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IPL 2025: सोशल मीडिया विज्ञापनों पर ₹850 करोड़ खर्च करेंगे ब्रैंड्स– गौरव जैन
शेयरचैट और मोज के चीफ बिजनेस ऑफिसर गौरव जैन के मुताबिक इस बार इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन के दौरान सोशल मीडिया पर विज्ञापन खर्च ₹850 करोड़ तक पहुंच सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
शालिनी मिश्रा, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
IPL 2025 का असर सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी धूम मचने वाली है। 'शेयरचैट' (ShareChat) और 'मोज' (Moj) के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) गौरव जैन के मुताबिक, इस बार IPL सीजन के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ब्रैंड्स करीब 850 करोड़ रुपये (100 मिलियन डॉलर) खर्च करने जा रहे हैं।
गौरव जैन ने बताया, “हम लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहे हैं और अब हमारे पास लगभग 25 बिलियन ऐड इंप्रेशंस हैं। मुझे तो लगता है कि अब 100 मिलियन डॉलर से कम की रकम छोटी लगती है। IPL सोशल मीडिया विज्ञापनों के लिए इस साल का बेंचमार्क 850 करोड़ रुपये है।”
डिजिटल विज्ञापन में बूम
2024 में सोशल मीडिया विज्ञापन में जबरदस्त उछाल आया है। कुल डिजिटल ऐड खर्च में इसका हिस्सा 23% तक पहुंच गया है और इसका कुल मूल्य 10,506 करोड़ रुपये आंका गया है। यह आंकड़े Dentsu-e4m की हालिया डिजिटल विज्ञापन रिपोर्ट से सामने आए हैं, जिसमें यह भी बताया गया है कि 2025 के अंत तक डिजिटल विज्ञापन बाजार 59,200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
गौरव जैन ने बताया कि IPL एक हाई-एनर्जी इवेंट है, जहां क्रिकेट प्रेमी मैच देखते हुए सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहते हैं। “चाहे अपनी पसंदीदा टीम की जीत का जश्न हो या फिर मैच पर गर्मागर्म बहस, फैन्स रियल टाइम में अपनी भावनाएं साझा करना पसंद करते हैं और यह हम ShareChat और Moj जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गहराई से महसूस करते हैं।”
क्षेत्रीय भाषाओं का दबदबा
IPL को लेकर दर्शकों की दीवानगी अब मातृभाषाओं में जाहिर हो रही है। ShareChat के आंकड़ों के मुताबिक, अब भारत में 92% क्रिकेट प्रेमी अपने क्षेत्रीय भाषा में ही क्रिकेट कंटेंट देखना पसंद करते हैं, जो पिछले सीजन से 29% की बढ़त दर्शाता है। इसी बदलाव के चलते ब्रैंड्स अब तेजी से वर्नाक्युलर कंटेंट मार्केटिंग की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
इंफ्लुएंसर मार्केटिंग और ब्रैंड इनोवेशन
IPL शुरू होने से पहले ही Qoruz नामक एक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ने अनुमान लगाया था कि ब्रैंड्स IPL 2025 में 550 करोड़ रुपये इंफ्लुएंसर ड्रिव कैंपेन पर खर्च करेंगे। लेकिन IPL के पहले ही हफ्ते में यह रुझान और भी तेजी से बढ़ा है। अब अधिकतर ब्रैंड्स रीजनल इंफ्लुएंसर्स के साथ मिलकर जुड़ाव बढ़ा रहे हैं।
गौरव ने बताया, “मिड-फरवरी से हमें ब्रैंड्स की तरफ से इनोवेटिव कैंपेन के ब्रीफ मिलने लगते हैं—चाहे वो हैशटैग चैलेंज हों, वर्चुअल लेंस हों या इंटरएक्टिव टूल्स। खासतौर पर ब्रैंडेड हैशटैग चैलेंज विज्ञापनदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं क्योंकि ये फैन्स को टीम के प्रति निष्ठा जताने और ब्रैंड से जुड़ने का मौका देते हैं।”
