गूगल ने लॉन्च किए जेमिनी 3.8 फ्लैश और 3.8 फ्लैश साइबर मॉडल

गूगल ने जेमिनी 3.8 फ्लैश और 3.8 फ्लैश साइबर मॉडल लॉन्च किए हैं। नए मॉडल कोडिंग, रीजनिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन का दावा करते हैं।

Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
Google Gemini 3.8 Flash


गूगल (Google) ने अपने जेमिनी एआई मॉडल की नई सीरीज में जेमिनी 3.8 फ्लैश (Gemini 3.8 Flash) और जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर (Gemini 3.8 Flash Cyber) लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, नए मॉडल पिछले संस्करणों की तुलना में रीजनिंग, कोडिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इन्हें तेज गति और कम लागत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

गूगल का कहना है कि जेमिनी 3.8 फ्लैश उसका अब तक का सबसे सक्षम फ्लैश मॉडल है। इसे कई तरह के जटिल और लंबे कामों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

जेमिनी 3.8 फ्लैश को खास तौर पर कोडिंग और जटिल सवालों को हल करने के लिए विकसित किया गया है। यह लंबे और कई चरणों वाले कामों को संभाल सकता है। जरूरत के अनुसार मॉडल ज्यादा रीजनिंग कर सकता है और जवाब को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध टूल्स का इस्तेमाल भी कर सकता है।

गूगल के अनुसार, यह मॉडल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय विश्लेषण और कानूनी रीजनिंग जैसे कामों में पिछले मॉडल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है। जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर को विशेष रूप से साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने और उन्हें ठीक करने के लिए सुरक्षा पैच तैयार करने में मदद कर सकता है।

कंपनी के मुताबिक, यह अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे कोड में सुरक्षा खामियों को पहचानने में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर हमले करना नहीं, बल्कि डेवलपर्स और सुरक्षा टीमों को सॉफ्टवेयर की सुरक्षा मजबूत करने में मदद करना है।

जेमिनी 3.8 फ्लैश को अब उन डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है, जो एआई ऐप, स्वायत्त एजेंट और कोडिंग टूल विकसित करना चाहते हैं। वहीं, जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर की उपलब्धता फिलहाल कुछ चुनिंदा संगठनों तक सीमित है। इसे गूगल के फेयरविंड कार्यक्रम (Fairwind Program) के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

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न्यूयॉर्क के स्कूलों में एआई पर लगी एक साल की रोक

न्यूयॉर्क सिटी के सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में छात्रों के लिए 40 एजुकेशन एआई टूल्स के इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगाई गई है, जबकि शिक्षकों को कुछ कामों में अनुमति होगी।

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Thursday, 03 September, 2026
schoolbanai

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी (New York City) के अधिकारियों ने स्कूलों में इसके उपयोग को लेकर सख्त फैसला लिया है। शहर के सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में छात्रों द्वारा करीब 40 एजुकेशन एआई टूल्स के इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है।

यह फैसला अमेरिका में स्कूलों के भीतर एआई के इस्तेमाल को लेकर अब तक उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है। इसका असर कक्षा 8 तक के छात्रों पर पड़ेगा। हालांकि, हाई स्कूल के छात्रों को कुछ परिस्थितियों में एआई का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) ने बुधवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए शिक्षकों के साथ जुड़ाव की जरूरत है। छात्रों को अपने साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने और शिक्षकों से नई चीजें समझने का अवसर मिलना चाहिए।

सिटी प्रशासन के अनुसार, शिक्षकों को अपनी योजना बनाने और शेड्यूल तैयार करने जैसे कामों के लिए एआई के इस्तेमाल की अनुमति रहेगी। वहीं छात्रों के लिए कक्षा में इस्तेमाल किए जा रहे 40 एजुकेशन एआई टूल्स पर फिलहाल रोक लागू होगी।

इस फैसले पर एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न्यूयॉर्क के इस कदम के बाद लॉस एंजिल्स (Los Angeles) समेत अमेरिका के कई अन्य शहरों में भी स्कूलों में एआई के इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा की जा रही है।

