टीवी से मोबाइल तक: क्या यूट्यूब बन रहा है नई पत्रकारिता का सबसे बड़ा मंच?

भारत में खबरें देखने और समझने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक ज्यादातर लोग खबरों के लिए अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर थे, लेकिन अब मोबाइल स्क्रीन उनकी पहली पसंद बनती जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 13 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 13 June, 2026
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भारत में पत्रकारिता का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक खबरों के लिए लोग अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर रहते थे। बड़े-बड़े न्यूज स्टूडियो, तेज आवाज में बहस करते एंकर और “ब्रेकिंग न्यूज” की होड़ टीवी पत्रकारिता की पहचान बन चुके थे। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।

आज बड़ी संख्या में लोग मोबाइल पर खबरें देखना और समझना पसंद कर रहे हैं। बदलाव सिर्फ प्लेटफॉर्म का नहीं है, बल्कि खबर पेश करने के तरीके का भी है। अब दर्शक शोर-शराबे और लंबी बहसों की बजाय ऐसे लोगों को सुनना पसंद करते हैं जो सरल भाषा में, सीधे और तथ्यों के साथ अपनी बात रखें। वे ऐसे कंटेंट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उन्हें जानकारी देने के साथ किसी विषय को आसानी से समझाए भी।

यहीं से “क्रिएटर जर्नलिज्म” यानी क्रिएटर आधारित पत्रकारिता का दौर शुरू हुआ है। यह पत्रकारिता बड़े टीवी स्टूडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यूट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों तक पहुंच रही है।

भारत में यूट्यूब अब केवल मनोरंजन का मंच नहीं रह गया है। यह खबरों, विश्लेषण, एक्सप्लेनर वीडियो, इंटरव्यू और जनमत का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। यही वजह है कि आज पारंपरिक मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के बीच दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने की सीधी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

भारत और यूट्यूब: दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल दर्शक वर्ग

भारत आज यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। स्टैटिस्टा और गूगल ऐड्स के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में यूट्यूब की विज्ञापन पहुंच करीब 51 से 52 करोड़ यूजर्स के आसपास है। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा यूट्यूब दर्शक भारत में मौजूद हैं।

दुनियाभर में यूट्यूब के करीब 2.5 से 2.7 अरब मंथली एक्टिव यूजर्स माने जाते हैं। भारत का योगदान इसमें लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है सस्ता मोबाइल इंटरनेट, किफायती स्मार्टफोन और क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की तेज बढ़त।

कुछ साल पहले तक यूट्यूब को केवल गानों, कॉमेडी वीडियो या मनोरंजन मंच के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब लोग यहां न्यूज, राजनीति, करेंट अफेयर्स, वित्त, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी बड़ी संख्या में वीडियो देख रहे हैं।

भारत में डिजिटल ऑडियंस खास तौर पर “वीडियो-फर्स्ट” हो चुकी है। यानी लोग खबरें पढ़ने से ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की डिजिटल न्यूज रिपोर्ट भी बताती है कि भारत समेत कई देशों में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स न्यूज देखने का बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं।

यही वजह है कि आज यूट्यूब क्रिएटर्स का प्रभाव कई टीवी एंकरों के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी ज्यादा दिखाई देता है।

क्रिएटर पत्रकारिता: नए दौर के डिजिटल पत्रकार

भारत में यूट्यूब आधारित पत्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दो तरह के लोग दिखाई देते हैं।

पहला वर्ग उन पत्रकारों का है जिन्होंने टीवी न्यूज छोड़कर स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए। दूसरा वर्ग उन युवाओं का है जो कभी किसी न्यूज रूम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने रिसर्च आधारित कंटेंट और एक्सप्लेनर वीडियो के जरिए बड़ी ऑडियंस बना ली।

रवीश कुमार: टीवी से डिजिटल तक

पूर्व एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार इस बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं। 2022 में एनडीटीवी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। कुछ ही समय में उनका चैनल भारत के सबसे बड़े स्वतंत्र न्यूज प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया।

डिजिटल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके चैनल के सब्सक्राइबर्स करोड़ों में हैं और उनके वीडियो अरबों बार देखे जा चुके हैं। रवीश कुमार की लोकप्रियता यह दिखाती है कि दर्शक सिर्फ बड़े मीडिया ब्रांड को नहीं, बल्कि भरोसेमंद चेहरों को भी फॉलो करते हैं।

अजीत अंजुम: ग्राउंड रिपोर्टिंग का डिजिटल चेहरा

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम भी उन बड़े नामों में शामिल हैं जिन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। लंबे समय तक टीवी न्यूज इंडस्ट्री में काम करने के बाद उन्होंने यूट्यूब को अपना मुख्य मंच बनाया।

अजीत अंजुम की खास पहचान उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और चुनावी कवरेज मानी जाती है। वे अक्सर छोटे शहरों, गांवों और आम लोगों के बीच जाकर रिपोर्टिंग करते हैं। यही वजह है कि उनकी पत्रकारिता को “ग्राउंड कनेक्टेड जर्नलिज्म” कहा जाता है।

उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और चुनाव, राजनीति, किसान आंदोलन, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर उनके वीडियो को बड़ी संख्या में देखा जाता है।

डिजिटल दौर में अजीत अंजुम की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक आज भी फील्ड रिपोर्टिंग और जमीनी पत्रकारिता को महत्व देते हैं। जहां टीवी न्यूज पर स्टूडियो बहसों का दबदबा बढ़ा है, वहीं यूट्यूब पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अलग पहचान मिल रही है।

पुण्य प्रसून बाजपेयी: टीवी के तेज तेवर से डिजिटल पत्रकारिता तक

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी भी उन चर्चित चेहरों में शामिल हैं जिन्होंने टीवी न्यूज से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत उपस्थिति बनाई। लंबे समय तक विभिन्न न्यूज चैनलों में एंकरिंग और राजनीतिक विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों पर अपनी अलग पहचान बनाई।

पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने तीखे राजनीतिक विश्लेषण, सत्ता से सवाल पूछने की शैली और गहरे मुद्दों पर आधारित कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उन्होंने लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो, विश्लेषण और समसामयिक मुद्दों पर आधारित कंटेंट के जरिए बड़ी ऑडियंस तैयार की।

उनके वीडियो खास तौर पर उन दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं जो टीवी की तेज बहसों की बजाय विस्तार से मुद्दों को समझना चाहते हैं।

पुण्य प्रसून बाजपेयी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि डिजिटल पत्रकारिता ने अनुभवी टीवी पत्रकारों को एक नया मंच दिया है, जहां वे बिना समय की पाबंदी के अपनी बात रख सकते हैं और सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं।

