अभिषेक मेहता को डाबर में डीजीएम-डिजिटल मार्केटिंग पद पर प्रमोट किया गया है। वह पिछले दो वर्षों से कंपनी से जुड़े हैं और इससे पहले बागरीज़ में मार्केटिंग हेड थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अभिषेक मेहता (Abhishek Mehta) को डाबर (Dabur) में DGM - Digital Marketing के पद पर प्रमोट किया गया है। मेहता पिछले दो वर्षों से कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।
डाबर में अपनी पिछली भूमिका में वह Digital Marketing Lead के तौर पर काम कर रहे थे। इस जिम्मेदारी के तहत वह कंपनी के हेल्थ केयर और फूड्स एंड बेवरेजेज वर्टिकल्स का डिजिटल मार्केटिंग नेतृत्व संभाल रहे थे।
डाबर से पहले मेहता बागरीज़ (Bagrry's) में Head of Marketing की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह जुबिलेंट फूडवर्क्स (Jubilant FoodWorks) में Head of Digital Marketing के पद पर थे।
भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।
यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।
प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा
DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है।
VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।
भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।
मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन
स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:
मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।
ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।
लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।
फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है
DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।
यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।
उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।
इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?
DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।
IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।
Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।
भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।
हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।
प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?
जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।
चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।
नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।
अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।
भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा
भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।
Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।
बदलाव आ रहा है:
भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।
छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।
AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन
DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।
डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।
OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग
2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।
OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं
स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।
दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।
डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।
भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।
अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे
2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।
भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।
इसके अलावा किसी अनजान ऐप को गैर-जरूरी परमिशन नहीं देनी चाहिए। फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर को भी समय-समय पर अपडेट रखना जरूरी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एंड्रॉयड (Android) यूजर्स के लिए सरकार ने नए मालवेयर खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। यह मालवेयर इंस्टाग्राम (Instagram) और फेसबुक (Facebook) पर दिखने वाले विज्ञापनों के जरिए फैलाया जा रहा है। इनमें कुछ खतरनाक ऐप्स को पोर्न या एडल्ट कंटेंट वाले एप्लिकेशन के रूप में पेश किया जा रहा है।
नेशनल साइबर थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) के मुताबिक, ऐसे कुछ ऐप फोन में वीपीएन इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके जरिए हमलावर डिवाइस के इंटरनेट ट्रैफिक को अपने नियंत्रण वाले सर्वर से गुजार सकते हैं। इससे फोन से भेजी या प्राप्त की जा रही जानकारी के उजागर होने का खतरा बढ़ जाता है।
खतरा केवल फर्जी ऐप डाउनलोड करने तक सीमित नहीं है। ऐप इंस्टॉल करने के बाद अगर यूजर उसे जरूरत से ज्यादा परमिशन दे देता है, तो मालवेयर एंड्रॉयड डिवाइस पर व्यापक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकता है। इससे निजी जानकारी के साथ वित्तीय डेटा भी खतरे में पड़ सकता है।