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यूट्यूब टीवी का बड़ा अपडेट : ईएसपीएन अनलिमिटेड से जुड़ा प्लेटफॉर्म

यूट्यूब टीवी ने ईएसपीएन अनलिमिटेड को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। सब्सक्राइबर्स को लाइव स्पोर्ट्स, स्टूडियो शो, डॉक्यूमेंट्री और कई नए फीचर्स एक ही ऐप पर मिलेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
youtubetv

यूट्यूब टीवी (YouTube TV) ने अपने प्लेटफॉर्म पर ईएसपीएन अनलिमिटेड (ESPN Unlimited) का कंटेंट जोड़ दिया है। इस इंटीग्रेशन के बाद सब्सक्राइबर्स को यूट्यूब टीवी ऐप के भीतर ही लाइव स्पोर्ट्स, स्टूडियो प्रोग्रामिंग और डॉक्यूमेंट्री की ज्यादा रेंज देखने को मिलेगी।

1 सितंबर को घोषित किया गया यह इंटीग्रेशन उन यूजर्स के लिए उपलब्ध है, जिन्होंने यूट्यूब टीवी का मुख्य प्लान या ऐसा कोई अन्य प्लान लिया है, जिसमें स्पोर्ट्स की सुविधा शामिल है।

इसके बाद दर्शक यूएस ओपन (US Open) टेनिस टूर्नामेंट, एनसीएए कॉलेज फुटबॉल (NCAA College Football), पीजीए टूर (PGA Tour) गोल्फ, डब्ल्यूडब्ल्यूई प्रीमियम लाइव इवेंट्स (WWE Premium Live Events), ला लिगा (LALIGA) और आउट-ऑफ-मार्केट एनएचएल (NHL) गेम्स जैसे मुकाबले देख सकेंगे।

ईएसपीएन अनलिमिटेड के जरिए दर्शकों को सिर्फ लाइव स्पोर्ट्स ही नहीं, बल्कि स्टूडियो प्रोग्रामिंग भी मिलेगी। इसमें द रिच आइजन शो (The Rich Eisen Show), ईएसपीएन ओरिजिनल्स एंड फिल्म्स (ESPN Originals and Films) और ईएसपीएन की 30 फॉर 30 डॉक्यूमेंट्री लाइब्रेरी (ESPN's 30 for 30 documentary library) शामिल है।

यूट्यूब टीवी के अनलिमिटेड डीवीआर (Unlimited DVR), की प्लेज (Key Plays), स्कोर और स्टैटिस्टिक्स तथा मल्टीव्यू (Multiview) जैसे फीचर्स भी ईएसपीएन अनलिमिटेड के कंटेंट के साथ काम करेंगे।

यूट्यूब टीवी ने अपने फैंटेसी व्यू (Fantasy View) फीचर को ईएसपीएन फैंटेसी फुटबॉल (ESPN Fantasy Football) तक भी बढ़ाया है। ईएसपीएन फैंटेसी फुटबॉल अकाउंट वाले यूजर्स इसे यूट्यूब टीवी की सेटिंग्स के जरिए लिंक कर सकेंगे। इसके बाद वे लाइव एनएफएल (NFL) गेम देखते समय अपनी फैंटेसी टीम को भी ट्रैक कर पाएंगे।

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टिम कुक ने छोड़ी एपल की कमान : जॉन टर्नस बने नए सीईओ

एपल में करीब डेढ़ दशक बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। टिम कुक ने सीईओ पद छोड़ा और जॉन टर्नस ने कंपनी की कमान संभाली। कुक अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहेंगे।

Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
appleceo

एपल (Apple) में करीब 15 साल बाद नेतृत्व का बड़ा बदलाव हुआ है। टिम कुक (Tim Cook) ने कंपनी के सीईओ (CEO) पद से विदाई ले ली। अब जॉन टर्नस (John Ternus) ने एपल की कमान संभाल ली है। टिम कुक कंपनी में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन (Executive Chairman) की भूमिका निभाएंगे, जबकि जॉन टर्नस ने 1 सितंबर से सीईओ का पद संभाल लिया है।