ध्रुव राठी: एक्सप्लेनर पत्रकारिता का बड़ा चेहरा

ध्रुव राठी भारत के सबसे चर्चित डिजिटल क्रिएटर्स में गिने जाते हैं। उनके वीडियो राजनीति, प्रशासन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उन्होंने यूट्यूब पर “एक्सप्लेनर फॉर्मेट” को लोकप्रिय बनाया। यानी जटिल मुद्दों को आसान भाषा, ग्राफिक्स और रिसर्च के जरिए समझाना।

उनके अलग-अलग चैनलों और बहुभाषी ऑडियंस को मिलाकर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके वीडियो पर अरबों व्यूज आ चुके हैं। ध्रुव राठी की सफलता ने यह साबित किया कि यूट्यूब पर लंबी और रिसर्च आधारित पत्रकारिता भी बड़े स्तर पर सफल हो सकती है।

नितीश राजपूत: हिंदी डिजिटल ऑडियंस की नई पसंद

नितीश राजपूत ने हिंदी ऑडियंस के बीच एक्सप्लेनर और करेंट अफेयर्स वीडियो के जरिए मजबूत पहचान बनाई है। उनके वीडियो खास तौर पर युवा दर्शकों में लोकप्रिय हैं क्योंकि वे कठिन विषयों को सरल हिंदी में समझाने की कोशिश करते हैं।

डिजिटल एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके सब्सक्राइबर्स करोड़ों के करीब पहुंच चुके हैं और उनके वीडियो लगातार हाई एंगेजमेंट हासिल करते हैं।

बरखा दत्त और मोजो स्टोरी

टीवी पत्रकारिता का बड़ा नाम रही बरखा दत्त ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म “मोजो स्टोरी” शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग और फील्ड पत्रकारिता की वजह से इस प्लेटफॉर्म को काफी पहचान मिली। यूट्यूब पर मोजो स्टोरी ने स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता का एक अलग मॉडल पेश किया।

फेय डिसूजा: शांत और तथ्य आधारित पत्रकारिता

मिरर नाउ की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर फेय डिसूजा भी डिजिटल पत्रकारिता की बड़ी आवाज बन चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे सनसनीखेज पत्रकारिता से दूर रहकर शांत और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग करती हैं।

डिजिटल ऑडियंस के एक बड़े वर्ग को यह तरीका ज्यादा भरोसेमंद लगता है।

आखिर दर्शक टीवी न्यूज से दूर क्यों जा रहे हैं?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग टीवी छोड़कर मोबाइल पर न्यूज देखने लगे?

इसकी कई वजहें हैं।

  1. शोर और बहस से थक चुकी ऑडियंस

पिछले कुछ वर्षों में टीवी न्यूज पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वहां तथ्यों से ज्यादा चीख-पुकार दिखाई देती है। प्राइम टाइम बहसों में कई बार चर्चा से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। इससे दर्शकों का एक वर्ग धीरे-धीरे टीवी से दूर हुआ। इसके मुकाबले यूट्यूब क्रिएटर्स लंबे फॉर्मेट में बिना रुकावट अपनी बात रखते हैं।

  1. मोबाइल-फर्स्ट पीढ़ी

भारत की नई डिजिटल पीढ़ी मोबाइल पर ही कंटेंट देखती है। आज बड़ी संख्या में युवा ऑडियंस टीवी नहीं देखती। उनके लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम और पॉडकास्ट ही सूचना के मुख्य स्रोत बन चुके हैं।

  1. व्यक्तिगत पसंद वाला कंटेंट

यूट्यूब एल्गोरिदम दर्शक की पसंद के हिसाब से कंटेंट दिखाता है। अगर कोई व्यक्ति राजनीति देखता है तो उसे उसी तरह के वीडियो ज्यादा दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यूजर्स अपने पसंदीदा क्रिएटर्स से जुड़ाव महसूस करते हैं।

  1. लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो

टीवी न्यूज में समय सीमित होता है। लेकिन यूट्यूब पर क्रिएटर्स 20 मिनट, 40 मिनट या एक घंटे तक किसी मुद्दे को विस्तार से समझा सकते हैं। यही वजह है कि एक्सप्लेनर पत्रकारिता तेजी से लोकप्रिय हुई है।

आईपीएल और डिजिटल बदलाव

भारत में मनोरंजन और खेल देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और मीडिया ट्रैकिंग डेटा बताते हैं कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों में डिजिटल दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक टीवी की वृद्धि धीमी पड़ रही है। जियोस्टार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक आईपीएल के दौरान करोड़ों यूजर्स डिजिटल माध्यमों पर मैच देख रहे हैं।

इसका मतलब साफ है- दर्शक गए नहीं, बल्कि मंच बदल गया है। जहां पहले पूरा परिवार टीवी के सामने बैठता था, अब हर व्यक्ति अपने मोबाइल पर अलग-अलग कंटेंट देख रहा है।

 

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हिताची डिजिटल में अभिजीत गायकवाड़ को मिली नई जिम्मेदारी

अभिजीत गायकवाड़ ने हिताची डिजिटल में ग्लोबल क्रिएटिव हेड की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह हिताची डिजिटल सर्विसेज में ग्लोबल लीड-क्रिएटिव एंड डिजाइन के पद पर कार्यरत थे।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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अभिजीत गायकवाड़ (Abhijeet Gaikwad) ने हिताची डिजिटल (Hitachi Digital) में ग्लोबल क्रिएटिव हेड (Global Creative Head) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए इस भूमिका को लेकर उत्साह जताया।

नई भूमिका में वह वैश्विक स्तर पर कंपनी की क्रिएटिव लीडरशिप से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। इससे पहले गायकवाड़ हिताची डिजिटल सर्विसेज (Hitachi Digital Services) में ग्लोबल लीड-क्रिएटिव एंड डिजाइन (Global Lead – Creative & Design) के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने संगठन के क्रिएटिव और डिजाइन से जुड़े कामों का नेतृत्व किया।

गायकवाड़ को डिजाइन क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है। वह ब्रांड के विजन को कारोबारी परिणामों में बदलने के लिए काम करते रहे हैं। उन्हें क्रॉस-फंक्शनल टीमों का नेतृत्व करने के साथ ब्रांड स्ट्रैटेजी, यूएक्स/यूआई (UX/UI) और क्रिएटिव डायरेक्शन का अनुभव है।

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BookMyShow Live में गौतम चटवाल को मिली स्पॉन्सरशिप की कमान

