सरकार ने छोटे डिजिटल पेमेंट को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत 2000 रुपये तक के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन को लेकर सरकार ने नया नियम जारी किया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (Department of Financial Services) ने 14 सितंबर को गैजेट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) जारी कर छोटे डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) के लिए शुल्क से जुड़े नियम स्पष्ट किए हैं।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर (Payment System Provider) किसी भी तरह का चार्ज नहीं लगा सकते। यह रोक सीधे लगाए जाने वाले शुल्क के साथ-साथ अप्रत्यक्ष तरीके से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी।
यह नियम पेमेंट करने वाले और पेमेंट पाने वाले, दोनों पर लागू है। यानी 2,000 रुपये तक के यूपीआई पेमेंट के लिए न ग्राहक से और न ही दुकानदार या व्यापारी से कोई ट्रांजैक्शन फीस (Transaction Fee) ली जा सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक किराने की दुकान पर यूपीआई के जरिए 500 रुपये का भुगतान करता है, तो इस पेमेंट के लिए ग्राहक या दुकानदार से अलग से कोई फीस नहीं ली जा सकती। यही नियम 2,000 रुपये तक के पेमेंट के लिए रुपे डेबिट कार्ड (RuPay Debit Card) से किए गए भुगतान पर भी लागू होगा।
यह नियम खास तौर पर कम वैल्यू वाले डिजिटल पेमेंट के लिए अहम है। किराना दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों, छोटी दुकानों और दूसरे छोटे कारोबारों में यूपीआई और डेबिट कार्ड से बड़े पैमाने पर भुगतान लिया जाता है। ऐसे में 2,000 रुपये या उससे कम के पेमेंट पर ग्राहक और व्यापारी से अलग चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।
हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर नोटिफिकेशन में कोई नया फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) नहीं बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर अब निश्चित रूप से शुल्क लगेगा। ऐसे ट्रांजैक्शन पर लागू नियम और फीस संबंधित प्रावधानों और मौजूदा चार्ज स्ट्रक्चर पर निर्भर करेंगे।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है। ABC के नवनिर्वाचित चेयरमैन मोहित जैन ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्कुलेशन और ऑडियंस की अहमियत लगातार बढ़ रही है और ऐसे में ABC अपने मौजूदा मापन ढांचे में डिजिटल को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।
मोहित जैन के मुताबिक, ABC ने केंद्र सरकार को ‘डिजिटल न्यूज मेजरमेंट’ को व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसे लागू करने में समय लग सकता है, क्योंकि इसमें सरकार की मंजूरी के साथ-साथ एक नई मापन व्यवस्था तैयार करने की जटिलता भी शामिल है।
मोहित जैन ने कहा, “हमने डिजिटल न्यूज मेजरमेंट को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ABC के प्रमुख ग्राहकों में से एक है और सरकार भी इस मुद्दे पर बात कर रही है। उनके मुताबिक, ऑडिट में डिजिटल ऑडियंस को भी शामिल किया जाना चाहिए।
प्रिंट और डिजिटल के बीच अंतर कम करने की कोशिश
ABC का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का प्रिंट मीडिया मापन सिस्टम भी प्रिंट और डिजिटल के बीच की दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है।
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) भारतीय पाठक सर्वेक्षण (IRS) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। प्रस्तावित नए पायलट में प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल रीडरशिप को भी मापने की योजना है। इससे विज्ञापनदाताओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट की खपत की ज्यादा मौजूदा तस्वीर मिल सकती है।
ABC और IRS की भूमिका हालांकि अलग-अलग रही है। ABC मुख्य रूप से ऑडिटेड सर्कुलेशन का आंकड़ा देता है, यानी किसी प्रकाशन की कितनी प्रतियां सर्कुलेट हो रही हैं। वहीं IRS यह पता लगाने की कोशिश करता है कि किसी प्रकाशन को कितने लोग पढ़ते या इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब जब ऑडियंस तेजी से प्रिंट से डिजिटल की ओर जा रही है, दोनों संस्थाओं के सामने एक बड़ा सवाल है कि मल्टी-प्लेटफॉर्म दौर में किसी पब्लिशर की कुल ऑडियंस को किस तरह मापा जाए।
ABC पहले भी कर चुका है डिजिटल मापन की कोशिश
ABC इससे पहले भी डिजिटल मापन के क्षेत्र में कदम रख चुका है। ब्यूरो ने 2016 में ABC Digital लॉन्च किया था। इसके लिए Nielsen ने PC और मोबाइल पर डिजिटल मापन का समाधान उपलब्ध कराया था। उस समय भी इसका उद्देश्य प्रिंट मापन के साथ डिजिटल ऑडियंस को समझना था, क्योंकि पाठकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर रुझान बढ़ रहा था।
अब डिजिटल विज्ञापन भारतीय विज्ञापन बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऐसे में पब्लिशर्स के लिए वेबसाइट, ऐप और प्रिंट पर कंटेंट देखने वाली ऑडियंस की वैल्यू बताने के लिए भरोसेमंद थर्ड-पार्टी डेटा की जरूरत बढ़ गई है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए अलग-अलग उद्देश्यों वाली कई मापन व्यवस्थाएं होंगी या फिर ABC और IRS भविष्य में एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करेंगे।
विज्ञापनदाताओं के लिए भी जरूरी है एक साझा मापन सिस्टम
विज्ञापन इंडस्ट्री भी अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को मापने के लिए एक साझा व्यवस्था की जरूरत पर जोर देती रही है। फिलहाल विज्ञापनदाता अलग-अलग डेटासेट और प्लेटफॉर्म की ओर से दिए गए आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं। इससे अलग-अलग स्क्रीन पर ऑडियंस को एक साथ समझना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, ABC के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सरकार की मंजूरी है। मोहित जैन ने कहा कि सरकार ABC के प्रमुख हितधारकों में से एक है और पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।
ABC की वेबसाइट के मुताबिक, ब्यूरो के 750 से ज्यादा पब्लिशर सदस्य हैं। इनमें 562 डेली, 107 वीकली और 50 मैगजीन शामिल हैं। यदि MIB इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए दो पुराने और प्रमुख संस्थानों की ओर से मापन व्यवस्था तैयार करने की कोशिश सामने आ सकती है। एक तरफ MIB के समर्थन से ABC का डिजिटल मापन ढांचा होगा, वहीं दूसरी तरफ MRUC के जरिए IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश चल रही है। ऐसे में सवाल यह है कि इंडस्ट्री को दो अलग-अलग सिस्टम की जरूरत है या दोनों व्यवस्थाओं को एक-दूसरे के पूरक के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।