सरकारी चेतावनी के मुताबिक, ऐसे खतरनाक ऐप संवेदनशील जानकारी हासिल करने, संचार को इंटरसेप्ट करने या बिना अनुमति वित्तीय लेनदेन कराने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। खासतौर पर तब जोखिम बढ़ जाता है, जब यूजर किसी अनजान ऐप को सिर्फ उसके बताए कंटेंट तक पहुंचने के लिए व्यापक परमिशन दे देता है।
यूजर्स को सोशल मीडिया विज्ञापनों या अनजान वेबसाइटों से प्रमोट किए जा रहे APK फाइल डाउनलोड करने से बचना चाहिए। खासकर उन ऐप्स से सावधान रहना जरूरी है, जो आधिकारिक ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा किसी अनजान ऐप को गैर-जरूरी परमिशन नहीं देनी चाहिए। फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर को भी समय-समय पर अपडेट रखना जरूरी है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में ‘ज्ञानी अर्थ’ लॉन्च किया, जिसमें एवॉन 3.3 और प्लेक्सस के जरिए एआई को वास्तविक काम से जोड़ा गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने 28 अगस्त को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में ‘ज्ञानी अर्थ’ (Gnani Artha) लॉन्च किया। इसे जीएनएएनआई एआई (GNANI AI) ने विकसित किया है और यह एक सॉवरेन एआई स्टैक है।
‘ज्ञानी अर्थ’ में दो प्रमुख तकनीकें शामिल हैं-एवॉन 3.3 (Evon 3.3) और प्लेक्सस (Plexus)। एवॉन 3.3 एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल है, जबकि प्लेक्सस ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो एआई की क्षमताओं को वास्तविक दुनिया के काम और संस्थानों से जोड़ने का काम करता है।
लॉन्च के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि एवॉन 3.3 और प्लेक्सस का संयोजन भारत के तेजी से मजबूत होते तकनीकी इकोसिस्टम को दर्शाता है। उनके मुताबिक, भारतीय इंजीनियर अब केवल अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें खुद विकसित करने की क्षमता भी रखते हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने तकनीक के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि कंप्यूटर आने के समय नौकरियां खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन भारत में आईटी क्षेत्र ने बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए। उन्होंने उम्मीद जताई कि एआई भी नए रोजगार और विकास के रास्ते खोलेगा।
उन्होंने भारत में एआई को बढ़ावा देने वाली इंडिया एआई मिशन (IndiaAI Mission) और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। साथ ही डिजिटल संसद (Digital Sansad) का उदाहरण देते हुए बताया कि एआई के जरिए संसदीय बहस और दस्तावेज कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
भारत के डिजिटल भुगतान की पहचान बन चुका UPI 10 साल का हो गया है। एक दशक में इसके ट्रांजैक्शन करीब 13 हजार गुना बढ़े और नेटवर्क 703 बैंकों तक पहुंच गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत की डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी UPI अब अपने सफर के 10 साल पूरे कर चुका है। 25 अगस्त 2016 को शुरू हुई यह सुविधा आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी लेनदेन तक भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुकी है।
UPI की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसकी उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले शुरू हुई UPI व्यवस्था ने भारत की डिजिटल भुगतान यात्रा को नई दिशा दी और इतने बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल देश के लिए गर्व की बात है।
वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के आंकड़ों से UPI के विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है। लॉन्च के बाद वित्त वर्ष 2016-17 में इसके जरिए केवल 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। वहीं 2025-26 में सालाना लेनदेन की संख्या 24,162 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। यानी लगभग एक दशक के दौरान UPI ट्रांजैक्शन में करीब 13 हजार गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
लेनदेन की संख्या के साथ-साथ UPI के जरिए भेजी गई रकम में भी भारी उछाल आया है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के माध्यम से करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था। यह आंकड़ा 2025-26 में बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
जुलाई में बना सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड
UPI का इस्तेमाल हर महीने नए स्तर पर पहुंच रहा है। मई 2026 में पहली बार एक महीने के दौरान 2,300 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे। इस महीने कुल 2,320 करोड़ लेनदेन हुए। इसके बाद जुलाई 2026 में UPI ने एक और ऊंचाई हासिल की और 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।
44 बैंकों से 703 तक पहुंचा नेटवर्क
UPI के विस्तार का असर इससे जुड़े बैंकों की संख्या में भी दिखाई देता है। शुरुआत के वित्त वर्ष 2016-17 में केवल 44 बैंक इस सिस्टम से जुड़े थे। करीब एक दशक बाद वित्त वर्ष 2025-26 में UPI नेटवर्क से जुड़े बैंकों की संख्या बढ़कर 703 हो गई।