लाइव एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही BookMyShow ने गौतम चटवाल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

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Published - Thursday, 05 November, 2026
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Thursday, 05 November, 2026
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लाइव एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही BookMyShow ने गौतम चटवाल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कंपनी के लाइव एंटरटेनमेंट डिवीजन BookMyShow Live में हेड ऑफ स्पॉन्सरशिप्स के तौर पर जॉइन किया है। वह इस डिवीजन के तहत होने वाले सभी लाइव इवेंट्स के लिए स्पॉन्सरशिप से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

चटवाल इससे पहले हॉकी इंडिया लीग की फ्रेंचाइजी SG Pipers में वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ सेल्स एंड मार्केटिंग के पद पर काम कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने करीब नौ साल तक Star Sports में अपनी सेवाएं दीं। वहां वह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सेल्स) के साथ वाइस प्रेसिडेंट और असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट एंड रेवेन्यू स्ट्रैटेजी) जैसे पदों पर रहे।

IPL और ISL जैसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स का अनुभव

Star Sports में अपने कार्यकाल के दौरान चटवाल ने IPL, इंडियन सुपर लीग (ISL) और प्रो कबड्डी लीग जैसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिए ब्रैंड पार्टनरशिप पर काम किया।

उन्होंने ISL के दौरान DHL के एक खास ब्रैंड कैंपेन पर भी काम किया था, जिसमें ड्रोन के जरिए मैच की गेंद मैदान तक पहुंचाई गई थी। इसके अलावा वह 'Star Deals' पहल से भी जुड़े रहे। इसके तहत लाइव IPL प्रसारण के दौरान दर्शकों को उनके मोबाइल फोन पर अलग-अलग ब्रैंड्स के ऑफर्स दिए जाते थे। चटवाल ने MICA के 2002 बैच से पढ़ाई की है।

दिलजीत और कोल्डप्ले जैसे बड़े इवेंट्स से जुड़ी है BookMyShow Live

BookMyShow Live फिलहाल देश में कई बड़े लाइव म्यूजिक और एंटरटेनमेंट इवेंट्स से जुड़ा है। कंपनी Live Nation के साथ मिलकर दिलजीत दोसांझ के 'RuPay AURA India Tour 2026' का सह-निर्माण और प्रमोशन कर रही है। इस टूर की शुरुआत नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए हाउसफुल शो के साथ हुई।

इसके अलावा BookMyShow Live, 'Lollapalooza India' का भी सह-निर्माण करता है। कंपनी ने Live Nation के साथ मिलकर भारत में Coldplay के 'Music of the Spheres' टूर के आयोजन और प्रमोशन की जिम्मेदारी भी संभाली थी।

गौतम चटवाल की नियुक्ति को कंपनी के लाइव एंटरटेनमेंट कारोबार में स्पॉन्सरशिप और ब्रैंड पार्टनरशिप को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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YAAP Digital के शेयरों में क्यों आई हलचल? कंपनी ने दी सफाई

डिजिटल मार्केटिंग कंपनी YAAP Digital Limited ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में आई बड़ी हलचल को लेकर सफाई दी है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 05 November, 2026
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Thursday, 05 November, 2026
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डिजिटल मार्केटिंग कंपनी YAAP Digital Limited ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में आई बड़ी हलचल को लेकर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि शेयरों की कीमत में हो रहे उतार-चढ़ाव के पीछे कोई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी या कॉरपोरेट घोषणा नहीं है, जिसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया हो। कंपनी के मुताबिक, शेयरों में यह हलचल पूरी तरह बाजार की स्थितियों की वजह से है।

दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 3 नवंबर 2026 को कंपनी को एक पत्र भेजकर उसके शेयरों की कीमत में हाल के दिनों में हुई बड़ी हलचल पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके जवाब में कंपनी ने 4 नवंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को अपनी सफाई दी।

कंपनी ने नहीं छिपाई कोई अहम जानकारी

NSE को दिए जवाब में YAAP Digital ने कहा कि वह सेबी के लिस्टिंग नियमों (SEBI Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015) के तहत सभी जरूरी जानकारियों और महत्वपूर्ण घटनाओं का खुलासा समय पर करती रही है। कंपनी ने इसके लिए रेगुलेशन 30 और अन्य लागू प्रावधानों का पालन करने की बात कही।

कंपनी ने साफ किया कि फिलहाल उसके पास ऐसी कोई महत्वपूर्ण घटना, जानकारी या प्रस्तावित कॉरपोरेट घोषणा लंबित नहीं है, जिसका असर उसके शेयरों की कीमत या कारोबार की मात्रा पर पड़ सकता हो।

शेयरों में उतार-चढ़ाव से मैनेजमेंट का संबंध नहीं

कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि हाल में शेयरों की कीमत में जो बदलाव देखने को मिला है, वह पूरी तरह बाजार की गतिविधियों और मौजूदा परिस्थितियों का नतीजा है। मैनेजमेंट का इस कीमत में उतार-चढ़ाव से कोई संबंध नहीं है और न ही वह इसके लिए जिम्मेदार है।

कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह आगे भी स्टॉक एक्सचेंजों को सभी महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह स्पष्टीकरण कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर शिवानी शिवशंकर तिवारी ने NSE को भेजा है।

 

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दर्शन कांतक बने नेटफ्लिक्स के एड प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट

नेटफ्लिक्स ने दर्शन कांतक को अपने एड प्लेटफॉर्म का वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। वह विज्ञापन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग, डेटा और इनसाइट्स से जुड़े कामकाज का नेतृत्व करेंगे।

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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नेटफ्लिक्स (Netflix) ने गूगल क्लाउड (Google Cloud) के वरिष्ठ अधिकारी दर्शन कांतक (Darshan Kantak) को अपने एड प्लेटफॉर्म का वाइस प्रेसिडेंट (Vice President) नियुक्त किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कंपनी के विज्ञापन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग और डेटा एवं इनसाइट्स से जुड़े कामकाज का नेतृत्व करेंगे।

नई भूमिका में कांतक नेटफ्लिक्स की ग्लोबल एडवरटाइजिंग स्ट्रैटेजी तैयार करने के साथ विज्ञापन पार्टनर्स को दी जाने वाली तकनीक, रिपोर्टिंग और ऑपरेशनल क्षमताओं को मजबूत करेंगे। इसमें नेटफ्लिक्स के एड्स सूट (Ads Suite) के जरिए मिलने वाली सेवाओं का विस्तार भी शामिल होगा।

