होम / डिजिटल / CCI के आदेश पर झुका वॉट्सऐप, यूजर की सहमति से ही होगा डेटा शेयर
CCI के आदेश पर झुका वॉट्सऐप, यूजर की सहमति से ही होगा डेटा शेयर
वॉट्सऐप ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के आदेशों को लागू करेगा और यूज़र्स की सहमति के आधार पर ही अन्य मेटा कंपनियों के साथ डेटा शेयर करेगा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 hours ago
वॉट्सऐप ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के आदेशों को लागू करेगा और यूजर्स की सहमति के आधार पर ही अन्य मेटा कंपनियों के साथ डेटा शेयर करेगा। यह मामला वॉट्सऐप की 2021 की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर चल रहे लंबे विवाद से जुड़ा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच (जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे) ने वॉट्सऐप और मेटा को अपनी अंतरिम याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी। इन याचिकाओं में कंपनी ने NCLAT के आदेशों पर रोक लगाने की मांग की थी।
16 मार्च तक पालन का भरोसा
वॉट्सऐप और मेटा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें डेटा शेयरिंग के तरीके की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी 16 मार्च तक यूजर-चॉइस वाला नया सिस्टम लागू कर देगी और फिलहाल किसी अंतरिम राहत की मांग नहीं करेगी।
कोर्ट ने कंपनी की इस बात को रिकॉर्ड में लेते हुए अंतरिम याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि, 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी की वैधता को चुनौती देने वाली मुख्य अपील अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी NCLAT के आदेश के अनुसार CCI के सामने अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
क्या है पूरा मामला?
साल 2021 में वॉट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट की थी। इस अपडेट में यूजर्स को नए नियम मानना जरूरी था, तभी वे ऐप का इस्तेमाल जारी रख सकते थे। 2016 की पॉलिसी में यूजर्स को Facebook (अब मेटा) के साथ कुछ डेटा शेयरिंग से बाहर रहने का विकल्प मिलता था, लेकिन 2021 की पॉलिसी में यह विकल्प हटा दिया गया था।
नवंबर 2024 में CCI ने कहा कि वॉट्सऐप ने अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल किया है और यह प्रतिस्पर्धा कानून, 2002 का उल्लंघन है। आयोग ने कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और पांच साल तक विज्ञापन के लिए मेटा कंपनियों के साथ यूजर डेटा शेयर करने पर रोक लगा दी।
हालांकि बाद में NCLAT ने मेटा से जुड़े कुछ निष्कर्षों को हटा दिया, लेकिन वॉट्सऐप पर लगाया गया जुर्माना बरकरार रखा।
विज्ञापन पर रोक का मुद्दा अभी बाकी
CCI ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है कि विज्ञापन के लिए डेटा शेयरिंग पर लगी पांच साल की रोक को फिर से लागू किया जाए। यह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है। आयोग का कहना है कि यह सिर्फ प्राइवेसी का नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा कानून का भी अहम मुद्दा है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप के “माने या छोड़ दें” (Take it or Leave it) मॉडल पर सख्त टिप्पणी की थी और इसे जबरदस्ती जैसा बताया था।
डिजिटल विज्ञापन पर पड़ेगा असर
इस पूरे मामले पर टेक्नोलॉजी और विज्ञापन जगत की नजरें टिकी हैं। सवाल सिर्फ यूजर की सहमति का नहीं, बल्कि यह भी है कि बड़ी डिजिटल कंपनियां अलग-अलग सेवाओं का डेटा जोड़कर अपने विज्ञापन कारोबार को कितना मजबूत कर सकती हैं।
भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य में डेटा के इस्तेमाल और विज्ञापन के तरीके को तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई का इंतजार है।
टैग्स