टीवी से मोबाइल तक: क्या यूट्यूब बन रहा है नई पत्रकारिता का सबसे बड़ा मंच?

भारत में खबरें देखने और समझने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक ज्यादातर लोग खबरों के लिए अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर थे, लेकिन अब मोबाइल स्क्रीन उनकी पहली पसंद बनती जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 13 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 13 June, 2026
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भारत में पत्रकारिता का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक खबरों के लिए लोग अखबार और टीवी न्यूज चैनलों पर निर्भर रहते थे। बड़े-बड़े न्यूज स्टूडियो, तेज आवाज में बहस करते एंकर और “ब्रेकिंग न्यूज” की होड़ टीवी पत्रकारिता की पहचान बन चुके थे। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।

आज बड़ी संख्या में लोग मोबाइल पर खबरें देखना और समझना पसंद कर रहे हैं। बदलाव सिर्फ प्लेटफॉर्म का नहीं है, बल्कि खबर पेश करने के तरीके का भी है। अब दर्शक शोर-शराबे और लंबी बहसों की बजाय ऐसे लोगों को सुनना पसंद करते हैं जो सरल भाषा में, सीधे और तथ्यों के साथ अपनी बात रखें। वे ऐसे कंटेंट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उन्हें जानकारी देने के साथ किसी विषय को आसानी से समझाए भी।

यहीं से “क्रिएटर जर्नलिज्म” यानी क्रिएटर आधारित पत्रकारिता का दौर शुरू हुआ है। यह पत्रकारिता बड़े टीवी स्टूडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यूट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों तक पहुंच रही है।

भारत में यूट्यूब अब केवल मनोरंजन का मंच नहीं रह गया है। यह खबरों, विश्लेषण, एक्सप्लेनर वीडियो, इंटरव्यू और जनमत का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। यही वजह है कि आज पारंपरिक मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के बीच दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने की सीधी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

भारत और यूट्यूब: दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल दर्शक वर्ग

भारत आज यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। स्टैटिस्टा और गूगल ऐड्स के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में यूट्यूब की विज्ञापन पहुंच करीब 51 से 52 करोड़ यूजर्स के आसपास है। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा यूट्यूब दर्शक भारत में मौजूद हैं।

दुनियाभर में यूट्यूब के करीब 2.5 से 2.7 अरब मंथली एक्टिव यूजर्स माने जाते हैं। भारत का योगदान इसमें लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है सस्ता मोबाइल इंटरनेट, किफायती स्मार्टफोन और क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की तेज बढ़त।

कुछ साल पहले तक यूट्यूब को केवल गानों, कॉमेडी वीडियो या मनोरंजन मंच के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब लोग यहां न्यूज, राजनीति, करेंट अफेयर्स, वित्त, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी बड़ी संख्या में वीडियो देख रहे हैं।

भारत में डिजिटल ऑडियंस खास तौर पर “वीडियो-फर्स्ट” हो चुकी है। यानी लोग खबरें पढ़ने से ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की डिजिटल न्यूज रिपोर्ट भी बताती है कि भारत समेत कई देशों में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स न्यूज देखने का बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं।

यही वजह है कि आज यूट्यूब क्रिएटर्स का प्रभाव कई टीवी एंकरों के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी ज्यादा दिखाई देता है।

क्रिएटर पत्रकारिता: नए दौर के डिजिटल पत्रकार

भारत में यूट्यूब आधारित पत्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दो तरह के लोग दिखाई देते हैं।

पहला वर्ग उन पत्रकारों का है जिन्होंने टीवी न्यूज छोड़कर स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए। दूसरा वर्ग उन युवाओं का है जो कभी किसी न्यूज रूम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने रिसर्च आधारित कंटेंट और एक्सप्लेनर वीडियो के जरिए बड़ी ऑडियंस बना ली।

रवीश कुमार: टीवी से डिजिटल तक

पूर्व एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार इस बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं। 2022 में एनडीटीवी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। कुछ ही समय में उनका चैनल भारत के सबसे बड़े स्वतंत्र न्यूज प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया।

