महात्मा गांधी की अनकही कहानियां सामने लाएगी ‘Gandhi Gatha’, इस चैनल पर होगी प्रसारित

महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है।

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Thursday, 10 September, 2026
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महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है। यह सीरीज यूट्यूब चैनल Avadh Panch पर प्रस्तुत की जाएगी और इसे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय पेश करेंगे।

‘Gandhi Gatha’ का मकसद गांधी जी के जीवन को केवल बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तारीखों और समय के हिसाब से बताना नहीं है। सीरीज में उनके जीवन से जुड़े उन छोटे प्रसंगों और मानवीय कहानियों पर फोकस किया जाएगा, जो उपलब्ध तो हैं, लेकिन हजारों पन्नों में दबे होने की वजह से आम लोगों तक कम पहुंच पाती हैं।

सीरीज की शुरुआत करते हुए मधुकर उपाध्याय बताते हैं कि इतिहास लिखते समय इतिहासकारों का ध्यान अक्सर बड़ी घटनाओं पर ज्यादा रहता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बड़ी घटनाओं की तारीख, समय और उनसे जुड़े लोग आसानी से दर्ज और प्रमाणित किए जा सकते हैं। वहीं छोटी घटनाएं कई बार फुटनोट या हाशिए में दर्ज होकर रह जाती हैं।

तारीखों के बजाय कहानियों पर फोकस

‘Gandhi Gatha’ की खास बात यह होगी कि इसमें गांधी जी के जीवन की घटनाओं को किसी तय क्रम में नहीं दिखाया जाएगा। यानी कहानियां उनके जीवन की तारीख या साल के हिसाब से क्रमवार नहीं होंगी।

सीरीज की सोच यह है कि अगर गांधी जी के जीवन से साल, तारीख, दिन और समय जैसी चीजें हटा दी जाएं, तो उनके जीवन से जुड़ी ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जिन्हें आमतौर पर पढ़ने या सुनने का मौका कम मिलता है।

मधुकर उपाध्याय के मुताबिक, गांधी जी के बारे में काफी सामग्री उपलब्ध है और उनकी बड़ी घटनाओं की जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से जांचा जा सकता है। लेकिन छोटी कहानियों को हजारों पन्नों के बीच तलाशना आसान नहीं है। ‘Gandhi Gatha’ में इन्हीं कहानियों को खोजकर एक साथ सामने लाने की कोशिश की गई है।

‘अनलिखी नहीं, अनकही हैं ये कहानियां’

सीरीज में गांधी जी से जुड़ी कहानियों को ‘अनलिखी’ नहीं, बल्कि ‘अनकही’ बताया गया है। यानी ये घटनाएं कहीं न कहीं दर्ज हैं, लेकिन आम चर्चा और इतिहास की मुख्यधारा में इनका जिक्र कम हुआ है। इसी वजह से सीरीज में घटनाओं के समय के पारंपरिक क्रम को भी तोड़ा गया है। किसी अंक में 1930 या 1946 के बाद की घटना पहले आ सकती है, तो किसी दूसरे अंक में 1915 या गांधी जी के जीवन के किसी और दौर की कहानी सामने आ सकती है।

नोआखली की घटना में कुत्ते की कहानी भी

‘Gandhi Gatha’ में किस तरह की कहानियां दिखाई जाएंगी, इसका एक उदाहरण नोआखली से जुड़ी घटना के जरिए दिया गया है। मधुकर उपाध्याय के अनुसार, नोआखली में दंगे रोकने के लिए गांधी जी पैदल घूमे थे। इस पूरी घटना के बीच एक कुत्ते से जुड़ा प्रसंग भी है, जिसका आमतौर पर ज्यादा जिक्र नहीं मिलता।

बताया गया है कि गांधी जी को एक कुत्ता मिला और वह उन्हें अपने मालिक के घर तक ले गया। जब गांधी जी उस घर तक पहुंचे तो वहां कोई जीवित व्यक्ति नहीं था, बल्कि वहां शव पड़े थे। सीरीज में इसी तरह के छोटे, मानवीय और कम चर्चित प्रसंगों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

हर दिन आएगा नया एपिसोड

‘Gandhi Gatha’ का पहला एपिसोड 20 सितंबर को आएगा। इसके बाद सीरीज में हर दिन एक नया एपिसोड पेश करने की योजना है। यानी दर्शक रोज गांधी जी के जीवन से जुड़ी एक नई कहानी सुन सकेंगे। सीरीज की शुरुआत गांधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ से होगी। यह भजन नरसी मेहता ने लिखा था। कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध गायिका शुभा मुद्गल ने इस भजन को गाया है। सीरीज की प्रस्तुति में इस भजन का इस्तेमाल किया जाएगा और हर एपिसोड की शुरुआत में शुभा मुद्गल की आवाज में इसे सुनाया जाएगा।

‘Gandhi Gatha’ के जरिए गांधी जी के जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश की गई है, जिसमें बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय उन छोटी कहानियों पर ध्यान दिया जाएगा, जो उनके जीवन और व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।

 

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Amazon ने भारत में लॉन्च किया Creator Connections, 50,000 ऐडवर्टाइजर्स को जोड़ा

भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।

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ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने भारत में Creator Connections कार्यक्रम लॉन्च किया है। इसके जरिए Amazon ब्रैंड्स और क्रिएटर्स को एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर ला रहा है, जहां क्रिएटर्स को सिर्फ लोगों तक पहुंच बनाने के लिए नहीं, बल्कि उनके कंटेंट से होने वाली योग्य सेल्स के आधार पर अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा।

भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।

कैसे काम करेगा Creator Connections?

