GTPL Hathway Limited के बोर्ड ने 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम नियुक्तियों और एक निदेशक के इस्तीफे को मंजूरी दी है।
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Vikas Saxena
GTPL Hathway Limited के बोर्ड ने 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम नियुक्तियों और एक निदेशक के इस्तीफे को मंजूरी दी है। बोर्ड ने अश्विन कुमार पटेल को कंपनी का कंपनी सेक्रेट्री और कम्प्लॉयंस ऑफिसर (Key Managerial Personnel) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 19 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी।
इसके अलावा, कंपनी के मौजूदा B2B (CATV & Broadband) का बिजनेस हेड और चीफ स्ट्रैटजी ऑफिसर पीयूष पंकज को कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। वह सौरव बनर्जी की जगह लेंगे, जो 30 सितंबर 2026 को कामकाजी समय समाप्त होने के साथ रिटायर हो रहे हैं।
बोर्ड ने गौरव सिंह कपूर को भी कंपनी का एडिशनल डायरेक्टर (नॉन-एग्जिक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यह नियुक्ति कंपनी के सदस्यों की मंजूरी के अधीन है। मंजूरी मिलने के बाद वह Companies Act, 2013 और कंपनी के Articles of Association के मुताबिक रोटेशन के आधार पर रिटायरमेंट के दायरे में होंगे।
जानिए, कौन हैं अश्विन कुमार पटेल
अश्विन कुमार पटेल, इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) के फेलो सदस्य हैं। उन्हें कंपनी सचिव से जुड़े काम और कानूनी मामलों, सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में कॉरपोरेट कानून के अनुपालन, प्रतिभूति कानून, कॉरपोरेट पुनर्गठन, जांच-पड़ताल, मुकदमेबाजी और कानूनी मामलों के प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने करीब 18 साल तक Electrotherm (India) Limited में अलग-अलग पदों और भूमिकाओं पर काम किया है।
पीयूष पंकज को मिली CFO की जिम्मेदारी
पीयूष पंकज को कुल 28 साल से ज्यादा का अनुभव है और वह पिछले 10 साल से GTPL Hathway से जुड़े हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कंपनी में कई अलग-अलग पदों पर काम किया है। फिलहाल वह B2B (CATV & Broadband) के बिजनेस हेड और चीफ स्ट्रैटजी ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं।
वह चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (CFA) हैं और उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया (ICFAI) से फाइनेंस और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Finance & IT) में एमबीए किया है।
गुरजीव सिंह कपूर बने एडिशनल डायरेक्टर
गुरजीव सिंह कपूर को 1 अक्टूबर 2026 से एडिशनल डायरेक्टर (नॉन-एग्जिक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) बनाया गया है। गुरजीव सिंह का कंपनी के किसी भी मौजूदा डायरेक्टर के साथ कोई पारिवारिक या अन्य संबंध नहीं है।कंपनी ने यह भी बताया है कि गौरव सिंह कपूर को सेबी (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण के आदेश के तहत डायरेक्टर पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
गुरजीव सिंह को मीडिया इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का नेतृत्व अनुभव है। उन्होंने रणनीतिक विकास और बिजनेस ऑपरेशंस में बदलाव के क्षेत्र में काम किया है।
फिलहाल वह Hathway Cable and Datacom Limited (HCDL) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद पर हैं। HCDL से जुड़ने से पहले उन्होंने ESPN, Discovery और Sony Pictures जैसी कंपनियों में काम किया है। इससे पहले वह Disney Star में डिस्ट्रीब्यूशन व इंटरनेशनल बिजनेस के हेड रह चुके हैं, जहां उन्होंने ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाने और रेवेन्यू ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने Delhi College of Engineering से Bachelor of Engineering की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने Faculty of Management Studies, Delhi से Marketing Management में MBA और Cornell University से Digital Business Leadership में डिप्लोमा किया है।
तविंदरजीत सिंह पनेसर ने दिया इस्तीफा
बोर्ड ने तविंदरजीत सिंह पनेसर (Tavinderjit Singh Panesar) का इस्तीफा भी नोट किया है। वह कंपनी में नॉन-एग्जिक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद पर थे। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से तत्काल प्रभाव से कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने बोर्ड से अपना इस्तीफा स्वीकार करने और उन्हें निदेशक की जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से मुक्त करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कंपनी के साथ अपने कार्यकाल के दौरान बोर्ड के सदस्यों से मिले सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया है।
नई दिल्ली में उर्दू सहाफ़त कॉन्क्लेव में उर्दू भाषा, पत्रकारिता, साझा सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय निर्माण में भूमिका पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू समेत विशेषज्ञों ने चर्चा की।
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Samachar4media Bureau
नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क के बज़्म-ए-सहाफ़त के तहत ‘उर्दू सहाफ़त कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL) के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में उर्दू भाषा, पत्रकारिता, साझा सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय निर्माण में उर्दू की भूमिका पर चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कहा कि उर्दू भाषा की मिठास का उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा एहसास है। उनके मुताबिक, उर्दू से परिचित व्यक्ति समृद्ध होता है। यह भाषा व्यक्तित्व को संवारने के साथ जीवन जीने के तौर-तरीके भी सिखाती है। उन्होंने कहा कि उर्दू पूरी तरह भारत की भाषा है और इसकी जन्मभूमि तथा मूल भारत है। इसे किसी धर्म या संप्रदाय से जोड़ना उचित नहीं है।