सात साल से IRS का इंतजार
IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। इसके बाद से फंडिंग, मेथडोलॉजी, रिसर्च पार्टनर और सर्वे के दायरे जैसे मुद्दों पर असहमति के चलते इसकी वापसी लगातार टलती रही है।
इंडस्ट्री के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अब सवाल सिर्फ सर्वे को दोबारा शुरू करने का नहीं है, बल्कि यह भी तय करना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदले मीडिया इकोसिस्टम में एक रीडरशिप करेंसी को आखिर मापना क्या चाहिए।
पब्लिशर्स की ओर से फंड किए जाने वाले IRS को MRUC और Readership Studies Council of India (RSCI) मिलकर प्रकाशित करते हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा लगातार चलने वाला रीडरशिप स्टडी बताया जाता है। इसका सालाना सैंपल साइज 2.56 लाख से ज्यादा उत्तरदाताओं का है। IRS भारत में प्रिंट और दूसरे मीडिया के इस्तेमाल, लोगों की प्रोफाइल, प्रोडक्ट ओनरशिप और उनके इस्तेमाल की तस्वीर पेश करता है। इसके सर्वे में 100 से ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी भी शामिल हैं।
इस सर्वे पर करीब 40-50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसे पब्लिशर्स के योगदान से पूरा किया जाता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रिंट सर्कुलेशन में कमी और न्यूज कंजम्पशन की बदलती आदतों के बीच कुछ पब्लिशर्स इसकी उपयोगिता और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
एक रीजनल पब्लिशर के मुताबिक, कई पब्लिशर्स ऐसे सर्वे में पैसा लगाने से हिचक रहे हैं, जिसके नतीजे उनकी मार्केट पोजिशन को कमजोर कर सकते हैं और इससे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।
यह चुनौती इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि मीडिया प्लानिंग का तरीका बदल चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब कैंपेन की लगभग रियल-टाइम माप उपलब्ध कराते हैं, जबकि रिटेल मीडिया में सीधे नतीजे मापने की सुविधा है। विज्ञापनदाता भी अब सिर्फ समय-समय पर मिलने वाली रिपोर्ट के बजाय लगातार कैंपेन को बेहतर बनाने की उम्मीद करते हैं।
इसके बावजूद प्रिंट इंडस्ट्री के लिए IRS की गैरमौजूदगी एक बड़ा मापन गैप पैदा करती है। प्रिंट सेक्टर से करीब 20,000 करोड़ रुपये का विज्ञापन कारोबार होने का अनुमान है। ऐसे में पब्लिशर्स का मानना है कि मीडिया प्लानिंग, विज्ञदाताओं का भरोसा और बाजार की तुलना के लिए एक स्वतंत्र इंडस्ट्री करेंसी जरूरी है।
फिलहाल विज्ञापनदाता ABC के सर्कुलेशन डेटा के अलावा पब्लिशर्स की अपनी रिसर्च और अलग-अलग ऑडियंस स्टडीज पर भी निर्भर हैं। अब ABC के डिजिटल ऑडियंस मापन प्रस्ताव और IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश के बीच यह देखना अहम होगा कि भारत में डिजिटल न्यूज ऑडियंस के लिए भविष्य का मापन सिस्टम किस दिशा में जाता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है। इसके जरिए लोग वेबसाइट या UMANG ऐप पर लॉगिन किए बिना PF से जुड़ी जरूरी जानकारी WhatsApp के जरिए हासिल कर सकेंगे।
EPFO ने 13 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नए WhatsApp चैनल की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, इस चैनल के जरिए सदस्यों तक जरूरी अपडेट और उपयोगी जानकारी सीधे WhatsApp पर पहुंचाई जाएगी।
कैसे काम करेगा WhatsApp चैनल?
सदस्य EPFO की ओर से साझा किए गए लिंक या QR कोड के जरिए आधिकारिक WhatsApp चैनल से जुड़ सकते हैं। इसके बाद बातचीत शुरू करने के लिए उन्हें “Hello” मैसेज भेजना होगा।
बताया गया है कि सेवा का इस्तेमाल उसी मोबाइल नंबर से किया जाना होगा, जो सदस्य के UAN (Universal Account Number) के साथ रजिस्टर्ड है। सिस्टम पहले यह जांच करेगा कि जानकारी मांगने वाला व्यक्ति उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं।
नंबर का सत्यापन होने के बाद यूजर को कुछ विकल्प दिए जाएंगे। इनके जरिए वह अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारी हासिल कर सकेगा। सिस्टम इन अनुरोधों को AI आधारित चैटबॉट के जरिए प्रोसेस कर सकता है या EPFO के रिकॉर्ड से सीधे जानकारी निकाल सकता है।
PF बैलेंस और क्लेम स्टेटस की मिल सकती है जानकारी
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, WhatsApp के जरिए सदस्य अपने PF खाते का बैलेंस, क्लेम का स्टेटस और हाल की कुछ ट्रांजैक्शन की जानकारी देख सकते हैं। यानी PF से जुड़ी पासबुक जैसी कुछ सुविधाएं WhatsApp पर मिल सकती हैं।
हालांकि, EPFO ने अभी इस चैनल पर उपलब्ध सभी सेवाओं की पूरी आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। साथ ही, जवाब मिलने में कितना समय लगेगा, कितनी बार जानकारी मांगी जा सकती है या मोबाइल नंबर का सत्यापन नहीं होने पर क्या प्रक्रिया होगी, इस बारे में भी अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
ऐसे में सदस्यों को WhatsApp चैनल से जुड़ने के बाद स्क्रीन पर दिए गए विकल्पों के अनुसार ही आगे बढ़ने और सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए EPFO के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
WhatsApp के अलावा ये विकल्प भी मौजूद
जब तक WhatsApp चैनल की सभी सुविधाओं को लेकर EPFO की ओर से पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक PF बैलेंस चेक करने के मौजूदा तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सदस्य अपने UAN से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS भेजकर PF की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए मैसेज में “EPFOHO UAN ENG” लिखना होगा। यहां ENG की जगह अपनी पसंदीदा भाषा के पहले तीन अक्षर लिखे जा सकते हैं।
इसके अलावा, UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर भी PF से जुड़ी जानकारी SMS के जरिए प्राप्त की जा सकती है। वहीं, UMANG ऐप और EPFO के Member e-Sewa Portal के जरिए UAN और OTP से लॉगिन करके PF की पासबुक सहित अन्य सेवाओं का इस्तेमाल पहले की तरह किया जा सकता है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर ाऔर इतने ही डिटैचेबल वारंट आवंटित किए हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर (Compulsorily Convertible Preference Shares-CCPS) और इतने ही डिटैचेबल वारंट (Detachable Warrants) आवंटित किए हैं। कंपनी के निदेशक मंडल ने 11 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी।
