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यूपी में 2000 करोड़ से शुरू होगा AI मिशन, 62 नई डेटा लैब छोटे शहरों में होंगी स्थापित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में एआई मिशन लागू करने की घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन वर्षों में करीब 2000 करोड़ रुपये की योजनाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में एआई मिशन लागू करने की घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन वर्षों में करीब 2000 करोड़ रुपये की योजनाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी। खास तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के इस्तेमाल से उत्तर प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
लखनऊ में आयोजित ‘एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ के दौरान एआई हेल्थ समिट में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन और उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपी डेस्को) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव और इंडिया एआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह के बीच हुआ। इस समझौते को केंद्र और राज्य सरकार के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
यूपी डेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने बताया कि इंडिया एआई मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग को नोडल विभाग और यूपी डेस्को को राज्य की नोडल एजेंसी बनाया गया है। प्रदेश में कुल 65 डेटा और एआई लैब स्थापित करने की योजना है। इनमें से लखनऊ और गोरखपुर के NIELIT केंद्रों में दो लैब पहले से काम कर रही हैं, जबकि पीलीभीत में एक लैब उद्योग साझेदारी के जरिए शुरू हो चुकी है। बाकी 62 नई एआई डेटा लैब छोटे शहरों में स्थापित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एआई तकनीक शासन को प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय बनाने में मदद कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के उपयोग से नीतियां अधिक सटीक होंगी और महामारियों, वेक्टर जनित रोगों जैसे मामलों में बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे। एआई आधारित टूल्स के जरिए टीबी जैसी बीमारियों की पहचान, इलाज और निगरानी को पहले ही मजबूत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि कृषि, शिक्षा, पुलिसिंग और अन्य क्षेत्रों में भी कर रही है। प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सिलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई और इनोवेशन आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 81 हो गई है। कोविड-19 से पहले कई जिलों में आईसीयू की सुविधा नहीं थी, लेकिन अब ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस, ब्लड बैंक और डिजिटल जांच सुविधाएं हर जिले में मौजूद हैं। वर्चुअल आईसीयू और टेलीमेडिसिन सेवाएं भी शुरू की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि एआई मानव के लिए है, मानव एआई के लिए नहीं। तकनीक जब संवेदना और नवाचार से जुड़ती है, तभी विकास समावेशी बनता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन व्यावहारिक समाधानों, पायलट परियोजनाओं और समयबद्ध कार्ययोजना के रूप में ठोस नतीजे देगा।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री अजीत पाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा अमित कुमार घोष सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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