कॉन्क्लेव में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain), पूर्व राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी (Shahid Siddiqui) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अख्तर (Professor Shahid Akhtar) समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क के निदेशक एवं ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधे श्याम राय (Radhe Shyam Rai) ने उर्दू-हिंदी के मजबूत रिश्ते और साझा सांस्कृतिक परंपरा पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक डॉ. मोहम्मद शम्स इकबाल (Dr. Mohammad Shams Iqbal) ने उर्दू पत्रकारिता की देश के निर्माण और विकास में भूमिका बताई।
शाहनवाज़ हुसैन ने उर्दू को साझा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षक बताया। वहीं शाहिद सिद्दीकी ने इसे तहज़ीब, शालीनता और प्रेम की भाषा बताते हुए उर्दू के प्रचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के इस्तेमाल की जरूरत बताई। प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने कहा कि विकसित भारत 2047 में भारतीय भाषाओं, विशेषकर उर्दू की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के इतिहास और कार्यों पर डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके बाद विशेषज्ञों ने पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। दूसरे सत्र में ‘राष्ट्रीय निर्माण में उर्दू पत्रकारिता की भूमिका’ पर फिरोज़ बख्त अहमद (Firoz Bakht Ahmed), तहसीन मुनव्वर (Tahseen Munawwar), खुर्शीद रब्बानी (Khurshid Rabbani), अतहर सईद (Athar Saeed) और डॉ. वसीम राशिद (Dr. Wasim Rashid) ने विचार रखे।
तीसरे सत्र में ‘राजनीतिक संवाद में उर्दू की भूमिका’ पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Imran Masood), बीजेपी नेता आलोक वत्स (Alok Vats) और भारत एक्सप्रेस के एंकर रोहित पोखरियाल (Rohit Pokhariyal) ने चर्चा की।
अंतिम सत्र में ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें इकबाल अशहर (Iqbal Ashhar), शालिनी सिंह (Shalini Singh), अनामिका जैन अंबर (Anamika Jain Amber), अलीना इत्रत (Alina Itrat) और मोइन शादाब (Moin Shadab) समेत कई शायरों और कवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में सहयोगियों को मोमेंटो और भारत एक्सप्रेस की ओर से सम्मानित किया गया।
UFO Moviez India Limited ने TSR Films Private Limited के साथ चल रहे मध्यस्थता मामले (Arbitration Proceedings) को लेकर अपडेट दिया है।
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Vikas Saxena
UFO Moviez India Limited ने TSR Films Private Limited के साथ चल रहे मध्यस्थता मामले (Arbitration Proceedings) को लेकर अपडेट दिया है। कंपनी के मुताबिक, इस मामले में 17 सितंबर 2026 को मध्यस्थ (Sole Arbitrator) ने एक आदेश दिया, जिसके बाद पहले जारी किया गया अंतरिम यथास्थिति (Status Quo) आदेश वापस ले लिया गया। इसके साथ ही दोनों कंपनियों के बीच हुआ विज्ञापन समझौता भी समाप्त हो गया है।
कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह मामला 23 दिसंबर 2023 को हुए ऐडवर्टाइजमेंट एग्रीमेंट से जुड़ा है। इस समझौते के तहत TSR के सिनेमाघरों की स्क्रीन पर इन-सिनेमा विज्ञापन के अधिकार UFO Moviez के पास थे। इस मामले में जून 2025 में एक मध्यस्थ (Sole Arbitrator) की नियुक्ति की गई थी। हालांकि, मध्यस्थता की कार्यवाही चल रही थी, उसी दौरान TSR ने 23 सितंबर 2025 को नोटिस देकर यह समझौता खत्म कर दिया था।
नोटिस मिलने के बाद UFO Moviez ने Arbitration and Conciliation Act, 1996 की धारा 17 के तहत एक अंतरिम आवेदन दाखिल किया था। इसमें कंपनी ने मध्यस्थता मामले के अंतिम निपटारे तक पहले से चल रही अनुबंध व्यवस्था को जारी रखने की मांग की थी।
इसके बाद 1 अक्टूबर 2025 को Sole Arbitrator ने अंतरिम यथास्थिति (Status Quo) का आदेश दिया था, जो तब से लागू था। हालांकि, करीब 10 महीने बाद TSR ने 29 जुलाई 2026 को इस यथास्थिति (Status Quo) आदेश को जारी रखने को Sole Arbitrator के सामने चुनौती दी।
अब 17 सितंबर 2026 के आदेश में Sole Arbitrator ने UFO Moviez की अंतरिम याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। इसके साथ ही पहले दिया गया Status Quo का अंतरिम आदेश वापस ले लिया गया। इसके परिणामस्वरूप, दोनों कंपनियों के बीच हुआ विज्ञापन समझौता अब समाप्त माना जाएगा।
कंपनी ने साफ किया है कि इस आदेश के तहत उस पर कोई लागत, हर्जाना या किसी तरह की मौद्रिक देनदारी नहीं लगाई गई है।
मुख्य मामले पर इस आदेश का असर नहीं
UFO Moviez ने बताया कि यह आदेश केवल अंतरिम आवेदन तक सीमित है। इसमें मामले के मुख्य पक्षों यानी दोनों कंपनियों की ओर से किए गए दावों, बचाव और Counter Claim के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया गया है।
कंपनी के मुताबिक, इस आदेश का मुख्य मामले पर कोई असर नहीं है। दोनों पक्षों के दावे अभी भी Sole Arbitrator के सामने लंबित हैं और UFO Moviez की ओर से पेश किया गया बचाव और Counter Claim भी प्रभावित नहीं हुआ है।
कंपनी पर बड़े वित्तीय असर की उम्मीद नहीं
UFO Moviez ने अपने मौजूदा आकलन के आधार पर कहा है कि इस आदेश से कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
कंपनी ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि TSR के स्तर पर समझौते को लागू करने में आ रही दिक्कतों के कारण TSR की स्क्रीन पर विज्ञापन अधिकारों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। इसके चलते कंपनी के लिए यह व्यवस्था कुल मिलाकर नकारात्मक रिटर्न दे रही थी। कंपनी ने यह भी कहा कि इन कामकाजी दिक्कतों के कारण उसने जो कटौती की थी, वह भी मध्यस्थता मामले में उठाए गए मुद्दों में शामिल है।
UFO Moviez ने बताया कि वह अपने कानूनी सलाहकारों के साथ इस आदेश की समीक्षा कर रही है और अपने हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी। कंपनी को इस आदेश की जानकारी उसके वकीलों के जरिए 17 सितंबर 2026 को दोपहर 1:49 बजे मिली थी।
शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Limited) की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 14 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
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Vikas Saxena
शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Limited) की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 14 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में रखे गए सभी चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।
कंपनी की ओर से 17 अगस्त 2026 को जारी मतदान नतीजों के मुताबिक, AGM में रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग को मिलाकर मतदान के नतीजे जारी किए गए हैं। इन नतीजों के साथ स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट भी जमा की गई है।
पहला प्रस्ताव: फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मंजूरी
पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, जिसमें ऑडिट किए गए कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी शामिल हैं, को मंजूरी देने की बात थी। इसके साथ डायरेक्टरों और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को भी स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा गया था।
इस प्रस्ताव पर कुल 1,96,93,131 वोट पड़े। इनमें 1,96,92,397 वोट पक्ष में और 734 वोट विरोध में पड़े। पक्ष में पड़े वोट कुल वोटों का 99.9963% रहे। यह प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।
जय मारू की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी
दूसरे प्रस्ताव में जय मारू को डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई। जय मारू कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं और रोटेशन के आधार पर डायरेक्टर पद से रिटायर हो रहे थे। पात्र होने के कारण उन्होंने दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश किया था।
इस प्रस्ताव पर भी कुल 1,96,93,131 वोट पड़े। इनमें 1,96,92,336 वोट पक्ष में और 795 वोट विरोध में पड़े। पक्ष में पड़े वोट 99.996% रहे। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हो गया।
Statutory Auditors की दोबारा नियुक्ति
तीसरे प्रस्ताव में M/s Mukund M. Chitale & Co., Chartered Accountants को कंपनी के Statutory Auditors के रूप में दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी गई। फर्म का Registration Number 106655W है।
इस प्रस्ताव पर 1,96,92,336 वोट पक्ष में और 795 वोट विरोध में पड़े। पक्ष में वोटों का प्रतिशत 99.996% रहा और प्रस्ताव पास हो गया।
Cost Auditors के पारिश्रमिक की पुष्टि
चौथे प्रस्ताव में 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए Cost Auditors को दिए जाने वाले पारिश्रमिक की पुष्टि करने का प्रस्ताव था। इस प्रस्ताव पर 1,96,92,397 वोट पक्ष में और 734 वोट विरोध में पड़े। पक्ष में वोटों का प्रतिशत 99.9963% रहा। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।
मतदान से जुड़ी जानकारी
कंपनी के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 रिकॉर्ड डेट थी और उस दिन कंपनी के रिकॉर्ड में कुल 13,945 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 8 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 40 सार्वजनिक शेयरधारक शामिल हुए। AGM में कुल 4 प्रस्ताव रखे गए थे और सभी प्रस्ताव पास हो गए।
रिमोट ई-वोटिंग की प्रक्रिया 10 अगस्त 2026 सुबह 9 बजे शुरू हुई थी और 13 अगस्त 2026 शाम 5 बजे समाप्त हुई। वहीं, जो सदस्य रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं कर सके, उनके लिए AGM के दौरान भी ई-वोटिंग की सुविधा दी गई थी। इस सुविधा के जरिए 3 सदस्यों ने मतदान किया।
स्क्रूटिनाइजर के तौर पर Dipesh Gosar & Co. के प्रैक्टिसिंग कंपनी सेक्रेटरी दिपेश यू. गोसार को नियुक्त किया गया था। उन्होंने ई-वोटिंग प्रक्रिया की जांच कर अपनी रिपोर्ट कंपनी को सौंपी।
तबूला ने प्रीमियम डिजिटल विज्ञापन सेवा प्रदाता डायनोमी को खरीदने की पेशकश की है। सौदा 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके लिए नियामकीय और शेयरधारक मंजूरी जरूरी होगी।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल विज्ञापन कंपनी तबूला (Taboola) ने डायनोमी (Dianomi) को खरीदने की पेशकश की है। डायनोमी बिजनेस, फाइनेंस और लाइफस्टाइल (Business, Finance and Lifestyle) क्षेत्रों के प्रीमियम ग्राहकों को डिजिटल विज्ञापन सेवाएं देती है। अधिग्रहण (Acquisition) 2026 के अंत से पहले पूरा होने की उम्मीद है। इसके लिए सामान्य नियामकीय शर्तों (Regulatory Conditions) और डायनोमी के शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
डायनोमी प्रीमियम विज्ञापनदाताओं (Premium Advertisers) को बड़े और हाई-इंटेंट ऑडियंस (High-Intent Audiences) तक पहुंच उपलब्ध कराती है। इसके ग्राहकों में चार्ल्स श्वाब (Charles Schwab), इनवेस्को (Invesco) और बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। कंपनी प्रीमियम पब्लिशर्स (Premium Publishers) के साथ साझेदारी के जरिए यह सुविधा देती है।
तबूला के मुताबिक, डायनोमी के अधिग्रहण से परफॉर्मेंस विज्ञापनदाताओं (Performance Advertisers) को फाइनेंस पर केंद्रित एक विशेष और प्रीमियम विज्ञापन नेटवर्क (Premium Ad Network) उपलब्ध कराने की उसकी क्षमता मजबूत होगी। यह नेटवर्क तबूला के परफॉर्मेंस एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म रियलाइज (Performance Advertising Platform Realize) से संचालित होगा।
रियलाइज एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म (Technology Platform) है, जो तबूला की सप्लाई, फर्स्ट-पार्टी डेटा (First-Party Data) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विज्ञापनदाताओं को बड़े स्तर पर परिणाम हासिल करने में मदद करता है। इसके जरिए दुनिया के कई बड़े पब्लिशर्स पर परफॉर्मेंस कैंपेन (Performance Campaigns) चलाए जा सकते हैं।
तबूला के सीईओ (CEO) एडम सिंगोल्डा (Adam Singolda) ने कहा कि डायनोमी ने दुनिया के बड़े वित्तीय ब्रांड्स को उनके टारगेट ऑडियंस से जोड़कर परफॉर्मेंस आधारित विज्ञापन (Performance-driven Advertising) को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
उन्होंने कहा कि बिजनेस और फाइनेंस क्षेत्र में संभावित ग्राहकों तक पहुंच बनाने पर डायनोमी का फोकस, इन क्षेत्रों में तबूला की परफॉर्मेंस क्षमता का अच्छा पूरक है। दोनों कंपनियों के साथ आने से विज्ञापनदाताओं को रियलाइज प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े और क्यूरेटेड (Curated) पब्लिशर्स नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