कंपनी ने बताया कि 100 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक CCPS को 100 रुपये के इश्यू मूल्य पर आवंटित किया गया है। ये 10% Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares हैं। प्रत्येक CCPS पर आवेदन के समय 50 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी।
इस तरह 82,61,401 CCPS का कुल इश्यू मूल्य 82.61 करोड़ रुपये है। ये CCPS राइट्स इश्यू के तहत पात्र इक्विटी शेयरधारकों या आवेदकों, जिनमें रिनाउंसी (Renounce) भी शामिल हैं, को आवंटित किए गए हैं।
इसके साथ ही कंपनी ने 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी आवंटित किए हैं। प्रत्येक वारंट का इश्यू मूल्य 10 रुपये है। आवेदन के समय प्रत्येक वारंट के लिए 5 रुपये का भुगतान किया गया है और बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी। इन वारंट का कुल इश्यू मूल्य 8.26 करोड़ रुपये है।
कंपनी के मुताबिक, इस आवंटन के बाद उसका मौजूदा पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी के पास पहले की तरह 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 4,72,08,008 पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर हैं, जिनकी कुल राशि 47.20 करोड़ रुपये है।
आवंटन के बाद कंपनी के पूंजी ढांचे में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता CCPS शामिल हो गए हैं, जिनकी कुल राशि 41.30 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी शामिल हैं, जिनकी राशि 4.13 करोड़ रुपये है।
कंपनी ने बताया कि यह आवंटन राइट्स इश्यू के लिए तय किए गए Basis of Allotment को अंतिम रूप दिए जाने के बाद किया गया है। इसके लिए कंपनी ने इश्यू के रजिस्ट्रार और BSE Limited, जो इस इश्यू का Designated Stock Exchange है, के साथ प्रक्रिया पूरी की।
कंपनी ने इस संबंध में SEBI के 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत जरूरी जानकारी भी स्टॉक एक्सचेंज को उपलब्ध कराई है।
महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है। यह सीरीज यूट्यूब चैनल Avadh Panch पर प्रस्तुत की जाएगी और इसे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय पेश करेंगे।
‘Gandhi Gatha’ का मकसद गांधी जी के जीवन को केवल बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तारीखों और समय के हिसाब से बताना नहीं है। सीरीज में उनके जीवन से जुड़े उन छोटे प्रसंगों और मानवीय कहानियों पर फोकस किया जाएगा, जो उपलब्ध तो हैं, लेकिन हजारों पन्नों में दबे होने की वजह से आम लोगों तक कम पहुंच पाती हैं।
सीरीज की शुरुआत करते हुए मधुकर उपाध्याय बताते हैं कि इतिहास लिखते समय इतिहासकारों का ध्यान अक्सर बड़ी घटनाओं पर ज्यादा रहता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बड़ी घटनाओं की तारीख, समय और उनसे जुड़े लोग आसानी से दर्ज और प्रमाणित किए जा सकते हैं। वहीं छोटी घटनाएं कई बार फुटनोट या हाशिए में दर्ज होकर रह जाती हैं।
तारीखों के बजाय कहानियों पर फोकस
‘Gandhi Gatha’ की खास बात यह होगी कि इसमें गांधी जी के जीवन की घटनाओं को किसी तय क्रम में नहीं दिखाया जाएगा। यानी कहानियां उनके जीवन की तारीख या साल के हिसाब से क्रमवार नहीं होंगी।
सीरीज की सोच यह है कि अगर गांधी जी के जीवन से साल, तारीख, दिन और समय जैसी चीजें हटा दी जाएं, तो उनके जीवन से जुड़ी ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जिन्हें आमतौर पर पढ़ने या सुनने का मौका कम मिलता है।
मधुकर उपाध्याय के मुताबिक, गांधी जी के बारे में काफी सामग्री उपलब्ध है और उनकी बड़ी घटनाओं की जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से जांचा जा सकता है। लेकिन छोटी कहानियों को हजारों पन्नों के बीच तलाशना आसान नहीं है। ‘Gandhi Gatha’ में इन्हीं कहानियों को खोजकर एक साथ सामने लाने की कोशिश की गई है।
‘अनलिखी नहीं, अनकही हैं ये कहानियां’
सीरीज में गांधी जी से जुड़ी कहानियों को ‘अनलिखी’ नहीं, बल्कि ‘अनकही’ बताया गया है। यानी ये घटनाएं कहीं न कहीं दर्ज हैं, लेकिन आम चर्चा और इतिहास की मुख्यधारा में इनका जिक्र कम हुआ है। इसी वजह से सीरीज में घटनाओं के समय के पारंपरिक क्रम को भी तोड़ा गया है। किसी अंक में 1930 या 1946 के बाद की घटना पहले आ सकती है, तो किसी दूसरे अंक में 1915 या गांधी जी के जीवन के किसी और दौर की कहानी सामने आ सकती है।
नोआखली की घटना में कुत्ते की कहानी भी
‘Gandhi Gatha’ में किस तरह की कहानियां दिखाई जाएंगी, इसका एक उदाहरण नोआखली से जुड़ी घटना के जरिए दिया गया है। मधुकर उपाध्याय के अनुसार, नोआखली में दंगे रोकने के लिए गांधी जी पैदल घूमे थे। इस पूरी घटना के बीच एक कुत्ते से जुड़ा प्रसंग भी है, जिसका आमतौर पर ज्यादा जिक्र नहीं मिलता।
बताया गया है कि गांधी जी को एक कुत्ता मिला और वह उन्हें अपने मालिक के घर तक ले गया। जब गांधी जी उस घर तक पहुंचे तो वहां कोई जीवित व्यक्ति नहीं था, बल्कि वहां शव पड़े थे। सीरीज में इसी तरह के छोटे, मानवीय और कम चर्चित प्रसंगों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
हर दिन आएगा नया एपिसोड
‘Gandhi Gatha’ का पहला एपिसोड 20 सितंबर को आएगा। इसके बाद सीरीज में हर दिन एक नया एपिसोड पेश करने की योजना है। यानी दर्शक रोज गांधी जी के जीवन से जुड़ी एक नई कहानी सुन सकेंगे। सीरीज की शुरुआत गांधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ से होगी। यह भजन नरसी मेहता ने लिखा था। कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध गायिका शुभा मुद्गल ने इस भजन को गाया है। सीरीज की प्रस्तुति में इस भजन का इस्तेमाल किया जाएगा और हर एपिसोड की शुरुआत में शुभा मुद्गल की आवाज में इसे सुनाया जाएगा।
‘Gandhi Gatha’ के जरिए गांधी जी के जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश की गई है, जिसमें बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय उन छोटी कहानियों पर ध्यान दिया जाएगा, जो उनके जीवन और व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।
भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने भारत में Creator Connections कार्यक्रम लॉन्च किया है। इसके जरिए Amazon ब्रैंड्स और क्रिएटर्स को एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर ला रहा है, जहां क्रिएटर्स को सिर्फ लोगों तक पहुंच बनाने के लिए नहीं, बल्कि उनके कंटेंट से होने वाली योग्य सेल्स के आधार पर अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा।
भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।
कैसे काम करेगा Creator Connections?