डिजिटल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके चैनल के सब्सक्राइबर्स करोड़ों में हैं और उनके वीडियो अरबों बार देखे जा चुके हैं। रवीश कुमार की लोकप्रियता यह दिखाती है कि दर्शक सिर्फ बड़े मीडिया ब्रांड को नहीं, बल्कि भरोसेमंद चेहरों को भी फॉलो करते हैं।

अजीत अंजुम: ग्राउंड रिपोर्टिंग का डिजिटल चेहरा

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम भी उन बड़े नामों में शामिल हैं जिन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। लंबे समय तक टीवी न्यूज इंडस्ट्री में काम करने के बाद उन्होंने यूट्यूब को अपना मुख्य मंच बनाया।

अजीत अंजुम की खास पहचान उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और चुनावी कवरेज मानी जाती है। वे अक्सर छोटे शहरों, गांवों और आम लोगों के बीच जाकर रिपोर्टिंग करते हैं। यही वजह है कि उनकी पत्रकारिता को “ग्राउंड कनेक्टेड जर्नलिज्म” कहा जाता है।

उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और चुनाव, राजनीति, किसान आंदोलन, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर उनके वीडियो को बड़ी संख्या में देखा जाता है।

डिजिटल दौर में अजीत अंजुम की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक आज भी फील्ड रिपोर्टिंग और जमीनी पत्रकारिता को महत्व देते हैं। जहां टीवी न्यूज पर स्टूडियो बहसों का दबदबा बढ़ा है, वहीं यूट्यूब पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अलग पहचान मिल रही है।

पुण्य प्रसून बाजपेयी: टीवी के तेज तेवर से डिजिटल पत्रकारिता तक

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी भी उन चर्चित चेहरों में शामिल हैं जिन्होंने टीवी न्यूज से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत उपस्थिति बनाई। लंबे समय तक विभिन्न न्यूज चैनलों में एंकरिंग और राजनीतिक विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों पर अपनी अलग पहचान बनाई।

पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने तीखे राजनीतिक विश्लेषण, सत्ता से सवाल पूछने की शैली और गहरे मुद्दों पर आधारित कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उन्होंने लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो, विश्लेषण और समसामयिक मुद्दों पर आधारित कंटेंट के जरिए बड़ी ऑडियंस तैयार की।

उनके वीडियो खास तौर पर उन दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं जो टीवी की तेज बहसों की बजाय विस्तार से मुद्दों को समझना चाहते हैं।

पुण्य प्रसून बाजपेयी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि डिजिटल पत्रकारिता ने अनुभवी टीवी पत्रकारों को एक नया मंच दिया है, जहां वे बिना समय की पाबंदी के अपनी बात रख सकते हैं और सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं।

ध्रुव राठी: एक्सप्लेनर पत्रकारिता का बड़ा चेहरा

ध्रुव राठी भारत के सबसे चर्चित डिजिटल क्रिएटर्स में गिने जाते हैं। उनके वीडियो राजनीति, प्रशासन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उन्होंने यूट्यूब पर “एक्सप्लेनर फॉर्मेट” को लोकप्रिय बनाया। यानी जटिल मुद्दों को आसान भाषा, ग्राफिक्स और रिसर्च के जरिए समझाना।

उनके अलग-अलग चैनलों और बहुभाषी ऑडियंस को मिलाकर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके वीडियो पर अरबों व्यूज आ चुके हैं। ध्रुव राठी की सफलता ने यह साबित किया कि यूट्यूब पर लंबी और रिसर्च आधारित पत्रकारिता भी बड़े स्तर पर सफल हो सकती है।

नितीश राजपूत: हिंदी डिजिटल ऑडियंस की नई पसंद

नितीश राजपूत ने हिंदी ऑडियंस के बीच एक्सप्लेनर और करेंट अफेयर्स वीडियो के जरिए मजबूत पहचान बनाई है। उनके वीडियो खास तौर पर युवा दर्शकों में लोकप्रिय हैं क्योंकि वे कठिन विषयों को सरल हिंदी में समझाने की कोशिश करते हैं।