भावना वर्मा ने हिंदुस्तान यूनिलीवर में पांच साल पूरे करने के बाद कंपनी से विदाई ली है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट में अपने अनुभव, चुनौतियों और सीख को साझा करते हुए आभार जताया।
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भावना वर्मा (Bhavna Verma) ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में पांच साल पूरे करने के बाद कंपनी से विदाई ले ली है। वह कंपनी में पॉन्ड्स (POND’S) की ग्लोबल ब्रांड डायरेक्टर (Global Brand Director) के तौर पर काम कर रही थीं। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने सफर के खत्म होने की जानकारी साझा की।
अपने पांच साल के सफर को याद करते हुए वर्मा ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पॉन्ड्स की ब्रांड डायरेक्टर के तौर पर उन्हें इतने बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म (Global Platform) पर काम करने का मौका मिलेगा। इस दौरान मिले अनुभवों, चुनौतियों और सीख ने उनके प्रोफेशनल सफर (Professional Journey) को आकार दिया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज हिंदुस्तान यूनिलीवर में मेरे पांच साल पूरे हो रहे हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पॉन्ड्स की ब्रांड डायरेक्टर के तौर पर मुझे जेनजी (GenZ) के लिए आइकॉनिक गूगली वूगली वूक्स (Googly Woogly Wooksh) को फिर से बनाने का मौका मिलेगा।”
कंपनी से विदाई लेते हुए वर्मा ने उन लोगों और टीमों का धन्यवाद किया, जिनके साथ उन्होंने काम किया और जिन्होंने उनके सफर में सहयोग दिया। उन्होंने पिछले पांच सालों में मिले मौकों और बनी यादों के लिए भी आभार जताया। अब वह अपने प्रोफेशनल सफर के अगले अध्याय की ओर बढ़ रही हैं।
भावना वर्मा ग्लोबल ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट (Global Brand Strategist) और पीएंडएल ऑपरेटर (P&L Operator) हैं। उन्हें उपभोक्ताओं और कारोबार के लिए प्रभावशाली वैल्यू तैयार करने वाले सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक ब्रांड बनाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है।
केरल पुलिस की ओर से रिपोर्टर टीवी (Reporter TV) के ठिकानों पर छापेमारी के एक दिन बाद चैनल के मैनेजिंग एडिटर और डायरेक्टर एंटो ऑगस्टीन (Anto Augustine) को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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Samachar4media Bureau
केरल पुलिस की ओर से 'रिपोर्टर टीवी' (Reporter TV) के ठिकानों पर छापेमारी के एक दिन बाद चैनल के मैनेजिंग एडिटर और डायरेक्टर एंटो ऑगस्टीन (Anto Augustine) को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी अवैध रूप से शराब रखने के आरोप में केरल के आबकारी विभाग (Excise Department) ने की है।
पुलिस ने 'रिपोर्टर टीवी' के खिलाफ एक कथित धोखाधड़ी के मामले में छापेमारी की थी। यह मामला फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) को केरल लाने की असफल कोशिश से जुड़ा बताया जा रहा है।
ऑगस्टीन के वायनाड स्थित घर की तलाशी के दौरान विशेष जांच दल (SIT) को कथित तौर पर 67 लीटर अवैध इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और फॉरेन मेड फॉरेन लिकर का स्टॉक मिला। इसके बाद आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए केरल आबकारी कानून (Kerala Abkari Act) के तहत मामला दर्ज किया।
केरल में एक व्यक्ति को अधिकतम तीन लीटर IMFL रखने की अनुमति है। आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, ऑगस्टीन पर लगाए गए अपराध गैर-जमानती हैं और दोष साबित होने पर उन्हें इन धाराओं के तहत 10 साल तक की जेल हो सकती है।
ऑगस्टीन को गुरुवार सुबह कोच्चि स्थित 'रिपोर्टर टीवी' के मुख्यालय से हिरासत में लिया गया। हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
ऑगस्टीन ने कहा, “मैंने मेसी से जुड़े सभी दस्तावेज सौंप दिए थे। अब आबकारी विभाग यह मामला लेकर आया है कि उन्हें मेरे घर में शराब का स्टॉक मिला है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी शराब नहीं पी। मैं जांच में सहयोग करूंगा।” उन्हें वायनाड की एक अदालत में पेश किया जाएगा।
गिरफ्तारी से पहले 'रिपोर्टर टीवी' के ठिकानों पर छापेमारी
'रिपोर्टर टीवी' और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी के बाद केरल में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया था। विपक्षी CPI(M) ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई “आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है।”
वहीं, मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के दौरान भी मीडिया के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई थी।
पिछली LDF सरकार के दौरान राज्य के खेल विभाग ने मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना फुटबॉल टीम को अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए केरल लाने की दिशा में कदम उठाए थे। इस आयोजन का प्रायोजक 'रिपोर्टर टीवी' था, जबकि सरकार इसमें सुविधा उपलब्ध कराने वाली भूमिका में थी। यह कार्यक्रम 2025 के अंत में आयोजित किया जाना था। राज्य सरकार ने आयोजन के लिए कोच्चि का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम भी 'रिपोर्टर टीवी' और Reporter Broadcasting Company (RBC) को सौंपा था। हालांकि, यह कार्यक्रम नहीं हो सका।
126 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की भी जांच
मई में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद खेल विभाग ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में कथित तौर पर 126 करोड़ रुपये के अवैध वित्तीय लेन-देन और जीएसटी भुगतान में चूक का पता चलने की बात सामने आई। यह भी आरोप लगाया गया कि RBC ने इस मामले से जुड़े कई दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया था। विशेष जांच दल की जानकारी के आधार पर दर्ज FIR में पहचान बदलकर धोखाधड़ी, धोखे से संपत्ति हासिल करना और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस ने चैनल के न्यूजरूम और उसी इमारत में स्थित RBC के कार्यालय के अलावा एंटो ऑगस्टीन और उनके भाइयों रोजी और जोसेकुट्टी के कोच्चि और वायनाड स्थित घरों पर भी छापेमारी की। FIR में आरोप लगाया गया है कि ऑगस्टीन और अन्य लोगों ने दिसंबर 2024 से पहले आपराधिक साजिश रची और अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के साथ हुए कथित समझौतों को तैयार किया।