Creator Connections में ब्रैंड्स अपने प्रोडक्ट और कैंपेन बजट लेकर आएंगे, जबकि क्रिएटर्स अपनी ऑडियंस के हिसाब से उन कैंपेन को चुन सकेंगे, जो उनके लिए सही हैं। अगर किसी क्रिएटर के कंटेंट के जरिए Amazon पर योग्य खरीदारी होती है, तो उसे अतिरिक्त कमीशन मिलेगा।

इस मॉडल में क्लिक और सेल्स, दोनों को ट्रैक किया जाएगा। यानी किसी क्रिएटर की सफलता सिर्फ उसके फॉलोअर्स या कंटेंट की पहुंच से तय नहीं होगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि उसके कंटेंट से कितने लोग वास्तव में खरीदारी तक पहुंचे।

1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क

Amazon में Social कॉमर्स Emerging Countries की हेड निधि ठक्कर के मुताबिक, कंपनी का Creator Ecosystem अब करीब 1.65 लाख क्रिएटर्स तक पहुंच चुका है। पारंपरिक इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में ब्रैंड्स अक्सर पहुंच, कंटेंट या किसी तय डिलिवरेबल के लिए भुगतान करते हैं। इसके मुकाबले Creator Connections में सेल्स और Conversion पर ज्यादा जोर दिया गया है।

Thakkar के मुताबिक, Amazon क्रिएटर्स को केवल Reach के लिए भुगतान नहीं कर रहा है। यहां यह देखा जाएगा कि उनकी ऑडियंस कितनी प्रभावी तरीके से खरीदारी में बदलती है।

छोटे क्रिएटर्स को भी मिल सकता है फायदा

Amazon का यह मॉडल छोटे और Niche Creators के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। किसी क्रिएटर के फॉलोअर्स भले ही कम हों, लेकिन अगर उसकी ऑडियंस ज्यादा जुड़ी हुई है और उसके सुझाव पर खरीदारी करने की संभावना ज्यादा है, तो वह बड़े क्रिएटर की तुलना में ब्रैंड के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।

Creator Connections के जरिए क्रिएटर का कंटेंट Amazon के बाहर भी दिखाई दे सकता है, लेकिन खरीदारी आखिरकार Amazon पर होगी। इससे कंपनी को क्रिएटर की सिफारिश से लेकर प्रोडक्ट की खरीदारी तक की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

क्रिएटर्स को मिलेगा अतिरिक्त कमीशन

योग्य सेल्स होने पर क्रिएटर्स को अतिरिक्त कमीशन मिलेगा। यह कमाई, जहां लागू हो, उनकी मौजूदा Amazon Associates या इन्फ्लुएंसर कमाई के अतिरिक्त होगी।

वहीं, ब्रैंड्स अपने कैंपेन को प्रोडक्ट, कमीशन रेट, बजट और कैंपेन की अवधि के हिसाब से तय कर सकेंगे।

फिलहाल कैंपेन के लिए कम से कम 10 फीसदी कमीशन रेट, 5,000 डॉलर का न्यूनतम बजट और 30 से 365 दिन तक की अवधि रखी गई है। एक कैंपेन में अधिकतम 1,200 ASINs शामिल किए जा सकते हैं।

24 घंटे की विंडो में होगी सेल्स की ट्रैकिंग

इस पूरे मॉडल में Attribution यानी यह पता लगाना अहम है कि सेल्स किस क्रिएटर के कंटेंट से हुई। Amazon के मुताबिक, क्रिएटर के लिंक पर क्लिक करने के बाद 24 घंटे की विंडो में होने वाली योग्य खरीदारी को इसके लिए देखा जाएगा। हालांकि, हर क्लिक को समान महत्व नहीं दिया जाएगा। कंपनी Conversion को भी ध्यान में रखेगी। Amazon ने यह भी कहा है कि उसके पास कम गुणवत्ता वाले ट्रैफिक और योग्य गतिविधि के बीच अंतर करने के लिए सिस्टम मौजूद हैं।

कंपनी ने Bot Traffic की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली अपनी खास प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा नहीं की है।

त्योहारी सीजन से पहले लॉन्च हुआ कार्यक्रम

Creator Connections की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब भारत में त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान ब्रैंड्स आमतौर पर मार्केटिंग और कॉमर्स पर ज्यादा खर्च करते हैं।

Amazon के मुताबिक, त्योहारी सीजन में क्रिएटर्स की कमाई सामान्य दिनों के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से करीब पांच गुना तक बढ़ी है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि Creator Connections से इस त्योहारी सीजन में कितनी अतिरिक्त सेल्स या कमाई होने की उम्मीद है।

निधि ठक्कर ने कहा कि Amazon के पास इस संबंध में आंतरिक अनुमान हैं, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित आंकड़ा साझा नहीं किया।

क्रिएटर्स को सही कैंपेन चुनने में मिलेगी मदद

Amazon क्रिएटर्स को अपनी ऑडियंस के हिसाब से सही कैंपेन चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि क्रिएटर और प्रोडक्ट के बीच सही तालमेल होने से लंबे समय तक बेहतर Conversion हासिल किया जा सकता है।

इसके लिए क्रिएटर्स को उनकी ऑडियंस और कंटेंट के हिसाब से Personalised Campaign Recommendations देने की भी योजना है।

फिलहाल सीमित स्तर पर शुरुआत

Amazon ने Creator Connections को फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआती दौर में 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 ज्यादा सक्रिय क्रिएटर्स को शामिल किया गया है। कंपनी इस शुरुआती समूह के प्रदर्शन से यह समझना चाहती है कि क्रिएटर्स को इससे कितनी कमाई होती है और ब्रैंड्स को अपने विज्ञापन खर्च पर कितना Return मिलता है।

Amazon क्रिएटर्स की भर्ती, उन्हें ट्रेनिंग देने और अकाउंट मैनेजमेंट जैसे कामों में एजेंसियों के साथ भी काम कर रहा है। इसके साथ ही कंपनी Creator University और Creator Central जैसी पहलों के जरिए सेल्फ-सर्विस सिस्टम भी तैयार कर रही है।