डिजिटल एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक उनके सब्सक्राइबर्स करोड़ों के करीब पहुंच चुके हैं और उनके वीडियो लगातार हाई एंगेजमेंट हासिल करते हैं।

बरखा दत्त और मोजो स्टोरी

टीवी पत्रकारिता का बड़ा नाम रही बरखा दत्त ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म “मोजो स्टोरी” शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग और फील्ड पत्रकारिता की वजह से इस प्लेटफॉर्म को काफी पहचान मिली। यूट्यूब पर मोजो स्टोरी ने स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता का एक अलग मॉडल पेश किया।

फेय डिसूजा: शांत और तथ्य आधारित पत्रकारिता

मिरर नाउ की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर फेय डिसूजा भी डिजिटल पत्रकारिता की बड़ी आवाज बन चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे सनसनीखेज पत्रकारिता से दूर रहकर शांत और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग करती हैं।

डिजिटल ऑडियंस के एक बड़े वर्ग को यह तरीका ज्यादा भरोसेमंद लगता है।

आखिर दर्शक टीवी न्यूज से दूर क्यों जा रहे हैं?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग टीवी छोड़कर मोबाइल पर न्यूज देखने लगे?

इसकी कई वजहें हैं।

  1. शोर और बहस से थक चुकी ऑडियंस

पिछले कुछ वर्षों में टीवी न्यूज पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वहां तथ्यों से ज्यादा चीख-पुकार दिखाई देती है। प्राइम टाइम बहसों में कई बार चर्चा से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। इससे दर्शकों का एक वर्ग धीरे-धीरे टीवी से दूर हुआ। इसके मुकाबले यूट्यूब क्रिएटर्स लंबे फॉर्मेट में बिना रुकावट अपनी बात रखते हैं।

  1. मोबाइल-फर्स्ट पीढ़ी

भारत की नई डिजिटल पीढ़ी मोबाइल पर ही कंटेंट देखती है। आज बड़ी संख्या में युवा ऑडियंस टीवी नहीं देखती। उनके लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम और पॉडकास्ट ही सूचना के मुख्य स्रोत बन चुके हैं।

  1. व्यक्तिगत पसंद वाला कंटेंट

यूट्यूब एल्गोरिदम दर्शक की पसंद के हिसाब से कंटेंट दिखाता है। अगर कोई व्यक्ति राजनीति देखता है तो उसे उसी तरह के वीडियो ज्यादा दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यूजर्स अपने पसंदीदा क्रिएटर्स से जुड़ाव महसूस करते हैं।

  1. लंबे फॉर्मेट वाले वीडियो

टीवी न्यूज में समय सीमित होता है। लेकिन यूट्यूब पर क्रिएटर्स 20 मिनट, 40 मिनट या एक घंटे तक किसी मुद्दे को विस्तार से समझा सकते हैं। यही वजह है कि एक्सप्लेनर पत्रकारिता तेजी से लोकप्रिय हुई है।

आईपीएल और डिजिटल बदलाव

भारत में मनोरंजन और खेल देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और मीडिया ट्रैकिंग डेटा बताते हैं कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों में डिजिटल दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक टीवी की वृद्धि धीमी पड़ रही है। जियोस्टार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक आईपीएल के दौरान करोड़ों यूजर्स डिजिटल माध्यमों पर मैच देख रहे हैं।

इसका मतलब साफ है- दर्शक गए नहीं, बल्कि मंच बदल गया है। जहां पहले पूरा परिवार टीवी के सामने बैठता था, अब हर व्यक्ति अपने मोबाइल पर अलग-अलग कंटेंट देख रहा है।

 

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Jio Platforms के IPO की तैयारी तेज, SEBI ने DRHP पर मांगा स्पष्टीकरण

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी Jio Platforms Limited के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच एक अहम अपडेट सामने आया है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 27 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 27 June, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी 'जियो प्लेटफॉर्म' (Jio Platforms Limited) के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच एक अहम अपडेट सामने आया है। बाजार नियामक संस्था SEBI ने कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पर कुछ अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण (clarification) मांगे हैं।

यह जानकारी ऐसे समय आई है जब Jio Platforms ने हाल ही में 19 जून 2026 को अपना DRHP SEBI के पास दाखिल किया था। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम रेगुलेटर की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका मतलब यह नहीं है कि IPO को खारिज कर दिया गया है।

क्या है IPO प्लान?