नेटफ्लिक्स से पहले कांतक गूगल क्लाउड में अप्लाइड एआई के वाइस प्रेसिडेंट थे। वहां उन्होंने रिटेल, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज, पब्लिक सर्विसेज, टेक्नोलॉजी और मीडिया एवं एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्रों के लिए एंटरप्राइज एआई एप्लिकेशन विकसित करने वाली टीमों का नेतृत्व किया।

कांतक इससे पहले स्नैप इंक. (Snap Inc.), मेटा (Meta), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और याहू (Yahoo) में भी वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। उनके अनुभव में एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

अपनी नई भूमिका को लेकर कांतक ने कहा कि उनके करियर का बड़ा हिस्सा ब्रांड और परफॉर्मेंस एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने में बीता है। हाल के वर्षों में उन्होंने बड़े स्तर पर एंटरप्राइज एआई सॉल्यूशंस तैयार करने और उनका विस्तार करने पर काम किया है।

उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स के साथ उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा, जिससे दर्शकों के लिए विज्ञापन अधिक प्रासंगिक बन सकें। साथ ही विज्ञापनदाताओं के लिए इनोवेशन और प्रभावशीलता बढ़ाने वाले टूल्स तैयार किए जा सकेंगे।

कांतक नेटफ्लिक्स की प्रेसिडेंट ऑफ एडवरटाइजिंग एमी रेनहार्ड (Amy Reinhard) को रिपोर्ट करेंगे। उनकी नियुक्ति का स्वागत करते हुए रेनहार्ड ने कहा कि कांतक के पास विज्ञापन उद्योग का व्यापक अनुभव है। उन्होंने तेजी से बढ़ती कंपनियों में विज्ञापन कारोबार तैयार करने और उसे बड़े स्तर तक पहुंचाने में नेतृत्व किया है।

रेनहार्ड के मुताबिक, कांतक की तकनीक, एआई टूल्स और ऑपरेशंस से जुड़ी विशेषज्ञता नेटफ्लिक्स के विज्ञापन कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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मोबएवेन्यू के मुनाफे में 55 फीसदी की बढ़ोतरी

मोबएवेन्यू ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 76.7 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया। कंपनी का मुनाफा 54.8 फीसदी बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का योगदान भी बढ़ा।

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
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एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी कंपनी मोबएवेन्यू (Mobavenue) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 76.7 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले इसमें 41.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने परफॉर्मेंस आधारित विज्ञापन कारोबार और अंतरराष्ट्रीय परिचालन का विस्तार जारी रखा है।

दूसरी तिमाही में कंपनी का ईबीआईटीडीए (EBITDA) 47.3 फीसदी बढ़कर 16.2 करोड़ रुपये रहा। ईबीआईटीडीए मार्जिन 80 बेसिस पॉइंट सुधरकर 21.1 फीसदी पर पहुंच गया। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 54.8 फीसदी बढ़कर 11.3 करोड़ रुपये रहा। पीएटी मार्जिन में 130 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ और यह 14.7 फीसदी हो गया।

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रेवेन्यू 48.6 फीसदी बढ़कर 149.6 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान ईबीआईटीडीए 59.6 फीसदी बढ़कर 31.6 करोड़ रुपये और टैक्स के बाद मुनाफा 72.2 फीसदी बढ़कर 22.9 करोड़ रुपये पहुंच गया। पहली छमाही में पीएटी मार्जिन 15.3 फीसदी रहा।

कंपनी के मुताबिक, दूसरी तिमाही में प्रति आउटकम रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इससे उसके परफॉर्मेंस आधारित विज्ञापन मॉडल की कमाई क्षमता में सुधार हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी कंपनी को अधिक योगदान मिला है। दूसरी तिमाही में कुल रेवेन्यू में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 23.8 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 12.3 फीसदी थी। पहली छमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजारों का योगदान 22.3 फीसदी रहा।

मोबएवेन्यू फिलहाल 13 देशों में क्लाइंट्स को सेवाएं दे रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर उसका प्रमुख केंद्र है। कंपनी अमेरिका समेत दूसरे बाजारों में अपनी टीम का विस्तार कर रही है। साथ ही भारत में अपने टेक्नोलॉजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को भी मजबूत बना रही है।

प्लेटफॉर्म के स्तर पर कंपनी की पहुंच दुनियाभर में करीब 2.7 अरब डिवाइस तक है। मोबएवेन्यू हर दिन लगभग 1.4 अरब सिग्नल प्रोसेस करती है। दूसरी तिमाही में उसके प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ आउटकम दर्ज किए गए। कंपनी फिलहाल करीब 170 ब्रांड्स के साथ काम कर रही है।

मोबएवेन्यू ने खुद को एआई-नेटिव एडवरटाइजिंग और कंज्यूमर ग्रोथ प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया है। कंपनी की रणनीति अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के साथ तकनीक और आउटकम आधारित प्राइसिंग के जरिए विज्ञापन अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने पर केंद्रित है। कंपनी भारत से बाहर कारोबार बढ़ाने के साथ 20 फीसदी से अधिक ईबीआईटीडीए मार्जिन बनाए रखने पर भी ध्यान दे रही है।

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'टाइम्स नाउ नवभारत' ने लॉन्च किया Local App, अब शहर और मोहल्ले की खबरें भी मिलेंगी एक जगह

डिजिटल न्यूज के बढ़ते दायरे के बीच 'टाइम्स नाउ नवभारत' ने हाइपरलोकल पत्रकारिता की दिशा में एक नई पहल की है। नेटवर्क ने अपना Times Now Navbharat Local App लॉन्च किया है

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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डिजिटल न्यूज के बढ़ते दायरे के बीच 'टाइम्स नाउ नवभारत' (Times Now Navbharat) ने हाइपरलोकल पत्रकारिता की दिशा में एक नई पहल की है। नेटवर्क ने अपना 'टाइम्स नाउ नवभारत' Local App लॉन्च किया है। इस ऐप के जरिए लोगों को उनके शहर, कस्बे और आसपास के इलाकों की खबरें सीधे मोबाइल पर मिल सकेंगी। यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

इस ऐप का मकसद सिर्फ देश और दुनिया की बड़ी खबरें लोगों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उनके आसपास होने वाली घटनाओं और स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता देना है। इसके लिए ऐप में लोकेशन आधारित न्यूज की सुविधा दी गई है। यानी यूजर्स अपने इलाके से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें और अपडेट आसानी से देख सकेंगे।