UPI की पहुंच अब भारत की सीमाओं से बाहर भी फैल चुकी है। फिलहाल यह UAE (UAE), फ्रांस (France), भूटान (Bhutan), श्रीलंका (Sri Lanka), नेपाल (Nepal), सिंगापुर (Singapore), मॉरीशस (Mauritius), कतर (Qatar), कंबोडिया (Cambodia), ग्रीस (Greece) और मालदीव (Maldives) समेत 11 देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी UPI की भूमिका तेजी से मजबूत हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के अनुसार, 2025 में दुनिया भर के रियल-टाइम पेमेंट (Real-Time Payment) ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी रही।
इस तरह सिर्फ 10 वर्षों में UPI भारत की रोजमर्रा की भुगतान व्यवस्था का हिस्सा बनने के साथ वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुका है।
विजय चौहान को Havas India में AVP – Digital Media नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह एजेंसी में Senior Media Director की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विजय चौहान (Vijay Chauhan) को हवास इंडिया (Havas India) में AVP – Digital Media के पद पर पदोन्नत किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
चौहान इससे पहले हवास इंडिया में Senior Media Director के तौर पर काम कर रहे थे। वह 2023 से एजेंसी के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया, मीडिया प्लानिंग तथा डिजिटल रणनीति के क्षेत्र में अनुभव रखते हैं।
हवास इंडिया में शामिल होने से पहले चौहान ने करीब पांच साल बीसी वेब वाइज (BC Web Wise) के साथ काम किया। इससे पहले वह डिजिटल स्ट्रिंग्स (Digital Strings), मैडिसन कम्युनिकेशंस (Madison Communications) और कस्टमर सेंट्रिया (Customer Centria) जैसी कंपनियों से भी जुड़े रहे हैं।
नई भूमिका में चौहान की जिम्मेदारियों में डिजिटल मीडिया से जुड़े काम और रणनीतिक पहल को आगे बढ़ाना शामिल होगा। उनका अनुभव मीडिया प्लानिंग और डिजिटल स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में रहा है।
फ्लिपकार्ट में वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर दो बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। बिजनेस फाइनेंस और सप्लाई चेन से जुड़े दो अधिकारी अपने पद छोड़ेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर एक बार फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारी गुंजन भारती (Gunjan Bhartia) और अमेर हुसैन (Amer Hussain) अपने मौजूदा पदों से हटने वाले हैं। दोनों अधिकारियों ने हाल ही में फ्लिपकार्ट जॉइन किया था और उनके जाने से कंपनी के नेतृत्व में एक और बदलाव जुड़ जाएगा।
गुंजन भारती वर्तमान में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट- बिजनेस फाइनेंस के पद पर हैं। उन्होंने दिसंबर 2025 में फ्लिपकार्ट के साथ अपनी पारी शुरू की थी। वहीं, अमेर हुसैन जनवरी 2026 में कंपनी से जुड़े थे और वह ग्रॉसरी एवं मिनट्स कारोबार के लिए सप्लाई चेन के वाइस प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इन दोनों अधिकारियों का जाना ऐसे समय हो रहा है, जब फ्लिपकार्ट ग्रुप में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई वरिष्ठ स्तर के बदलाव हुए हैं। मिंत्रा (Myntra) की सीईओ नंदिता सिन्हा (Nandita Sinha) फ्लिपकार्ट से निकलकर स्विगी (Swiggy) के इंस्टामार्ट कारोबार से जुड़ी हैं। वहीं, फ्लिपकार्ट के पुराने अधिकारी अंकित जैन (Ankit Jain) ने भी स्विगी में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-ऑपरेशंस का पद संभाला है।
इसके अलावा फ्लिपकार्ट ग्रुप के सीएफओ श्रीराम वेंकटरमण (Sriram Venkatraman) भी अपना पद छोड़ चुके हैं। कंपनी में ये बदलाव ऐसे वक्त हो रहे हैं, जब फ्लिपकार्ट का फोकस मुनाफे को बेहतर करने पर है। इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ (IPO) को आगे खिसकाए जाने की बात भी सामने आई थी।
भारत में साइबर ठगी के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने Google से उसके Firebase प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में साइबर ठगी के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने Google से उसके Firebase प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि इनका इस्तेमाल लोगों को बड़े बैंकों के नाम पर ठगने, मोबाइल से संवेदनशील जानकारी चुराने और मैलवेयर फैलाने के लिए किया जा रहा था।
Reuters की ओर से देखे गए तीन सरकारी नोटिस के मुताबिक, Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने सिर्फ अगस्त महीने में Firebase पर मौजूद कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने के निर्देश दिए।
बड़े बैंकों की फर्जी वेबसाइट बनाकर हो रही थी ठगी
जिन वेबसाइट्स की पहचान की गई, उनमें से कम से कम सात वेबसाइट्स प्रमुख भारतीय बैंकों की नकल करती थीं। इनमें State Bank of India (SBI), ICICI Bank और Axis Bank जैसे बैंकों के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