कंपनी की योजना है कि वह इस IPO के जरिए 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। इन शेयरों का फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर होगा। यह पूरा इश्यू फ्रेश इश्यू होगा, यानी इसमें किसी पुराने शेयरधारक की हिस्सेदारी नहीं बिकेगी, बल्कि कंपनी सीधे नई पूंजी जुटाएगी।

शेयरों की कीमत और इश्यू का साइज बुक बिल्डिंग प्रोसेस के जरिए तय किया जाएगा।

SEBI की भूमिका क्या है?

SEBI IPO दस्तावेजों की जांच करता है ताकि निवेशकों को सही और पूरी जानकारी मिले। इसी प्रक्रिया के तहत उसने Jio Platforms से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है और अक्सर बड़े IPO में रेगुलेटर इस तरह के सवाल पूछता है ताकि दस्तावेजों में कोई कमी या अस्पष्टता न रहे।

आगे क्या होगा?

अब कंपनी को SEBI द्वारा मांगी गई जानकारी या स्पष्टीकरण देना होगा। इसके बाद ही IPO को आगे मंजूरी मिल सकती है। साथ ही, BSE और NSE से भी जरूरी मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी के बाद कंपनी IPO का फाइनल प्राइस बैंड, तारीख और लिस्टिंग डिटेल्स जारी करेगी।

 

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‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (हिंदी) की डिजिटल टीम में शामिल हुए निखिल दुबे, मिली यह जिम्मेदारी

निखिल दुबे इससे पहले ‘एनडीटीवी’ में एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे, जहां से कुछ दिनों पूर्व उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 26 June, 2026
Last Modified:
Friday, 26 June, 2026
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वरिष्ठ टीवी पत्रकार निखिल दुबे ने अब नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए डिजिटल का रुख किया है। उन्होंने हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (हिंदी) की डिजिटल टीम में बतौर मल्टीमीडिया एडिटर जॉइन किया है।  

निखिल दुबे इससे पहले ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में कार्यरत थे। उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, जहां से पिछले दिनों उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

निखिल दुबे को तमाम चैनल्स के साथ काम करने का 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘एनडीटीवी’ से पहले निखिल दुबे हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रात नौ बजे के प्राइम टाइम शो ‘Public Interest’ को लीड कर चुके हैं। निखिल दुबे की ‘एबीपी न्यूज’ के साथ यह चौथी पारी थी।

‘एबीपी न्यूज’ के साथ अपनी चौथी पारी शुरू करने से पहले निखिल दुबे ‘टीवी9’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह इस नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस चैनल के साथ भी उनका संक्षिप्त कार्यकाल रहा था। वहीं, इससे पहले वह ‘इंडिया टीवी’ (India TV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत थे।

‘इंडिया टीवी’ से पहले निखिल दुबे ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ में कार्यरत थे। इससे पहले वह ‘जी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘जी न्यूज’ से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत थे।

अन्य मीडिया संस्थानों की बात करें तो उन्होंने फरवरी 2019 में ‘न्यूज नेशन’ जॉइन किया था और मई में उसे अलविदा कह दिया था। वहीं ‘इंडिया न्यूज’ में वह नवंबर 2018 से जनवरी 2019 तक कार्यरत रहे।

‘इंडिया न्यूज’ से पहले निखिल दुबे ‘एबीपी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वहां 9 जुलाई 2016 को पदभार संभाला था। जब वहां के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अचानक चैनल से इस्तीफा दिया था तो निखिल ने भी वहां से अपना इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2009 में एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर भी इस चैनल के साथ काम कर चुके हैं। तब इस चैनल का नाम ‘एबीपी न्यूज’ की जगह ‘स्टार न्यूज’ था।