Creator Connections में ब्रैंड्स अपने प्रोडक्ट और कैंपेन बजट लेकर आएंगे, जबकि क्रिएटर्स अपनी ऑडियंस के हिसाब से उन कैंपेन को चुन सकेंगे, जो उनके लिए सही हैं। अगर किसी क्रिएटर के कंटेंट के जरिए Amazon पर योग्य खरीदारी होती है, तो उसे अतिरिक्त कमीशन मिलेगा।
इस मॉडल में क्लिक और सेल्स, दोनों को ट्रैक किया जाएगा। यानी किसी क्रिएटर की सफलता सिर्फ उसके फॉलोअर्स या कंटेंट की पहुंच से तय नहीं होगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि उसके कंटेंट से कितने लोग वास्तव में खरीदारी तक पहुंचे।
1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क
Amazon में Social कॉमर्स Emerging Countries की हेड निधि ठक्कर के मुताबिक, कंपनी का Creator Ecosystem अब करीब 1.65 लाख क्रिएटर्स तक पहुंच चुका है। पारंपरिक इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में ब्रैंड्स अक्सर पहुंच, कंटेंट या किसी तय डिलिवरेबल के लिए भुगतान करते हैं। इसके मुकाबले Creator Connections में सेल्स और Conversion पर ज्यादा जोर दिया गया है।
Thakkar के मुताबिक, Amazon क्रिएटर्स को केवल Reach के लिए भुगतान नहीं कर रहा है। यहां यह देखा जाएगा कि उनकी ऑडियंस कितनी प्रभावी तरीके से खरीदारी में बदलती है।
छोटे क्रिएटर्स को भी मिल सकता है फायदा
Amazon का यह मॉडल छोटे और Niche Creators के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। किसी क्रिएटर के फॉलोअर्स भले ही कम हों, लेकिन अगर उसकी ऑडियंस ज्यादा जुड़ी हुई है और उसके सुझाव पर खरीदारी करने की संभावना ज्यादा है, तो वह बड़े क्रिएटर की तुलना में ब्रैंड के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
Creator Connections के जरिए क्रिएटर का कंटेंट Amazon के बाहर भी दिखाई दे सकता है, लेकिन खरीदारी आखिरकार Amazon पर होगी। इससे कंपनी को क्रिएटर की सिफारिश से लेकर प्रोडक्ट की खरीदारी तक की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।
क्रिएटर्स को मिलेगा अतिरिक्त कमीशन
योग्य सेल्स होने पर क्रिएटर्स को अतिरिक्त कमीशन मिलेगा। यह कमाई, जहां लागू हो, उनकी मौजूदा Amazon Associates या इन्फ्लुएंसर कमाई के अतिरिक्त होगी।
वहीं, ब्रैंड्स अपने कैंपेन को प्रोडक्ट, कमीशन रेट, बजट और कैंपेन की अवधि के हिसाब से तय कर सकेंगे।
फिलहाल कैंपेन के लिए कम से कम 10 फीसदी कमीशन रेट, 5,000 डॉलर का न्यूनतम बजट और 30 से 365 दिन तक की अवधि रखी गई है। एक कैंपेन में अधिकतम 1,200 ASINs शामिल किए जा सकते हैं।
24 घंटे की विंडो में होगी सेल्स की ट्रैकिंग
इस पूरे मॉडल में Attribution यानी यह पता लगाना अहम है कि सेल्स किस क्रिएटर के कंटेंट से हुई। Amazon के मुताबिक, क्रिएटर के लिंक पर क्लिक करने के बाद 24 घंटे की विंडो में होने वाली योग्य खरीदारी को इसके लिए देखा जाएगा। हालांकि, हर क्लिक को समान महत्व नहीं दिया जाएगा। कंपनी Conversion को भी ध्यान में रखेगी। Amazon ने यह भी कहा है कि उसके पास कम गुणवत्ता वाले ट्रैफिक और योग्य गतिविधि के बीच अंतर करने के लिए सिस्टम मौजूद हैं।
कंपनी ने Bot Traffic की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली अपनी खास प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा नहीं की है।
त्योहारी सीजन से पहले लॉन्च हुआ कार्यक्रम
Creator Connections की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब भारत में त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान ब्रैंड्स आमतौर पर मार्केटिंग और कॉमर्स पर ज्यादा खर्च करते हैं।
Amazon के मुताबिक, त्योहारी सीजन में क्रिएटर्स की कमाई सामान्य दिनों के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से करीब पांच गुना तक बढ़ी है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि Creator Connections से इस त्योहारी सीजन में कितनी अतिरिक्त सेल्स या कमाई होने की उम्मीद है।
निधि ठक्कर ने कहा कि Amazon के पास इस संबंध में आंतरिक अनुमान हैं, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित आंकड़ा साझा नहीं किया।
क्रिएटर्स को सही कैंपेन चुनने में मिलेगी मदद
Amazon क्रिएटर्स को अपनी ऑडियंस के हिसाब से सही कैंपेन चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि क्रिएटर और प्रोडक्ट के बीच सही तालमेल होने से लंबे समय तक बेहतर Conversion हासिल किया जा सकता है।
इसके लिए क्रिएटर्स को उनकी ऑडियंस और कंटेंट के हिसाब से Personalised Campaign Recommendations देने की भी योजना है।
फिलहाल सीमित स्तर पर शुरुआत
Amazon ने Creator Connections को फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआती दौर में 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 ज्यादा सक्रिय क्रिएटर्स को शामिल किया गया है। कंपनी इस शुरुआती समूह के प्रदर्शन से यह समझना चाहती है कि क्रिएटर्स को इससे कितनी कमाई होती है और ब्रैंड्स को अपने विज्ञापन खर्च पर कितना Return मिलता है।
Amazon क्रिएटर्स की भर्ती, उन्हें ट्रेनिंग देने और अकाउंट मैनेजमेंट जैसे कामों में एजेंसियों के साथ भी काम कर रहा है। इसके साथ ही कंपनी Creator University और Creator Central जैसी पहलों के जरिए सेल्फ-सर्विस सिस्टम भी तैयार कर रही है।
फॉलोअर्स से आगे अब सेल्स पर फोकस
Creator Connections के जरिए Amazon इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सिर्फ फॉलोअर्स और इम्प्रेशंस तक सीमित रखने के बजाय सीधे कॉमर्स और Conversion से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