FIR के मुताबिक, इन दस्तावेजों के आधार पर राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि संदिग्धों ने इस सौदे से अवैध लाभ हासिल किया और राज्य सरकार को कोच्चि का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम चैनल को आयोजन के लिए सौंपने के लिए तैयार किया, जबकि बाद में यह आयोजन हुआ ही नहीं।
फिलहाल, एंटो ऑगस्टीन ने शराब रखने से जुड़े आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह जांच में सहयोग करेंगे। वहीं, मेसी को केरल लाने से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच भी जारी है
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (TNIE), तमिलनाडु के रेजिडेंट एडिटर एंटो जोसेफ (Anto Joseph) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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Samachar4media Bureau
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (TNIE), तमिलनाडु के रेजिडेंट एडिटर एंटो जोसेफ (Anto Joseph) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वह समूह के आने वाले बिजनेस डेली ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ (The Financial Standard) की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही पांच साल से ज्यादा समय बाद उनकी वित्तीय पत्रकारिता में वापसी होगी।
नया बिजनेस डेली नवंबर में लॉन्च होने की उम्मीद है और इसका मुख्यालय कोच्चि में होगा। इसे एक राष्ट्रीय वित्तीय दैनिक के तौर पर पेश किया जाएगा। अखबार का फोकस भारत में तेजी से बदल रहे विकास के क्षेत्रों पर होगा। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इनोवेशन, परिवार के स्वामित्व वाले कारोबार और उभरते क्षेत्रीय बाजार शामिल हैं।
जोसेफ ने पांच साल से ज्यादा समय तक TNIE के तमिलनाडु एडिटोरियल ऑपरेशंस का नेतृत्व किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब खासकर दक्षिण भारत में बिजनेस अखबारों के क्षेत्र में नई दिलचस्पी देखने को मिल रही है।
वित्तीय पत्रकारिता में लंबा अनुभव
एंटो जोसेफ ने द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) में एक दशक से ज्यादा समय तक काम किया। यहां उन्होंने एडिटर–इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने DNA में पांच साल से ज्यादा समय बिताया। यहां उन्होंने एसोसिएट एडिटर से शुरुआत की और आगे चलकर मैनेजिंग एडिटर-बिजनेस बने।
इससे पहले जोसेफ करीब छह साल तक फाइनेंशियल क्रॉनिकल (Financial Chronicle) में रेजिडेंट एडिटर, मुंबई और एसोसिएट एडिटर के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने ब्रिटेन की Chevening Scholarship के तहत लंदन में The Guardian के लिए स्ट्रिंगर के तौर पर भी काम किया है। इसके अलावा वह Fortune, Newslaundry, Mint, Money9 और Caravan जैसे प्रकाशनों के लिए भी लिख चुके हैं।
बिजनेस अखबारों के बाजार में नई एंट्री
‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ की लॉन्चिंग भारत के बिजनेस अखबारों के बाजार में एक और नाम जोड़ेगी। 2007 में Mint और 2008 में Financial Chronicle के लॉन्च के बाद से इस क्षेत्र में नए राष्ट्रीय खिलाड़ियों की संख्या सीमित रही है।
कोच्चि से शुरू होने वाला ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ भारत के आर्थिक विकास के बदलते भौगोलिक स्वरूप पर ध्यान देने की कोशिश करेगा। इसका मकसद पारंपरिक वित्तीय केंद्रों से आगे बढ़कर देश के दूसरे हिस्सों में बन रहे नए आर्थिक केंद्रों को भी कवरेज में जगह देना होगा।
क्या होगी ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ की कवरेज?
समूह के मुताबिक, ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ को एक प्रीमियम प्रकाशन के तौर पर पेश किए जाने की संभावना है। इसमें कॉरपोरेट जगत, सार्वजनिक नीति, पूंजी बाजार, कमोडिटीज और व्यापक बिजनेस इकोसिस्टम से जुड़ी खबरों को जगह मिलेगी। अखबार का जोर ओरिजिनल रिपोर्टिंग और विश्लेषण पर रहेगा।
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप की CEO लक्ष्मी मेनन ने एक्सचेंज4मीडिया से बातचीत में कहा कि अखबार का फोकस भारत में आर्थिक विकास के बदलते स्वरूप पर होगा।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत की विकास कहानी कुछ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही है। अब उभरते शहरों के उद्यमी, औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माता, बढ़ते उपभोक्ता बाजार, हर जिले तक पहुंचते डिजिटल कारोबार और देश के अलग-अलग हिस्सों से तेजी से विस्तार कर रहे कारोबार इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
लक्ष्मी मेनन के मुताबिक, समूह को ऐसे वित्तीय दैनिक के लिए बड़ा अवसर दिखाई देता है, जो भारत के बदलते आर्थिक परिदृश्य को सामने रख सके।
उन्होंने कहा कि अखबार की संपादकीय कवरेज उन कारोबारों, उद्योगों, नीतियों और लोगों पर केंद्रित होगी, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक बदलाव को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें मैन्युफैक्चरिंग हब, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, इनोवेशन इकोसिस्टम, परिवार के स्वामित्व वाले कारोबार, क्षेत्रीय कंपनियां और तेजी से बढ़ते शहर शामिल होंगे।
बड़े वित्तीय केंद्र भी कवरेज में रहेंगे
लक्ष्मी मेनन ने कहा कि देश के स्थापित वित्तीय केंद्र भी अखबार की कवरेज का अहम हिस्सा बने रहेंगे। हालांकि, इन्हें भारत की व्यापक आर्थिक कहानी से जोड़कर देखा जाएगा।
उनके मुताबिक, अखबार स्थानीय कारोबार को राष्ट्रीय बाजारों से, क्षेत्रीय घटनाक्रम को व्यापक आर्थिक रुझानों से और उभरते कारोबारों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की कोशिश करेगा। इसका फोकस वहां रहेगा, जहां पूंजी, प्रतिभा, तकनीक और कारोबारी महत्वाकांक्षा आर्थिक मूल्य पैदा कर रहे हैं।
बदलते पाठक व्यवहार के बीच लॉन्च
‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ का लॉन्च ऐसे समय हो रहा है, जब प्रकाशक बदलती पाठक आदतों और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच अपनी प्रिंट रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। एक अलग बिजनेस डेली में निवेश करके समूह विशेष बिजनेस पत्रकारिता की मांग पर भरोसा जता रहा है। खास तौर पर ऐसे पाठकों के बीच, जो ओरिजिनल रिपोर्टिंग, गहराई और विश्लेषण वाली खबरें चाहते हैं।
‘‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप’ का इतिहास
चेन्नई मुख्यालय वाला ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप अपनी शुरुआत The Indian Express से जोड़ता है। इसकी स्थापना 1932 में पी. वरदराजुलु नायडू ने की थी और बाद में इसे रामनाथ गोयनका ने अधिग्रहित किया। 1999 में एक्सप्रेस ग्रुप के पुनर्गठन के बाद दक्षिण भारत के संस्करण ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप का हिस्सा बन गए, जबकि उत्तर भारत के संस्करण द इंडियन एक्सप्रेस के तहत जारी रहे।
आज समूह The New Indian Express के 40 से ज्यादा संस्करण प्रकाशित करता है। इसके अलावा समूह के प्रकाशनों में The Sunday Express, The Morning Standard, The Sunday Standard और तमिल दैनिक Dinamani भी शामिल हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशन (Madison Communication) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है
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Samachar4media Bureau
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशन (Madison Communication) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है, जिसमें कंपनी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच से जुड़ी शक्तियों को चुनौती दी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि मामले में पहले से लागू कोई भी अंतरिम राहत फिलहाल जारी रहेगी।
इस याचिका में CCI की जांच की संवैधानिक सीमाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। खास तौर पर यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या CCI का महानिदेशक (Director General) उस जांच का दायरा उन पक्षों और आरोपों से आगे बढ़ा सकता है, जिनके आधार पर आयोग ने अपनी शुरुआती राय यानी prima facie opinion बनाई थी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मैडिसन की याचिका और उससे जुड़ी अर्जियों को 15 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मामले में पहले से लागू कोई अंतरिम आदेश आगे भी प्रभावी रहेगा।
यह मामला CCI की जांच प्रक्रिया से जुड़े एक बड़े कानूनी विवाद का हिस्सा है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि जब CCI किसी मामले में prima facie राय बनाता है, तो उसके बाद उसका महानिदेशक उन कंपनियों या गतिविधियों तक जांच को कितना बढ़ा सकता है, जिनका नाम शुरुआती आदेश में साफ तौर पर नहीं था।
मैडिसन ने धारा 26(1) की संवैधानिक वैधता पर उठाए सवाल
मैडिसन ने Competition Act की Section 26(1) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि इस प्रावधान के तहत महानिदेशक को CCI की शुरुआती prima facie राय का आधार बने पक्षों और आरोपों से आगे जाकर जांच का दायरा बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलती।
विज्ञापन एजेंसी का तर्क है कि अगर जांच करने वाली इकाई को खुद ही जांच का दायरा बढ़ाने की छूट दी जाती है, तो यह CCI की वैधानिक शक्तियों का जरूरत से ज्यादा हस्तांतरण माना जा सकता है। मैडिसन ने इसे प्राकृतिक न्याय (natural justice) से जुड़ी चिंता भी बताया है।
दूसरी ओर, CCI ने महानिदेशक की जांच संबंधी शक्तियों का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि एक बार Section 26(1) के तहत prima facie राय बन जाने के बाद, महानिदेशक मामले के विषय से जुड़ी कंपनियों और गतिविधियों की जांच कर सकता है।
फरवरी 2024 की लेनिएंसी अर्जी से शुरू हुआ मामला
मैडिसन का कहना है कि यह जांच फरवरी 2024 में दाखिल की गई लेनिएंसी आवेदन (leniency application) से आगे बढ़ी थी। कंपनी के मुताबिक, इसमें मुख्य रूप से भारतीय विज्ञापनदाताओं की संस्था Indian Society of Advertisers (ISA) के जरिए काम करने वाले विज्ञापनदाताओं के बीच संभावित buyers’ cartel से जुड़े आरोप उठाए गए थे।
मैडिसन का दावा है कि बाद की जांच में विज्ञापन एजेंसियों पर भी काफी ध्यान दिया गया। कंपनी ने एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं के साथ किए गए अलग-अलग व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। इसके लिए उसने मार्च 2025 में अपने मुंबई कार्यालय में की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई का भी जिक्र किया है।
मैडिसन ने CCI के prima facie आदेश की व्याख्या और उसके बाद महानिदेशक की ओर से की गई जांच को भी चुनौती दी है। कंपनी ने ISA की ओर से कथित तौर पर प्रसारित Model Agency Agreement का हवाला देते हुए कहा है कि विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच बातचीत या सौदेबाजी पर लगी पाबंदियों का असर एजेंसियों की कमाई के मॉडल पर पड़ा।
मैडिसन, जो Advertising Agencies Association of India (AAAI) की सदस्य है, का कहना है कि मीडिया एजेंसी के पारिश्रमिक से जुड़ी AAAI की गाइडलाइंस का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों के असर से एजेंसियों को बचाना था।
कंपनी ने इसी आधार पर सवाल उठाया है कि क्या महानिदेशक बिना CCI के किसी नए या ज्यादा स्पष्ट निर्देश के मूल आरोपों से आगे जाकर दूसरे पक्षों और दूसरी गतिविधियों की जांच कर सकता है।
वकीलों से जुड़े नियम भी चुनौती के घेरे में
यह मामला सिर्फ CCI की जांच के दायरे तक सीमित नहीं है। इसमें CCI (General) Regulations, 2024 के उन प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है, जो जांच के दौरान वकीलों के आचरण और उनकी भागीदारी से जुड़े हैं।
मैडिसन ने Regulations 46(3), 46(4), 46A और 47(c) समेत कई प्रावधानों को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि ये प्रावधान CCI के वैधानिक अधिकार से आगे जाते हैं और Bar Council of India (BCI) के अधिकार क्षेत्र में दखल देते हैं। खास तौर पर Regulation 46(3) और 46(4) पर सवाल उठाए गए हैं। मैडिसन का तर्क है कि इनके जरिए CCI उन अधिकृत प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जिनके व्यवहार को पेशेवर कदाचार (professional misconduct) माना जाए।