फॉलोअर्स से आगे अब सेल्स पर फोकस

Creator Connections के जरिए Amazon इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सिर्फ फॉलोअर्स और इम्प्रेशंस तक सीमित रखने के बजाय सीधे कॉमर्स और Conversion से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

कंपनी के पास पहले से 1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क है और भारत अमेरिका के बाद इस कार्यक्रम का पहला अंतरराष्ट्रीय बाजार बना है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्रिएटर्स की पहुंच को वास्तविक खरीदारी और सेल्स में बदलने का यह मॉडल कितना सफल होता है।

क्रिएटर्स के लिए यह अपनी ऑडियंस के भरोसे से कमाई बढ़ाने का नया रास्ता हो सकता है, जबकि ब्रैंड्स को कंटेंट से सीधे सेल्स तक पहुंचने का मौका मिलेगा। वहीं Amazon के लिए यह इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सीधे अपने Shopping Ecosystem से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।

 

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Snap ने रोनन हैरिस को बनाया चीफ कमर्शियल ऑफिसर, संभालेंगे ग्लोबल विज्ञापन कारोबार

सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 09 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 09 September, 2026
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सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है। अब हैरिस Snap के ग्लोबल विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) और Go-to-Market ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।

रोनन हैरिस ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब Snap अपने विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने और परफॉर्मेंस विज्ञापन पर ज्यादा फोकस करने की कोशिश कर रही है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन करीब चार साल बाद अपने पद से हटने की तैयारी कर रहे हैं।

विज्ञापन कारोबार का लंबा अनुभव

रोनन हैरिस को विज्ञापन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। Snap के CEO Evan Spiegel ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि हैरिस के पास विज्ञापन क्षेत्र की गहरी समझ, पार्टनर्स के साथ मजबूत रिश्ते और Snap में लगातार बिजनेस ग्रोथ का रिकॉर्ड है।

Spiegel के मुताबिक, उन्हें उम्मीद है कि हैरिस की अगुवाई में ज्यादा से ज्यादा विज्ञापनदाता Snapchat पर सफल होंगे और कंपनी का विज्ञापन कारोबार आगे बढ़ेगा।

2022 में Snap से जुड़े थे हैरिस

रोनन हैरिस ने अक्टूबर 2022 में Snap जॉइन किया था। तब उन्हें EMEA प्रेजिडेंट बनाया गया था। पिछले करीब चार वर्षों में उन्होंने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में Snap के बिजनेस का नेतृत्व किया है। उनके कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में कंपनी के कारोबार में लगातार ग्रोथ देखने को मिली। अब उन्हें कंपनी की ग्लोबल कमर्शियल जिम्मेदारी दी गई है।

गूगल में 17 साल का अनुभव

Snap से पहले हैरिस ने करीब 17 साल गूगल में काम किया। उन्होंने 2005 में Dublin स्थित गूगल के EMEA मुख्यालय से अपना सफर शुरू किया था। गूगल में उन्होंने कई अहम नेतृत्व पदों पर काम किया और EMEA क्षेत्र के साथ-साथ मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में कंपनी के ऑपरेशंस और बिजनेस को संभाला। बाद में वह गूगल में UK और Ireland के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे।

गूगल में काम करने के दौरान हैरिस का बड़ा फोकस ऑनलाइन विज्ञापन कारोबार पर रहा। EMEA क्षेत्र में गूगल के विज्ञापन बिक्री बिजनेस के साथ उनके लंबे अनुभव को Snap की नई जिम्मेदारी के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग का भी अनुभव

रोनन हैरिस ने University College Dublin से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत उन्होंने जापान में Mitsubishi Chemical Corporation की Information Storage Products Division से की थी। इसके बाद उन्होंने करीब नौ साल जापान में कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में काम किया। साल 2001 में वह आयरलैंड लौटे और प्राइवेट इक्विटी के क्षेत्र में काम किया।

अजीत मोहन के बाद संभालेंगे कमर्शियल कमान

हैरिस को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन कंपनी से विदाई की तैयारी कर रहे हैं। Snap में करीब चार साल के दौरान अजीत मोहन ने कंपनी के विज्ञापन कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने पर काम किया। उनका फोकस एड प्लेटफॉर्म को परफॉर्मेंस के लिए बेहतर बनाने और Direct Response Advertising को बिजनेस का अहम हिस्सा बनाने पर रहा। अब हैरिस को यही काम ग्लोबल स्तर पर आगे बढ़ाना होगा।

Snap के विज्ञापन कारोबार के लिए अहम समय

Snap इस समय अपने विज्ञापन कारोबार में बदलाव कर रही है। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ Snapchat के यूजर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने बड़े यूजर बेस को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा प्रभावी और मापने योग्य नतीजों में बदलना भी है।

कंपनी का कुल रेवेन्यू Q2 2026 में सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा है। वहीं, Snapchat दुनियाभर में करीब एक अरब यूजर्स के आंकड़े के करीब पहुंच रहा है।

कंपनी संगठन के कुछ हिस्सों में भी बदलाव कर रही है और इंजीनियरिंग तथा विज्ञापन उत्पादों पर ज्यादा जोर दे रही है। ऐसे में रोनन हैरिस की नियुक्ति Snap के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती Snapchat की बड़ी पहुंच को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा मजबूत, प्रभावी और मापने योग्य बिजनेस रिजल्ट में बदलने की होगी।

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SAB Events में होगा Sri Adhikari Brothers Digital Network का विलय, RoC ने दी मंजूरी

सब इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड (SAB Events & Governance Now Media Limited) ने अपने Resolution Plan को लागू करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 09 September, 2026
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Wednesday, 09 September, 2026
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सब इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड (SAB Events & Governance Now Media Limited) ने अपने रेजोल्यूशन प्लान को लागू करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि Registrar of Companies (RoC), Mumbai-I ने Sri Adhikari Brothers Digital Network Private Limited के कंपनी में विलय से जुड़ा Form INC-28 मंजूर कर दिया है।