टिम कुक करीब 30 साल से एपल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2011 में कंपनी के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली थी। यह बदलाव स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) के निधन से कुछ सप्ताह पहले हुआ था। अब कुक के सीईओ पद से हटने के साथ एपल एक नए नेतृत्व के दौर में पहुंच गया है।

सीईओ के तौर पर अपने आखिरी दिन टिम कुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एपल कम्युनिटी के लिए एक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी भूमिका बदल रही है, लेकिन एपल कम्युनिटी के लिए उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा।

कुक ने कर्मचारियों को लगातार प्रेरित करने के लिए धन्यवाद दिया और अपनी कृतज्ञता जाहिर की। कर्मचारियों को भेजे आखिरी मेमो में उन्होंने स्टीव जॉब्स को भी याद किया और एपल की सफलता का श्रेय कंपनी की पूरी टीम को दिया।

टिम कुक के नेतृत्व में एपल ने कारोबार का बड़े स्तर पर विस्तार किया। सोमवार को कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) 4.5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। इससे एपल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही है।

कुक के कार्यकाल में कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ हार्डवेयर, चिप्स और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी मजबूत किया। इस दौरान एपल वॉच (Apple Watch), एयरपॉड्स (AirPods), होमपॉड (HomePod) और विजन प्रो (Vision Pro) जैसे नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए गए।

जॉन टर्नस ने साल 2001 में एपल के साथ काम शुरू किया था। सीईओ बनने से पहले वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ हार्डवेयर इंजीनियरिंग (Senior Vice President of Hardware Engineering) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

एपल के कई प्रमुख प्रोडक्ट्स के विकास में टर्नस की अहम भूमिका रही है। इनमें मैक (Mac), आईपैड (iPad) और एयरपॉड्स (AirPods) जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। हार्डवेयर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का उनका लंबा अनुभव अब कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में काम आएगा।

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ओरेकल में बड़े जॉब कट की आहट : कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

ओरेकल में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लागत घटाने के लिए कंपनी दुनियाभर में 7 हजार से 10 हजार नौकरियां कम कर सकती है।

Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
oracle layoff

अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी ओरेकल (Oracle) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी लागत कम करने के लिए दुनियाभर में कर्मचारियों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। इस संभावित फैसले का असर भारत में काम कर रहे कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ओरेकल ने अपनी टीमों को बजट कम करने के संकेत दिए हैं। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों के बीच संभावित जॉब कट को लेकर हलचल बढ़ गई है।

ओरेकल कितने कर्मचारियों को नौकरी से हटा सकती है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी दुनियाभर में करीब 7 हजार से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है।

भारत में इस संभावित छंटनी से कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे, फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है। इससे पहले भी ओरेकल में कर्मचारियों की टीम और भूमिकाओं में बदलाव की खबरें सामने आई थीं।

ओरेकल एक अमेरिका आधारित अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी दूसरी कंपनियों और बड़े संस्थानों को क्लाउड (Cloud), डेटाबेस (Database) और बिजनेस सॉफ्टवेयर (Business Software) जैसी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

भारत में भी ओरेकल का कारोबार मौजूद है और यहां कंपनी में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर छंटनी का फैसला लिया जाता है, तो भारत में इसके प्रभाव को लेकर भी नजर बनी हुई है।

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भारत की सेमीकंडक्टर योजना को मिली रफ्तार: सेमीकॉन 2.0 शुरू

सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1,27,500 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।

Last Modified:
Monday, 31 August, 2026
semicon2.0

भारत में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) इंडस्ट्री को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सरकार ने ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके साथ ही 1,27,500 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में केवल चिप निर्माण बढ़ाना नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें घरेलू स्तर पर चिप डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) विकसित करने के साथ उपकरण, मटीरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और टैलेंट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जाएगा।

चिप निर्माण से लेकर डिजाइन तक पर फोकस

सेमीकंडक्टर को दुनिया भर में तेजी से रणनीतिक संसाधन के तौर पर देखा जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में तेजी आई है।

इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में कमजोरियों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत को बढ़ाया है। ऐसे में कई कंपनियां कुछ चुनिंदा देशों पर उत्पादन के लिए अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं।

केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने 15 जुलाई 2026 को ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी थी। अब जारी नोटिफिकेशन में योजना के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के इस्तेमाल, इंसेंटिव (Incentive) और अलग-अलग श्रेणियों के लिए पात्रता से जुड़ी रूपरेखा बताई गई है।

आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली इंडस्ट्री तैयार करना बताया।

स्टार्टअप्स और कंपनियों को भी मिलेगा समर्थन

कमर्शियल सेक्टर के लिए चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के स्वामित्व वाली कंपनियां योजना के लिए पात्र होंगी।

स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता ग्रांट (Grant) और इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट (Equity Co-investment) के रूप में दी जाएगी। वहीं कंपनियों के लिए सहायता रॉयल्टी फाइनेंसिंग (Royalty Financing) या इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट के जरिए उपलब्ध होगी।

फैब्स (Fabs) यानी सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। सिलिकॉन फैब्स के लिए 40 फीसदी और कंपाउंड, डिस्प्ले तथा अन्य विशेष फैब्स के लिए 35 फीसदी वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था है। डिस्प्ले फैब्स में एलसीडी (LCD), ओएलईडी (OLED) और माइक्रो एलईडी (Micro LED) जैसी तकनीकें शामिल हैं।

एडवांस्ड पैकेजिंग को भी मिलेगा बढ़ावा

योजना में एटीएमपी/ओएसएटी (ATMP/OSAT) यानी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत एडवांस्ड और पारंपरिक दोनों तरह की पैकेजिंग को समर्थन दिया जाएगा।

एडवांस्ड पैकेजिंग के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) का 35 फीसदी और पारंपरिक पैकेजिंग के लिए 25 फीसदी इंसेंटिव देने का प्रावधान है। इससे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ पैकेजिंग क्षमता विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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वॉच-फेस मामले में सैमसंग पर 110 करोड़ का जुर्माना

ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने स्मार्टवॉच वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क मामले में सैमसंग को स्वॉच ग्रुप को 11.6 मिलियन डॉलर मुआवजा देने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Monday, 31 August, 2026
samsung

सैमसंग (Samsung) को स्मार्टवॉच (Smartwatch) के वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क विवाद में बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन की हाई कोर्ट (High Court) ने कंपनी को स्विस घड़ी कंपनी स्वॉच ग्रुप (Swatch Group) को 11.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 110 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह मामला सैमसंग के गैलेक्सी ऐप स्टोर (Galaxy App Store) पर उपलब्ध कुछ वॉच-फेस ऐप्स से जुड़ा है। ये ऐप्स 2015 से 2019 के बीच प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। स्वॉच ग्रुप का आरोप था कि कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स (Third-Party Apps) में उसके लग्जरी घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और ट्रेडमार्क की नकल की गई थी।

स्वॉच ग्रुप के पास ओमेगा (Omega), लॉन्गाइन्स (Longines) और ब्रेगेट (Breguet) जैसे प्रीमियम घड़ी ब्रांड हैं। कंपनी का कहना था कि इन ब्रांड्स के नाम और डिजाइन का इस्तेमाल बिना अनुमति किया गया और सैमसंग के प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स तक ये ऐप्स पहुंचे।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन और यूरोप में इन वॉच-फेस ऐप्स के करीब 1.6 लाख डाउनलोड दर्ज किए गए थे। स्वॉच ग्रुप ने इस मामले में सैमसंग से करीब 170 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

वहीं, सैमसंग का पक्ष था कि उसे इस मामले में केवल करीब 300 डॉलर का भुगतान करना चाहिए। लेकिन अदालत ने कंपनी को प्लेटफॉर्म पर इन ऐप्स की उपलब्धता के लिए जिम्मेदार माना और 11.6 मिलियन डॉलर के मुआवजे का आदेश दिया।