इन फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों से बैंकिंग और दूसरी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ वेबसाइट्स का इस्तेमाल चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, OTP और दूसरी निजी जानकारी इकट्ठा करने के लिए भी किया जा रहा था।
ऑफर का लालच देकर डाउनलोड करवाए जा रहे थे ऐप
जालसाज Android यूजर्स को अलग-अलग तरह के ऑफर देकर अपने जाल में फंसा रहे थे। इनमें नए क्रेडिट कार्ड, रिवॉर्ड रिडीम करने और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने जैसे ऑफर शामिल थे। इन ऑफर्स के जरिए यूजर्स को ऐसे मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था, जो देखने में बैंकिंग ऐप जैसे लगते थे। लेकिन आरोप है कि ये ऐप असल में मैलिशियस सॉफ्टवेयर थे।
ऐप फोन में इंस्टॉल होने के बाद यूजर की संवेदनशील जानकारी को जालसाजों तक पहुंचा सकता था।
PM-KISAN के नाम पर भी बनाया गया ठगी का जाल
एक मामले में जालसाजों ने केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना का भी इस्तेमाल किया। लोगों को योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद का लालच देकर एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा गया। ऐप को भुगतान का दावा करने के लिए जरूरी बताया गया था।
आरोप है कि ऐप इंस्टॉल होने के बाद वह यूजर के मोबाइल से जानकारी लेकर उसे जालसाजों द्वारा नियंत्रित Firebase डेटाबेस तक भेज सकता था।
Google को लगातार भेजे जा रहे नोटिस
Reuters के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में सरकार ने Firebase से जुड़े मामलों को लेकर Google को दर्जनों नोटिस भेजे हैं।
Google ने कहा है कि उसकी पॉलिसीज फिशिंग, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाती हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि वह I4C समेत कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है और उनके भेजे गए कंटेंट हटाने के अनुरोधों पर कार्रवाई करती है।
Firebase की लोकप्रियता का फायदा उठा रहे जालसाज
Firebase एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसका इस्तेमाल डेवलपर्स ऐप्स और वेबसाइट्स बनाने और उन्हें होस्ट करने के लिए करते हैं। इसमें डेटाबेस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि साइबर ठगी करने वाले लोग दूसरे मुफ्त डेवलपमेंट टूल्स से Firebase की तरफ तेजी से बढ़े हैं। इसकी एक वजह प्लेटफॉर्म की मुफ्त सुविधाएं और डेटाबेस क्षमता बताई जा रही है। हालांकि, Firebase का इस्तेमाल सामान्य तौर पर वैध ऐप्स और वेबसाइट्स बनाने के लिए भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। कार्रवाई उन वेबसाइट्स और डेटाबेस के खिलाफ है, जिनके बारे में अधिकारियों ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की पहचान की है।
भारत में बढ़ रही है ऑनलाइन ठगी की चिंता
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत में ऑनलाइन फ्रॉड लगातार बड़ी चिंता बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में लोगों को कथित ऑनलाइन ठगी के कारण करीब 2.4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
बैंकों और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाकर लोगों को निशाना बनाना साइबर ठगों के तरीकों में शामिल है। ऐसे में सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें हटाने पर जोर दे रही हैं। Firebase से जुड़ी यह कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है, जिसमें सरकार ने Google से ऐसे प्लेटफॉर्म और लिंक हटाने को कहा है जिनका इस्तेमाल लोगों की वित्तीय और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा रहा था।
बैंकों और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाकर लोगों को निशाना बनाना साइबर ठगों के तरीकों में शामिल है। ऐसे में सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें हटाने पर जोर दे रही हैं।
Firebase से जुड़ी यह कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है, जिसमें सरकार ने Google से ऐसे प्लेटफॉर्म और लिंक हटाने को कहा है जिनका इस्तेमाल लोगों की वित्तीय और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा रहा था।
क्विंट डिजिटल ने करीब ₹90.88 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने की घोषणा की है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 को BSE को दी जानकारी में बताया कि उसकी राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त को Letter of Offer को मंजूरी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल (Quint Digital Limited) ने करीब ₹90.88 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने की घोषणा की है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 को BSE को दी जानकारी में बताया कि उसकी राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त को Letter of Offer को मंजूरी दी है। कंपनी ने यह Letter of Offer BSE के समक्ष जमा किया है।
इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कहां होगा?