निखिल दुबे ने 1995 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद 2002 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मॉसकॉम किया और इसके बाद पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। मई 2003 में उन्होंने ‘सहारा समय’ से अपने करियर की शुरुआत की और नवंबर 2005 तक वह यहां रहे। ‘सहारा समय’ में अपने सफर में वह विशेष संवाददाता की भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2006 में ‘स्टार न्यूज’ के साथ अपने सफर को आगे बढ़ाया। वहां तीन साल सात महीने रहने के बाद उनके सफर का अगला पड़ाव ‘आजतक’ बना। नवंबर 2010 से नवंबर 2012 तक वह सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर ‘आजतक’ को अपना योगदान देते रहे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक फ्रीलांस के तौर पर काम किया।

इसके बाद वह जुलाई 2013 में मुंबई में एंडेमॉल प्रॉडक्शन हाउस (Endemol production house) के साथ जुड़ गए और सितंबर 2013 तक बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम किया। फिर वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘इंडिया टीवी’ आ गए। सितंबर 2013 से जनवरी 2014 तक वे यहां रहे। ‘इंडिया टीवी’ के बाद उन्होंने ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में बतौर डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर काम किया और जनवरी से अगस्त 2014 तक रहे।

इसके बाद करीब तीन महीने तक वह ‘न्यूज24’ से जुड़े रहे और डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर नवंबर 2014 तक का सफर तय किया। इसके बाद वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘जी न्यूज’ आ गए और जुलाई 2016 तक रहे। इसके बाद वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’, ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी9’ होते हुए ‘एबीपी न्यूज’ पहुंचे थे और वहां अपनी पारी को विराम देने के बाद पिछले साल ‘एनडीटीवी’ के साथ नई पारी का आगाज किया था, जहां से पिछले दिनों इस्तीफा देने के बाद अब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (हिंदी) की डिजिटल टीम में जॉइन किया है।

आपको यह भी बता दें कि निखिल दुबे ने इंडिया टीवी में ‘तलाश’ नाम से शो बनाया था। वह एबीपी में ‘घंटी बजाओ’ और ‘वायरल सच’ शो में काम कर चुके हैं। इसके अलावा चार घंटे का मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ प्रोड्यूस किया। जी न्यूज में रहते हुए उन्होंने क्रिकेट विश्वकप पर सात करोड़ रुपये की प्रॉडक्शन कास्ट का शो ‘World War’ प्रड्यूस किया। इसके अलावा भी वह तमाम जाने-माने शो प्रड्यूस कर चुके हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से निखिल दुबे को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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मेटा की संध्या देवनाथन ने कुणाल शाह का किया स्वागत

'मेटा' की भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने 'व्हाट्सऐप' के नए प्रमुख कुणाल शाह (Kunal Shah) का स्वागत करते हुए उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया।

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Published - Friday, 26 June, 2026
Last Modified:
Friday, 26 June, 2026
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'मेटा' (Meta) की भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख (Vice President & Head – India and South East Asia) संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) के नए प्रमुख कुणाल शाह (Kunal Shah) का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कुणाल शाह ऐसे नेता हैं, जो लोगों का भरोसा जीतने वाले प्रोडक्ट तैयार करना अच्छी तरह जानते हैं।

हाल ही में कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह विल कैथकार्ट (Will Cathcart) की जगह लेंगे, जिन्होंने सात वर्षों तक इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा किए गए एक पोस्ट में संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में संस्थापक (Founder) और निवेशक (Investor) के रूप में कुणाल शाह (Kunal Shah) का लंबा अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से व्हाट्सऐप (WhatsApp) को बेहतर बनाने को लेकर कुणाल के सुझावों को करीब से देखने का अवसर उन्हें मिला है।

संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने कहा कि 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) आज दुनिया भर में 3 अरब से अधिक लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और भारत में यह करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, यह प्लेटफॉर्म परिवारों को जोड़ने, छोटे कारोबारों को ग्राहकों तक पहुंचाने और समुदायों को एक-दूसरे से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में तकनीक के प्रभाव और डिजिटल इकोसिस्टम की गहरी समझ रखने वाले कुणाल शाह (Kunal Shah) के नेतृत्व में 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) की अगली विकास यात्रा को लेकर कंपनी उत्साहित है।