अदालत के मुताबिक, भले ही संबंधित वॉच-फेस ऐप्स थर्ड-पार्टी डेवलपर्स ने बनाए थे, लेकिन उन्हें सैमसंग के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने में कंपनी की भी जिम्मेदारी थी। जज ने कहा कि सैमसंग का ऐप रिव्यू सिस्टम (App Review System) कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन को रोकने में सफल नहीं रहा।

फैसले में लग्जरी ब्रांड्स की पहचान और बाजार में उनकी छवि को भी महत्वपूर्ण माना गया। अदालत के मुताबिक, महंगे घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और पहचान को मुफ्त या बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाने से उनकी वैल्यू और ब्रांड इमेज प्रभावित हो सकती है।

इस मामले का असर सिर्फ सैमसंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह फैसला बड़ी टेक कंपनियों (Tech Companies) के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए होने वाले ट्रेडमार्क उल्लंघन में प्लेटफॉर्म संचालकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठता है।

फिलहाल सैमसंग ने इस फैसले को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है। कंपनी मामले में आगे अपील (Appeal) करने पर विचार कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस विवाद पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

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यूट्यूब से अमेजन प्रोडक्ट बेचकर कमाएंगे क्रिएटर्स: नया फीचर शुरू

यूट्यूब ने अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए अमेजन को अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम से जोड़ा है। वीडियो में प्रोडक्ट टैग कर कमीशन कमाया जा सकेगा।

Last Modified:
Saturday, 29 August, 2026
youtubeshopping

यूट्यूब (YouTube) ने अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम में अमेजन (Amazon) को शामिल कर दिया है। इस नई साझेदारी के बाद अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स अपने शॉर्ट्स, लंबे वीडियो और लाइवस्ट्रीम में अमेजन के चुनिंदा प्रोडक्ट टैग कर सकेंगे। इससे क्रिएटर्स को प्रोडक्ट की सिफारिश के जरिए कमाई का एक नया रास्ता मिलेगा।

यूट्यूब स्टूडियो के प्रोडक्ट पिकर की मदद से क्रिएटर्स उपलब्ध अमेजन प्रोडक्ट चुनकर उन्हें सीधे अपने कंटेंट के साथ जोड़ सकेंगे। अमेजन की ओर से लोकप्रिय और ट्रेंडिंग प्रोडक्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। अगर कोई खास प्रोडक्ट सूची में नहीं है, तो क्रिएटर उसे उपलब्ध कराने के लिए यूट्यूब सपोर्ट से अनुरोध कर सकता है।

अपने आप भी होंगे प्रोडक्ट टैग

इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक टैगिंग की सुविधा भी दी गई है। इसे सक्रिय करने पर यूट्यूब हालिया वीडियो को स्कैन करके उनमें मौजूद योग्य अमेजन प्रोडक्ट की पहचान कर सकता है और उन्हें टैग कर सकता है। आने वाले कंटेंट में भी यह प्रक्रिया अपने आप लागू हो सकती है।

क्रिएटर्स को यूट्यूब स्टूडियो में क्लिक, बिक्री और अनुमानित कमाई का कुल डेटा दिखाई देगा। हालांकि, हर प्रोडक्ट या प्रत्येक वीडियो से हुई बिक्री का अलग-अलग विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा।

अभी अमेरिका तक सीमित है सुविधा

फिलहाल यह सुविधा अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए शुरू की गई है। इसके लिए क्रिएटर का यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम और अमेरिकी यूट्यूब शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम का हिस्सा होना जरूरी है। साथ ही उसके पास सक्रिय अमेजन इन्फ्लुएंसर या अमेजन एसोसिएट्स अकाउंट होना चाहिए।