कंपनी के मुताबिक, इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद उसे करीब ₹8,936.12 लाख यानी ₹89.36 करोड़ की शुद्ध प्राप्ति होने का अनुमान है। सकल इश्यू से करीब ₹151.43 लाख यानी ₹1.51 करोड़ इश्यू से जुड़े खर्चों में जाने का अनुमान है।
शुद्ध प्राप्ति का इस्तेमाल तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए प्रस्तावित है:
RB Diversified का ₹40.50 करोड़ का कर्ज चुकाएगी कंपनी
Letter of Offer के मुताबिक, Quint Digital ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कारोबार और निवेश से जुड़ी जरूरतों के लिए RB Diversified Private Limited से असुरक्षित ऋण लिया था। 31 जुलाई 2026 तक इस ऋण के तहत बकाया रकम ₹4,050 लाख यानी ₹40.50 करोड़ थी। इस ऋण पर 11.50% सालाना ब्याज लगता है।
कंपनी ने इस ऋण की पूरी रकम को राइट्स इश्यू से मिलने वाली शुद्ध प्राप्ति से चुकाने का प्रस्ताव रखा है। दस्तावेज के मुताबिक, इस भुगतान से कंपनी की बकाया देनदारी और ऋण चुकाने से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि RB Diversified Private Limited, Quint Digital की प्रमोट ग्रुप कंपनी है। Letter of Offer में कहा गया है कि इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹40.50 करोड़ तक की राशि सीधे RB Diversified Private Limited को चुकाई जाएगी।
360 One Prime का ₹18 करोड़ का कर्ज भी चुकाएगी कंपनी
कंपनी ने 360 One Prime Limited से भी सुरक्षित ऋण (Secured Loan) लिया हुआ है। 31 जुलाई 2026 तक इन ऋणों के तहत कुल बकाया रकम ₹2,310.15 लाख यानी ₹23.10 करोड़ थी। कंपनी ने इसमें से ₹1,800 लाख यानी ₹18 करोड़ राइट्स इश्यू से मिलने वाली रकम से चुकाने का प्रस्ताव रखा है।
इस ऋण पर 11% सालाना ब्याज है और दस्तावेज में इसकी अदायगी की तारीख 26 अक्टूबर 2028 बताई गई है। कंपनी के मुताबिक, इस प्रस्तावित अदायगी से कंपनी की बकाया देनदारियां और कर्ज चुकाने से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिलेगी।
भविष्य के अधिग्रहण के लिए ₹30.86 करोड़
कंपनी करीब ₹30.86 करोड़ का इस्तेमाल अभी तय नहीं किए गए अधिग्रहण और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करना चाहती है। दस्तावेज के मुताबिक, अधिग्रहण के लिए रखी गई यह रकम भविष्य में अधिग्रहण, निवेश या अन्य रणनीतिक अवसरों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, जिन्हें कंपनी का बोर्ड समय-समय पर पहचानकर मंजूरी देगा।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि Letter of Offer जारी होने की तारीख तक ऐसे किसी अधिग्रहण या निवेश के संबंध में कोई बाध्यकारी समझौता (Binding Arrangement) या अंतिम समझौता (Definitive Agreement) नहीं किया गया है।
दस्तावेज के मुताबिक, इस मद के तहत इस्तेमाल की जाने वाली रकम सकल प्राप्ति (Gross Proceeds) के 35% से ज्यादा नहीं होगी। वहीं किसी एक उद्देश्य के लिए खर्च की जाने वाली रकम सकल प्राप्ति के 25% से अधिक नहीं होगी।
रकम के इस्तेमाल का प्रस्तावित समय
कंपनी ने शुद्ध प्राप्ति (Net Proceeds) के इस्तेमाल का अनुमानित कार्यक्रम भी दिया है। इसके तहत ₹40.50 करोड़ के असुरक्षित ऋण की अदायगी वित्त वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित है। वहीं 360 One Prime के ₹18 करोड़ के सुरक्षित ऋण की अदायगी वित्त वर्ष 2031-32 में प्रस्तावित है।
इसके अलावा, अभी तय नहीं किए गए अधिग्रहण और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए रखे गए ₹30.86 करोड़ में से ₹4.94 करोड़ वित्त वर्ष 2026-27, ₹4.13 करोड़ वित्त वर्ष 2027-28 और ₹21.79 करोड़ वित्त वर्ष 2031-32 में इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है।