शहर और मोहल्ले की खबरों पर रहेगा फोकस

आज डिजिटल दौर में लोगों की दिलचस्पी सिर्फ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों तक सीमित नहीं है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि उनके शहर में क्या हो रहा है, किन सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या है, स्थानीय प्रशासन ने क्या फैसले लिए हैं और उनके आसपास कौन-सी महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं।

'टाइम्स नाउ नवभारत' ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Local App पेश किया है। इसके जरिए स्थानीय घटनाओं, नागरिक सुविधाओं, ट्रैफिक, प्रशासनिक फैसलों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों की जानकारी देने पर जोर रहेगा।

ऐप में वीडियो कंटेंट भी शामिल किया गया है, जिससे यूजर्स अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ पढ़ ही नहीं सकेंगे, बल्कि वीडियो के जरिए उन्हें बेहतर तरीके से देख और समझ भी सकेंगे।

हाइपरलोकल पत्रकारिता को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

'टाइम्स नाउ नवभारत' की यह पहल डिजिटल न्यूज इकोसिस्टम में हाइपरलोकल पत्रकारिता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। इसके जरिए स्थानीय स्तर के उन मुद्दों को भी व्यापक मंच देने की कोशिश की जाएगी, जो अक्सर राष्ट्रीय खबरों के बीच उतनी जगह नहीं बना पाते।

लोकेशन आधारित खबरों और वीडियो के माध्यम से यूजर्स को अपने आसपास की गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। साथ ही स्थानीय जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में भी मदद मिलेगी।

Times Network का हिस्सा है 'टाइम्स नाउ नवभारत'

'टाइम्स नाउ नवभारत', Times Network का हिस्सा है, जो देश के प्रमुख मीडिया समूहों में शामिल Times Group के अंतर्गत आता है। Times Network के पास हिंदी और अंग्रेजी न्यूज चैनलों के अलावा एंटरटेनमेंट और बिजनेस न्यूज से जुड़े कई ब्रैंड हैं।

नेटवर्क के प्रमुख न्यूज ब्रैंड्स में Times Now, ET Now, Mirror Now, 'टाइम्स नाउ नवभारत' और ET Now Swadesh शामिल हैं। इसके अलावा नेटवर्क की कई डिजिटल वेबसाइट्स और अन्य कंटेंट प्लेटफॉर्म भी हैं।

Local App की लॉन्चिंग के साथ 'टाइम्स नाउ नवभारत' ने डिजिटल न्यूज में अपनी मौजूदगी को स्थानीय स्तर तक बढ़ाने की कोशिश की है। इस पहल के जरिए अब खबरों का दायरा देश और दुनिया से आगे बढ़कर लोगों के अपने शहर, मोहल्ले और आसपास के इलाकों तक पहुंचेगा।

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Quint Digital ने Quintype Solutions LLC को दी 50 लाख डॉलर की कॉरपोरेट गारंटी

डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अमेरिका की कंपनी Quintype Solutions LLC के लिए 50 लाख डॉलर (USD 5 million) की कॉरपोरेट गारंटी दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
QuintDigital9657

डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अमेरिका की कंपनी Quintype Solutions LLC के लिए 50 लाख डॉलर (USD 5 million) की कॉरपोरेट गारंटी दी है। कंपनी की ओर से दी गई यह गारंटी 2 नवंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। Quint Digital ने 3 नवंबर को स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी।

कंपनी ने यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत BSE को दी गई सूचना में साझा की है। यह गारंटी Quintype Solutions LLC की ओर से दी गई है, जो अमेरिका के डेलावेयर में रजिस्टर्ड एक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी है।

दो अलग-अलग समझौतों के तहत दी गई गारंटी

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कुल 50 लाख डॉलर की कॉरपोरेट गारंटी दो अलग-अलग मास्टर सर्विस एग्रीमेंट (MSA) के तहत दी गई है। इनमें से प्रत्येक समझौते के तहत अधिकतम 25 लाख डॉलर की गारंटी शामिल है।

Quint Digital ने यह भी बताया है कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Global Media Technologies Inc. के जरिए Quintype Solutions LLC में उसकी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

प्रमोटर समूह का कोई हित नहीं

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन में प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों का कोई हित नहीं है।

कंपनी ने कहा है कि इस गारंटी से जुड़े बाकी जरूरी विवरण 17 अक्टूबर 2026 को दी गई पिछली सूचना में साझा किए जा चुके हैं। ताजा जानकारी में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि कॉरपोरेट गारंटी 2 नवंबर से प्रभावी हो गई है।

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वॉल्ट डिज्नी हजारों कर्मचारियों की छंटनी पर कर रही विचार

वॉल्ट डिज्नी हजारों नौकरियों में कटौती पर विचार कर रही है। कंपनी मैनेजरों से सालाना खर्च में 20 फीसदी तक बचत के विकल्प तलाशने को कह रही है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
Walt Disney

वॉल्ट डिज्नी (Walt Disney) व्यापक स्तर पर लागत कम करने की योजना के तहत हजारों नौकरियों में कटौती पर विचार कर रही है। वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कुछ मैनेजरों से सालाना खर्च में 20 फीसदी तक बचत के विकल्प तलाशने को कहा है।

प्रस्तावित बचत का कुछ हिस्सा नौकरियों में कटौती से हासिल किया जा सकता है, जबकि बाकी रकम अन्य ऑपरेशनल खर्च कम करके बचाने की योजना है।

कंपनी की यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है, जब डिज्नी को कई कारोबारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का बढ़ता इस्तेमाल, बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन में कमजोरी, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और थीम पार्कों में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की संख्या में सुस्ती शामिल है।

सीईओ जोश डी'अमारो (Josh D’Amaro) के नेतृत्व में कंपनी बचत से मिलने वाली रकम का कुछ हिस्सा विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर खर्च करने की तैयारी कर रही है। इनमें फिल्म और टेलीविजन प्रोग्रामिंग, तकनीकी पहल, थीम पार्क और क्रूज कारोबार शामिल हैं।

खर्चों की यह समीक्षा इस साल कंपनी में हुई कर्मचारियों की कटौती के बाद हो रही है। सितंबर में डिज्नी ने सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था। इसे 2026 में कंपनी की छंटनी का तीसरा दौर बताया गया था। डिज्नी ने मौजूदा वित्त वर्ष में समायोजित प्रति शेयर आय में दोहरे अंक की वृद्धि देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

डी'अमारो और सीएफओ ह्यू जॉनस्टन (Hugh Johnston) ने अगस्त में संकेत दिया था कि कंपनी खर्च कम करने के लिए अतिरिक्त कदमों का मूल्यांकन कर रही है। इनमें कर्मचारियों की संख्या में संभावित कटौती भी शामिल थी।

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भारत को AVGC-XR का वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ी?

