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योगी-केजरीवाल बनने की राह पर KCR, अपनी खुशी के नाम पर की विज्ञापनों की ‘बरसात’
तेलंगाना ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस मनाया। राज्य के मुख्यमंत्री ने अपनी ये खुशी विज्ञापनों के रूप में व्यक्त की, वो भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि जैकेट विज्ञापन।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
तेलंगाना ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस मनाया। राज्य के मुख्यमंत्री ने अपनी ये खुशी विज्ञापनों के रूप में व्यक्त की, वो भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि जैकेट विज्ञापन। यानी कि सूबे के मुखिया के. चंद्रशेखर राव (KCR) की खुशी व्यक्त करने में अखबारों के फ्रंट पेज सहित दो-तीन पृष्ठ खप गए।
अब ये खुशी आम जनता को कितने की पड़ी होगी, समझा जा सकता है। ‘जनता’ को इसलिए कि मुख्यमंत्री अपनी जेब से तो भुगतान करेंगे नहीं, खर्चा सरकारी खजाने से किया जाएगा और सरकारी खजाना जनता से मिलने वाले टैक्स से ही भरता है।
वैसे, चंद्रशेखर राव ने ये कोई नई परंपरा शुरू नहीं की है। मोदी-योगी से लेकर दिल्ली की ‘आप’ सरकार भी यही करती आई है। वहीं, पंजाब में ‘आप’ को सत्ता संभाले कुछ महीने ही गुजरे हैं, लेकिन विज्ञापन की ‘बरसात’ की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में 10 हजार करोड़ रुपये उधार लिए, जिसको विज्ञापन पर ही खर्च किया जा रहा है।
विज्ञापन सरकार की उपलब्धियों-योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम होता है, लिहाजा इसकी आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इस ‘आवश्यकता’ पर कितना खर्चा जायज है, इसका सटीक आकलन सरकार की जिम्मेदारी है और अक्सर सरकार इस जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा करने में नाकाम हो जाती है।
के. चंद्रशेखर राव ने अपने राज्य के स्थापना दिवस पर विभिन्न मीडिया संस्थानों को दिल-खोलकर विज्ञापन दिए, ये विज्ञापन ऑल एडिशन थे। यानी कि तेलंगाना से बाहर के अखबारों में भी राज्य का स्थापना दिवस नज़र आया। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल माध्यम पर KCR की हंसती ही तस्वीर विज्ञापन की शक्ल में दिखाई गई। अब गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे राज्यों के लोग, तेलंगाना सरकार की उपलब्धि या राज्य के विकास में बारे में जानकर क्या कर लेंगे? क्या ये कुछ ऐसा है, जो नहीं जानना उनके लिए अपराध है?
तेलंगाना सरकार क्या कर रही है, क्या करने वाली है, इसका सीधा सरोकार केवल वहां की जनता से है। इसलिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर दूसरे राज्यों के लोगों को तेलंगाना का विकास दिखाने से बेहतर होता कि मुख्यमंत्री राज्य के विकास पर कुछ और ध्यान केंद्रित कर लेते। तब शायद वास्तव में राज्य की जनता को खुशी मिलती। हालांकि, मोदी-योगी, केजरीवाल बनने की KCR की इस कोशिश से विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री को कोई परहेज नहीं होगा, आख़िरकार उनका अस्तित्व ही इस पर टिका है।
कोई लाख इनकार करे, लेकिन आज का कड़वा सच यही है कि मीडिया विज्ञापन के बिना नहीं चल सकता। विज्ञापन ही तय करते हैं कि कोई संस्थान कितने वक्त तक खड़ा रह सकता है। ऐसे में विज्ञापन देने वाले और लेने वाले के बीच एक अदृश्य या अनकहा रिश्ता बनना लाजमी है।
अब तेलंगाना के बाहर भी मीडिया को KCR को उतनी ही तवज्जो देनी होगी, जितनी योगी या केजरीवाल को मिलती है, क्योंकि राज्य के स्थापना दिवस के जैकेट विज्ञापन से उस अनकहे रिश्ते की शुरुआत हो चुकी है। कहावत है न, पैसा अपने साथ मुसीबतें भी लाता है। विज्ञापन की इस ‘बरसात’ के बाद मीडिया को भी संतुलन बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी। यदि वो तेलंगाना की अगली ‘बरसात’ की चाह में KCR पर ज्यादा फोकस करती है, तो दिल्ली में बैठे बॉस को संतुष्ट करना मुश्किल हो जाएगा।
अब चलते-चलते जरा सरकारों द्वारा विज्ञापन पर खर्चे के आंकड़ों पर भी नजर डाल लेते हैं। कुछ महीनों पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बताया था कि मोदी सरकार ने तीन सालों में विज्ञापनों पर 1,700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह विज्ञापन अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिए गए थे। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में 1,698.98 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
इसी तरह अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2021 के बीच योगी सरकार ने टीवी न्यूज चैनल्स और अखबारों को विज्ञापन देने में 160.31 करोड़ रुपए खर्च किए थे। वहीं, दावा ये भी किया जा रहा है दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना काल के चार महीनों में 48 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए थे। क्या इतना भारी-भरकम खर्चा विज्ञापनों पर करना वास्तव में जरूरी था? ये सवाल नेताओं/सरकारों को खुद से पूछना चाहिए।
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