कंपनी ने साथ ही कहा है कि धन की यह जरूरत और रकम के इस्तेमाल की योजना उसके प्रबंधन के अनुमान (Management Estimates), मौजूदा बिजनेस प्लान और अन्य कारोबारी व तकनीकी परिस्थितियों पर आधारित है। इनका किसी बैंक या वित्तीय संस्था ने स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन (Appraisal) नहीं किया है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
Letter of Offer में दिए गए ऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरण के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में Quint Digital का कारोबार से कुल राजस्व (Total Revenue from Operations) ₹8,12,255 हजार रहा। 31 मार्च 2025 को यह ₹3,18,114 हजार था।
वित्त वर्ष 2025-26 में टैक्स और असाधारण मदों (Extraordinary Items) के बाद कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) ₹4,15,489 हजार रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी को ₹3,32,931 हजार का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ था।
वहीं, 30 जून 2026 को समाप्त तीन महीने की अवधि के सीमित समीक्षा किए गए कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरण (Limited Reviewed Consolidated Financial Statements) के मुताबिक, कारोबार से कुल राजस्व ₹3,47,973 हजार और टैक्स व असाधारण मदों के बाद शुद्ध घाटा (Net Loss) ₹29,685 हजार रहा।
कंपनी के प्रमुख शेयरधारक
30 जून 2026 तक कंपनी के 1% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख शेयरधारकों में Raghav Bahl के पास 1,38,60,426 शेयर (29.36%) थे। वहीं Ritu Kapur के पास 78,71,171 शेयर (16.67%) की हिस्सेदारी थी।
इसके अलावा Mohan Lal Jain के पास 8.28%, RB Diversified Private Limited के पास 8.26%, Unico Global Opportunities Fund Limited के पास 7.44%, Genesis Grand General Trading L.L.C के पास 4.33%, Madhu Sudan Goyal के पास 5.91% और Smita Soni के पास 1.08% हिस्सेदारी थी। इन सभी प्रमुख शेयरधारकों के पास कुल 81.32% हिस्सेदारी थी।
BSE से मिल चुकी है इन-प्रिंसिपल मंजूरी
राइट्स इश्यू के तहत जारी होने वाली राइट्स सिक्योरिटीज (Rights Securities) की लिस्टिंग के लिए कंपनी को BSE से इन-प्रिंसिपल मंजूरी (In-Principle Approval) मिल चुकी है। यह मंजूरी 14 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए दी गई थी।
कंपनी के मुताबिक, राइट्स इश्यू को लेकर बोर्ड ने 22 मई 2026 को प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त 2026 को Letter of Offer और इश्यू की शर्तों को मंजूरी दी।
इश्यू की अहम तारीखें
Letter of Offer में दिए गए कार्यक्रम के मुताबिक, राइट्स इश्यू 2 सितंबर 2026 को खुलेगा और 10 सितंबर 2026 को बंद होगा। रिकॉर्ड डेट 25 अगस्त 2026 तय की गई है। वहीं राइट्स एंटाइटलमेंट (Rights Entitlements) को डीमैट खातों (Demat Accounts) में 26 अगस्त 2026 तक क्रेडिट किए जाने का कार्यक्रम है।
टैक्स मामले का भी खुलासा
Letter of Offer में कंपनी से जुड़े एक कर मामले (Tax Proceeding) का भी खुलासा किया गया है। दस्तावेज के मुताबिक, 28 मार्च 2026 को आकलन वर्ष (Assessment Year) 2024-25 के लिए एक आकलन आदेश (Assessment Order) पारित किया गया था, जिसमें ₹27,44,649 के ब्याज खर्च (Interest Expense) को कर कटौती (Deduction) के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया।
इसके बाद ₹10,70,427 की कर मांग (Tax Demand) उठाई गई, जिसे कंपनी ने तय समय के भीतर जमा कर दिया। दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि 15 मई 2026 के आदेश के जरिए जुर्माने (Penalty) से राहत (Immunity) मांगने वाली कंपनी की अर्जी (Application) स्वीकार कर ली गई।
कंपनी ने निवेशकों को क्या सलाह दी?