ब्रैंड्स अब निवेश पर रिटर्न (ROI) को लेकर ज्यादा गंभीर हैं और इसके लिए कई मेट्रिक्स जैसे व्यू-थ्रू रेट, इंगेजमेंट लेवल और क्लिक-थ्रू रेट को ट्रैक करने के लिए प्लेटफॉर्म्स पर टूल्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा थर्ड पार्टी BLS (ब्रैंड लिफ्ट सर्वे) और साइंटिफिक A/B टेस्टिंग भी की जाती है।
क्षेत्रीय मार्केटिंग के कामयाब किस्से
गौरव ने कुछ उदाहरण भी साझा किए, जो स्थानीय इंफ्लुएंसर मार्केटिंग की ताकत को दर्शाते हैं। जैसे भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी ने ‘हैशटैग ऑसम एंथम’ कैंपेन चलाया जिसमें रीजनल क्रिएटर्स को जोड़ा गया। इसका नतीजा रहा—लगभग 440 मिलियन व्यूज और 1.1 से 1.2 लाख यूजर्स द्वारा बना कंटेंट।
एक OTT प्लेटफॉर्म ने भी ShareChat के जरिए क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट बांटा, जिससे 650 मिलियन व्यूज और 200 मिलियन यूजर्स की भागीदारी हासिल हुई।
एक प्रमुख FMCG ब्रैंड ने ‘हैशटैग स्टैमिना कप’ कैंपेन चलाया, जिसमें स्पोर्ट्स की उत्तेजना और ब्रैंड की बात को मिलाकर 350 मिलियन व्यूज और 14% का शानदार इंगेजमेंट रेट हासिल किया गया।
वर्नाक्युलर-फर्स्ट अप्रोच की ओर बदलाव
गौरव के अनुसार, “अब यह सोच छोड़नी होगी कि स्थानीय भाषा में कंटेंट बनाना बाद की बात है। अब पूरा कॉन्सेप्ट और मीडिया प्लानिंग की दिशा ही इसी पर तय होनी चाहिए कि सही दर्शकों तक उनकी पसंद की भाषा में कैसे पहुंचा जाए। दर्शक डब और नकली कंटेंट को तुरंत पहचान लेते हैं और इससे ब्रैंड की साख पर असर पड़ सकता है।”
IPL में सेकेंड स्क्रीन का व्यवहार भी ट्रेंड बन चुका है। 86% दर्शक टीवी पर मैच देखते हुए मोबाइल पर क्रिकेट कंटेंट देखते हैं। इसके साथ ही शॉर्ट-फॉर्म वीडियो IPL चर्चा का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। मैच के समय यूजर जनरेटेड क्रिकेट कंटेंट में चार गुना वृद्धि देखी गई है।
इंफ्लुएंसर्स से बढ़ रहा ब्रैंड जुड़ाव
गौरव कहते हैं, “अब सिर्फ किसी बड़े सेलिब्रिटी या स्टार क्रिकेटर से पैन इंडिया कैंपेन करवा लेने से बात नहीं बनती। अब असली असर क्षेत्रीय नैनो और माइक्रो इंफ्लुएंसर्स से आ रहा है, जिनकी क्षमता स्टोर में बिक्री बढ़ाने में अधिक है।”
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 65% उपभोक्ता ऐसे सोशल मीडिया कैंपेन को याद रखते हैं जो इंफ्लुएंसर्स के जरिए चलाए गए हों। इनमें से 50% YouTube पर ऐसे कैंपेन देखते हैं, जबकि X दूसरे और Instagram तीसरे नंबर पर है।
59% लोग ऐसे कंटेंट से सक्रिय रूप से जुड़ते हैं जबकि केवल 9% निष्क्रिय रहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि IPL के बावजूद एंटरटेनमेंट इंफ्लुएंसर्स की इंगेजमेंट दर (38%) स्पोर्ट्स इंफ्लुएंसर्स (18%) से कहीं अधिक है।
14% लोगों ने माना कि उन्होंने इंफ्लुएंसर कैंपेन के कारण खरीदारी की और पुरुषों ने इसमें ज्यादा सक्रियता दिखाई। 35% उपभोक्ता तब ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं जब ब्रैंड और इंफ्लुएंसर के बीच लंबे समय तक साझेदारी होती है।
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