्जाने की मांग करते हुए कॉपीराइट केस दायर किया।
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ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd - ZEEL) ने रिलायंस-डिज्नी (Reliance-Disney) जॉइंट वेंचर जियोस्टार (JioStar) के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मामला दायर किया है।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, यह मुकदमा 14 अप्रैल को नई दिल्ली में दायर किया गया था, जिसमें ZEEL ने करीब 30 लाख डॉलर के हर्जाने की मांग की है।ज़ी का आरोप है कि जियोस्टार ने लाइसेंसिंग एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी उसके कॉपीराइट वाले गानों का इस्तेमाल अपने टीवी चैनलों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर जारी रखा।
कंपनी के अनुसार, 2024 और 2025 में एग्रीमेंट समाप्त होने के बाद भी उसके कंटेंट का कम से कम 50 बार इस्तेमाल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जियोस्टार को निर्देश दिया कि वह ज़ी के कंटेंट के किसी भी संभावित उल्लंघन को रोके और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई करे। अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत का मीडिया सेक्टर तेजी से बदल रहा है। जियोस्टार, रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और डिज्नी (Disney) के 8.5 बिलियन डॉलर के संयुक्त मीडिया वेंचर के रूप में काम कर रहा है। वहीं ज़ी के पास 17 भाषाओं में 19,450 से अधिक गानों के अधिकार हैं।
वॉट्सऐप (WhatsApp) ने भारत में बिजनेस AI फीचर लॉन्च किया है। यह AI आधारित टूल छोटे कारोबारियों को 24/7 कस्टमर सपोर्ट, लीड मैनेजमेंट, अपॉइंटमेंट बुकिंग और सेल्स बढ़ाने में मदद करेगा।
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मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप (WhatsApp) ने भारत में WhatsApp Business ऐप के लिए नया “Business AI” फीचर लॉन्च किया है। यह AI आधारित फीचर छोटे कारोबारियों को ग्राहकों के सवालों का 24/7 जवाब देने, लीड कैप्चर करने, अपॉइंटमेंट बुक करने और सेल्स बढ़ाने में मदद करेगा। खास बात यह है कि यह फीचर भारत की सभी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।
कंपनी के अनुसार, बिजनेस AI को कारोबारी अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकेंगे। यह ग्राहकों के उत्पाद, कीमत, डिस्काउंट, डिलीवरी और अन्य सामान्य सवालों के जवाब ऑटोमैटिक तरीके से देगा। आने वाले समय में इसमें UPI के जरिए सीधे WhatsApp चैट में पेमेंट की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।
मेटा इंडिया (Meta India) में डायरेक्टर बिजनेस मैसेजिंग रवि गर्ग ने कहा कि छोटे व्यवसायों के लिए हर ग्राहक बातचीत बेहद अहम होती है और सीमित संसाधनों के बीच बड़ी संख्या में आने वाले सवालों को संभालना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि AI इस समस्या का बड़ा समाधान बन सकता है।
कंपनी ने बताया कि इस फीचर का इस्तेमाल करने वाले कई छोटे व्यवसाय पहले से बेहतर रिजल्ट देख रहे हैं। पर्सनल केयर ब्रैंड Soil Concept और गिफ्टिंग बिजनेस The Purple Sunset ने दावा किया कि AI सपोर्ट के बाद उनकी सेल्स और कन्वर्जन रेट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।