कंपनी के पास पहले से 1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क है और भारत अमेरिका के बाद इस कार्यक्रम का पहला अंतरराष्ट्रीय बाजार बना है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्रिएटर्स की पहुंच को वास्तविक खरीदारी और सेल्स में बदलने का यह मॉडल कितना सफल होता है।
क्रिएटर्स के लिए यह अपनी ऑडियंस के भरोसे से कमाई बढ़ाने का नया रास्ता हो सकता है, जबकि ब्रैंड्स को कंटेंट से सीधे सेल्स तक पहुंचने का मौका मिलेगा। वहीं Amazon के लिए यह इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सीधे अपने Shopping Ecosystem से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है। अब हैरिस Snap के ग्लोबल विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) और Go-to-Market ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।
रोनन हैरिस ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब Snap अपने विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने और परफॉर्मेंस विज्ञापन पर ज्यादा फोकस करने की कोशिश कर रही है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन करीब चार साल बाद अपने पद से हटने की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन कारोबार का लंबा अनुभव
रोनन हैरिस को विज्ञापन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। Snap के CEO Evan Spiegel ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि हैरिस के पास विज्ञापन क्षेत्र की गहरी समझ, पार्टनर्स के साथ मजबूत रिश्ते और Snap में लगातार बिजनेस ग्रोथ का रिकॉर्ड है।
Spiegel के मुताबिक, उन्हें उम्मीद है कि हैरिस की अगुवाई में ज्यादा से ज्यादा विज्ञापनदाता Snapchat पर सफल होंगे और कंपनी का विज्ञापन कारोबार आगे बढ़ेगा।
2022 में Snap से जुड़े थे हैरिस
रोनन हैरिस ने अक्टूबर 2022 में Snap जॉइन किया था। तब उन्हें EMEA प्रेजिडेंट बनाया गया था। पिछले करीब चार वर्षों में उन्होंने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में Snap के बिजनेस का नेतृत्व किया है। उनके कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में कंपनी के कारोबार में लगातार ग्रोथ देखने को मिली। अब उन्हें कंपनी की ग्लोबल कमर्शियल जिम्मेदारी दी गई है।
गूगल में 17 साल का अनुभव
Snap से पहले हैरिस ने करीब 17 साल गूगल में काम किया। उन्होंने 2005 में Dublin स्थित गूगल के EMEA मुख्यालय से अपना सफर शुरू किया था। गूगल में उन्होंने कई अहम नेतृत्व पदों पर काम किया और EMEA क्षेत्र के साथ-साथ मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में कंपनी के ऑपरेशंस और बिजनेस को संभाला। बाद में वह गूगल में UK और Ireland के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे।
गूगल में काम करने के दौरान हैरिस का बड़ा फोकस ऑनलाइन विज्ञापन कारोबार पर रहा। EMEA क्षेत्र में गूगल के विज्ञापन बिक्री बिजनेस के साथ उनके लंबे अनुभव को Snap की नई जिम्मेदारी के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग का भी अनुभव
रोनन हैरिस ने University College Dublin से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत उन्होंने जापान में Mitsubishi Chemical Corporation की Information Storage Products Division से की थी। इसके बाद उन्होंने करीब नौ साल जापान में कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में काम किया। साल 2001 में वह आयरलैंड लौटे और प्राइवेट इक्विटी के क्षेत्र में काम किया।
अजीत मोहन के बाद संभालेंगे कमर्शियल कमान
हैरिस को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन कंपनी से विदाई की तैयारी कर रहे हैं। Snap में करीब चार साल के दौरान अजीत मोहन ने कंपनी के विज्ञापन कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने पर काम किया। उनका फोकस एड प्लेटफॉर्म को परफॉर्मेंस के लिए बेहतर बनाने और Direct Response Advertising को बिजनेस का अहम हिस्सा बनाने पर रहा। अब हैरिस को यही काम ग्लोबल स्तर पर आगे बढ़ाना होगा।
Snap के विज्ञापन कारोबार के लिए अहम समय
Snap इस समय अपने विज्ञापन कारोबार में बदलाव कर रही है। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ Snapchat के यूजर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने बड़े यूजर बेस को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा प्रभावी और मापने योग्य नतीजों में बदलना भी है।
कंपनी का कुल रेवेन्यू Q2 2026 में सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा है। वहीं, Snapchat दुनियाभर में करीब एक अरब यूजर्स के आंकड़े के करीब पहुंच रहा है।
कंपनी संगठन के कुछ हिस्सों में भी बदलाव कर रही है और इंजीनियरिंग तथा विज्ञापन उत्पादों पर ज्यादा जोर दे रही है। ऐसे में रोनन हैरिस की नियुक्ति Snap के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती Snapchat की बड़ी पहुंच को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा मजबूत, प्रभावी और मापने योग्य बिजनेस रिजल्ट में बदलने की होगी।
सब इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड (SAB Events & Governance Now Media Limited) ने अपने Resolution Plan को लागू करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सब इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड (SAB Events & Governance Now Media Limited) ने अपने रेजोल्यूशन प्लान को लागू करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि Registrar of Companies (RoC), Mumbai-I ने Sri Adhikari Brothers Digital Network Private Limited के कंपनी में विलय से जुड़ा Form INC-28 मंजूर कर दिया है।