कंपनी का कहना है कि वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की व्यवस्था Advocates Act, 1961 के तहत होती है और यह अधिकार वैधानिक बार काउंसिल व्यवस्था के पास है।
BCI ने भी CCI के प्रावधानों का विरोध किया
इस चुनौती के चलते Bar Council of India भी मामले में सीधे जुड़ गया है। BCI का कहना है कि Advocates Act वकीलों के पंजीकरण, पेशेवर आचरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी पूरी वैधानिक व्यवस्था देता है।
BCI के मुताबिक, किसी दूसरे कानून के तहत काम करने वाला नियामक अधीनस्थ कानून यानी subordinate legislation के जरिए वकीलों के लिए अलग से अनुशासनात्मक व्यवस्था नहीं बना सकता।
परिषद ने खास तौर पर उन प्रावधानों का विरोध किया है, जिनके चलते CCI की जांच के दौरान वकीलों के पेशेवर कदाचार को लेकर कोई निष्कर्ष या कार्रवाई हो सकती है। BCI ने उन शब्दों और भाषा पर भी सवाल उठाए हैं, जिनसे जांच के दौरान किसी व्यवहार को अनुचित माना जा सकता है।
CCI की पूछताछ के दौरान वकील की भूमिका का सवाल
मामले का एक और अहम मुद्दा Regulation 47(c) है। यह प्रावधान वकीलों को पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों के साथ जाने की अनुमति देता है, लेकिन जब बयान दर्ज किया जा रहा हो, तब वकील को इतनी दूरी पर रहने से रोकता है कि वह बातचीत सुन सके।
मैडिसन और BCI ने इस व्यवस्था को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अगर वकील सवाल और उसके जवाब सुन ही नहीं सकता, तो उसकी मौजूदगी का फायदा काफी सीमित हो जाता है। BCI का तर्क है कि ऐसी पाबंदी से वकील अपने मुवक्किल को प्रभावी कानूनी सलाह देने, कानूनी विशेषाधिकार (privilege) से जुड़े मुद्दे पहचानने, प्रक्रिया में गड़बड़ी बताने या पूछताछ के दौरान कानूनी चिंता होने पर दखल देने की स्थिति में नहीं रहेगा।
परिषद ने “defiant behaviour” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। उसने कहा है कि CCI की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या संस्थागत गरिमा के खिलाफ माने जाने वाले आचरण की भाषा अस्पष्ट हो सकती है और इसका असर वैध प्रतिकूल या प्रभावी कानूनी पैरवी पर पड़ सकता है।
CCI का कहना है कि उसके नियामकीय प्रावधान उसकी वैधानिक शक्तियों के दायरे में हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि अधिकृत प्रतिनिधियों से जुड़े प्रावधानों को वकीलों पर बार काउंसिल की अनुशासनात्मक शक्तियों से अलग करके देखा जाना चाहिए।
विज्ञापन क्षेत्र में CCI की जांच पर भी नजर
मैडिसन की यह कानूनी चुनौती ऐसे समय में आई है, जब विज्ञापन और मीडिया खरीदारी (media buying) से जुड़े क्षेत्र में CCI की जांच को लेकर पहले से कानूनी सवाल उठ रहे हैं। व्यापक जांच में विज्ञापन क्षेत्र के अलग-अलग पक्षों के बीच कथित तालमेल की पड़ताल की गई है। इसमें विज्ञापन एजेंसियां और उद्योग से जुड़े संगठन भी CCI की जांच के दायरे में आए हैं।
मैडिसन की याचिका ने इस सवाल को अलग तरीके से सामने रखा है कि क्या किसी खास आरोप के आधार पर शुरू हुई जांच को बाद में महानिदेशक उन दूसरे पक्षों या गतिविधियों तक बढ़ा सकता है, जिनकी जानकारी जांच के दौरान सामने आती है।
इस मामले का असर सिर्फ विज्ञापन क्षेत्र तक सीमित नहीं हो सकता, क्योंकि Section 26(1) की व्याख्या से यह तय हो सकता है कि CCI की शुरुआती prima facie राय दर्ज होने के बाद उसकी जांच का दायरा कितना आगे तक जा सकता है।
इसके साथ ही, CCI की 2024 General Regulations भी संवैधानिक जांच के दायरे में आ गई हैं, खासकर उन मामलों में जहां ये नियम किसी पक्ष के कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार और पेशेवर संस्थाओं की अनुशासनात्मक शक्तियों से जुड़े हैं।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने इन सभी मूल मुद्दों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामले को 15 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है और लागू अंतरिम राहत जारी रहेगी। इस तरह, CCI की जांच की सीमा, वकीलों से जुड़े उसके नियमों और विज्ञापन क्षेत्र की व्यापक जांच को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
AGM के दौरान शेयरधारकों के लिए सवाल-जवाब का सत्र भी रखा गया। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने उनके सवालों का जवाब दिया।
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Vikas Saxena
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) की 44वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:16 बजे समाप्त हुई। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक में रखे गए सभी 8 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।
बैठक की अध्यक्षता कंपनी के चेयरपर्सन आर. गोपालन ने की। उन्होंने शेयरधारकों, निदेशकों, ऑडिटरों और अन्य प्रतिभागियों का स्वागत किया। कंपनी ने शेयरधारकों को AGM से पहले रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा दी थी। इसके अलावा, बैठक के दौरान भी उन शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिन्होंने पहले अपना वोट नहीं दिया था।
बैठक में कंपनी के CEO पुनीत गोयनका समेत बोर्ड के कई सदस्य मौजूद रहे। स्वतंत्र निदेशक डॉ. पी.वी. रमण मूर्ति AGM में शामिल नहीं हो सके और उनकी ओर से शिशिर देसाई ने बैठक में हिस्सा लिया। कंपनी के वैधानिक, आंतरिक और सचिवीय ऑडिटर, CEO, CFO और कंपनी सचिव के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में मौजूद थे।
16 शेयरधारकों ने पूछे सवाल
AGM के दौरान शेयरधारकों के लिए सवाल-जवाब का सत्र भी रखा गया। कुल 16 शेयरधारकों ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और अन्य संबंधित मामलों पर सवाल या टिप्पणियां की। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने उनके सवालों का जवाब दिया।
कंपनी सचिव ने बताया कि विनोद कोठारी एंड कंपनी की जॉइंट मैनेजिंग पार्टनर विनिता नायर को वोटों की जांच के लिए स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया गया था। उन्होंने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच की।
AGM में कौन-कौन से प्रस्ताव रखे गए?