यह विलय कंपनी के उस रेजोल्यूशन प्लान का हिस्सा है, जिसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 10 जुलाई 2026 के अपने आदेश के जरिए मंजूरी दी थी। यह प्रक्रिया Pre-Packaged Insolvency Resolution Process (PPIRP) के तहत चल रही है।

कंपनी ने बताया कि यह जानकारी उसके पहले के 10 जुलाई, 11 जुलाई और 21 जुलाई 2026 के खुलासों के क्रम में दी गई है, जिनमें रेजोल्यूशन प्लान की मंजूरी और NCLT के आदेश से जुड़ी जानकारी साझा की गई थी।

100 शेयरों के बदले मिलेंगे 436 शेयर

मंजूर रेजोल्यूशन प्लान के तहत Sri Adhikari Brothers Digital Network Private Limited (Transferor Company) के शेयरधारकों को SAB Events & Governance Now Media के शेयर मिलेंगे।

इसके तहत ट्रांसफर कंपनी के हर 100 इक्विटी शेयर के बदले SAB Events & Governance Now Media के 436 इक्विटी शेयर दिए जाएंगे। कंपनी ने कहा है कि यह शेयर आवंटन और विलय की प्रक्रिया मंजूर रेजोल्यूशन प्लान के मुताबिक लागू की जाएगी।

NCLT की मंजूरी के बाद लागू हो रहा रेजोल्यूशन प्लान 

दरअसल, SAB Events & Governance Now Media की यह प्रक्रिया NCLT द्वारा 10 जुलाई 2026 को मंजूर किए गए रेजोल्यूशन प्लान से जुड़ी है। अब RoC द्वारा Form INC-28 को मंजूरी मिलने के बाद रेजोल्यूशन प्लान के तहत प्रस्तावित विलय को लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।

यह जानकारी कंपनी के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर कैलाश मार्कंड अधिकारी की ओर से जारी की गई है।

 

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पुतिन के भारत दौरे से पहले Russia Today ने शुरू किया हिंदी ऑपरेशन

रूसी सरकारी प्रसारक RT ने 7 सितंबर को rthindi.com नाम से हिंदी वेबसाइट लॉन्च की है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit होने वाला है।

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Monday, 07 September, 2026
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रूसी सरकारी प्रसारक RT ने 7 सितंबर को भारत में अपना हिंदी डिजिटल ऑपरेशन शुरू कर दिया। इसके साथ ही भारत में RT की मौजूदगी अब अंग्रेजी भाषा के दर्शकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के सबसे बड़े हिंदी भाषी समाचार बाजार तक पहुंच बनाने की दिशा में बढ़ गई है।

RT ने इसके लिए rthindi.com नाम से हिंदी वेबसाइट लॉन्च की है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit होने वाला है। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की भी तैयारी है, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होने की उम्मीद है।

फर्क नजरिए का’ है RT Hindi की टैगलाइन

भारत में RT Hindi ने “Fark nazariye ka” यानी “The world looks different from here” टैगलाइन के साथ अपनी शुरुआत की है। लॉन्च कवर पर पत्रकार रुंझुन शर्मा को प्रमुखता दी गई है। वह RT India में न्यूज हेड हैं और कई बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान राष्ट्रपति पुतिन के मीडिया पूल तक उनकी पहुंच रही है।

इस टैगलाइन के जरिए RT यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भारत और दुनिया को देखने और समझने का सिर्फ एक नजरिया नहीं हो सकता। इसके साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि दुनिया को समझने के नजरिए हमेशा पश्चिमी देशों के नजरिए तक सीमित नहीं होने चाहिए।

हिंदी में खबरें और रूस से जुड़ी जानकारी देने पर जोर

RT India की न्यूज हेड रुंझुन शर्मा ने हाल ही में रूसी दूतावास के Deputy Chief of Mission रोमन बाबुश्किन का हिंदी में इंटरव्यू किया। इसे RT के नए हिंदी ऑपरेशन की शुरुआती झलक के तौर पर देखा जा रहा है। नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने भी RT Hindi के लॉन्च की जानकारी साझा की है और इसे एक नए हिंदी डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया है।

हिंदी में दिए इंटरव्यू में बाबुश्किन ने RT Hindi की शुरुआत को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा दर्शकों तक भरोसेमंद और समय पर जानकारी पहुंचाई जा सकेगी। उन्होंने वैश्विक सूचना माहौल में रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की ओर से अभियान चलाए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसे माहौल में हिंदी भाषी लोगों को रूस के बारे में सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।

सलमान खुर्शीद ने भी दी RT Hindi को शुभकामनाएं

RT India से जुड़े भारतीय राजनीतिक चेहरों की ओर से भी हिंदी डिजिटल ऑपरेशन को समर्थन मिला है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो RT के कार्यक्रम In Conversation With की मेजबानी करते हैं, ने RT की हिंदी वेबसाइट के लिए एक लेख लिखा।

उन्होंने भारत और रूस के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों ने कई दौर के बदलाव देखे हैं, लेकिन उनकी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत और भरोसेमंद बनी रही है। उन्होंने RT के हिंदी ऑपरेशन को एक दूरदर्शी पहल बताते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं।

50 करोड़ से ज्यादा हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंच

RT India के CEO अशोक बगरिया ने कहा कि RT Hindi का लॉन्च भारत के प्रति RT की प्रतिबद्धता का स्वाभाविक अगला कदम है। उन्होंने भारत में 50 करोड़ से ज्यादा हिंदी भाषी लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी ऑपरेशन के जरिए भारत, रूस और दुनिया से जुड़ी खबरों को और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि RT India ने अपनी टीम का काफी विस्तार किया है और अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 50 प्रोफेशनल्स इस ऑपरेशन से जुड़े हैं।

अशोक बगरिया के मुताबिक, फिलहाल RT India ही इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य ढांचा बना रहेगा और आने वाले समय में भारत की दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी मौजूदगी बढ़ाने की संभावना है।

दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था RT India

भारत में RT की मौजूदा यात्रा दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी। उस समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में RT India को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस मौके पर RT की एडिटर-इन-चीफ मार्गरीटा सिमोन्यान भी मौजूद थीं।

RT India ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से अपना प्रसारण शुरू किया था। शुरुआत में इसका फोकस मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा के दर्शकों पर था। अब हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए RT भारत के कहीं बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

स्थानीय कंटेंट पर बढ़ा RT का फोकस

भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ RT ने स्थानीय स्तर पर भी कंटेंट तैयार करने पर जोर दिया है। इसके कार्यक्रमों और पॉडकास्ट में भारतीय पत्रकारों, राजनीतिक चेहरों और दूसरी जानी-मानी हस्तियों की भागीदारी देखने को मिली है। हिंदी वेबसाइट की शुरुआत इसी स्थानीयकरण की अगली कड़ी है। इसके जरिए RT भारत और दुनिया से जुड़ी अपनी खबरों को देश के सबसे बड़े भाषा दर्शक वर्ग तक पहुंचाना चाहता है।

कुल मिलाकर, RT का भारत में विस्तार अब अंग्रेजी भाषा के अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से आगे बढ़कर हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंच गया है। दिसंबर 2025 में शुरू हुए RT India ऑपरेशन के बाद अब RT Hindi के लॉन्च से रूस के इस मीडिया समूह ने भारत के बड़े हिंदी समाचार बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। 

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क्रिएटर इकॉनमी में नई शुरुआत, सेल्फ-सर्व टेक्नोलॉजी और 48 घंटे में पेमेंट पर जोर

भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग सेक्टर लंबे समय से पेमेंट में देरी और कई स्तर के बिचौलियों की समस्या से जूझ रहा है। कई मामलों में क्रिएटर्स को उनके काम का भुगतान 60 से 90 दिन में मिलता है

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Monday, 07 September, 2026
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शालिनी मिश्रा, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग सेक्टर लंबे समय से पेमेंट में देरी और कई स्तर के बिचौलियों की समस्या से जूझ रहा है। कई मामलों में क्रिएटर्स को उनके काम का भुगतान 60 से 90 दिन में मिलता है और यह समय 120 दिन से भी आगे निकल जाता है। इसका सीधा असर क्रिएटर्स के कैश फ्लो और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता है।

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, वित्तीय गड़बड़ियों, लंबे समय तक पैसे रोके जाने और दूसरे मौकों के हाथ से निकलने की वजह से इस सेक्टर को हर साल करीब 450 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

अब इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश शुरू हो गई है। कई प्लेटफॉर्म और क्रिएटर मैनेजमेंट एजेंसियां ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें पेमेंट ज्यादा पारदर्शी हो और क्रिएटर्स को जल्दी पैसा मिल सके।

बिचौलियों को हटाकर सीधे सिस्टम पर जोर

पेमेंट में देरी की एक बड़ी वजह कई स्तरों पर काम करने वाले एजेंसी और बिचौलिये माने जाते हैं। इसे कम करने के लिए टेक प्लेटफॉर्म अब Self-Serve Infrastructure पर जोर दे रहे हैं, जहां ब्रैंड और क्रिएटर के बीच कामकाज और पेमेंट की जानकारी ज्यादा सीधे तरीके से उपलब्ध हो।

Amazon की सोशल कॉमर्स- Emerging Marketplaces की प्रमुख निधि ठक्कर ने Direct Affiliate Tracking System के जरिए पेमेंट से जुड़ी दिक्कत कम होने की बात कही। उन्होंने एक्सचेंज4मीडिया से बातचीत में बताया कि Amazon में हर महीने पेमेंट किया जाता है और 30 दिन की पेमेंट विंडो रहती है। उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में काफी कुछ बिचौलियों के जरिए होता है। ब्रैंड एजेंसी से बात करता है और फिर लिंक, ब्रैंड की पहचान, प्रोडक्ट भेजने जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है।

निधि ठक्कर के मुताबिक, एजेंसियां इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाती हैं, लेकिन बिजनेस प्लेटफॉर्म के स्तर पर Self-Serve Model की शुरुआत एक अच्छा कदम है।

सीधे संबंध से पेमेंट की स्थिति साफ होगी

निधि ठक्कर ने यह भी बताया कि जब बीच में कोई ऐसा बिचौलिया नहीं होता जिसने पर्चेस ऑर्डर लिया हो और उसके बाद पेमेंट का हिसाब स्पष्ट न हो, तो क्रिएटर का प्लेटफॉर्म के साथ सीधा संबंध बनता है। Amazon इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम यानी AIP में क्रिएटर का Affiliate Account, उसके Payments और बाकी जानकारी सीधे दिखाई देती है। इससे यह स्पष्ट रहता है कि कितना पैसा आना है और पेमेंट की स्थिति क्या है।

Amazon इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम में अब 1.65 लाख क्रिएटर्स जुड़े हुए हैं। इनमें करीब 70 से 75% क्रिएटर्स नॉन-मेट्रो शहरों से आते हैं। यह Amazon के ग्राहकों के आंकड़ों से भी काफी हद तक मेल खाता है। कंपनी के मुताबिक, उसके करीब 85% ग्राहक Tier-1 मेट्रो शहरों के बाहर रहते हैं।

Opraah ने शुरू किया 48 घंटे में पेमेंट का मॉडल

प्लेटफॉर्म के स्तर पर बदलाव के साथ-साथ क्रिएटर मैनेजमेंट एजेंसियां भी पेमेंट सिस्टम में बदलाव कर रही हैं। नई दिल्ली स्थित टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी Opraah ने “OPay: 48 Hour Creator Payments” नाम से नई व्यवस्था शुरू की है। इस मॉडल के तहत एजेंसी के एक्सक्लूसिव क्रिएटर्स को ब्रैंड कैंपेन Live होने के 48 घंटे के भीतर पूरा कैंपेन पेमेंट देने की बात कही गई है। इसका मकसद क्रिएटर्स को पारंपरिक 60 से 90 दिन के पेमेंट साइकल से राहत देना है।

Opraah के कोफाउंडर प्रणव पनपलिया ने कहा कि क्रिएटर इकनॉमी तेजी से बदली है, लेकिन क्रिएटर्स के आसपास की व्यवस्थाएं उतनी तेजी से नहीं बदलीं। उनके मुताबिक, आज क्रिएटर्स असल में बिजनेस चला रहे हैं। वे टीम, एडिटर, यात्रा और प्रोडक्शन का खर्च संभालते हैं। ऐसे में उन्हें अपना काम पूरा करने के बाद अपने पैसे के लिए बार-बार पीछे नहीं भागना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 48 घंटे में पेमेंट सिर्फ तेजी का मामला नहीं है, बल्कि इसका मकसद एक तेज और पारदर्शी सिस्टम तैयार करना है।

HashFame और Xley.ai भी सीधे कनेक्शन पर दे रहे जोर

इसी तरह HashFame और Xley.ai जैसे प्लेटफॉर्म भी ब्रैंड और क्रिएटर्स के बीच सीधा संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। HashFame पर ब्रैंड अपने कैंपेन पोस्ट कर सकते हैं और क्रिएटर्स अपनी प्रोफाइल के मुताबिक कैंपेन देखकर उन्हें सीधे स्वीकार कर सकते हैं।

Xley.ai भी इसी तरह ब्रैंड और क्रिएटर्स के बीच Direct Marketplace उपलब्ध कराता है। इससे पारंपरिक एजेंसियों और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।

क्रिएटर्स को फॉलोअप और कैश फ्लो की चिंता से राहत

समय पर पेमेंट मिलने से उन क्रिएटर्स को सबसे ज्यादा राहत मिल सकती है, जिनके पास कामकाज चलाने के लिए सीमित वर्किंग कैपिटल होता है। 

लाइफस्टाइल और ब्यूटी क्रिएटर शालिनी सिंह ने कहा कि क्रिएटर के तौर पर पेमेंट में देरी का सामना करना पड़ता है। काम पूरा करने के बाद पेमेंट के लिए बार-बार फॉलोअप करना काफी परेशान करने वाला होता है। कई बार क्रिएटर्स अपने खर्चों की योजना भी आने वाले पेमेंट को ध्यान में रखकर बनाते हैं। उनके मुताबिक, 48 घंटे में पेमेंट मिलने से यह अनिश्चितता खत्म होगी और क्रिएटर्स अपना ध्यान काम पर लगा सकेंगे।

एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल क्रिएटर्स वैशाली और आनंद ने भी बताया कि कई बार कंटेंट तैयार होकर लाइव हो जाने के बावजूद पेमेंट आने में कई हफ्ते या उससे ज्यादा समय लग जाता है।

उनका कहना है कि जब क्रिएटर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देता है तो वह उम्मीद करता है कि पेमेंट की प्रक्रिया भी उतनी ही आसान होगी। 48 घंटे का पेमेंट सिस्टम क्रिएटर्स को स्पष्टता देगा और बार-बार फॉलोअप करने की जरूरत कम करेगा।

बदल रही है इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की पुरानी व्यवस्था

Amazon का Direct Self-Serve Accounting Model और Opraah का 48 घंटे में पेमेंट का मॉडल भारत के इन्फ्लुएंसर मार्केटिंगसेक्टर में बदलाव के संकेत दे रहा है। अगर यह व्यवस्था बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो लंबे पेमेंट साइकल, बिचौलियों और पैसों के लंबे समय तक अटके रहने जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।

इससे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंगसेक्टर में एक ऐसा बिजनेस-फर्स्ट फ्रेमवर्क तैयार होने की उम्मीद है, जिसमें पारदर्शिता, तेज पेमेंट और सीधे संबंध पर ज्यादा जोर होगा।

 

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भारतीय भाषाओं में पढ़ाई होगी आसान: बोधन AI ने लॉन्च किए नए मॉडल

आईआईटी मद्रास के बोधन एआई ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाई आसान बनाने के लिए चार नए एआई मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनका इस्तेमाल छात्र, शिक्षक, संस्थान और स्टार्टअप कर सकेंगे।

Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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आईआईटी मद्रास (IIT Madras) में इनक्यूबेट किए गए बोधन एआई (Bodhan AI) ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को आसान बनाने के लिए चार नए एआई मॉडल (AI Models) लॉन्च किए हैं। इन्हें एआई4भारत (AI4Bharat) के साथ मिलकर तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, इन मॉडल्स को डिजिटल पब्लिक गुड (Digital Public Good) के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

इनका इस्तेमाल एडटेक कंपनियां (EdTech Companies), स्टार्टअप, रिसर्चर, यूनिवर्सिटी और सरकारी संस्थान कर सकेंगे। चारों मॉडल अलग-अलग काम के लिए बनाए गए हैं। इनमें ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (Automatic Speech Recognition), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (Optical Character Recognition), मशीन ट्रांसलेशन (Machine Translation) और टेक्स्ट-टू-स्पीच (Text-to-Speech) मॉडल शामिल हैं।

स्पीच मॉडल 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि ओसीआर और टीटीएस मॉडल 23 भाषाओं में काम करते हैं। बोधन-ट्रांसलेट (Bodhan-Translate) मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर सकता है। इनका मकसद संस्थानों को हर बार अपनी अलग एआई तकनीक तैयार करने की जरूरत से बचाना है।

बोधन एआई ने छात्रों और शिक्षकों के लिए स्टूडेंट ट्यूटर (Student Tutor) और टीचर असिस्टेंट (Teacher Assistant) बॉट भी लॉन्च किए हैं। स्टूडेंट बॉट कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए है और एनसीईआरटी (NCERT) तथा एससीईआरटी (SCERT) के सिलेबस के अनुसार काम करेगा। छात्र 22 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट या आवाज के जरिए सवाल पूछ सकेंगे।

यह बॉट किताबों की जानकारी के आधार पर सवाल समझाने, उदाहरण देने, आकलन और गणना जैसे कामों में मदद करेगा। वहीं टीचर बॉट शिक्षकों को लेसन प्लान (Lesson Plan), वर्कशीट, क्विज, होमवर्क और रिवीजन मटेरियल तैयार करने में मदद करेगा।

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OpenAI ने लॉन्च किया GPT-6 Astra: जानिए नए AI मॉडल की खासियत

OpenAI ने नया GPT-6 Astra मॉडल लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक, यह कंप्यूटर इस्तेमाल, ब्राउजिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और साइंस जैसे प्रोफेशनल काम में बेहतर प्रदर्शन करेगा।

Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
openai

ओपनएआई (OpenAI) ने अपना नया एआई मॉडल जीपीटी-6 एस्ट्रा (GPT-6 Astra) लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह उसका अब तक का सबसे इंटेलिजेंट और अलाइन्ड (Aligned) मॉडल है। ओपनएआई के मुताबिक, इस मॉडल को तैयार करने में कई साल की ट्रेनिंग (Training), रीइन्फोर्समेंट लर्निंग (Reinforcement Learning) और अलाइनमेंट रिसर्च (Alignment Research) का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी का कहना है कि जीपीटी-6 एस्ट्रा कंप्यूटर इस्तेमाल, वेब ब्राउजिंग (Web Browsing), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (Software Engineering), साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security) और साइंस जैसे कामों में पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है।

ओपनएआई के अनुसार, मॉडल ने फ्रंटियरमैथ टियर 4 (FrontierMath Tier 4) में 98 फीसदी स्कोर हासिल किया है। वहीं एआरसी-एजीआई-3 (ARC-AGI-3) में इसका स्कोर 99.9 फीसदी और एक्सप्लॉइटबेंच (ExploitBench) में 100 फीसदी रहा है।

कंपनी ने बताया कि जीपीटी-6 एस्ट्रा कंप्यूटर और ब्राउजर (Browser) पर ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम कर सकता है। प्रोफेशनल टास्क (Professional Tasks) में भी यह तेज और सटीक रिजल्ट देने के लिए तैयार किया गया है। ओपनएआई के मुताबिक, पिछले मॉडल की तुलना में इसमें गलत जवाब देने की संभावना भी कम हुई है।

फिलहाल जीपीटी-6 एस्ट्रा का एक्सेस कुछ चुनिंदा यूजर्स को दिया गया है। आने वाले समय में इसे चैटजीपीटी गो (ChatGPT Go), चैटजीपीटी प्लस (ChatGPT Plus), प्रो (Pro), बिजनेस (Business) और एंटरप्राइज (Enterprise) प्लान वाले यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा ओपनएआई एपीआई (OpenAI API), माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर (Microsoft Azure) और एडब्ल्यूएस बेडरॉक (AWS Bedrock) पर भी इसे उपलब्ध कराने की तैयारी है।

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भारत में बंद होगा Discovery+ ऐप, 3 नवंबर से उपलब्ध नहीं होगी सर्विस

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) ने भारत में अपने स्टैंडअलोन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म discovery+ को बंद करने का फैसला किया है।

Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
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वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) ने भारत में अपने स्टैंडअलोन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म discovery+ को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी की ओर से जारी अपडेट के मुताबिक, भारत में discovery+ की नई सब्सक्रिप्शन अब 3 सितंबर 2026 से खरीदी नहीं जा सकेगी। वहीं, मौजूदा यूजर्स के लिए discovery+ ऐप की सेवा 3 नवंबर 2026 से पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।

इस फैसले के साथ भारत में discovery+ का स्टैंडअलोन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर सफर खत्म हो जाएगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि discovery+ पर उपलब्ध कंटेंट को प्लेटफॉर्म बंद होने के बाद भारत में किस तरह और किस स्ट्रीमिंग सर्विस के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।

मौजूदा सब्सक्राइबर्स का क्या होगा?

कंपनी के मुताबिक, मौजूदा सब्सक्राइबर्स की सेवा उनके सब्सक्रिप्शन के Billing Cycle के हिसाब से जारी रहेगी। यानी ऐप बंद होने की घोषणा का मतलब यह नहीं है कि सभी यूजर्स की सेवा तुरंत बंद हो जाएगी।

मंथली सब्सक्राइबर्स के लिए 3 अक्टूबर 2026 से Auto-Renewal बंद हो जाएगा। यूजर्स अपने मौजूदा Billing Cycle के खत्म होने तक discovery+ का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके बाद उनका एक्सेस खत्म हो जाएगा।

वहीं, सालाना सब्सक्रिप्शन लेने वाले उन यूजर्स को, जिनकी मौजूदा Billing Period 3 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 के बीच खत्म हो रही है, उनकी मौजूदा अवधि पूरी होने तक सेवा मिलती रहेगी। हालांकि, इन सब्सक्रिप्शन को आगे Renew नहीं किया जाएगा।

जिन Annual Subscribers की Billing Period 3 नवंबर 2026 के बाद तक चल रही है, उन्हें उनकी बची हुई सब्सक्रिप्शन अवधि के लिए Pro-Rata Refund दिया जाएगा। यानी जितने समय की सेवा का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा, उसके हिसाब से रकम वापस की जाएगी।

भारत में Discovery+ का स्टैंडअलोन सफर खत्म

Discovery+ को भारत में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया गया था। इस पर Discovery के अलावा अलग-अलग तरह के Documentary, Reality, Lifestyle, Food, Travel और Entertainment कंटेंट उपलब्ध रहे हैं।