यह विलय कंपनी के उस रेजोल्यूशन प्लान का हिस्सा है, जिसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 10 जुलाई 2026 के अपने आदेश के जरिए मंजूरी दी थी। यह प्रक्रिया Pre-Packaged Insolvency Resolution Process (PPIRP) के तहत चल रही है।
कंपनी ने बताया कि यह जानकारी उसके पहले के 10 जुलाई, 11 जुलाई और 21 जुलाई 2026 के खुलासों के क्रम में दी गई है, जिनमें रेजोल्यूशन प्लान की मंजूरी और NCLT के आदेश से जुड़ी जानकारी साझा की गई थी।
100 शेयरों के बदले मिलेंगे 436 शेयर
मंजूर रेजोल्यूशन प्लान के तहत Sri Adhikari Brothers Digital Network Private Limited (Transferor Company) के शेयरधारकों को SAB Events & Governance Now Media के शेयर मिलेंगे।
इसके तहत ट्रांसफर कंपनी के हर 100 इक्विटी शेयर के बदले SAB Events & Governance Now Media के 436 इक्विटी शेयर दिए जाएंगे। कंपनी ने कहा है कि यह शेयर आवंटन और विलय की प्रक्रिया मंजूर रेजोल्यूशन प्लान के मुताबिक लागू की जाएगी।
NCLT की मंजूरी के बाद लागू हो रहा रेजोल्यूशन प्लान
दरअसल, SAB Events & Governance Now Media की यह प्रक्रिया NCLT द्वारा 10 जुलाई 2026 को मंजूर किए गए रेजोल्यूशन प्लान से जुड़ी है। अब RoC द्वारा Form INC-28 को मंजूरी मिलने के बाद रेजोल्यूशन प्लान के तहत प्रस्तावित विलय को लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
यह जानकारी कंपनी के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर कैलाश मार्कंड अधिकारी की ओर से जारी की गई है।
रूसी सरकारी प्रसारक RT ने 7 सितंबर को rthindi.com नाम से हिंदी वेबसाइट लॉन्च की है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit होने वाला है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रूसी सरकारी प्रसारक RT ने 7 सितंबर को भारत में अपना हिंदी डिजिटल ऑपरेशन शुरू कर दिया। इसके साथ ही भारत में RT की मौजूदगी अब अंग्रेजी भाषा के दर्शकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के सबसे बड़े हिंदी भाषी समाचार बाजार तक पहुंच बनाने की दिशा में बढ़ गई है।
RT ने इसके लिए rthindi.com नाम से हिंदी वेबसाइट लॉन्च की है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit होने वाला है। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की भी तैयारी है, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होने की उम्मीद है।
‘फर्क नजरिए का’ है RT Hindi की टैगलाइन
भारत में RT Hindi ने “Fark nazariye ka” यानी “The world looks different from here” टैगलाइन के साथ अपनी शुरुआत की है। लॉन्च कवर पर पत्रकार रुंझुन शर्मा को प्रमुखता दी गई है। वह RT India में न्यूज हेड हैं और कई बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान राष्ट्रपति पुतिन के मीडिया पूल तक उनकी पहुंच रही है।
इस टैगलाइन के जरिए RT यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भारत और दुनिया को देखने और समझने का सिर्फ एक नजरिया नहीं हो सकता। इसके साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि दुनिया को समझने के नजरिए हमेशा पश्चिमी देशों के नजरिए तक सीमित नहीं होने चाहिए।
हिंदी में खबरें और रूस से जुड़ी जानकारी देने पर जोर
RT India की न्यूज हेड रुंझुन शर्मा ने हाल ही में रूसी दूतावास के Deputy Chief of Mission रोमन बाबुश्किन का हिंदी में इंटरव्यू किया। इसे RT के नए हिंदी ऑपरेशन की शुरुआती झलक के तौर पर देखा जा रहा है। नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने भी RT Hindi के लॉन्च की जानकारी साझा की है और इसे एक नए हिंदी डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया है।
हिंदी में दिए इंटरव्यू में बाबुश्किन ने RT Hindi की शुरुआत को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा दर्शकों तक भरोसेमंद और समय पर जानकारी पहुंचाई जा सकेगी। उन्होंने वैश्विक सूचना माहौल में रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की ओर से अभियान चलाए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसे माहौल में हिंदी भाषी लोगों को रूस के बारे में सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
सलमान खुर्शीद ने भी दी RT Hindi को शुभकामनाएं
RT India से जुड़े भारतीय राजनीतिक चेहरों की ओर से भी हिंदी डिजिटल ऑपरेशन को समर्थन मिला है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो RT के कार्यक्रम In Conversation With की मेजबानी करते हैं, ने RT की हिंदी वेबसाइट के लिए एक लेख लिखा।
उन्होंने भारत और रूस के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों ने कई दौर के बदलाव देखे हैं, लेकिन उनकी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत और भरोसेमंद बनी रही है। उन्होंने RT के हिंदी ऑपरेशन को एक दूरदर्शी पहल बताते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं।
50 करोड़ से ज्यादा हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंच
RT India के CEO अशोक बगरिया ने कहा कि RT Hindi का लॉन्च भारत के प्रति RT की प्रतिबद्धता का स्वाभाविक अगला कदम है। उन्होंने भारत में 50 करोड़ से ज्यादा हिंदी भाषी लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी ऑपरेशन के जरिए भारत, रूस और दुनिया से जुड़ी खबरों को और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि RT India ने अपनी टीम का काफी विस्तार किया है और अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 50 प्रोफेशनल्स इस ऑपरेशन से जुड़े हैं।