AGM में कुल 8 प्रस्तावों पर मतदान हुआ। इनमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी देना, ₹2 प्रति इक्विटी शेयर अंतिम डिविडेंड घोषित करना और सौरव अधिकारी की दोबारा नियुक्ति शामिल थी। इसके अलावा कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि और चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए। इन चार स्वतंत्र निदेशकों में दीपू बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, डॉ. वेंकट रमण मूर्ति पिनिसेट्टी और शिशिर बाबुभाई देसाई शामिल हैं। इन सभी प्रस्तावों को भी जरूरी बहुमत मिला।
₹2 डिविडेंड के प्रस्ताव को 99.90% वोट
कंपनी के वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹2 प्रति इक्विटी शेयर अंतिम डिविडेंड घोषित करने के प्रस्ताव के पक्ष में 32,93,58,906 वोट पड़े, जो कुल वैध वोटों का 99.9050% था। इसके खिलाफ 3,13,103 वोट पड़े, यानी 0.0950% वोट विरोध में रहे।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 32,69,73,821 वोट पड़े, जो 99.8084% थे। इसके खिलाफ 6,27,557 वोट, यानी 0.1916% वोट पड़े।
सौरव अधिकारी की दोबारा नियुक्ति को 92.21% वोट
सौरव अधिकारी को गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक के पद पर दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव के पक्ष में 30,33,94,872 वोट पड़े, जो कुल वैध वोटों का 92.2102% था। वहीं, 2,56,30,525 वोट यानी 7.7898% वोट प्रस्ताव के खिलाफ पड़े। कॉस्ट ऑडिटर की पारिश्रमिक (फीस) को लेकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पुष्टि करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 99.4794% वोट पड़े, जबकि 0.5206% वोट इसके खिलाफ रहे।
चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी
दीपू बंसल की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 30,58,33,101 वोट, यानी 92.9513% वोट पड़े। इसके खिलाफ 7.0487% वोट रहे। उत्तम प्रकाश अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को 92.9522% वोट मिले, जबकि 7.0478% वोट इसके खिलाफ पड़े।
वहीं, डॉ. वेंकट रमण मूर्ति पिनिसेट्टी की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 78.5235% वोट पड़े और 21.4765% वोट इसके खिलाफ रहे। जबकि शिशिर बाबुभाई देसाई की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को 78.5210% वोट मिले, जबकि 21.4790% वोट इसके खिलाफ पड़े।
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी 8 प्रस्ताव 17 सितंबर 2026 को जरूरी बहुमत के साथ पास हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वोटों के आंकड़े चार दशमलव तक लिए गए हैं।
AGM की वोटिंग के लिए 10 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट तय की गई थी। इस तारीख को कंपनी में कुल 6,37,473 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 9 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 117 पब्लिक शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
वह इससे पहले इंडिया टुडे, सीएनएन-न्यूज18, टाइम्स नाउ और न्यूजएक्स जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।
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Samachar4media Bureau
‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने वरिष्ठ पत्रकार स्नेहा मोरदानी (Sneha Mordani) को हेल्थ एडिटर के पद पर नियुक्त किया है। मोरदानी को टेलीविजन पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। वह इससे पहले इंडिया टुडे, सीएनएन-न्यूज18, टाइम्स नाउ और न्यूजएक्स जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।
NDTV में उनका स्वागत करते हुए कंपनी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि हेल्थ पत्रकारिता उन क्षेत्रों में से एक है, जहां पत्रकारिता लोगों के जीवन पर सीधा असर डाल सकती है। इसके लिए गंभीरता, विश्वसनीयता और जटिल जानकारी को ऐसे पत्रकारिता कंटेंट में बदलने की क्षमता जरूरी है, जिसे दर्शक आसानी से समझ सकें और जिस पर भरोसा कर सकें।
राहुल कंवल ने कहा कि स्नेहा मोरदानी के पास विशेषज्ञ रिपोर्टिंग का वर्षों का अनुभव, मजबूत संपादकीय समझ और हेल्थ बीट की गहरी समझ है।
वहीं, NDTV के चीफ कंटेंट ऑफिसर विनय सरावगी ने कहा कि NDTV Lifeline को हेल्थ से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के आसपास एक डिजिटल-फर्स्ट पहल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, भरोसेमंद विशेषज्ञता और ऐसे फॉर्मेट को एक साथ लाना है, जिनके जरिए आज के दर्शक जानकारी खोजते और उसे देखते हैं। विनय सरावगी के मुताबिक, हेल्थ पत्रकारिता में स्नेहा मोरदानी का अनुभव और सार्थक व निरंतर कवरेज तैयार करने की उनकी समझ इस पहल को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी।