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ऑनलाइन कंटेंट में ‘अश्लीलता’ की स्पष्ट परिभाषा देने वाले नए नियम लाएगी सरकार!

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों और OTT प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन कंटेंट को नियंत्रित करने वाले सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों और OTT प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन कंटेंट को नियंत्रित करने वाले सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। इस मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि 'अश्लील' और अन्य अस्वीकार्य या अवैध डिजिटल कंटेंट क्या होगा। The Hindu की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव सभी डिजिटल कंटेंट- सोशल मीडिया, OTT स्ट्रीमिंग सर्विस और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पर लागू होगा और इसमें 1995 के केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट से लिए गए व्यापक प्रतिबंध शामिल हैं।

इस नोट को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वकील ने इस सप्ताह चल रहे मुकदमे में पक्षकारों को भेजा। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल पहले सरकार से कहा था कि ऑनलाइन कंटेंट के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाएं।

IT Rules पहले से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देशित करते हैं कि वे अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल उत्पीड़न, किसी की निजता का उल्लंघन, लिंग या जातीय आधार पर अपमानजनक या उत्पीड़न करने वाला, मनी लॉन्ड्रिंग या जुआ बढ़ावा देने वाला कंटेंट न दिखाएं। अब सरकार का प्रस्ताव अगर सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी पाता है, तो इसमें 'अश्लील डिजिटल कंटेंट' की स्पष्ट परिभाषा और नियमों के कोड ऑफ एथिक्स में बदलाव शामिल होगा। यह बदलाव IT Act की Section 67, केबल TV एक्ट और IPC के आधार पर होगा।

डिजिटल अधिकारों की वकील मिशी चौधरी ने The Hindu से कहा कि यह मूल रूप से केबल TV प्रोग्राम कोड को डिजिटल मीडिया में लागू करने जैसा है। उनका कहना है कि यह भारत में डिजिटल कंटेंट के लिए अब तक का सबसे व्यापक नियामक बदलाव होगा।

सिनेमैटोग्राफ एक्ट के अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री को 'सार्वजनिक प्रदर्शन योग्य' होना चाहिए। यह शर्त केवल स्ट्रीमिंग सर्विस पर लागू होगी, सोशल मीडिया पर नहीं।

कोड ऑफ एथिक्स के तहत प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंटेंट में अश्लीलता, अपराध को बढ़ावा देने वाला संदेश, आपत्तिजनक या अपमानजनक दृश्य/शब्द, या किसी जातीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह का अपमान न हो। इसमें कुल 17 प्रकार के प्रतिबंध शामिल हैं।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने IT Rules के कुछ नियमों पर रोक लगा रखी है और अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए है। मिशी चौधरी के अनुसार, नोट इन रोकी गई नियमावली को फिर से लागू करने की कोशिश करता है।

सरकार का प्रस्ताव यह भी कहता है कि कंटेंट के कोड का उल्लंघन हुआ या नहीं, इसका निर्णय 'कम्युनिटी स्टैंडर्ड टेस्ट' के आधार पर होगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि क्या समकालीन सामाजिक मान्यताओं के हिसाब से कंटेंट किसी की कामुक रुचि को भाता है या नहीं। साहित्यिक, वैज्ञानिक, कला या राजनीतिक मूल्य वाली सामग्री इस कोड से बाहर रहेगी।

यह प्रस्ताव कॉमेडियन समय रैना के विवादित जोक के बाद आया है, जब उनके YouTube चैनल का एक भाग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि नियम तैयार करते समय अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन न हो, लेकिन उचित प्रतिबंध भी सुनिश्चित किए जाएं।म


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