अब कंपनी द्वारा स्टैंडअलोन ऐप और वेबसाइट को बंद करने का फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की बड़ी मीडिया कंपनियां अपनी Streaming Strategies पर दोबारा विचार कर रही हैं। कंपनियां कंटेंट को अलग-अलग ऐप पर उपलब्ध कराने के बजाय बड़े और Consolidated Streaming Platforms पर लाने के विकल्पों पर भी काम कर रही हैं।

Paramount Skydance डील के बीच बड़ा फैसला

Discovery+ को बंद करने का फैसला वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के लिए चल रही बड़ी Corporate हलचल के बीच आया है। कंपनी की Paramount Skydance को करीब 110 अरब डॉलर में बिक्री का प्रस्ताव चर्चा में है। इस संभावित डील के कारण वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की Streaming Strategy को लेकर भी काफी बदलाव की संभावना बनी हुई है।

Paramount Skydance के CEO David Ellison के मुताबिक, डील पूरी होने की स्थिति में Paramount+ और HBO Max को एक ही Streaming Offering के तहत लाने की योजना हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के Streaming Business का स्वरूप काफी अलग दिखाई दे सकता है।

फिलहाल भारत में discovery+ के स्टैंडअलोन प्लेटफॉर्म को बंद करने का फैसला इसी बड़े बदलाव का एक हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, भारत में discovery+ के मौजूदा कंटेंट का भविष्य क्या होगा और क्या इसे किसी दूसरे OTT प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जाएगा, इस बारे में कंपनी ने अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। 

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अभिषेक मेहता बने डाबर में डीजीएम-डिजिटल मार्केटिंग

अभिषेक मेहता को डाबर में डीजीएम-डिजिटल मार्केटिंग पद पर प्रमोट किया गया है। वह पिछले दो वर्षों से कंपनी से जुड़े हैं और इससे पहले बागरीज़ में मार्केटिंग हेड थे।

Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
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अभिषेक मेहता (Abhishek Mehta) को डाबर (Dabur) में DGM - Digital Marketing के पद पर प्रमोट किया गया है। मेहता पिछले दो वर्षों से कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।

डाबर में अपनी पिछली भूमिका में वह Digital Marketing Lead के तौर पर काम कर रहे थे। इस जिम्मेदारी के तहत वह कंपनी के हेल्थ केयर और फूड्स एंड बेवरेजेज वर्टिकल्स का डिजिटल मार्केटिंग नेतृत्व संभाल रहे थे।

डाबर से पहले मेहता बागरीज़ (Bagrry's) में Head of Marketing की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह जुबिलेंट फूडवर्क्स (Jubilant FoodWorks) में Head of Digital Marketing के पद पर थे।

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AI के साथ बदली आउटडोर विज्ञापन की दुनिया, स्मार्ट हो रहे हैं डिजिटल होर्डिंग्स

भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।

Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
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भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं। दिन का समय, मौसम, ट्रैफिक, आसपास की भीड़ और लोगों की पसंद के आधार पर स्क्रीन पर दिखने वाले विज्ञापन कुछ ही सेकंड में बदल जाते हैं। AI, रियल-टाइम डेटा और ऑटोमेशन की मदद से आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, तेज और असरदार बन चुके हैं।

एक समय था जब होर्डिंग और बिलबोर्ड पर एक ही विज्ञापन कई हफ्तों या महीनों तक लगा रहता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लोकेशन डेटा, मौसम की जानकारी और ऑडियंस एनालिटिक्स की मदद से डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) स्क्रीनें रियल-टाइम में विज्ञापन बदल सकती हैं। इससे ब्रांड सही समय पर सही जगह और सही दर्शकों तक अपना संदेश पहुंचा पा रहे हैं। यही वजह है कि AI आधारित DOOH विज्ञापन आज विज्ञापन उद्योग की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हो गया है और सार्वजनिक स्थानों पर ब्रांड कम्युनिकेशन का तरीका भी तेजी से बदल रहा है।

तेजी से बढ़ता विशाल मार्केट

DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।

यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।

भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।

प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा

DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है। 

VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।

भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।

मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन

स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:

मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।

ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।

लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।

Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।

फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है

DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।

यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।

उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।

इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?

DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।

लेकिन 2025-26 में यह समस्या धीरे-धीरे कम हो रही है। अब कंपनियां मोबाइल लोकेशन डेटा की मदद से यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि विज्ञापन देखने के बाद कितने लोग स्टोर तक पहुंचे। इसके अलावा QR कोड स्कैन, ब्रांड सर्वे और रिटेल फुटफॉल स्टडी जैसे तरीकों से भी यह मापा जा रहा है कि विज्ञापन का असर कितना हुआ और कंपनियों को उससे कितना फायदा मिला।

IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।

Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।

भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।

हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।

प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?

जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।

चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।

नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।

हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।

अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।

भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा

भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।

Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।

बदलाव आ रहा है:

  • सरकार की Smart Cities Mission के तहत 100 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है।
  • दिसंबर 2024 तक भारत का operational metro network 993 किलोमीटर पार कर गया, जबकि 51 शहरों में 997 किलोमीटर और निर्माणाधीन है।
  • Times OOH ने मुंबई मेट्रो लाइन 3 का विज्ञापन अधिकार हासिल किया (जुलाई 2024)।
  • AdOnMo ने सितंबर 2024 में $25 मिलियन की फंडिंग जुटाई। AdOnMo, जो भारत के elevator media मार्केट में अग्रणी है, के पास 26 शहरों में 50,000 से अधिक स्मार्ट स्क्रीनें हैं।
  • FICCI और EY की 2024 रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक digital media भारत के OOH मार्केट के कुल राजस्व का 15% बन जाएगी, जिसमें transit media 40% हिस्सा रखेगी।

भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।  

छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।

AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन

DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।

डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।

OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग

2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।

OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।

सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।

दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।

डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।

भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।

अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे

2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।

भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।

 

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