अशोक बगरिया के मुताबिक, फिलहाल RT India ही इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य ढांचा बना रहेगा और आने वाले समय में भारत की दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी मौजूदगी बढ़ाने की संभावना है।
दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था RT India
भारत में RT की मौजूदा यात्रा दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी। उस समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में RT India को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस मौके पर RT की एडिटर-इन-चीफ मार्गरीटा सिमोन्यान भी मौजूद थीं।
RT India ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से अपना प्रसारण शुरू किया था। शुरुआत में इसका फोकस मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा के दर्शकों पर था। अब हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए RT भारत के कहीं बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
स्थानीय कंटेंट पर बढ़ा RT का फोकस
भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ RT ने स्थानीय स्तर पर भी कंटेंट तैयार करने पर जोर दिया है। इसके कार्यक्रमों और पॉडकास्ट में भारतीय पत्रकारों, राजनीतिक चेहरों और दूसरी जानी-मानी हस्तियों की भागीदारी देखने को मिली है। हिंदी वेबसाइट की शुरुआत इसी स्थानीयकरण की अगली कड़ी है। इसके जरिए RT भारत और दुनिया से जुड़ी अपनी खबरों को देश के सबसे बड़े भाषा दर्शक वर्ग तक पहुंचाना चाहता है।
कुल मिलाकर, RT का भारत में विस्तार अब अंग्रेजी भाषा के अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से आगे बढ़कर हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंच गया है। दिसंबर 2025 में शुरू हुए RT India ऑपरेशन के बाद अब RT Hindi के लॉन्च से रूस के इस मीडिया समूह ने भारत के बड़े हिंदी समाचार बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।
भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग सेक्टर लंबे समय से पेमेंट में देरी और कई स्तर के बिचौलियों की समस्या से जूझ रहा है। कई मामलों में क्रिएटर्स को उनके काम का भुगतान 60 से 90 दिन में मिलता है
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शालिनी मिश्रा, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग सेक्टर लंबे समय से पेमेंट में देरी और कई स्तर के बिचौलियों की समस्या से जूझ रहा है। कई मामलों में क्रिएटर्स को उनके काम का भुगतान 60 से 90 दिन में मिलता है और यह समय 120 दिन से भी आगे निकल जाता है। इसका सीधा असर क्रिएटर्स के कैश फ्लो और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता है।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, वित्तीय गड़बड़ियों, लंबे समय तक पैसे रोके जाने और दूसरे मौकों के हाथ से निकलने की वजह से इस सेक्टर को हर साल करीब 450 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
अब इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश शुरू हो गई है। कई प्लेटफॉर्म और क्रिएटर मैनेजमेंट एजेंसियां ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें पेमेंट ज्यादा पारदर्शी हो और क्रिएटर्स को जल्दी पैसा मिल सके।
बिचौलियों को हटाकर सीधे सिस्टम पर जोर
पेमेंट में देरी की एक बड़ी वजह कई स्तरों पर काम करने वाले एजेंसी और बिचौलिये माने जाते हैं। इसे कम करने के लिए टेक प्लेटफॉर्म अब Self-Serve Infrastructure पर जोर दे रहे हैं, जहां ब्रैंड और क्रिएटर के बीच कामकाज और पेमेंट की जानकारी ज्यादा सीधे तरीके से उपलब्ध हो।
Amazon की सोशल कॉमर्स- Emerging Marketplaces की प्रमुख निधि ठक्कर ने Direct Affiliate Tracking System के जरिए पेमेंट से जुड़ी दिक्कत कम होने की बात कही। उन्होंने एक्सचेंज4मीडिया से बातचीत में बताया कि Amazon में हर महीने पेमेंट किया जाता है और 30 दिन की पेमेंट विंडो रहती है। उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में काफी कुछ बिचौलियों के जरिए होता है। ब्रैंड एजेंसी से बात करता है और फिर लिंक, ब्रैंड की पहचान, प्रोडक्ट भेजने जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
निधि ठक्कर के मुताबिक, एजेंसियां इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाती हैं, लेकिन बिजनेस प्लेटफॉर्म के स्तर पर Self-Serve Model की शुरुआत एक अच्छा कदम है।
सीधे संबंध से पेमेंट की स्थिति साफ होगी
निधि ठक्कर ने यह भी बताया कि जब बीच में कोई ऐसा बिचौलिया नहीं होता जिसने पर्चेस ऑर्डर लिया हो और उसके बाद पेमेंट का हिसाब स्पष्ट न हो, तो क्रिएटर का प्लेटफॉर्म के साथ सीधा संबंध बनता है। Amazon इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम यानी AIP में क्रिएटर का Affiliate Account, उसके Payments और बाकी जानकारी सीधे दिखाई देती है। इससे यह स्पष्ट रहता है कि कितना पैसा आना है और पेमेंट की स्थिति क्या है।
Amazon इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम में अब 1.65 लाख क्रिएटर्स जुड़े हुए हैं। इनमें करीब 70 से 75% क्रिएटर्स नॉन-मेट्रो शहरों से आते हैं। यह Amazon के ग्राहकों के आंकड़ों से भी काफी हद तक मेल खाता है। कंपनी के मुताबिक, उसके करीब 85% ग्राहक Tier-1 मेट्रो शहरों के बाहर रहते हैं।
Opraah ने शुरू किया 48 घंटे में पेमेंट का मॉडल
प्लेटफॉर्म के स्तर पर बदलाव के साथ-साथ क्रिएटर मैनेजमेंट एजेंसियां भी पेमेंट सिस्टम में बदलाव कर रही हैं। नई दिल्ली स्थित टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी Opraah ने “OPay: 48 Hour Creator Payments” नाम से नई व्यवस्था शुरू की है। इस मॉडल के तहत एजेंसी के एक्सक्लूसिव क्रिएटर्स को ब्रैंड कैंपेन Live होने के 48 घंटे के भीतर पूरा कैंपेन पेमेंट देने की बात कही गई है। इसका मकसद क्रिएटर्स को पारंपरिक 60 से 90 दिन के पेमेंट साइकल से राहत देना है।