भारत के सामने एक बड़ा अवसर है कि वह केवल दूसरे देशों के लिए इन सेवाओं का काम करने वाला बाजार न रहे, बल्कि खुद भी ऐसे कंटेंट, तकनीक और प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बने, जिसकी मांग दुनिया भर में हो।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
AnimationGame547

भारत में एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) जैसे क्षेत्रों में तेजी से नए अवसर बन रहे हैं। फिल्मों में इस्तेमाल होने वाले शानदार विजुअल इफेक्ट्स से लेकर मोबाइल गेमिंग, एनिमेटेड फिल्मों, कॉमिक्स और वर्चुअल रियलिटी तक, मनोरंजन की दुनिया में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के सामने एक बड़ा अवसर है कि वह केवल दूसरे देशों के लिए इन सेवाओं का काम करने वाला बाजार न रहे, बल्कि खुद भी ऐसे कंटेंट, तकनीक और प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बने, जिसकी मांग दुनिया भर में हो।

इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी यानी AVGC-XR सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT), वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES), WaveX स्टार्टअप एक्सीलरेटर और 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' जैसी पहल शामिल हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इन प्रयासों का मकसद इस सेक्टर के लिए कुशल प्रतिभाएं तैयार करना, युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना, नए स्टार्टअप को बढ़ावा देना और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कारोबार तक पहुंच दिलाना है। सवाल यह है कि इन पहलों के जरिए भारत ने अब तक कितनी प्रगति की है और दुनिया का बड़ा AVGC-XR केंद्र बनने की दिशा में आगे कौन से कदम उठाए जा रहे हैं?

IICT: रचनात्मक तकनीक की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए नया संस्थान

भारत को AVGC-XR का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना में IICT की भूमिका काफी अहम है। मुंबई में स्थापित इस संस्थान को AVGC-XR सेक्टर के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ महाराष्ट्र सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों की भागीदारी है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) भी इसके प्रमुख इंडस्ट्री पार्टनर हैं।

IICT की स्थापना के लिए 11 अप्रैल 2025 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार, महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (MFSCDCL) और IICT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में IIT और IIM की तर्ज पर एक विश्वस्तरीय संस्थान तैयार करना है, जहां युवाओं को उद्योग की जरूरतों के मुताबिक ट्रेनिंग दी जा सके।

संस्थान का अस्थायी कैंपस मुंबई में नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) परिसर में शुरू किया गया। 18 जुलाई 2025 को इसका उद्घाटन हुआ। इसी मौके पर संस्थान का लोगो लॉन्च किया गया और गेमिंग, पोस्ट प्रोडक्शन, एनीमेशन, कॉमिक्स तथा एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) से जुड़े कुल 17 कोर्स शुरू किए गए।

इन पाठ्यक्रमों में अंडरग्रेजुएट डिप्लोमा, एक साल के डिप्लोमा और कम अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स शामिल हैं। AI आधारित प्रोग्राम और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी नई तकनीकों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। यहां 'लर्न बाय डूइंग' यानी काम करते हुए सीखने के तरीके पर जोर दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि छात्रों को सिर्फ क्लासरूम की पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय स्टूडियो और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट के जरिए अनुभव देने की कोशिश की जा रही है।

IICT में कितनी हुई प्रगति?

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में 167 छात्रों ने दाखिला लिया था, जबकि 150 से अधिक उम्मीदवार पाइपलाइन में थे। इसके अलावा IICT ने टेक्नोलॉजी, शिक्षा और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों के साथ 43 MoU किए हैं। इनमें NVIDIA, Adobe, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं।

संस्थान ने LTI Mindtree, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और MIT आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के साथ भी सहयोग किया है। इन साझेदारियों का मकसद छात्रों को नई तकनीक, इंडस्ट्री की जरूरतों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

IICT में स्टार्टअप को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के इन्क्यूबेटर में पहले बैच के 7 स्टार्टअप ने काम शुरू किया था। इन्हें मार्गदर्शन, तकनीकी सुविधाएं और इंडस्ट्री से संपर्क उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल IICT NFDC परिसर से काम कर रहा है। वहीं मुंबई के गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी में 10 एकड़ में इसका स्थायी कैंपस विकसित किया जा रहा है। इस कैंपस में आधुनिक स्टूडियो और इमर्सिव प्रोडक्शन से जुड़ी सुविधाएं तैयार करने की योजना है। 

इस तरह IICT का उद्देश्य सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा देना नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करना है जिनकी जरूरत एनीमेशन, गेमिंग, VFX और XR उद्योग में पड़ती है।

WaveX: स्टार्टअप को आइडिया से कारोबार तक पहुंचाने की पहल

AVGC-XR सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ प्रशिक्षित लोगों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे स्टार्टअप की भी जरूरत है जो अपनी तकनीक, गेम, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट तैयार करके बाजार में ला सकें। कई बार युवाओं के पास अच्छे आइडिया होते हैं, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन, फंडिंग, तकनीकी सुविधाएं और निवेशकों तक पहुंच नहीं मिल पाती। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने WAVES के तहत WaveX पहल शुरू की है।

WaveX सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक स्टार्टअप एक्सीलरेटर पहल है। इसका उद्देश्य मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर, खासकर AVGC-XR में उद्यमिता, नए प्रयोग और अपनी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property यानी IP) तैयार करने को बढ़ावा देना है। आसान भाषा में कहें तो इसका मकसद नए क्रिएटर्स और स्टार्टअप को केवल आइडिया बनाने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें ऐसा कारोबार खड़ा करने में मदद करना है, जिससे उनकी बनाई तकनीक और कंटेंट बाजार तक पहुंच सके।

WaveX के तहत स्टार्टअप को तीन चरणों में मदद दी जाती है-

  • प्री-इन्क्यूबेशन: इस चरण में स्टार्टअप के आइडिया की जांच, मेंटरशिप, ट्रेनिंग बूटकैंप और शुरुआती सहायता पर काम किया जाता है।
  • इन्क्यूबेशन: इसमें काम करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, फंडिंग से जुड़ी सहायता और इंडस्ट्री के साथ संपर्क उपलब्ध कराया जाता है।
  • एक्सीलरेशन: इस स्तर पर स्टार्टअप को बाजार तक पहुंच बनाने, निवेशकों से संपर्क करने, अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद दी जाती है।

इस कार्यक्रम में T-Hub और IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) जैसे संस्थान मास्टर इन्क्यूबेटर के रूप में जुड़े हैं। वहीं IICT, FTII और SRFTI जैसे संस्थान इसके सहयोगी केंद्रों में शामिल हैं।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में WaveX को 120 से अधिक स्टार्टअप आवेदन मिले और 30 से अधिक स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन कार्यक्रम में शामिल किया गया। WAVES 2025 के दौरान 200 से अधिक स्टार्टअप के साथ संपर्क किया गया, जबकि करीब 100 स्टार्टअप ने राष्ट्रीय मंच पर अपने इनोवेशन दिखाए।

स्टार्टअप को वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, गेमिंग लैब, XR/VR से जुड़ी सुविधाएं, एनीमेशन और VFX सुइट्स तथा प्रोटोटाइप तैयार करने की सुविधाओं तक पहुंच दी गई है। इसके अलावा उन्हें इंडस्ट्री विशेषज्ञों और निवेशकों के नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

WaveX की एक खास बात यह भी है कि इसे IICT और WAVES से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। क्रिएट इन इंडिया चैलेंज से नए आइडिया और प्रतिभाएं सामने आती हैं, IICT उन्हें जरूरी तकनीकी ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में मदद करता है, जबकि WaveX उन्हें कारोबार के रूप में आगे बढ़ाने और WAVES Bazaar के जरिए बाजार तक पहुंच बनाने का रास्ता देता है।

WAVES 2025: भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की कोशिश

IICT और WaveX के साथ सरकार ने WAVES को भी इस पूरे इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बनाया है। WAVES यानी वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट का पहला आयोजन 1 से 4 मई 2025 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई को इसका उद्घाटन किया था।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी रही। इसमें 650 से अधिक मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों तथा करीब एक लाख प्रतिनिधियों की भागीदारी दर्ज की गई।

WAVES 2025 में तीन प्रमुख पहल WAVES Bazaar, WaveX और Creatosphere को प्रमुखता से आगे बढ़ाया गया।

WAVES Bazaar को मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग के लिए कारोबारी मंच के रूप में तैयार किया गया। इसके जरिए 3,000 से अधिक B2B मीटिंग हुईं और 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी सौदों में मदद मिली। इस मंच का मकसद भारतीय और विदेशी कंपनियों को एक-दूसरे से जोड़ना और नए कारोबारी अवसर तैयार करना है।

WaveX के जरिए स्टार्टअप को अपने आइडिया पेश करने और निवेश से जुड़े अवसर मिले। मंत्रालय की रिपोर्ट में 120 से अधिक स्टार्टअप के बीच 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश संबंधी विचार-विमर्श का उल्लेख है। यहां यह समझना जरूरी है कि निवेश संबंधी चर्चा को वास्तविक निवेश या प्राप्त फंडिंग नहीं माना जाना चाहिए।

वहीं Creatosphere को क्रिएट इन इंडिया चैलेंज के पहले सीजन के ग्रैंड फिनाले, मास्टरक्लास और मेंटरशिप सेशन के लिए मंच बनाया गया। इसके जरिए क्रिएटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने और इंडस्ट्री के लोगों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।

WAVES 2025 के दौरान 8,000 करोड़ रुपये के रणनीतिक MoU भी हुए। इसके अलावा सह-निर्माण (Co-production) से जुड़े समझौते किए गए। इन प्रयासों का मकसद भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाना और भारतीय कंटेंट एवं तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। हालांकि, MoU की राशि को पूरे हो चुके कारोबार या वास्तविक निवेश के रूप में नहीं देखना चाहिए।

Create in India Challenge: देशभर की प्रतिभाओं को मिला मंच

AVGC-XR सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें सही अवसर देना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से मंत्रालय ने WAVES के तहत 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' (CIC) शुरू किया।

इस पहल का मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद क्रिएटर्स, छात्रों, नए कलाकारों और तकनीक से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देना है। इसके तहत इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग चुनौतियां रखी जाती हैं, जिनमें हिस्सा लेकर प्रतिभागी अपने आइडिया और काम को सामने ला सकते हैं।

पहला सीजन WAVES 2025 से पहले शुरू किया गया था। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें भारत और 60 से अधिक देशों से एक लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन मिले। रिपोर्ट के विस्तृत विवरण में 63 देशों से एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन का उल्लेख है। इसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

इस पहल के तहत आठ सेक्टरों में 33 चैलेंज आयोजित किए गए और 25 से अधिक इंडस्ट्री पार्टनर इससे जुड़े। 750 से अधिक फाइनलिस्ट को WAVES 2025 में अपना काम दिखाने के लिए चुना गया। इस पहल को डिजिटल माध्यमों पर 2.13 करोड़ से अधिक इम्प्रेशन भी मिले।

इन चैलेंज में एनीमेशन, गेमिंग, म्यूजिक, कॉमिक्स, AI और AR/VR जैसे क्षेत्र शामिल थे। मंत्रालय की रिपोर्ट के शुरुआती हिस्से में 32 चैलेंज का उल्लेख है, जबकि पेज 55 पर दिए गए विस्तृत विवरण में 33 चैलेंज बताया गया है। इसलिए विस्तृत विवरण के आधार पर यहां 33 चैलेंज का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया है।

इसका समापन Creatosphere में हुआ, जहां गेमिंग, एनीमेशन, VFX, XR, म्यूजिक और डिजिटल कंटेंट से जुड़े काम दिखाए गए। यहां मास्टरक्लास, पैनल चर्चा, प्रदर्शनियों और नेटवर्किंग सेशन का आयोजन किया गया। इस मंच के जरिए क्रिएटर्स को इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से सीखने और अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

इस पहल की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है। इसके जरिए प्रतिभाओं की पहचान करने के बाद उन्हें ट्रेनिंग, कारोबार और बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर

AVGC-XR सेक्टर में रोजगार के अवसर केवल एनीमेशन बनाने या गेम डिजाइन करने तक सीमित नहीं हैं। इसमें 3D मॉडलिंग, कैरेक्टर डिजाइन, VFX, गेम डेवलपमेंट, वर्चुअल प्रोडक्शन, XR कंटेंट, पोस्ट प्रोडक्शन और AI आधारित क्रिएटिव काम जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर किसी फिल्म में दिखाए जाने वाले काल्पनिक शहर, डिजिटल किरदार या एक्शन सीन तैयार करने के लिए अलग-अलग तरह के तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। इसी तरह गेमिंग इंडस्ट्री में गेम डिजाइनर, प्रोग्रामर, एनिमेटर और साउंड डिजाइनर की भूमिका होती है। XR तकनीक के जरिए शिक्षा, मनोरंजन और दूसरे क्षेत्रों के लिए नए अनुभव तैयार किए जा सकते हैं।