Letter of Offer में कंपनी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे राइट्स इश्यू से जुड़े दस्तावेज और जोखिम कारकों (Risk Factors) को ध्यान से पढ़ने के बाद ही निवेश का फैसला लें। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इश्यू से जुड़े दस्तावेज में दी गई जानकारी के आधार पर निवेशकों को अपनी स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।
Quint Digital ने अधिकतम ₹90.88 करोड़ जुटाने के लिए यह राइट्स इश्यू पेश किया है। कंपनी को इश्यू से जुड़े खर्चों के बाद करीब ₹89.36 करोड़ की शुद्ध प्राप्ति (Net Proceeds) होने का अनुमान है।
प्रस्तावित इस्तेमाल के तहत ₹40.50 करोड़ RB Diversified Private Limited से लिए गए असुरक्षित ऋण की अदायगी, ₹18 करोड़ 360 One Prime Limited से लिए गए सुरक्षित ऋण की अदायगी और ₹30.86 करोड़ भविष्य के अधिग्रहण तथा सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए रखे गए हैं।
गूगल भारत में योग्य कॉलेज स्टूडेंट्स को AI प्लस का 12 महीने का सब्सक्रिप्शन मुफ्त दे रहा है। इसमें जेमिनी के कई स्टडी टूल्स और 400GB स्टोरेज मिलेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने भारत में कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए बड़ा ऑफर पेश किया है। कंपनी योग्य छात्रों को गूगल AI प्लस (Google AI Plus) का 12 महीने का सब्सक्रिप्शन मुफ्त दे रही है। भारत में इस प्लान की सामान्य कीमत 399 रुपये प्रति माह है, यानी सालभर में करीब 4,800 रुपये का खर्च आता है।
इस ऑफर के तहत स्टूडेंट्स को जेमिनी (Gemini) की ज्यादा इस्तेमाल सीमा के साथ 400GB क्लाउड स्टोरेज मिलेगा। इसके अलावा पढ़ाई के लिए डिजाइन किए गए कई AI फीचर्स भी उपलब्ध होंगे, जिनकी मदद से छात्र नोट्स तैयार करने, विषयों को समझने और परीक्षा की तैयारी करने जैसे काम कर सकेंगे।
पढ़ाई के लिए मिलेंगे AI टूल्स
गूगल AI प्लस के साथ छात्रों को जेमिनी में स्टूडेंट हब, स्टडी नोटबुक, फ्लैशकार्ड और प्रैक्टिस क्विज जैसे फीचर्स मिलेंगे। छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़ी सामग्री और नोट्स अपलोड करके उनके आधार पर स्टडी प्लान तैयार करवा सकेंगे।
जेमिनी छात्रों की तैयारी के स्तर को समझने के लिए कस्टम क्विज भी तैयार कर सकता है। इससे छात्र अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन विषयों पर ज्यादा अभ्यास कर सकेंगे।
इसके अलावा मुश्किल विषयों को आसान तरीके से समझाने के लिए 3D मॉडल, टेबल और अन्य विजुअल तैयार किए जा सकेंगे। जेमिनी लाइव में डीप रिसर्च फीचर की मदद से छात्र किसी विषय पर विस्तृत जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने में भी सहायता ले सकेंगे।
ऐसे मिलेगा मुफ्त सब्सक्रिप्शन
भारत में योग्य कॉलेज स्टूडेंट्स इस ऑफर का लाभ लेने के लिए पहले अपनी स्टूडेंट पात्रता का सत्यापन करा सकते हैं। इसके बाद गूगल की ओर से दिए गए साइन-अप निर्देशों को पूरा करना होगा।
ऑफर लेने से पहले छात्रों को पात्रता की शर्तों, सत्यापन प्रक्रिया और मुफ्त अवधि खत्म होने के बाद लागू होने वाली शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
12 महीने की मुफ्त अवधि पूरी होने के बाद सब्सक्रिप्शन सामान्य शुल्क पर जारी हो सकता है। इसलिए छात्रों को यह भी जांच लेना चाहिए कि मुफ्त अवधि समाप्त होने के बाद उनके खाते पर किस तरह की बिलिंग लागू होगी।
एडटेक कंपनी VDO.AI ने NDTV के साथ अपनी पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल न्यूज की दुनिया में अब सिर्फ ज्यादा विज्ञापन दिखाना ही कमाई बढ़ाने का तरीका नहीं रह गया है। कोशिश यह है कि विज्ञापन ऐसे दिखें, जो यूजर के कंटेंट पढ़ने के अनुभव को खराब न करें और साथ ही पब्लिशर्स के लिए कमाई के नए रास्ते खोलें। इसी दिशा में एडटेक कंपनी VDO.AI ने NDTV के साथ अपनी पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाया है।
इस पार्टनरशिप के तहत VDO.AI के दो खास विज्ञापन फॉर्मेट VDO Native Video और VDO Ticker अब NDTV के न्यूज प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि इन फॉर्मेट्स का मकसद वीडियो से होने वाली कमाई बढ़ाने के साथ-साथ यूजर्स की एंगेजमेंट को भी बेहतर करना है।