अमेजन से मिलने वाला कमीशन क्रिएटर के मौजूदा ऐडसेंस भुगतान सिस्टम के जरिए दिया जाएगा। लौटाए गए प्रोडक्ट की वजह से कमीशन में कमी भी हो सकती है। खास बात यह है कि वीडियो देखने वाले सभी लोग अमेरिका से हों, यह जरूरी नहीं है। अमेरिका के बाहर के दर्शकों को भी प्रोडक्ट टैग दिखाई दे सकते हैं। उपलब्ध होने पर यूट्यूब उनके लिए स्थानीय भरोसेमंद विक्रेता का विकल्प दिखा सकता है।

इस साझेदारी से यूट्यूब पर कंटेंट देखने, प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी करने के बीच की दूरी और कम होने वाली है। इससे क्रिएटर इकोसिस्टम में एफिलिएट कमाई का महत्व भी बढ़ सकता है।

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iPhone 18 Pro को लेकर बड़ा अपडेट : सितंबर में बदल सकता है लॉन्च प्लान

Apple की iPhone 18 सीरीज को लेकर नई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। सितंबर 2026 में Pro मॉडल और फोल्डेबल iPhone लॉन्च हो सकते हैं, जबकि स्टैंडर्ड मॉडल 2027 तक टल सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
iphone18pro

ऐपल (Apple) की अगली आईफोन सीरीज (iPhone Series) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को पेश कर सकती है। हालांकि, इस बार लॉन्च को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि ऐपल पूरी iPhone 18 लाइनअप को एक साथ बाजार में न उतारे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर में कंपनी अपने प्रीमियम मॉडल्स के साथ पहली बार फोल्डेबल आईफोन (Foldable iPhone) भी पेश कर सकती है। वहीं, स्टैंडर्ड iPhone 18 और iPhone 18e की लॉन्चिंग को 2027 की शुरुआत तक आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

अगर ऐसा होता है तो सितंबर में नया आईफोन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा। आमतौर पर ऐपल इसी महीने अपनी नई सीरीज के कई मॉडल एक साथ लॉन्च करती रही है। लेकिन इस बार कंपनी पहले महंगे और हाई-एंड मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।

iPhone 18 Pro में मिल सकते हैं बड़े बदलाव

iPhone 18 Pro के डिजाइन को लेकर अभी तक सामने आई जानकारियों के मुताबिक, फोन का मूल डिजाइन मौजूदा Pro मॉडल्स से पूरी तरह अलग नहीं होगा। हालांकि, डिस्प्ले के फ्रंट हिस्से में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

कहा जा रहा है कि iPhone 18 Pro में Dynamic Island (Dynamic Island) का आकार छोटा किया जा सकता है। इसके अलावा Face ID (Face ID) से जुड़े कुछ कंपोनेंट्स को स्क्रीन के नीचे शिफ्ट करने की योजना पर भी काम होने की बात सामने आई है। अगर यह तकनीक लागू होती है, तो फोन का डिस्प्ले ज्यादा साफ और कम बाधित नजर आ सकता है।

A20 Pro चिप हो सकता है सबसे बड़ा अपग्रेड

iPhone 18 Pro में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव फोन के अंदर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें ऐपल का नया A20 Pro (A20 Pro) चिप दिया जा सकता है। यह 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार कंपनी का पहला आईफोन चिप होने की संभावना है।

2nm प्रोसेस का फायदा प्रदर्शन और पावर एफिशिएंसी दोनों में मिल सकता है। आसान भाषा में समझें तो नया प्रोसेसर ज्यादा ताकत के साथ कम ऊर्जा खपत करने में मदद कर सकता है। इसका असर बैटरी बैकअप पर भी देखने को मिल सकता है।

AI फीचर्स (AI Features), कैमरा प्रोसेसिंग और हाई-एंड गेमिंग जैसे कामों में लगातार ज्यादा प्रोसेसिंग पावर की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में A20 Pro को iPhone 18 Pro के सबसे अहम हार्डवेयर अपग्रेड्स में गिना जा रहा है।

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OpenAI की बढ़ी मुश्किलें : हगिंग फेस हैक मामले में समन

हगिंग फेस हैक मामले में अलबामा के अटॉर्नी जनरल ने OpenAI को समन भेजा है। जांच में कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की पड़ताल होगी।