अपने पोस्ट में संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने निवर्तमान प्रमुख विल कैथकार्ट (Will Cathcart) का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विल ने 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) को दुनिया के अरबों लोगों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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वेबसाइट और सर्वर पर बड़ा साइबर खतरा: 'आई4सी' (I4C) ने जारी की एडवाइजरी

'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) ने 'सीपैनल' और 'डब्ल्यूएचएम' में गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने संगठनों को तुरंत सिस्टम अपडेट करने की सलाह दी है।

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Published - Thursday, 25 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
cybersecurities

गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत कार्यरत 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (Indian Cyber Crime Coordination Centre-I4C) ने 'सीपैनल' (cPanel) और 'वेब होस्ट मैनेजर' (Web Host Manager-WHM) से जुड़ी गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस कमजोरी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बिना पासवर्ड के सर्वर के एडमिन पैनल तक पहुंच सकते हैं।

'आई4सी' (I4C) के अनुसार, इस खामी का इस्तेमाल रैनसमवेयर (Ransomware), मालवेयर (Malware) हमलों और डेटा चोरी जैसी गंभीर साइबर घटनाओं के लिए किया जा सकता है। इससे बड़ी संख्या में वेबसाइट्स, ईमेल सेवाएं और सर्वर प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (Indian Computer Emergency Response Team-CERT-In) ने भी इस सुरक्षा खामी को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने प्रभावित 'सीपैनल' (cPanel) और 'डब्ल्यूएचएम' (WHM) वर्जन को तुरंत अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि संभावित साइबर हमलों से बचा जा सके।

'आई4सी' (I4C) ने सभी संगठनों को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Multi-Factor Authentication-MFA) लागू करने, नियमित बैकअप रखने और एडमिन एक्सेस को सीमित करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था साइबर धोखाधड़ी या हमले का शिकार होती है, तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 या 'साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन' (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।

'सीपैनल' (cPanel) एक लोकप्रिय कंट्रोल पैनल सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से वेबसाइट मालिक अपनी वेबसाइट, ईमेल, डेटाबेस, फाइल्स और डोमेन का प्रबंधन करते हैं। वहीं 'डब्ल्यूएचएम' (WHM) इसका एडमिन संस्करण है, जिसका उपयोग होस्टिंग कंपनियां और सर्वर एडमिन एक साथ कई वेबसाइटों और cPanel अकाउंट्स को मैनेज करने के लिए करते हैं।

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डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘अमृत उजाला’ का भव्य शुभारंभ

‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 24 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
Amrit Ujala

बहुप्रतीक्षित डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘अमृत उजाला’ की न्यूज वेबसाइट, न्यूज ऐप एवं यूट्यूब न्यूज चैनल का शुभारंभ 24 जून को कानपुर में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित के. ए. दुबे पद्मेश के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।

इस अवसर पर पंडित पद्मेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मीडिया क्षेत्र के अनुभवी एवं प्रतिष्ठित लोगों द्वारा प्रारंभ किया गया यह अभिनव प्रयास निश्चित रूप से सफलता के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘अमृत उजाला’ प्रदेश के दूरस्थ गांवों एवं छोटे कस्बों तक की महत्वपूर्ण खबरों को आम जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर ‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य देश के सभी हिंदी भाषी राज्यों के प्रत्येक जिले, कस्बे एवं गांव की खबरों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी। उन्होंने बताया कि ‘अमृत उजाला’ का ध्येय वाक्य है-‘अब सच की रोशनी, हर जिले में।’

डॉ. सिंह ने बताया कि ‘अमृत उजाला’ के न्यूज ऐप को और अधिक उन्नत बनाया जा रहा है, जिसे पाठक गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ‘अमृत उजाला’ का यूट्यूब न्यूज चैनल भी एक जुलाई से शुरू हो जाएगा।

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पद्म पुरस्कार विजेताओं की अनकही कहानियां लेकर आएंगी पद्मजा जोशी

वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) का प्रकाशन 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) करेगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 24 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
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'ग्रिन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' (Grin Media Private Limited) की प्रकाशन इकाई 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) ने वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) के प्रकाशन की घोषणा की है। यह एक नैरेटिव नॉन-फिक्शन (Narrative Non-Fiction) पुस्तक होगी, जिसमें भारत के पद्म पुरस्कार विजेताओं की प्रेरणादायक और कम चर्चित कहानियों को शामिल किया जाएगा।

पुस्तक का हार्डकवर संस्करण 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) के बैनर तले प्रकाशित किया जाएगा। दक्षिण एशिया में इसके वितरण की जिम्मेदारी 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (Penguin Random House India) संभालेगा, जिसने प्रकाशक के साथ साझेदारी की है।

प्रकाशक के अनुसार, 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) उन व्यक्तियों की जीवन यात्राओं को सामने लाने का प्रयास है, जिनका योगदान समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जो अक्सर सार्वजनिक चर्चा से दूर रहे। पुस्तक में 1954 में शुरू हुए पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) के इतिहास और विकास को भी रेखांकित किया जाएगा।

इसमें पर्यावरणविदों, शिक्षकों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पैरा-एथलीट्स सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पद्म सम्मान प्राप्त व्यक्तित्वों की कहानियां शामिल होंगी। पुस्तक में 'वॉटर मैन ऑफ इंडिया' (Water Man of India) राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh), किसान एवं पर्यावरणविद जादव "मोलाई" पायेंग (Jadav "Molai" Payeng), पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर (Murlikant Petkar) और ट्रांसजेंडर लोक कलाकार मंजम्मा जोगती (Manjamma Jogati) जैसे नामों को भी स्थान दिया गया है।

'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने कहा कि पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) में एक पत्रकार की शोधपरक दृष्टि, साहित्यकार की संवेदनशीलता और आम भारतीयों की असाधारण उपलब्धियों को सामने लाने का जुनून है। प्रकाशक ने बताया कि इसे दक्षिण एशिया के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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AI ने न्यूजरूम व क्रिएटिव वर्ल्ड को क्यों हिला दिया है? भरोसे और पारदर्शिता की नई लड़ाई

हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 24 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
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दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।

इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।

किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।

लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।

इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।

इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।

AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।

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एआई के चलते 'ओरेकल' में बड़े पैमाने पर छंटनी : 13% घटी वर्कफोर्स

अमेरिकी टेक कंपनी 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की है। भविष्य में भी वर्कफोर्स में कटौती जारी रह सकती है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 23 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिकी टेक दिग्गज 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 नौकरियों में कटौती की है। कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 तक उसकी कुल वर्कफोर्स घटकर 1.41 लाख रह गई, जो एक वर्ष पहले लगभग 1.62 लाख थी। यानी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

सोमवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'ओरेकल' (Oracle) ने कहा कि उसके विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में एआई (AI) तकनीकों के इस्तेमाल से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और भविष्य में भी ऐसी कटौती जारी रह सकती है। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन और उत्पाद संबंधी बदलाव, प्रदर्शन मूल्यांकन, रणनीतिक पुनर्गठन और अधिग्रहण जैसी वजहों ने भी वर्कफोर्स में बदलाव को प्रभावित किया है।

इस वर्ष मार्च में भी 'ओरेकल' (Oracle) ने संकेत दिया था कि वह बड़े पैमाने पर नौकरी कटौती करने जा रही है। कंपनी उस समय एआई (AI) डेटा सेंटर विस्तार योजनाओं पर भारी निवेश के कारण नकदी दबाव का सामना कर रही थी।

'लैरी एलिसन' (Larry Ellison) के नेतृत्व में 'ओरेकल' (Oracle) अब पारंपरिक डेटाबेस सॉफ्टवेयर कंपनी से आगे बढ़कर एआई (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रही है। कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) जैसे ग्राहकों के लिए विशाल एआई डेटा सेंटर विकसित कर रही है, जिससे उसका मुकाबला 'अमेजन' (Amazon) और 'माइक्रोसॉफ्ट' (Microsoft) जैसे दिग्गजों से हो रहा है।