पढ़ते-पढ़ते दिखेगा Native Video विज्ञापन
VDO Native Video को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न्यूज आर्टिकल के बीच कंटेंट के माहौल में ही फिट हो जाए। यानी विज्ञापन यूजर के पढ़ने के अनुभव को अचानक रोकने के बजाय उसी के साथ दिखाई देता है।
कंपनी का दावा है कि इससे वीडियो विज्ञापन ज्यादा सहज तरीके से यूजर तक पहुंच सकते हैं और पब्लिशर को वीडियो इन्वेंट्री से अतिरिक्त कमाई का मौका मिलता है।
वहीं VDO Ticker एक स्क्रॉल-सिंक्रोनाइज्ड हेडलाइन फॉर्मेट है। इसका उद्देश्य यूजर्स को वेबसाइट पर मौजूद दूसरे कंटेंट की तरफ ले जाना है। इससे ज्यादा आर्टिकल पढ़े जाने, यूजर के वेबसाइट पर ज्यादा समय बिताने और एक पेज से दूसरे पेज पर जाने की संभावना बढ़ सकती है।
विज्ञापन दिखाने में Context का रखा जाएगा ध्यान
VDO.AI के मुताबिक, इन फॉर्मेट्स में Contextual Delivery, Frequency Controls और Viewability-focused Technology का इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो विज्ञापन को कंटेंट के संदर्भ के हिसाब से दिखाने, एक ही विज्ञापन को बार-बार दिखाने से बचने और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि विज्ञापन यूजर को ठीक से दिखाई दे।
इसका मकसद प्रीमियम न्यूज प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं को बेहतर ऑडियंस तक पहुंचाना है, लेकिन इसके साथ ही पाठकों के अनुभव का भी ध्यान रखना है।
डिजिटल पब्लिशर्स के सामने बड़ी चुनौती
दरअसल, डिजिटल पब्लिशर्स के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती है। उन्हें विज्ञापन से कमाई बढ़ानी है, लेकिन अगर वेबसाइट पर बहुत ज्यादा या परेशान करने वाले विज्ञापन दिखने लगें तो यूजर का अनुभव खराब हो सकता है।
ऑनलाइन न्यूज पढ़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ पब्लिशर्स के सामने यह सवाल भी है कि वे अपनी वेबसाइट पर मौजूद ऑडियंस की वैल्यू कैसे बढ़ाएं। ऐसे में अब जोर ज्यादा विज्ञापन लगाने के बजाय बेहतर और ज्यादा उपयोगी विज्ञापन अनुभव तैयार करने पर है।
‘Engagement’ को कमाई का अहम हिस्सा मानती है VDO.AI
VDO.AI के को-फाउंडर अर्जित सचदेवा ने कहा कि कंपनी के लिए मोनेटाइजेशन में एंगेजमेंट सबसे अहम है। उनके मुताबिक, जब यूजर वास्तव में कंटेंट से जुड़ा होता है, तभी लंबे समय तक टिकने वाली वैल्यू तैयार की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि NDTV के साथ लंबे समय से चल रही पार्टनरशिप कंपनी के उस नजरिए को दिखाती है, जिसमें एडटेक को सिर्फ ज्यादा विज्ञापन इन्वेंट्री बनाने के बजाय ऑडियंस के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
NDTV के लिए यूजर का भरोसा सबसे अहम
NDTV के VP-Product Monetisation and Analytics दिनेश जोशी ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला कोई भी विज्ञापन ऐसा होना चाहिए, जो यूजर के भरोसे और उसके समय का सम्मान करे।
उन्होंने कहा कि VDO.AI का Native Video और Contextual Delivery पर फोकस NDTV की उस रणनीति के साथ मेल खाता है, जिसमें पाठकों के साथ लंबे समय से बने भरोसे को बनाए रखते हुए मोनेटाइजेशन के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
डिजिटल विज्ञापन में बदल रहा है कमाई का तरीका
NDTV और VDO.AI की यह पार्टनरशिप डिजिटल पब्लिशिंग में हो रहे बड़े बदलाव की ओर भी इशारा करती है। अब पब्लिशर्स के लिए कमाई का मतलब सिर्फ वेबसाइट के किसी पेज पर ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन लगाना नहीं है।
फोकस इस बात पर है कि विज्ञापन ज्यादा प्रासंगिक, बेहतर तरीके से दिखाई देने वाले और कंटेंट के अनुभव के साथ जुड़े हुए हों। इससे एक तरफ विज्ञापनदाताओं को बेहतर ऑडियंस मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ पब्लिशर्स अपनी डिजिटल कमाई बढ़ा सकते हैं।
NDTV और VDO.AI के बीच पार्टनरशिप का यह विस्तार इसी सोच को आगे बढ़ाता है—यूजर का ध्यान और भरोसा बनाए रखते हुए उसकी एंगेजमेंट को ऐसी वैल्यू में बदलना, जिससे पब्लिशर और विज्ञापनदाता दोनों को फायदा हो और पाठक के अनुभव पर भी नकारात्मक असर न पड़े।