इस दिशा में मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए भी एक खास पहल की है। 2 अगस्त 2025 को NFDC ने ट्रेनिंग पार्टनर Aptech के सहयोग से 3D एनीमेशन और VFX में आठ महीने का मुफ्त आवासीय ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया था। इसके लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं का चयन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें इंडस्ट्री में मांग वाले तकनीकी कौशल सिखाना और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

इस तरह सरकार की कोशिश केवल बड़े शहरों तक ट्रेनिंग और तकनीकी सुविधाओं को सीमित रखने की नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद युवाओं को भी इस उद्योग से जोड़ने की है।

भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबार की संभावनाएं

भारत की AVGC-XR इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा अवसर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का है। अभी तक भारतीय कंपनियां दुनिया की कई बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों के लिए एनीमेशन, VFX और पोस्ट प्रोडक्शन से जुड़े काम करती रही हैं। लेकिन अब जरूरत ऐसी भारतीय कंपनियां और स्टार्टअप तैयार करने की भी है, जो अपने गेम, एनीमेशन कैरेक्टर, डिजिटल कहानियां और तकनीक विकसित कर सकें।

IICT के जरिए युवाओं को तकनीकी ट्रेनिंग और इंडस्ट्री से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। WaveX स्टार्टअप को अपना कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। वहीं WAVES Bazaar भारतीय कंपनियों को विदेशी खरीदारों और कारोबारी भागीदारों से जोड़ने का मंच उपलब्ध करा रहा है।

इन पहलों का एक और महत्वपूर्ण पहलू अपनी बौद्धिक संपदा (IP) तैयार करना है। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय कंपनी अपना एनिमेटेड कैरेक्टर, गेम या डिजिटल कहानी विकसित करती है और उसे अलग-अलग देशों में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे कंपनी के लिए लंबे समय तक कमाई के अवसर बन सकते हैं। इसलिए सरकार का जोर केवल सेवाएं देने के बजाय भारतीय कंपनियों की अपनी क्रिएटिव पहचान और कारोबार विकसित करने पर भी है।

हालांकि, इसके लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता, नई तकनीक, मजबूत टीम और बाजार की जरूरतों के मुताबिक कंटेंट तैयार करना होगा। केवल ट्रेनिंग और स्टार्टअप की संख्या बढ़ने से वैश्विक बाजार में जगह बनना तय नहीं है।

भारत को वैश्विक AVGC-XR हब बनाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ी?

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 को देखें तो भारत में AVGC-XR सेक्टर के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। IICT की शुरुआत, 17 कोर्स का लॉन्च, 43 MoU, 167 छात्रों का दाखिला, इन्क्यूबेटर में 7 स्टार्टअप की शुरुआत, WaveX के तहत 30 से अधिक स्टार्टअप को शामिल करना और Create in India Challenge में एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन इस दिशा में हुई प्रगति को दिखाते हैं।

इसके अलावा WAVES 2025 में 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी सौदे और 8,000 करोड़ रुपये के रणनीतिक MoU इस बात को दिखाते हैं कि सरकार भारतीय मीडिया एवं एंटरटेनमेंट उद्योग को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जोड़ने के लिए भी प्रयास कर रही है।

हालांकि, इन आंकड़ों को इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि भारत पहले ही दुनिया का बड़ा AVGC-XR केंद्र बन चुका है। अभी यह देखना बाकी है कि IICT से प्रशिक्षित युवाओं को कितने रोजगार मिलते हैं, इन्क्यूबेट किए गए स्टार्टअप में से कितने सफल कारोबार बन पाते हैं और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कितना नियमित कारोबार हासिल कर पाती हैं।

इसी तरह WAVES में हुए कारोबारी समझौते और निवेश संबंधी चर्चाएं अपने आप में वास्तविक निवेश या पूरे हो चुके कारोबार के बराबर नहीं हैं। इन पहलों का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में इनके नतीजों से ही पता चलेगा।

फिलहाल सरकार की कोशिश एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें किसी युवा के पास एनीमेशन या गेमिंग का आइडिया हो तो उसे ट्रेनिंग, तकनीकी सुविधाएं, मेंटरशिप, निवेश और बाजार तक पहुंचने के अवसर मिल सकें।

यदि IICT, WaveX, WAVES और Create in India Challenge के बीच यह तालमेल लगातार मजबूत होता है तो भारतीय कंपनियों के लिए सिर्फ विदेशी प्रोजेक्ट पर काम करने के बजाय अपने गेम, एनीमेशन कैरेक्टर, डिजिटल कहानियां और तकनीक विकसित करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। यही भारत को AVGC-XR के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की इस पूरी पहल का बड़ा उद्देश्य है। 

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Digicontent को दूसरी तिमाही में 4.27 करोड़ रुपये का मुनाफा, पिछले साल से 55% की गिरावट

मीडिया और डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी Digicontent Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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मीडिया और डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी Digicontent Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में 4.27 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले कंपनी के मुनाफे में करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है। सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 9.52 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने 2 नवंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।

रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी

कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, Digicontent का ऑपरेशंस से रेवेन्यू दूसरी तिमाही में 132.81 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 131.79 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के रेवेन्यू में करीब 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी की कुल आय 133.26 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के 133.93 करोड़ रुपये से थोड़ी कम है।

वहीं, कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 126.70 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल सितंबर तिमाही में यह 120.32 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी घटकर 10.83 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 18.47 करोड़ रुपये था।

छह महीने में 2.34 करोड़ रुपये का मुनाफा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 256.11 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 242.24 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.34 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में यह 7.19 करोड़ रुपये था।

स्टैंडअलोन नतीजों में घाटा

कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो सितंबर 2026 तिमाही में उसे 2.33 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पिछले साल की समान तिमाही में यह घाटा 1.77 करोड़ रुपये था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 29 लाख रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 30 लाख रुपये था।

Digicontent के साथ उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी HT Digital Streams Limited के नतीजे भी कंसोलिडेटेड वित्तीय आंकड़ों में शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि उसका कारोबार एंटरटेनमेंट और डिजिटल इनोवेशन बिजनेस से जुड़ा है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने इन-स्टोर म्यूजिक बिजनेस FabPlay से जुड़े डोमेन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को 1 करोड़ रुपये में ट्रांसफर करने का समझौता किया है। इस सौदे को बोर्ड की मंजूरी 1 अक्टूबर, 2026 को मिली थी, इसलिए इसे सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों में शामिल नहीं किया गया है।

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