हालांकि इस बदलाव की कीमत भी कंपनी को चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में पुनर्गठन गतिविधियों के तहत 'ओरेकल' (Oracle) ने कर्मचारियों को सेवरेंस और अन्य एग्जिट लागत के रूप में 1.84 अरब डॉलर खर्च किए। यह पिछले वित्त वर्ष के 374 मिलियन डॉलर के मुकाबले कई गुना अधिक है।

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गलत कैमरा भेजने पर 'एमेजॉन' और विक्रेता पर 4.68 लाख रुपये का जुर्माना

दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत कैमरा डिलीवर करने और रिफंड से इनकार करने के मामले में 'एमेजॉन' को ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 23 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने ई-कॉमर्स कंपनी 'एमेजॉन' (Amazon) और उसके एक विक्रेता को एक ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला ग्राहक को ऑर्डर किए गए कैमरे की जगह दूसरा मॉडल भेजे जाने और बाद में रिफंड देने से इनकार करने से जुड़ा है।

आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष तिकेंद्र नारायण प्रधान (Tikendra Narayan Pradhan) और सदस्य भावना ठाकुरी (Bhawana Thakuri) शामिल थीं, ने 'एमेजॉन' (Amazon) और विक्रेता को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।

मामले के अनुसार, ग्राहक ने 'एमेजॉन' (Amazon) के माध्यम से 1.43 लाख रुपये कीमत का 'फुजीफिल्म एक्स-टी5' (Fujifilm X-T5) डिजिटल कैमरा खरीदा था। फरवरी 2025 में डिलीवरी मिलने पर ग्राहक ने पाया कि उसे 'फुजीफिल्म एक्स-टी50' (Fujifilm X-T50) मॉडल भेजा गया है, जो ऑर्डर किए गए उत्पाद से अलग था।

ग्राहक ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद उसे कैमरा वापस भेजने और रिफंड मिलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि उत्पाद वापस लेने के बाद रिफंड अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लौटाया गया उत्पाद मूल ऑर्डर से मेल नहीं खाता। बाद में ग्राहक को यह भी बताया गया कि मामला गलत डिलीवरी का नहीं, बल्कि इस्तेमाल या क्षतिग्रस्त उत्पाद का है।

ग्राहक ने ईमेल और तस्वीरों के माध्यम से अपने दावे के समर्थन में सबूत भी प्रस्तुत किए, लेकिन न तो रिफंड दिया गया और न ही कैमरा वापस लौटाया गया। कानूनी नोटिस का भी कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।

आयोग ने 1.43 लाख रुपये की रिफंड राशि के अलावा 2 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न, 1 लाख रुपये सेवा में लापरवाही और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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'Meta' ने 'Cred' में किया 900 मिलियन डॉलर का निवेश

'मेटा प्लेटफॉर्म्स' ने 'क्रेड' में 900 मिलियन डॉलर का निवेश कर 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है। साथ ही कंपनी ने कुणाल शाह को 'व्हाट्सऐप' का नया प्रमुख नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 22 June, 2026
Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
Meta Platforms

'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए भारतीय फिनटेक कंपनी 'क्रेड' (Cred) में 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इस निवेश के बाद 'मेटा' (Meta) को कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। इस सौदे के बाद 'क्रेड' (Cred) का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर आंका गया है।

निवेश के साथ ही 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने एक महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव का भी ऐलान किया है। कंपनी ने 'क्रेड' (Cred) के संस्थापक कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वह 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) की जगह लेंगे, जिन्होंने सात वर्षों तक 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) 'मेटा' (Meta) के सबसे प्रभावशाली और सफल नेताओं में से एक रहे हैं। उनके नेतृत्व में 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) ने 3 अरब से अधिक यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई और प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कंपनी के अनुसार, कैथकार्ट अब 'मेटा' (Meta) के भीतर एक नई भूमिका संभालेंगे, जहां वह शुरुआत से नए उत्पादों के विकास पर काम करेंगे। कंपनी ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनके साथ करीबी सहयोग जारी रहेगा।

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