Opraah के कोफाउंडर प्रणव पनपलिया ने कहा कि क्रिएटर इकनॉमी तेजी से बदली है, लेकिन क्रिएटर्स के आसपास की व्यवस्थाएं उतनी तेजी से नहीं बदलीं। उनके मुताबिक, आज क्रिएटर्स असल में बिजनेस चला रहे हैं। वे टीम, एडिटर, यात्रा और प्रोडक्शन का खर्च संभालते हैं। ऐसे में उन्हें अपना काम पूरा करने के बाद अपने पैसे के लिए बार-बार पीछे नहीं भागना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 48 घंटे में पेमेंट सिर्फ तेजी का मामला नहीं है, बल्कि इसका मकसद एक तेज और पारदर्शी सिस्टम तैयार करना है।
HashFame और Xley.ai भी सीधे कनेक्शन पर दे रहे जोर
इसी तरह HashFame और Xley.ai जैसे प्लेटफॉर्म भी ब्रैंड और क्रिएटर्स के बीच सीधा संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। HashFame पर ब्रैंड अपने कैंपेन पोस्ट कर सकते हैं और क्रिएटर्स अपनी प्रोफाइल के मुताबिक कैंपेन देखकर उन्हें सीधे स्वीकार कर सकते हैं।
Xley.ai भी इसी तरह ब्रैंड और क्रिएटर्स के बीच Direct Marketplace उपलब्ध कराता है। इससे पारंपरिक एजेंसियों और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
क्रिएटर्स को फॉलोअप और कैश फ्लो की चिंता से राहत
समय पर पेमेंट मिलने से उन क्रिएटर्स को सबसे ज्यादा राहत मिल सकती है, जिनके पास कामकाज चलाने के लिए सीमित वर्किंग कैपिटल होता है।
लाइफस्टाइल और ब्यूटी क्रिएटर शालिनी सिंह ने कहा कि क्रिएटर के तौर पर पेमेंट में देरी का सामना करना पड़ता है। काम पूरा करने के बाद पेमेंट के लिए बार-बार फॉलोअप करना काफी परेशान करने वाला होता है। कई बार क्रिएटर्स अपने खर्चों की योजना भी आने वाले पेमेंट को ध्यान में रखकर बनाते हैं। उनके मुताबिक, 48 घंटे में पेमेंट मिलने से यह अनिश्चितता खत्म होगी और क्रिएटर्स अपना ध्यान काम पर लगा सकेंगे।
एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल क्रिएटर्स वैशाली और आनंद ने भी बताया कि कई बार कंटेंट तैयार होकर लाइव हो जाने के बावजूद पेमेंट आने में कई हफ्ते या उससे ज्यादा समय लग जाता है।
उनका कहना है कि जब क्रिएटर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देता है तो वह उम्मीद करता है कि पेमेंट की प्रक्रिया भी उतनी ही आसान होगी। 48 घंटे का पेमेंट सिस्टम क्रिएटर्स को स्पष्टता देगा और बार-बार फॉलोअप करने की जरूरत कम करेगा।
बदल रही है इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की पुरानी व्यवस्था
Amazon का Direct Self-Serve Accounting Model और Opraah का 48 घंटे में पेमेंट का मॉडल भारत के इन्फ्लुएंसर मार्केटिंगसेक्टर में बदलाव के संकेत दे रहा है। अगर यह व्यवस्था बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो लंबे पेमेंट साइकल, बिचौलियों और पैसों के लंबे समय तक अटके रहने जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
इससे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंगसेक्टर में एक ऐसा बिजनेस-फर्स्ट फ्रेमवर्क तैयार होने की उम्मीद है, जिसमें पारदर्शिता, तेज पेमेंट और सीधे संबंध पर ज्यादा जोर होगा।
आईआईटी मद्रास के बोधन एआई ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाई आसान बनाने के लिए चार नए एआई मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनका इस्तेमाल छात्र, शिक्षक, संस्थान और स्टार्टअप कर सकेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आईआईटी मद्रास (IIT Madras) में इनक्यूबेट किए गए बोधन एआई (Bodhan AI) ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को आसान बनाने के लिए चार नए एआई मॉडल (AI Models) लॉन्च किए हैं। इन्हें एआई4भारत (AI4Bharat) के साथ मिलकर तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, इन मॉडल्स को डिजिटल पब्लिक गुड (Digital Public Good) के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
इनका इस्तेमाल एडटेक कंपनियां (EdTech Companies), स्टार्टअप, रिसर्चर, यूनिवर्सिटी और सरकारी संस्थान कर सकेंगे। चारों मॉडल अलग-अलग काम के लिए बनाए गए हैं। इनमें ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (Automatic Speech Recognition), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (Optical Character Recognition), मशीन ट्रांसलेशन (Machine Translation) और टेक्स्ट-टू-स्पीच (Text-to-Speech) मॉडल शामिल हैं।
स्पीच मॉडल 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि ओसीआर और टीटीएस मॉडल 23 भाषाओं में काम करते हैं। बोधन-ट्रांसलेट (Bodhan-Translate) मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर सकता है। इनका मकसद संस्थानों को हर बार अपनी अलग एआई तकनीक तैयार करने की जरूरत से बचाना है।
बोधन एआई ने छात्रों और शिक्षकों के लिए स्टूडेंट ट्यूटर (Student Tutor) और टीचर असिस्टेंट (Teacher Assistant) बॉट भी लॉन्च किए हैं। स्टूडेंट बॉट कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए है और एनसीईआरटी (NCERT) तथा एससीईआरटी (SCERT) के सिलेबस के अनुसार काम करेगा। छात्र 22 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट या आवाज के जरिए सवाल पूछ सकेंगे।
यह बॉट किताबों की जानकारी के आधार पर सवाल समझाने, उदाहरण देने, आकलन और गणना जैसे कामों में मदद करेगा। वहीं टीचर बॉट शिक्षकों को लेसन प्लान (Lesson Plan), वर्कशीट, क्विज, होमवर्क और रिवीजन मटेरियल तैयार करने में मदद करेगा।