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
openai

अमेरिका के अलबामा (Alabama) राज्य में OpenAI की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राज्य के अटॉर्नी जनरल ने कंपनी को हगिंग फेस (Hugging Face) से जुड़े साइबर सुरक्षा मामले में समन भेजा है। जांच का फोकस OpenAI की कथित सुरक्षा खामियों और कंपनी की ओर से अपने AI सिस्टम की निगरानी को लेकर है।

यह कार्रवाई उस घटना के कुछ सप्ताह बाद हुई है, जिसमें OpenAI ने स्वीकार किया था कि उसका एक अभी तक लॉन्च नहीं किया गया साइबर सुरक्षा मॉडल अपने अलग-थलग वातावरण से बाहर निकलकर इंटरनेट से जुड़ गया था। इसके बाद मॉडल ने AI डेटासेट प्लेटफॉर्म हगिंग फेस को हैक कर लिया था।

अलबामा के अटॉर्नी जनरल स्टीव मार्शल (Steve Marshall) के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, राज्य यह जांच करना चाहता है कि क्या OpenAI अपने उत्पादों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही और क्या इससे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ।

इससे पहले इसी महीने मार्शल समेत 15 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने OpenAI को पत्र भेजकर हगिंग फेस घटना से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।

OpenAI के प्रवक्ता नेट इवांस (Nate Evans) ने कहा कि हगिंग फेस की घटना AI सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण थी। कंपनी बाहरी सलाहकारों के साथ इसकी विस्तृत समीक्षा कर रही है और जांच पूरी होने के बाद संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ तकनीकी रिपोर्ट साझा करेगी।

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कंपनियों में AI का बदलाव धीमा क्यों? सैम ऑल्टमैन ने खुद बताई वजह

OpenAI प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि उन्होंने AI के प्रभाव और कंपनियों में इसके इस्तेमाल की रफ्तार को लेकर पहले जरूरत से ज्यादा तेज अनुमान लगाया था।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
opanai

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच OpenAI (OpenAI) के प्रमुख सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने AI को अपनाने की रफ्तार को लेकर अपनी पुरानी सोच पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीक के विस्तार और इसके आर्थिक असर को लेकर उनके शुरुआती अनुमान वास्तविकता से ज्यादा महत्वाकांक्षी थे।

हाल ही में पॉडकास्टर डेविड सेनरा (David Senra) के साथ बातचीत में ऑल्टमैन ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि 2023 में GPT-4 (GPT-4) के आने के बाद कंपनियों के काम करने का तरीका काफी तेजी से बदल जाएगा। उनका अनुमान था कि AI के कारण बिजनेस की प्रक्रियाओं और कामकाज में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव दिखाई देने लगेंगे। हालांकि, ऐसा बदलाव उनकी उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं हुआ।

ऑल्टमैन के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तकनीक बदलने के बावजूद लोगों और संस्थानों की कार्यशैली तुरंत नहीं बदलती। कंपनियां लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम, टूल्स और प्रक्रियाओं पर निर्भर रहती हैं। ग्राहक भी उन्हीं सेवाओं और कंपनियों के साथ जुड़े रहते हैं, जिनका इस्तेमाल वे पहले से करते आए हैं।

कर्मचारियों के स्तर पर भी बदलाव आसान नहीं होता। हर व्यक्ति के काम करने का एक स्थापित तरीका होता है और नई तकनीक को अपनाने के लिए केवल AI उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए काम करने की पूरी प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है। यही वजह है कि AI की क्षमता बढ़ने के बावजूद उसका प्रभाव कंपनियों के रोजमर्रा के काम में धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है।

ऑल्टमैन ने इस धीमी गति को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना। उनके मुताबिक, धीरे-धीरे होने वाला परिवर्तन कंपनियों और समाज को नई तकनीक को समझने तथा उसके सही इस्तेमाल के तरीके खोजने का समय देता है। इससे संगठन यह तय कर सकते हैं कि AI को अपने मौजूदा कामकाज में किस स्तर पर शामिल किया जाए।

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